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History of Yoga and International Yoga Day: क्या योग सिर्फ एक कसरत है? जानिए इसका 5000 साल पुराना इतिहास और ‘योग दिवस’ शुरू होने के सबसे बड़े रहस्य

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आज 21 जून है और दुनिया भर के करोड़ों लोग अपनी चटाई बिछाकर एक साथ गहरी सांसें ले रहे हैं। आज का दिन भारत के लिए बेहद गर्व का दिन होता है क्योंकि ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ हमारी ही संस्कृति की देन है। लेकिन आज की इस आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोगों को लगता है कि योग सिर्फ शरीर को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ने या वजन कम करने की एक साधारण सी कसरत है।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आज आपको अपनी यह सोच बदलनी पड़ेगी। ‘Apni Vani’ की इस विस्तृत और खास रिपोर्ट में आइए उस सफर पर चलते हैं जहां से योग की शुरुआत हुई और जानते हैं कि आखिर संयुक्त राष्ट्र को इसके लिए एक खास दिन क्यों मुकर्रर करना पड़ा।

आखिर योग क्या है और क्या यह सिर्फ एक कसरत है?

सबसे पहले इस सबसे बड़े भ्रम को तोड़ना जरूरी है कि योग जिम में की जाने वाली कोई आम एक्सरसाइज है। ‘योग’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के ‘युज’ धातु से हुई है। इसका सीधा और शाब्दिक अर्थ होता है ‘जुड़ना’ या ‘मिलन’। यह केवल शरीर की मांसपेशियों को खींचने की कला नहीं है, बल्कि यह आपकी व्यक्तिगत चेतना (आत्मा) का सार्वभौमिक चेतना (परमात्मा) के साथ मिलन है। जब आप जिम जाते हैं, तो आप केवल अपने भौतिक शरीर पर काम करते हैं।

लेकिन जब आप योग करते हैं, तो आप अपने शरीर, मन, भावनाओं और अपनी सांसों को एक साथ एक ही लय में लाते हैं। महर्षि पतंजलि ने अपने ‘योग सूत्र’ में इसे बहुत स्पष्ट रूप से बताया है कि योग मन की वृत्तियों (विचारों के शोर) को शांत करने का एक अत्यंत सूक्ष्म विज्ञान है।

हजारों साल पुराना है इसका स्वर्णिम इतिहास

योग का इतिहास किसी एक या दो सदी का नहीं, बल्कि लगभग पांच हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। भारतीय पौराणिक कथाओं और ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव को सबसे पहला योगी यानी ‘आदियोगी’ माना जाता है। कहते हैं कि शिव ने ही हिमालय की कांति सरोवर झील के किनारे अपने सात शिष्यों (सप्तर्षियों) को योग का यह दिव्य ज्ञान दिया था।

इसके बाद अगर हम ऐतिहासिक और पुरातात्विक सबूतों की बात करें, तो सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में ऐसी कई मुहरें और मूर्तियां मिली हैं, जिनमें इंसान को योग और ध्यान की मुद्राओं में बैठे हुए दिखाया गया है। समय के साथ यह ज्ञान गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए आगे बढ़ा और बाद में महर्षि पतंजलि ने इसे लिखित रूप देकर पूरी दुनिया के लिए सुलभ बना दिया।

कैसे शुरू हुआ ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने का सफर?

अब सवाल यह उठता है कि हजारों साल पुरानी इस विधा के लिए अचानक एक ‘विश्व दिवस’ मनाने की जरूरत क्यों और कैसे महसूस हुई। इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव सितंबर 2014 में रखी गई थी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने ऐतिहासिक भाषण के दौरान दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था।

उन्होंने दुनिया को समझाया था कि योग जलवायु परिवर्तन से लड़ने और इंसानी भलाई का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है। भारत के इस प्रस्ताव का असर इतना जादुई था कि संयुक्त राष्ट्र के 175 सदस्य देशों ने बिना किसी मतदान के इस प्रस्ताव को भारी समर्थन के साथ स्वीकार कर लिया। यह अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड था। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर इसे वैश्विक मंजूरी दे दी।

21 जून की तारीख ही क्यों चुनी गई?

इस दिन को चुनने के पीछे भी एक बहुत बड़ा खगोलीय और आध्यात्मिक विज्ञान छिपा हुआ है। उत्तरी गोलार्ध में 21 जून साल का सबसे लंबा दिन होता है। इसे ग्रीष्म संक्रांति भी कहा जाता है। भारतीय परंपरा में संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है, और यह समय आध्यात्मिक सिद्धियों को प्राप्त करने और योग विद्या की शुरुआत करने के लिए सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इसी प्राकृतिक और आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए 21 जून को योग दिवस के लिए मुकर्रर किया गया था। साल 2015 में दुनिया ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया था।

History of Yoga and International Yoga Day
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क्या इसे पूरी दुनिया मानती है या कुछ देश विरोध करते हैं?

यह एक बहुत ही दिलचस्प सवाल है। जब इसे वैश्विक स्तर पर लागू किया गया था, तब शुरुआत में कुछ धार्मिक कट्टरपंथियों और रूढ़िवादी समूहों ने इसका यह कहकर विरोध किया था कि यह हिंदू धर्म का हिस्सा है। कई लोगों ने ‘सूर्य नमस्कार’ जैसी क्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। लेकिन सच्चाई यह है कि योग किसी भी धर्म से नहीं जुड़ा है; यह गुरुत्वाकर्षण के नियम की तरह ही एक विशुद्ध विज्ञान है। आज की तारीख में शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां योग न किया जाता हो।

संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से लगभग सभी इसे किसी न किसी रूप में मनाते हैं। यहां तक कि सऊदी अरब जैसे कट्टर इस्लामिक देश ने भी हाल ही के वर्षों में योग को आधिकारिक रूप से एक ‘खेल गतिविधि’ के रूप में मान्यता दे दी है और वहां भी महिलाएं खुलेआम योग का अभ्यास कर रही हैं।

Apnivani की बात

योग भारत का वह अमूल्य उपहार है जिसने बिना किसी हथियार या युद्ध के पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना लिया है। यह हमें सिखाता है कि शांति और स्वास्थ्य किसी बाजार में नहीं बिकते, बल्कि वे हमारे भीतर ही मौजूद हैं। आज के इस तनाव भरे और डिजिटल युग में, योग खुद से दोबारा जुड़ने का सबसे खूबसूरत रास्ता है।

अगर आपने अभी तक अपने जीवन में इसे शामिल नहीं किया है, तो आज 21 जून के इस खास दिन से बेहतर और कौन सा मौका हो सकता है? इस गहरी और ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सभी परिवार वालों और दोस्तों के साथ व्हाट्सएप पर जरूर शेयर करें, ताकि वे भी भारत की इस महान विरासत का असली मतलब समझ सकें।

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