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अफ्रीका के ज्वालामुखी का कहर भारत पर—सैकड़ों उड़ानें खतरे में, यात्रा ठप

इथियोपिया के उत्तर-पूर्वी इलाके में स्थित हायली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी लगभग 12,000 साल के लंबे इंतज़ार के बाद अचानक फट पड़ा। यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसके धुएं और राख का गुबार 14 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँच गया। इस घटना ने न सिर्फ अफ्रीका बल्कि एशिया के कई देशों को प्रभावित किया जिसमें भारत भी शामिल है।

भारत पर क्यों पड़ा असर?

इथियोपिया में हुए इस विस्फोट से निकली राख हवा के तेज़ बहाव के कारण लाल सागर → अरब सागर → पश्चिमी भारत की ओर बढ़ी। रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच यह राख का बादल भारत के कई हिस्सों में प्रवेश कर गया।

सबसे ज़्यादा असर इन राज्यों में दिखा:

राख हवा में फैलने से हवाई यातायात पर बड़ा असर पड़ा। DGCA ने सभी एयरलाइंस को चेतावनी जारी करते हुए प्रभावित मार्गों से बचने को कहा।

ज्वालामुखी

इसका असर उड़ानों पर कुछ इस तरह दिखा:

IMD का कहना है कि यह राख का गुबार अब चीन की ओर बढ़ रहा है और मंगलवार शाम तक भारतीय आसमान पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।

ज्वालामुखी कहाँ है और इसकी विशेषता क्या है?

हायली गुब्बी ज्वालामुखी इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा से लगभग 800 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।यह इलाका अफ़ार रिफ्ट वैली कहलाता है, जहाँ अफ्रीकी और अरबी टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से अलग हो रही हैं। यह दुनिया के सबसे सक्रिय भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में से एक है।

ज्वालामुखी की ऊँचाई: लगभग 500 मीटर

पिछला विस्फोट: 12,000 साल पहले

सक्रिय होने के संकेत: बहुत कम

वैज्ञानिकों की चिंता: क्षेत्र में कई और “छिपे ज्वालामुखी” हो सकते हैं

विस्फोट के बाद आसपास के गांवों में राख की मोटी परत जम गई है। हालाँकि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन स्थानीय चरवाहा समुदाय को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है—पानी के स्रोत दूषित हो गए, मवेशियों पर राख जम गई और दृश्यता बेहद कम हो गई।

विस्फोट क्यों हुआ? वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विस्फोट धरती के अंदर मैग्मा प्रेशर बढ़ने की वजह से हुआ, जो हज़ारों वर्षों तक जमा था। अफ़ार रिफ्ट वैली में टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार हिलती हैं, जिससे कभी-कभी अचानक ऊर्जा निकलती है और ऐसी दुर्लभ घटनाएँ होती हैं।

सैटेलाइट इमेज में विस्फोट के दौरान:

भारत में स्वास्थ्य पर क्या असर?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार—

इसलिए लोगों को गंभीर स्वास्थ्य खतरे की आशंका कम है|फिर भी, संवेदनशील मरीजों को मास्क पहनने और बाहर ज्यादा समय न बिताने की सलाह दी गई है।

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