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बिहार में बन गई इस पार्टी की सरकार, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

बिहार में सत्ता की जंग शुरू हो चुकी है। पहले चरण के मतदान ने सूबे के राजनीतिक तापमान को और भी गरम कर दिया है। कुल 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग पूरी हो गई है, और इस बार जनता ने पहले से कहीं ज्यादा जोश दिखाया — करीब 64.66% मतदान हुआ है, जो बिहार के चुनावी इतिहास में एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है।

जनता का जोश, रिकॉर्ड वोटिंग

राज्य के 18 जिलों में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान चला। चुनाव आयोग के मुताबिक, शाम तक 60.13% वोटिंग दर्ज हुई थी, जो बाद में बढ़कर 64% से अधिक हो गई। सबसे ज्यादा वोटिंग बेगूसराय जिले में (67.32%) और सबसे कम शेखपुरा में (52.36%) दर्ज हुई। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और युवाओं की लंबी कतारें साफ बता रही थीं कि जनता इस बार बदलाव के मूड में है।

बड़ा मुकाबला: NDA बनाम महागठबंधन

इस चुनाव में मुख्य लड़ाई दो गठबंधनों के बीच मानी जा रही है —

एक ओर हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), जिसमें BJP और JDU प्रमुख दल हैं।

दूसरी ओर हैं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन (RJD + कांग्रेस + वाम दल), जो सत्ता वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहा है।

इसके अलावा, चुनावी मैदान में एक नया चेहरा भी है — प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जिसने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जन सुराज पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है, लेकिन उसका प्रभाव कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

दिग्गजों की किस्मत EVM में बंद

पहले चरण की वोटिंग में कई बड़े नेताओं का भाग्य अब EVM में बंद हो चुका है।

इनमें शामिल हैं —

इन सभी सीटों पर वोटरों ने उत्साह से मतदान किया, और अब 14 नवंबर को ही पता चलेगा कि जनता ने किसे चुना है।

मुद्दे जो तय करेंगे बिहार की दिशा

इस बार के चुनाव में जनता के मन में कई सवाल हैं —

साथ ही युवाओं का एक बड़ा वर्ग नई राजनीति और नए विकल्पों की तलाश में है। यही वजह है कि इस बार मुकाबला सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि सोच और दिशा का भी है।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं, जब दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग होगी। उसके बाद 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी और बिहार का नया राजनीतिक चेहरा सामने आएगा।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ तेज हैं — क्या नीतीश कुमार फिर से सत्ता में लौटेंगे, या तेजस्वी यादव का “बदलाव” नारा जनता को रास आएगा?

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