आज के दौर में जब तमिल सुपरस्टार थलपति विजय ने अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) का बिगुल फूंका है, तो हर तरफ चर्चा है कि क्या कोई एक्टर फिर से मुख्यमंत्री बन सकता है? सोशल मीडिया पर अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि विजय राजनीति में आने वाले सबसे बड़े सितारे हैं, लेकिन कड़वा सच यह है कि विजय से दशकों पहले ही दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गजों ने न केवल राजनीति में कदम रखा, बल्कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर इतिहास लिख दिया था। विजय के लिए राह इतनी आसान नहीं होने वाली, क्योंकि जिन महानायकों ने यह मुकाम हासिल किया, उनका कद और संघर्ष आज की पीढ़ी से कोसों आगे था।
एम.जी. रामचंद्रन: रील लाइफ हीरो से ‘पुरातची थलाइवर’ बनने का सफर
जब हम सिनेमा और राजनीति के मिलन की बात करते हैं, तो सबसे पहला नाम एम.जी. रामचंद्रन (MGR) का आता है। क्या आप जानते हैं कि MGR भारत के पहले ऐसे फिल्म स्टार थे जिन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पद संभाला? 1977 में उन्होंने तमिलनाडु की सत्ता संभाली और 1987 तक (अपनी मृत्यु तक) वह अपराजेय रहे। उन्होंने AIADMK की नींव रखी और अपनी फिल्मों के माध्यम से गरीबों के मसीहा की जो छवि बनाई थी, उसे धरातल पर उतारा। विजय आज जिस ‘मास अपील’ की बात करते हैं, उसकी शुरुआत असल में MGR ने ही की थी।

एन.टी. रामा राव: जब भगवान कृष्ण पर्दे से उतरकर विधानसभा पहुंचे
आंध्र प्रदेश की राजनीति में एन.टी. रामा राव (NTR) एक ऐसा नाम है जिसने कांग्रेस के अजेय किले को ध्वस्त कर दिया था। NTR ने 1982 में ‘तेलुगु देशम पार्टी’ (TDP) बनाई और मात्र 9 महीने के भीतर मुख्यमंत्री बन गए। पर्दे पर राम और कृष्ण की भूमिका निभाने वाले NTR को जनता सच में भगवान मानती थी। उन्होंने ‘तेलुगु गौरव’ के नाम पर जो लहर पैदा की, वैसी लहर आज के किसी भी डिजिटल दौर के एक्टर के लिए पैदा करना नामुमकिन जैसा लगता है। NTR कुल तीन बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
जयललिता: सिनेमा की ‘अम्मा’ जिसने दशकों तक राज किया
सिर्फ पुरुष अभिनेता ही नहीं, बल्कि जे. जयललिता ने यह साबित किया कि एक महिला कलाकार भी राज्य की कमान संभाल सकती है। उन्होंने 6 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। जयललिता ने राजनीति में जो अनुशासन और पकड़ दिखाई, उसने उन्हें ‘आयरन लेडी’ और ‘अम्मा’ बना दिया। फिल्मी ग्लैमर से निकलकर एक कड़क प्रशासक बनने का उनका सफर आज के किसी भी एक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।
थलपति विजय और 2026 की चुनौती: क्या राह आसान है?
थलपति विजय ने फरवरी 2024 में अपनी पार्टी की घोषणा की है। उनका लक्ष्य 2026 का विधानसभा चुनाव है। लेकिन क्या वह MGR या NTR जैसा जादू चला पाएंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि आज की राजनीति और 80 के दशक की राजनीति में जमीन-आसमान का अंतर है। आज जनता केवल स्टारडम देखकर वोट नहीं देती, बल्कि ठोस विचारधारा और कार्ययोजना मांगती है। विजय अभी तक केवल एक्टर हैं, वह अभी सीएम नहीं बने हैं और उनके सामने DMK और AIADMK जैसे पुराने खिलाड़ियों की दीवार खड़ी है।
सिनेमा और राजनीति का रिश्ता भारत, खासकर दक्षिण भारत में बहुत गहरा रहा है। जहाँ MGR और NTR ने सफलता के झंडे गाड़े, वहीं रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज इस रेस में पीछे छूट गए। विजय के पास लोकप्रियता तो है, लेकिन इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज कराने के लिए उन्हें केवल ‘एक्टर’ से ऊपर उठकर ‘जनता का सेवक’ बनना होगा।