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दिल्ली में ‘भीम ज्योति उत्सव 2026’ का आगाज़: दलित इतिहास और अम्बेडकरवादी विचारधारा का भव्य संगम

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देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सामाजिक न्याय और वैचारिक क्रांति की गवाह बन रही है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 136वीं जयंती के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार द्वारा 10 अप्रैल से 14 अप्रैल 2026 तक ‘भीम ज्योति उत्सव’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह पाँच दिवसीय उत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारतीय दलित इतिहास की गौरवशाली गाथा और बाबा साहेब के संवैधानिक सपनों को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है।

भीम ज्योति उत्सव 2026
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ज्ञान और न्याय का प्रतीक: क्या है ‘भीम ज्योति’?

इस उत्सव का केंद्रबिंदु ‘भीम ज्योति’ है, जो मात्र एक प्रकाश पुंज नहीं बल्कि ज्ञान, समानता और चेतना का प्रतीक है। इंडिया गेट के समीप कस्तूरबा गांधी मार्ग पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को उस संघर्ष से रूबरू कराना है, जिसके दम पर आधुनिक भारत के संविधान की नींव रखी गई। आयोजकों का मानना है कि ‘भीम ज्योति’ की रोशनी समाज के उस अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए, जिसके हक की लड़ाई बाबा साहेब ने जीवनभर लड़ी।

उत्सव के मुख्य आकर्षण और विशेष गैलरी

भीम ज्योति उत्सव 2026 की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित की गई विशाल प्रदर्शनी गैलरी है। इस गैलरी में भारत के 299 ऐसे महापुरुषों के जीवन और योगदान को दर्शाया गया है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दलित उत्थान और सामाजिक समानता के लिए कार्य किया। अक्सर इतिहास के पन्नों में दब गए इन नायकों की कहानियाँ पहली बार इतने बड़े स्तर पर तस्वीरों और डिजिटल माध्यमों से जनता के सामने रखी जा रही हैं।

वैचारिक विमर्श और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

उत्सव के दौरान प्रतिदिन विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के जाने-माने अम्बेडकरवादी विचारक, लेखक और समाजशास्त्री ‘संविधान संरक्षण’ और ‘आज के समय में अम्बेडकरवाद की प्रासंगिकता’ जैसे विषयों पर संवाद कर रहे हैं।

इसके साथ ही, शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है। यहाँ दलित लोकगीतों, ‘अम्बेडकरी जलसा’ और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सामाजिक बुराइयों जैसे अस्पृश्यता और भेदभाव के खिलाफ संदेश दिया जा रहा है। युवाओं को जोड़ने के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं, जहाँ उन्हें भारतीय लोकतंत्र में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में शिक्षित किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार की पहल और सामाजिक समरसता

दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस उत्सव की रूपरेखा समाज कल्याण मंत्री द्वारा तैयार की गई है। सरकार का लक्ष्य इस आयोजन को ‘सोशल हारमनी’ (सामाजिक समरसता) के एक मॉडल के रूप में पेश करना है। यह उत्सव यह संदेश देता है कि बाबा साहेब के विचार किसी एक वर्ग विशेष के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अम्बेडकर के विजन को कैसे लागू किया जाए, इस पर भी यहाँ विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है।

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आम जनता के लिए जानकारी

यदि आप दिल्ली में हैं या इस दौरान दिल्ली आने वाले हैं, तो ‘भीम ज्योति उत्सव’ का अनुभव लेना आपके लिए यादगार हो सकता है।

यहाँ दलित साहित्य के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ दुर्लभ पुस्तकें और बाबा साहेब के भाषणों का संग्रह उपलब्ध है। इसके अलावा, पारंपरिक दस्तकारी और लोक-कला के बाज़ार भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

‘भीम ज्योति उत्सव 2026’ वर्तमान समय में वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक एकता की दिशा में एक सराहनीय कदम है। यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि जब तक समाज में समानता और बंधुत्व की भावना जीवित है, तब तक लोकतंत्र सुरक्षित है। 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती के समापन अवसर पर एक विशेष महा-आयोजन की तैयारी है, जिसमें लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद है।

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