यूट्यूबर और बिग बॉस OTT विनर एल्विश यादव (Elvish Yadav) और उनके करोड़ों फैंस के लिए आज का दिन किसी बड़े जश्न से कम नहीं है। पिछले साल जिस ‘स्नेक वेनम’ (सांप के ज़हर) केस ने पूरे सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था और जिसके चलते एल्विश को जेल तक जाना पड़ा था, आज उसी केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव के खिलाफ दर्ज FIR और सारी आपराधिक कार्रवाइयों को रद्द (Quash) कर दिया है! इंटरनेट पर हर कोई कह रहा है कि एल्विश को ‘क्लीन चिट’ मिल गई है। लेकिन क्या सच में मामला पूरी तरह खत्म हो गया है? आज ‘ApniVani’ के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कोर्ट रूम के अंदर का पूरा सच और इस ऐतिहासिक फैसले की 3 सबसे बड़ी बातें।
क्यों रद्द हुई एल्विश के खिलाफ FIR? (कानूनी जीत)
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंद्रेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने आज इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि नोएडा पुलिस द्वारा जो FIR दर्ज की गई थी, उसमें कानूनी तौर पर भारी गड़बड़ियां थीं।
NDPS एक्ट (ड्रग्स कानून) के तहत एल्विश को फंसाया गया था, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि जो लिक्विड (एंटी-वेनम) बरामद हुआ था, वो इस कानून की ‘बैन लिस्ट’ (Schedule) में आता ही नहीं है। इसके अलावा, एल्विश के पास से खुद कोई भी ज़हर या सांप बरामद नहीं हुआ था।
शिकायतकर्ता पर उठा सबसे बड़ा सवाल!
इस केस का सबसे कमज़ोर पहलू था इसकी शिकायत करने वाला इंसान। ‘वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट’ (Wildlife Protection Act) का एक कड़ा नियम है कि इसके तहत कोई भी केस सिर्फ एक ‘सरकारी या अधिकृत अधिकारी’ ही दर्ज करा सकता है।
लेकिन एल्विश के मामले में यह FIR एक प्राइवेट NGO (पीपल फॉर एनिमल्स) के सदस्य द्वारा दर्ज कराई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी तकनीकी गलती को पकड़ लिया और साफ कर दिया कि यह केस कानूनी रूप से टिक ही नहीं सकता।

‘क्लीन चिट’ का असली ट्विस्ट (क्या सच में आज़ाद हैं एल्विश?)
अब आते हैं उस सच पर जो आपको जानना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। क्या एल्विश को 100% ‘क्लीन चिट’ मिल गई है?
सुप्रीम कोर्ट के जज ने सुनवाई के दौरान एक बहुत बड़ी लाइन कही: “हम इस व्यक्ति को कोई क्लीन चिट नहीं दे रहे हैं। अगर कुछ गलत हुआ है, तो कानून के हिसाब से कार्रवाई होनी चाहिए।”
इसका सीधा सा मतलब यह है कि कोर्ट ने पुरानी ‘गलत FIR’ को तो फाड़कर फेंक दिया है, लेकिन पुलिस और वन्यजीव विभाग को यह ‘छूट’ (Liberty) भी दी है कि अगर उनके पास पक्के सबूत हैं, तो वे सही कानूनी प्रक्रिया फॉलो करके एल्विश के खिलाफ एक नई शिकायत (New Complaint) दर्ज कर सकते हैं।
ApniVani की बात (Conclusion)
फिलहाल के लिए एल्विश यादव और उनकी टीम चैन की सांस ले सकते हैं। पुरानी FIR रद्द होना उनके लिए एक बहुत बड़ी राहत है। अब देखना यह है कि क्या सरकारी एजेंसियां इस मामले में कोई नया कदम उठाती हैं, या फिर ‘सिस्टम’ का यह विवाद यहीं हमेशा के लिए दफन हो जाएगा। हम सबको इंतजार है रिजल्ट का।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि एल्विश यादव को इस केस में जानबूझकर फंसाया गया था? इस पूरे लीगल ड्रामे पर आपकी क्या बेबाक राय है, हमें नीचे कमेंट्स या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर बताएं!
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