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Fake Medical Certificate: छुट्टी के लिए फर्जी पर्चा लगाना पड़ेगा भारी! नौकरी जाएगी और जेल भी, लेकिन ऐसा करने की 3 असली वजहें क्या हैं?

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क्या आपने भी कभी ऑफिस से छुट्टी लेने या वेतन कटने (Salary Deduction) के डर से कोई फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट (Fake Medical Certificate) बनवाया है? अगर हाँ, तो अब सावधान हो जाइए।

हाल ही में हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि दफ्तर में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना कोई छोटी-मोटी चालाकी नहीं, बल्कि गंभीर कदाचार (Serious Misconduct) और धोखाधड़ी है। ऐसा करते हुए पकड़े जाने पर आपको न सिर्फ नौकरी से बर्खास्त (Terminate) किया जा सकता है, बल्कि आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा होता है। आखिर एक आम कर्मचारी को यह ‘फर्जीवाड़ा’ करने की जरूरत क्यों पड़ती है? क्या हमारे देश में कर्मचारियों को इंसान समझा जाता है या सिर्फ मशीन? आज ‘ApniVani’ पर हम हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ-साथ भारत के ‘टॉक्सिक’ वर्क कल्चर (Toxic Work Culture) का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलेंगे।

हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी: क्या है पूरा मामला?

अदालतों ने अपने कई हालिया फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि नियोक्ता (Employer) और कर्मचारी (Employee) का रिश्ता ‘भरोसे’ पर टिका होता है। जब आप काम से बचने के लिए किसी डॉक्टर की जाली मुहर या फर्जी बीमारी का पर्चा लगाते हैं, तो यह सीधे तौर पर कंपनी के साथ धोखाधड़ी (Fraud) है। कोर्ट के अनुसार, अगर कोई कंपनी जांच में मेडिकल सर्टिफिकेट को फर्जी पाती है, तो वह बिना कोई नोटिस दिए कर्मचारी को नौकरी से निकाल सकती है। ऐसे मामलों में कर्मचारी को ग्रेच्युटी या पीएफ के लाभ से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

Fake Medical Certificate

आखिर फर्जी मेडिकल लगाने की नौबत क्यों आती है? (3 कड़वे सच)

कोर्ट का फैसला अपनी जगह बिल्कुल सही है, लेकिन क्या कभी कंपनियों के ‘सिस्टम’ पर सवाल नहीं उठना चाहिए? एक कर्मचारी यह रिस्क क्यों लेता है? इसके पीछे 3 प्रमुख कारण हैं:

भारत vs विदेश: हम इंसान हैं या कोल्हू के बैल?

आइए अब भारत की तुलना बाहरी देशों (Foreign Countries) से करते हैं। इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन (ILO) के डेटा के अनुसार, भारतीय कर्मचारी दुनिया में सबसे ज्यादा काम करने वाले लोगों में से एक हैं।

फर्जीवाड़ा छोड़ें, अपनी आवाज उठाएं!

हाईकोर्ट के इस फैसले से यह तो साफ है कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाना अब आपको भारी पड़ सकता है। इसलिए यह चालाकी बिल्कुल न करें, क्योंकि एक झटके में आपका पूरा करियर और भविष्य बर्बाद हो सकता है।

लेकिन, कंपनियों और सरकार को भी यह समझना होगा कि कर्मचारी मशीन नहीं हैं। जब तक भारत में काम के घंटे (Working Hours) तय नहीं होंगे और एक ‘हेल्दी वर्क कल्चर’ नहीं बनेगा, तब तक लोग सिस्टम से बचने के लिए ऐसे शॉर्टकट खोजते रहेंगे।

आपकी राय: क्या आपको भी लगता है कि भारत की प्राइवेट कंपनियों में कर्मचारियों का खून चूसा जाता है और उन्हें पर्याप्त छुट्टियां नहीं मिलतीं? अपना अनुभव हमारे साथ कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें!

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