Apni Vani

Indian Army Day: वो 5 खूनी बॉर्डर जहां ‘मौत’ भी मांगती है परमिशन! सियाचिन का सच जान कलेजा कांप जाएगा सिर्फ वर्दी नहीं, लोहे का जिगर चाहिए

हम अक्सर फिल्मों में देखते हैं कि गोलियां चल रही हैं और हीरो लड़ रहा है। लेकिन हकीकत फिल्मों से कहीं ज्यादा खौफनाक है। Indian Army दुनिया की उन गिने-चुने फौजों में से है जो ‘बर्फ’ से लेकर ‘आग’ तक हर मौसम में दुश्मन की आंखों में आंखें डालकर खड़ी है। आज आर्मी डे पर हमें उन जवानों को याद करना चाहिए जो -60 डिग्री की ठंड में और 50 डिग्री की गर्मी में बिना पलक झपकाए हमारी नींद की पहरेदारी कर रहे हैं।

आखिर कौन सी हैं वो 5 जगहें, जहां इंसान का बचना नामुमकिन माना जाता है, लेकिन भारतीय सेना वहां शान से तिरंगा लहराती है? आइए जानते हैं।

Indian Army Day

सियाचिन ग्लेशियर (Siachen): जहां दुश्मन से ज्यादा ‘मौसम’ मारता है

मौत का साया: यहाँ ऑक्सीजन इतनी कम है कि सोते हुए इंसान की सांस कभी भी रुक सकती है। फिर भी, हमारे जवान यहाँ महीनों तक तैनात रहते हैं ताकि कोई दुश्मन ऊपर से नीचे न झांक सके। इसे “सफेद नर्क” भी कहा जाता है, लेकिन हमारे वीरों के लिए यह उनका मंदिर है।

LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल): एक जिंदा ज्वालामुखी

कश्मीर की वो लकीर, जो भारत और पाकिस्तान को बांटती है। यह दुनिया के सबसे ‘एक्टिव’ और खतरनाक बॉर्डर्स में से एक है।

हर पल खतरा: यहाँ कब, किस पहाड़ी के पीछे से गोली आ जाए, कोई नहीं जानता। सीजफायर के उल्लंघन और आतंकियों की घुसपैठ यहाँ आम बात है।

घने जंगल और पहाड़: उरी, पुंछ और राजौरी के सेक्टर ऐसे हैं जहां घने जंगलों में दुश्मन छिपा हो सकता है। यहाँ जवान ‘आंख’ से कम और ‘कान’ से ज्यादा काम लेते हैं। एक सूखी पत्ती की आवाज भी अलर्ट कर देती है।

LAC (गलवान और पैंगोंग): ड्रैगन से सीधी टक्कर

चीन के साथ लगने वाली सीमा (Line of Actual Control)। यह पाकिस्तान बॉर्डर से बिल्कुल अलग है। यहाँ गोलाबारी कम होती है, लेकिन शारीरिक संघर्ष (Physical Clashes) और मानसिक दबाव बहुत ज्यादा है।

गलवान की यादें: 2020 में हमने देखा कि कैसे हमारे निहत्थे जवानों ने चीनी सैनिकों को धूल चटा दी थी।

चुनौती: यहाँ ऑक्सीजन की कमी तो है ही, साथ ही यह एक “साइलेंट वॉर ज़ोन” है। दुश्मन सामने खड़ा है, तंबू गाड़कर। आपको 24 घंटे बिना पलक झपकाए उसे देखना है। जरा सी चूक और जमीन हाथ से गई।

थार रेगिस्तान (राजस्थान): जहां रेत भी उबाल मारती है

एक तरफ सियाचिन की बर्फ है, तो दूसरी तरफ राजस्थान का लोंगेवाला (Longewala) और जैसलमेर बॉर्डर।

जलती भट्टी: गर्मियों में यहाँ तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है। रेत इतनी गर्म होती है कि उस पर पापड़ सिंक जाए।

जूते पिघलते हैं: हमारे जवान भारी बूट और हथियार लेकर इस तपती रेत में पेट्रोलिंग करते हैं। कई बार रेत के तूफान (Sandstorms) सब कुछ ढक देते हैं, रास्ता भटकने का डर होता है, लेकिन हमारे जवानों के कदम नहीं डगमगाते।

नॉर्थ-ईस्ट के जंगल (अरुणाचल और म्यांमार बॉर्डर)

यह वो इलाका है जिसके बारे में कम बात होती है, लेकिन यह बेहद जानलेवा है। अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के घने वर्षावन (Rainforests)।

दिखाई न देने वाला दुश्मन: यहाँ दुश्मन सिर्फ इंसान नहीं हैं। जहरीले सांप, खून चूसने वाली जोंक (Leeches) और मलेरिया के मच्छर हैं।

गुरिल्ला वॉर: यहाँ के जंगलों में उग्रवादी गुट छिपे होते हैं जो घात लगाकर हमला (Ambush) करते हैं। यहाँ लड़ना किसी खुले मैदान की लड़ाई से सौ गुना मुश्किल है।

असली हीरो रील में नहीं, बॉर्डर पर हैं

आज 15 जनवरी को जब आप अपने घर में सुरक्षित बैठकर चाय पी रहे हैं, तो एक पल के लिए आंखें बंद करके उस जवान के बारे में सोचिएगा जो इस वक्त सियाचिन में बर्फ हटाकर अपनी पोस्ट बना रहा है।

भारतीय सेना सिर्फ एक नौकरी नहीं, एक जुनून है। यह वो वर्दी है जिसे पहनने के लिए लोहे का जिगर चाहिए।

अगर आपको भी अपनी सेना पर गर्व है, तो कमेंट में ‘Jai Hind’ लिखे बिना मत जाइएगा। और इस ब्लॉग को शेयर करें ताकि सबको पता चले कि हमारे रियल लाइफ ‘एवेंजर्स’ किन हालातों में रहते हैं।

Also Read:

बिहार में गंगा हुई निर्मल: BSPCB की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, जानें कैसे STPs ने बदली पवित्र नदी की सूरत

बिहार में ‘आतंकी’ हमले की धमकी ? पटना तथा अन्य अदालतो को RDX से उड़ाने की साजिश आई सामने ,जानिए पूरी खबर

Exit mobile version