Apni Vani

Dunkin Donuts India Exit News: भारत में क्यों सिमट रहा है डंकिन का साम्राज्य? जानें फ्लॉप होने के 5 बड़े बिजनेस कारण

Apni Vani

जब साल 2012 में दुनिया की मशहूर कॉफी और डोनट चेन ‘डंकिन डोनट्स’ (Dunkin’ Donuts) ने भारत में कदम रखा था, तो हर तरफ इसका शोर था। लोगों को लगा था कि जैसे डोमिनोज ने पिज्जा को हर घर तक पहुँचाया, वैसे ही डंकिन भी डोनट को भारतीयों का पसंदीदा नाश्ता बना देगा।

लेकिन आज, लगभग 14 साल बाद तस्वीर कुछ और ही है। डंकिन इंडिया का संचालन करने वाली कंपनी ‘जुबिलेंट फूडवर्क्स’ (Jubilant FoodWorks) लगातार अपने आउटलेट्स बंद कर रही है। आखिर दुनिया भर में राज करने वाला यह ब्रांड भारत में क्यों घुटने टेक रहा है? ‘ApniVani’ के आज के इस विशेष बिजनेस विश्लेषण में हम डंकिन के भारत में खत्म होते सफर की इनसाइड स्टोरी बताएंगे।

क्या है डंकिन और इसका इतिहास?

डंकिन (जिसे पहले डंकिन डोनट्स कहा जाता था) एक अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी है जिसकी शुरुआत 1950 में हुई थी। यह मुख्य रूप से अपनी कॉफी और डोनट्स के लिए जानी जाती है। भारत में इसने ‘जुबिलेंट फूडवर्क्स’ के साथ हाथ मिलाया था, जो भारत में डोमिनोज पिज्जा की सफलता का असली चेहरा है। शुरुआत में इन्होंने बड़े-बड़े स्टोर्स खोले, लेकिन जल्द ही इन्हें अहसास हो गया कि भारत का मार्केट अमेरिका जैसा नहीं है।

डोनट: एक ‘स्नैक’ या ‘खाना’?

डंकिन की सबसे बड़ी हार की वजह ‘कल्चरल मिसमैच’ (Cultural Mismatch) रही। अमेरिका में लोग डोनट को सुबह के नाश्ते (Breakfast) की तरह खाते हैं। लेकिन भारत में हम सुबह पराठे, पोहा या इडली खाना पसंद करते हैं। भारतीयों के लिए डोनट सिर्फ एक ‘मीठा स्नैक’ या डेजर्ट बनकर रह गया, जिसे लोग कभी-कभार ही खाते हैं। इसी वजह से डंकिन को वो ‘रेगुलर कस्टमर’ नहीं मिले जो डोमिनोज को मिलते हैं।

Dunkin Donuts India Exit News
Apni Vani

‘डोनट’ से ‘कॉफी’ बनने की नाकाम कोशिश

जब कंपनी को लगा कि डोनट से काम नहीं बन रहा, तो उन्होंने अपना नाम बदलकर सिर्फ ‘डंकिन’ (Dunkin’) कर दिया और अपना पूरा फोकस कॉफी पर डाल दिया। लेकिन यहाँ उनकी टक्कर पहले से जमे हुए दिग्गजों जैसे Starbucks और Cafe Coffee Day से हुई। इसके अलावा, आजकल भारत में ‘थर्ड वेव कॉफी’ (Third Wave Coffee) और ‘ब्लू टोकाई’ जैसे नए जमाने के प्रीमियम कॉफी ब्रांड्स युवाओं की पहली पसंद बन चुके हैं, जिनके सामने डंकिन अपनी जगह नहीं बना पाया।

हाई ऑपरेशनल कॉस्ट और कम मुनाफा

डंकिन ने भारत के सबसे महंगे और प्रीमियम मॉल्स में अपने बड़े-बड़े स्टोर्स खोले। इन स्टोर्स का किराया (Rent) और बिजली का बिल इतना ज्यादा था कि सिर्फ डोनट बेचकर उसे निकालना नामुमकिन था। जुबिलेंट फूडवर्क्स ने पिछले कुछ सालों में अपनी स्ट्रेटेजी बदलते हुए उन सभी स्टोर्स को बंद कर दिया है जो मुनाफे में नहीं थे। अब डंकिन सिर्फ चुनिंदा शहरों और छोटे काउंटर फॉर्मेट (Kiosks) में ही सिमट कर रह गया है।

प्राइसिंग और लोकल कॉम्पिटिशन

भारत में डोनट की कीमत ₹80 से ₹150 के बीच होती है। एक आम भारतीय परिवार के लिए यह काफी महंगा है। दूसरी तरफ, स्थानीय बेकरी और स्थानीय ब्रांड्स (जैसे Mad Over Donuts – MOD) ने भारतीय स्वाद के हिसाब से बेहतर और सस्ते विकल्प दिए। डंकिन न तो पूरी तरह ‘प्रीमियम’ बन पाया और न ही ‘मास मार्केट’ (सस्ता ब्रांड) बन सका, जिससे वह बीच में ही फंस गया।

Apni Vani

ApniVani की बात

डंकिन का भारत में संघर्ष यह सिखाता है कि सिर्फ ग्लोबल नाम होने से आप भारत में सफल नहीं हो सकते। यहाँ आपको ‘लोकल’ होना पड़ता है। जहाँ डोमिनोज ने पिज्जा में भारतीय मसाले और पनीर टिक्का डालकर उसे हिट करा दिया, वहीं डंकिन डोनट के साथ वैसा प्रयोग नहीं कर पाया। हालांकि कंपनी अभी पूरी तरह भारत नहीं छोड़ रही है, लेकिन बड़े स्टोर्स का बंद होना साफ संकेत है कि डंकिन का वो ‘गोल्डन एरा’ अब खत्म हो चुका है।

आपकी राय: क्या आपको डंकिन के डोनट्स पसंद हैं? या आपको लगता है कि भारतीय मिठाइयों के सामने डोनट कभी टिक ही नहीं सकता था? अपनी राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर जरूर बताएं!

Also Read:

कुशीनगर से ISIS संदिग्ध रिजवान अहमद गिरफ्तार: दिल्ली दहलाने की थी साजिश, घर में मिला ‘बारूद का जखीरा’

Fake Job Scams in India: व्हाट्सएप पर मिल रहे हैं लाखों की नौकरी के ऑफर? जानिए ठगी के 3 नए तरीके और कैसे पहचानें असली कंपनी

Exit mobile version