भारत की राजधानी दिल्ली के इतिहास में आज 13 फरवरी 2026 की तारीख स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नए प्रशासनिक मुख्यालयों—’सेवा तीर्थ’ (नया PMO) और ‘कर्तव्य भवन 1 व 2’ का औपचारिक उद्घाटन किया। यह कदम केवल पुरानी इमारतों से नई इमारतों में शिफ्ट होना नहीं है, बल्कि यह औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीकों (ब्रिटिश कालीन साउथ ब्लॉक) को पीछे छोड़कर एक आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत के शासन तंत्र की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
ब्रिटिश विरासत से ‘सेवा तीर्थ’ तक का सफर
दशकों से भारत का प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारत से संचालित हो रहा था। हालाँकि, समय के साथ पुरानी संरचनाओं में स्पेस की कमी और आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण हो गया था। ‘सेवा तीर्थ’ को इसी समस्या के समाधान के रूप में विकसित किया गया है। आज दोपहर करीब 1:30 बजे नामकरण के बाद शाम 6 बजे पीएम मोदी ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। अब देश का सर्वोच्च कार्यालय अत्याधुनिक सुरक्षा, डिजिटल इंटरफेस और ‘सर्विस-फर्स्ट’ के मंत्र के साथ काम करेगा।

क्या है ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ की खासियत?
यह पूरा परिसर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन इमारतों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है:
• अत्याधुनिक सुरक्षा: इसमें स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और 24×7 सर्विलांस नेटवर्क लगाया गया है।
• ग्रीन बिल्डिंग स्टैंडर्ड्स: ये इमारतें 4-Star GRIHA मानकों के अनुरूप हैं, जहाँ सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और अपशिष्ट प्रबंधन की बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं।
• डिजिटल वर्कप्लेस: सभी ऑफिस डिजिटल रूप से एकीकृत (Integrated) हैं, जो फाइलों की आवाजाही को कम कर त्वरित निर्णय लेने में मदद करेंगे।
• मंत्रालयों का एकीकरण: ‘कर्तव्य भवन 1 और 2’ में वित्त, रक्षा, शिक्षा, कानून और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को जगह दी गई है, जिससे अंतर-विभागीय समन्वय में लगने वाला समय काफी बचेगा।
शासन में बढ़ेगी पारदर्शिता और गति
नए परिसरों के बनने से सरकार के किराए के खर्च में करीब ₹1500 करोड़ की सालाना बचत होने का अनुमान है। मंत्रालयों के बिखरे होने के कारण जो फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग तक जाने में घंटों लगाती थीं, अब वे ‘कर्तव्य पथ’ पर स्थित इन एकीकृत भवनों के कारण मिनटों में संसाधित हो सकेंगी। यह “Minimum Government, Maximum Governance” के विजन की ओर एक बड़ा कदम है।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का क्या होगा?
एक बड़ा सवाल यह था कि इन ऐतिहासिक इमारतों का भविष्य क्या होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को अब ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ के रूप में बदला जाएगा। यह दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक होगा, जहाँ भारत के 5,000 साल पुराने इतिहास और कलाकृतियों को सहेज कर रखा जाएगा।
विकसित भारत का नया केंद्र
प्रधानमंत्री द्वारा ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन भारत के शासन को ‘अधिपत्य’ से ‘सेवा’ की ओर ले जाने का प्रयास है। जिस स्थान पर कभी औपनिवेशिक नीतियां बनती थीं, अब वहां एक आत्मनिर्भर भारत की नीतियां जन्म लेंगी। यह नई दिल्ली के स्वरूप को पूरी तरह बदलने वाला क्षण है।
Also Read:
बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका: अप्रैल 2026 से 4 गुना तक बढ़ेंगे रेट्स, जानें आपके जिले का हाल