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Ajinkya Rahane Retirement: ‘Cap Number 278 Signing Off’, शानदार रिकॉर्ड के बावजूद रहाणे को क्यों नहीं मिला मौका?

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भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए आज का दिन बेहद भावुक कर देने वाला है। ‘टीम इंडिया की दीवार’ (The Wall) के नाम से मशहूर, संकटमोचक और पूर्व उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने 30 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी फॉर्मेट्स से हमेशा के लिए संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 38 वर्षीय इस दिग्गज बल्लेबाज़ ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो शेयर करते हुए अपने 17 साल लंबे और शानदार करियर को अलविदा कहा।

वीडियो के अंत में उनके शब्द थे- “कैप नंबर 278, साइनिंग ऑफ” (Cap number 278, signing off)। Apni Vani आज सिर्फ उनके संन्यास की खबर नहीं देगा, बल्कि उस सिस्टम और अंदरूनी राजनीति का भी विश्लेषण करेगा जिसके कारण इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद रहाणे को उनके अंतिम वर्षों में टीम इंडिया में लगातार नज़रअंदाज़ किया गया।

भावुक विदाई और एक शानदार करियर का अंत

अजिंक्य रहाणे ने अपने रिटायरमेंट वीडियो में अपने आंसुओं को रोकते हुए कहा, “जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज़ की एक शुरुआत होती है और एक अंत। जब समय आता है, तो आपको उसका सम्मान करना पड़ता है।” रहाणे ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और देखते ही देखते वे टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे भरोसेमंद विदेशी बल्लेबाज़ बन गए। उन्होंने 85 टेस्ट मैचों में 38.46 की औसत से 5,077 रन बनाए, जिसमें 12 शानदार शतक शामिल हैं।

उनके करियर का सबसे सुनहरा पल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी था, जहां विराट कोहली की अनुपस्थिति में उन्होंने कप्तान के रूप में एक टूटी-फूटी भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक सीरीज़ जीत दिलाई थी। वनडे और टी20 में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और हाल ही में 2026 के आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की कप्तानी भी की।

खराब फॉर्म या सिस्टम की बेरुखी?

लेकिन रहाणे के इस संन्यास के पीछे एक गहरी कहानी छिपी है। 2020 की ऐतिहासिक कप्तानी के बाद, 2021 और 2022 में उनका फॉर्म थोड़ा खराब हुआ। साउथ अफ्रीका सीरीज़ में खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें टेस्ट टीम से ड्रॉप कर दिया गया।

एक खिलाड़ी जिसने विदेश में भारत को सबसे ज्यादा मैच जिताए, उसे वापसी करने के लिए घरेलू क्रिकेट (Ranji Trophy) में जाकर खुद को बार-बार साबित करना पड़ा। 2023 के वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में रहाणे ने शानदार वापसी की और 89 और 46 रन बनाकर टीम को फॉलो-ऑन से बचाया। वह दोनों WTC फाइनल्स (2021 और 2023) में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे।

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क्यों नहीं मिला लगातार मौका?

WTC फाइनल में खुद को साबित करने के बावजूद, उनका यह कमबैक सिर्फ तीन मैचों तक ही सीमित रहा। जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उनका आखिरी टेस्ट मैच साबित हुआ। इसके बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें कभी मौका नहीं दिया। इसके तीन बड़े कारण थे। पहला, भारतीय टीम मैनेजमेंट युवाओं को मौका देने की ओर बढ़ चुका था।

शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर और सरफराज खान जैसे युवा बल्लेबाजों को मध्यक्रम में जगह दी जाने लगी। दूसरा, बीसीसीआई का फोकस अब आक्रामक क्रिकेट पर था, और रहाणे की क्लासिक टेस्ट बैटिंग को पुरानी सोच मान लिया गया। तीसरा, रहाणे को कभी भी वह ‘लॉन्ग रोप’ (लगातार मौके) नहीं मिला जो उनके दौर के अन्य बड़े खिलाड़ियों को दिया गया।

फैंस के दिलों में रहेंगे ‘अजेय’

भले ही अजिंक्य रहाणे आज क्रिकेट के मैदान से दूर जा रहे हों, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे नई पीढ़ी के क्रिकेटरों की मदद करना जारी रखेंगे। उन्होंने अपने विदाई संदेश में कहा, “अजिंक्य का मतलब है अजेय, लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हार दिखाई है। मैंने गलतियां की हैं, लेकिन एक जगह है जहां मैं कभी नहीं हारा, और वह है आपके (फैंस) दिलों में।”

अब आप बेबाक होकर बताइये: क्या बीसीसीआई (BCCI) ने अजिंक्य रहाणे के साथ उनके अंतिम वर्षों में नाइंसाफी की? क्या उन्हें 2023 WTC फाइनल के बाद और मौके मिलने चाहिए थे? अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में ज़रूर दें!

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