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Chaiti Chhath Kyu Hota Hai: आखिर चैत में ‘भी’ क्यों मनाया जाता है यह व्रत? जानिए इसके पीछे के 3 असली कारण

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छठ पूजा का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में दिवाली के ठीक बाद आने वाले त्योहार (कार्तिक छठ) की तस्वीर बन जाती है। लेकिन बिहार, यूपी और झारखंड में यह महापर्व साल में दो बार मनाया जाता है। कल 22 मार्च 2026 से चैती छठ शुरू हो चुका है।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब कार्तिक महीने में इतनी धूमधाम से छठ होता है, तो चैती छठ क्यों होता है? आखिर चैत के महीने में ‘भी’ इस कठिन व्रत को करने की क्या वजह है? आज ‘ApniVani’ के इस विशेष लेख में हम आपके इसी सवाल का जवाब देंगे और एकदम आसान भाषा में समझाएंगे कि चैती छठ मनाने के पीछे विज्ञान, खेती और धर्म के 3 सबसे बड़े कारण क्या हैं।

पहला कारण: बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव (विज्ञान)

चैती छठ मुख्य रूप से स्वास्थ्य और विज्ञान से जुड़ा हुआ पर्व है। चैत्र का महीना वह समय होता है जब सर्दियां पूरी तरह से खत्म हो रही होती हैं और गर्मियां शुरू हो रही होती हैं।

प्राचीन काल में इस मौसम-बदलाव (Spring Transition) के दौरान चेचक (Smallpox), खसरा (Measles) और पेट की कई भयंकर बीमारियां महामारी की तरह फैलती थीं। सूर्य की किरणें इन मौसम वाली बीमारियों के कीटाणुओं को नष्ट करती हैं। इसलिए, इस बदलते मौसम में शरीर को निरोग रखने, ‘डिटॉक्स’ करने और इम्युनिटी (Immunity) बढ़ाने के लिए 36 घंटे के निर्जला उपवास और सूर्य की उपासना की यह परंपरा शुरू की गई।

दूसरा कारण: ‘रबी की फसल’ और प्रकृति को धन्यवाद (कृषि)

अगर आप अब भी सोच रहे हैं कि चैती छठ क्यों होता है, तो इसका सीधा कनेक्शन हमारे किसानों से है। छठ पूरी तरह से प्रकृति और खेती-किसानी का पर्व है।

चैत्र का महीना किसानों के लिए बहुत खास होता है क्योंकि इसी समय उनकी महीनों की मेहनत यानी ‘रबी की फसल’ (जैसे- गेहूं, चना, सरसों) पककर तैयार होती है और उसकी कटाई शुरू होती है। किसान अपनी नई फसल का पहला अनाज (खासकर नया गेहूं) भगवान सूर्य और छठी मैया को अर्पित करके उन्हें धन्यवाद देते हैं। यही वजह है कि चैती छठ के मुख्य प्रसाद ‘ठेकुआ’ में हमेशा इसी नए गेहूं का इस्तेमाल किया जाता है।

Chaitra Navratri - Chaiti Chhath Kyu Hota Hai

तीसरा कारण: नया हिंदू वर्ष और ‘नवरात्रि’ का पावन संयोग (धर्म)

चैत्र का महीना हिंदू पंचांग (कैलेंडर) का पहला महीना होता है और इसी महीने से ‘नया साल’ शुरू होता है। इसके अलावा, चैती छठ हमेशा ‘चैत्र नवरात्रि’ के पावन दिनों के ठीक बीच में पड़ता है।

यह वह समय होता है जब ब्रह्मांड में देवी की ‘शक्ति’ (नवरात्रि) और ‘सूर्य’ का तेज दोनों अपने चरम पर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नए साल की शुरुआत में सूर्य देव से नई ऊर्जा और छठी मैया से परिवार की सुख-शांति का आशीर्वाद लेने के लिए ही ऋषियों ने चैत के महीने में ‘भी’ इस व्रत का विधान बनाया था।

ApniVani की बात

अब आपको समझ आ गया होगा कि जहां ‘कार्तिक छठ’ दिवाली के बाद आता है, वहीं ‘चैती छठ’ बदलते मौसम में बीमारियों से लड़ने, नई फसल के स्वागत और नए साल में नई ऊर्जा पाने का एक बेहद वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पर्व है। यह व्रत हमें सिखाता है कि प्रकृति के हर बदलाव का सम्मान कैसे किया जाए।

आपकी राय: क्या आपको इससे पहले चैती छठ और कार्तिक छठ के बीच का यह वैज्ञानिक और कृषि से जुड़ा अंतर पता था? आपके घर में छठ की तैयारियां कैसी चल रही हैं? अपने विचार हमें कमेंट्स या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर जरूर बताएं!

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