मुंबई से सटे मीरा रोड (Mira Road) इलाके में एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना घटी है, जिसने स्थानीय पुलिस से लेकर महाराष्ट्र की एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) तक की नींद उड़ा दी है। नया नगर इलाके में ड्यूटी कर रहे दो बेगुनाह सिक्योरिटी गार्ड्स पर सिर्फ इसलिए चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने एक अनजान शख्स के कहने पर अपना धर्म बताने और ‘कलमा’ (Kalma) पढ़ने से इनकार कर दिया था।
सुनने में यह किसी आम आपराधिक घटना जैसी लग सकती है, लेकिन जब पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार किया और उसके घर की तलाशी ली, तो जो सबूत सामने आए, उसने इस पूरी वारदात को एक आतंकी साजिश (Terror Plot) से जोड़ दिया। आइए विस्तार से जानते हैं कि उस खौफनाक सुबह असल में क्या हुआ था और कैसे एक साइंस पढ़ाने वाला टीचर कट्टरपंथ की राह पर निकल पड़ा।
सुबह 4 बजे का वो खौफनाक मंज़र: ‘धर्म पूछा और फिर घोंपा चाकू’
यह पूरी वारदात सोमवार (27 अप्रैल 2026) की सुबह करीब 4 बजे की है।
मीरा रोड ईस्ट के नया नगर इलाके में वॉकहार्ट अस्पताल के ठीक पीछे एक ‘अस्मिता ग्रैंड बिल्डिंग’ का कंस्ट्रक्शन चल रहा है। वहां राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो रमेश सेन नाम के दो सिक्योरिटी गार्ड्स अपनी नाइट ड्यूटी कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, तभी 31 साल का जैब जुबैर अंसारी (Zaib Zubair Ansari) वहां पहुंचा।
शुरुआत में उसने गार्ड्स से पास की किसी मस्जिद का पता पूछा। जब गार्ड्स ने जानकारी न होने की बात कही, तो उसने अचानक उनका नाम और धर्म पूछना शुरू कर दिया। बात यहीं नहीं रुकी, आरोपी ने उन पर इस्लामिक ‘कलमा’ पढ़ने का दबाव डाला। जब गार्ड्स ने इसका विरोध किया, तो अंसारी ने अचानक एक धारदार हथियार (चाकू) निकाला और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में राजकुमार मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि सुब्रतो सेन को मामूली चोटें आईं।
सिर्फ 90 मिनट में गिरफ्तारी: कौन है हमलावर जैब अंसारी?
वारदात को अंजाम देकर हमलावर वहां से फरार हो गया, लेकिन घायल अवस्था में सुब्रतो सेन ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस की टीम तुरंत हरकत में आई और इलाके के CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए। घटना के महज 90 मिनट (डेढ़ घंटे) के भीतर पुलिस ने आरोपी जैब जुबैर अंसारी की पहचान कर उसे मीरा रोड स्थित उसके किराये के फ्लैट से दबोच लिया।
जब पुलिस ने उसकी बैकग्राउंड चेक की, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। जैब अंसारी कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि एक उच्च शिक्षित युवक है। वह साइंस ग्रेजुएट है और 2019 में अमेरिका (US) से भारत लौटा था। वह मीरा रोड में अकेला रहता था और इंटरनेट के जरिए छात्रों को ऑनलाइन केमिस्ट्री (Chemistry) और मैथ की क्लास देता था।
‘लोन वुल्फ’ अटैक की साजिश और घर से मिले खौफनाक सबूत
कहानी में सबसे बड़ा और खतरनाक मोड़ तब आया जब पुलिस आरोपी के घर की तलाशी लेने पहुंची।
वहां से पुलिस को कुछ ऐसी हस्तलिखित (Handwritten) डायरियां और नोट्स मिले, जिनमें ‘ISIS’, ‘लोन वुल्फ अटैक’ (अकेले दम पर किया जाने वाला आतंकी हमला), ‘जिहाद’ और ‘गाजा’ (Gaza) जैसे भड़काऊ शब्द लिखे हुए थे। सबसे खौफनाक बात यह थी कि आरोपी ने इन नोट्स में इस चाकूबाजी को ISIS से जुड़ने का अपना “पहला कदम” (First Step) बताया था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि उसके मकान मालिक ने उसे 5 मई तक फ्लैट खाली करने का नोटिस दिया हुआ था, जिसे लेकर वह मानसिक तनाव में भी था।

ATS के हाथ में कमान: क्या किसी बड़े नेटवर्क का मोहरा है आरोपी?
मामले की गंभीरता और आतंकी एंगल (Terror Angle) सामने आते ही इस केस की जांच तुरंत महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) को भी सौंप दी गई है।
फिलहाल जैब अंसारी के खिलाफ नया नगर पुलिस स्टेशन में हत्या के प्रयास और दो समुदायों के बीच धार्मिक नफरत फैलाने (BNS Section 196-1) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। एटीएस अब आरोपी के मोबाइल फोन, लैपटॉप, उसके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कॉल डिटेल्स की फोरेंसिक जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह सच में इंटरनेट के जरिए विदेशी कट्टरपंथी आकाओं के संपर्क में था?
Apnivani की बात
मीरा रोड की यह घटना एक बार फिर इस बात का सबूत है कि कट्टरपंथ और आतंकवाद की कोई शक्ल या डिग्री नहीं होती। एक अमेरिका से लौटा हुआ होनहार साइंस टीचर अगर ‘लोन वुल्फ’ बन सकता है, तो हमें अपने आस-पास और सोशल मीडिया के प्रति बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। पुलिस और एटीएस की मुस्तैदी से एक बहुत बड़ी साजिश समय रहते नाकाम हो गई।
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एक पढ़े-लिखे युवा का इस तरह कट्टरपंथ की राह पकड़ लेना हमारे समाज की कितनी बड़ी विफलता है? इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रियाएं कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!
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