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डॉक्टर बनने आई बेटी की ‘साजिश वाली मौत’: शरीर पर संघर्ष के निशान और सिस्टम की चुप्पी; क्या मिल पाएगा इंसाफ?

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली और हॉस्टल के भीतर चल रहे संदिग्ध खेल ने प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ इस पूरे मामले का विस्तृत विवरण दिया गया है:

दरिंदगी की पुष्टि: क्या कहती है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट?

शुरुआत में पुलिस जिस मामले को सामान्य मौत या आत्महत्या की दिशा में ले जा रही थी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उन दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में छात्रा के साथ रेप की पुष्टि हुई है।

साजिश वाली मौत

चोट के निशान: छात्रा के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म मिले हैं। गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर रगड़ के निशान (ब्रूजेस) पाए गए हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि छात्रा ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।

गंभीर चोटें: रिपोर्ट में सिर पर चोट (Head Injury) और शरीर के अंगों से भारी ब्लीडिंग की बात भी सामने आई है।

नशीले पदार्थ का शक: शरीर में ड्रग्स या नशीली गोलियों के अवशेष मिलने की भी आशंका जताई गई है, जिसके लिए विसरा सुरक्षित रखकर एम्स (AIIMS) भेजा गया है।

2. हॉस्टल संचालिका और डॉक्टर पर संगीन आरोप

छात्रा के परिजनों ने हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल, उनके पति श्रवण अग्रवाल और बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन पर सोची-समझी साजिश के तहत हत्या और रेप का आरोप लगाया है।

रैकेट चलाने का दावा: परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल के नाम पर वहाँ एक रैकेट चलाया जा रहा था। शाम ढलते ही हॉस्टल के बाहर लग्जरी गाड़ियों का जमावड़ा लग जाता था।

सबूत मिटाने की कोशिश: आरोप है कि डॉक्टर सतीश की मिलीभगत से छात्रा को गलत इंजेक्शन दिए गए ताकि शरीर पर मौजूद चोटों के निशानों को मिटाया जा सके।

पैसे का प्रलोभन: मृतका के पिता ने दावा किया कि संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें चुप रहने के लिए लाखों रुपये का ऑफर दिया और यहाँ तक कहा कि “जितना पैसा चाहिए ले लो, पर मामला आगे मत बढ़ाओ।”

3. पुलिस की भूमिका और रसूखदारों का दबाव

इस मामले में पुलिस की शुरुआती ढिलाई ने लोगों के गुस्से को भड़का दिया है।

लापरवाही के आरोप: स्थानीय थानेदार पर आरोप है कि उन्होंने रसूखदारों के दबाव में आकर शुरू में केस को हल्का करने की कोशिश की। हॉस्टल में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का न होना और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना भी बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

SIT का गठन: बढ़ते जनाक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी (IG) जितेंद्र राणा के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। टीम ने हॉस्टल को सील कर दिया है और वहाँ रह रही अन्य लड़कियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

4. वर्तमान स्थिति और इंसाफ की गुहार

फिलहाल, मुख्य आरोपी मनीष रंजन फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में छापेमारी जारी है। छात्रा के पिता का कहना है कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी, लेकिन सिस्टम और अपराधियों की मिलीभगत ने उसकी जान ले ली।

यह मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ चुका है और पटना की सड़कों पर छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। परिजनों की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों और परिजनों के बयानों के आधार पर संकलित की गई है।

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