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नासिक TCS कांड: मास्टरमाइंड HR निदा खान फरार, यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के आरोपों से दहला कॉर्पोरेट जगत

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महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की BPO यूनिट इन दिनों एक ऐसे विवाद के केंद्र में है जिसने न केवल आईटी सेक्टर बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी और कंपनी की पूर्व HR अधिकारी निदा खान फिलहाल फरार हैं। विशेष जांच टीम (SIT) की कई टीमें उनकी तलाश में मुंबई और भिवंडी में छापेमारी कर रही हैं, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है।

कौन है निदा खान? मास्टरमाइंड होने के गंभीर आरोप

निदा खान, जो मुंबई के पास भिवंडी की रहने वाली हैं और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा रही हैं, पर इस पूरे रैकेट की “लेडी कैप्टन” होने का आरोप है। पुलिस जांच के अनुसार, निदा खान ने जनवरी 2021 में TCS नासिक में HR पद पर जॉइन किया था। आरोप है कि उन्होंने अपनी स्थिति का फायदा उठाकर हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण करने वाले नेटवर्क को सुरक्षा प्रदान की।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि निदा खान उन पुरुषों को ‘डेयरडेविल’ कहती थीं जो महिलाओं का यौन उत्पीड़न करते थे। जब पीड़ित महिलाएं शिकायत लेकर निदा के पास जाती थीं, तो वह उन्हें यह कहकर चुप करा देती थीं कि “कॉर्पोरेट लाइफ में यह सब सामान्य है।”

नासिक TCS कांड
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यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का ‘खतरनाक’ खेल

SIT की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। यह मामला केवल कार्यस्थल पर उत्पीड़न तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें •धर्मांतरण (Religious Conversion) का एंगल भी जुड़ गया है:

•शिकायतों की अनदेखी: पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्होंने लगभग 78 ईमेल और चैट्स के जरिए अपनी आपबीती सुनाई, लेकिन HR निदा खान ने कोई कार्रवाई नहीं की।

•धार्मिक दबाव:महिला कर्मचारियों को नमाज पढ़ने, बुर्का या विशेष कपड़े पहनने और इस्लाम अपनाने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ मामलों में गोमांस (beef) खाने के लिए भी मजबूर करने के आरोप लगे हैं।

•विदेशी फंडिंग की आशंका: जांच में इमरान नामक एक व्यक्ति का नाम सामने आया है जो मलेशिया से इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था। पुलिस अब इस मामले में इंटरनेशनल फंडिंग और आतंकी लिंक की भी जांच कर रही है।

SIT की कार्रवाई और अब तक की गिरफ्तारियां

नासिक पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। अब तक इस मामले में कुल 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं और 6 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। निदा खान 10 अप्रैल को अपना बयान दर्ज कराने के बाद से ही भूमिगत हो गई हैं। उनका मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा है, जिससे संदेह और गहरा गया है।

महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितनी भी बड़ी कंपनी का कर्मचारी क्यों न हो।

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कॉर्पोरेट जगत में POSH एक्ट की विफलता

यह मामला TCS जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में POSH (Prevention of Sexual Harassment) कमेटी की विफलता पर बड़े सवाल खड़े करता है। कंपनी ने हालांकि ‘जीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी का दावा करते हुए आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, लेकिन सवाल यह है कि चार साल (2022-2026) तक यह सब कंपनी की नाक के नीचे कैसे चलता रहा?

निदा खान की गिरफ्तारी इस मामले की कई परतों को खोल सकती है। क्या यह वास्तव में एक संगठित धर्मांतरण सिंडिकेट था या केवल कार्यस्थल का शोषण? इसका जवाब निदा की कस्टडी के बाद ही मिल पाएगा।

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