NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। परीक्षा में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स के विवाद को लेकर आज (29 मई) देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई होने जा रही है।
इस बार कोर्ट के सामने देश के दो सबसे बड़े डॉक्टर्स एसोसिएशन— FAIMA (फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन) और UDF (यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट)— की याचिकाएं हैं। छात्रों के साथ खड़े इन संगठनों ने इस बार ऐसी मांगें की हैं, जो अगर मान ली गईं तो देश का पूरा मेडिकल एजुकेशन सिस्टम बदल जाएगा। ‘ApniVani’ की इस विशेष कानूनी रिपोर्ट में आइए गहराई से जानते हैं कि आज कोर्ट रूम में क्या होने वाला है और याचिकाओं में क्या-क्या मांगें उठाई गई हैं।
क्यों उठी NTA को पूरी तरह से ‘भंग’ करने की मांग?
इस सुनवाई की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली हाइलाइट यही है कि याचिकाओं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरी तरह से भंग (Dissolve) करने की मांग की गई है।
FAIMA और UDF का आरोप है कि NTA इतनी बड़ी और संवेदनशील परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से कराने में बार-बार नाकाम साबित हुई है। इस एजेंसी की साख पर अब गहरा बट्टा लग चुका है। छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए यह जरूरी है कि NTA के ढांचे को खत्म करके एक नई, पारदर्शी और जवाबदेह संस्था का गठन किया जाए।
‘कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट’ (CBT) से परीक्षा कराने का बड़ा प्रस्ताव
याचिकाओं में केवल कमियां नहीं गिनाई गई हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक सॉलिड समाधान भी कोर्ट के सामने रखा गया है।
मांग की गई है कि कोर्ट की निगरानी (Court-Monitored) में एक नया सिस्टम बनाया जाए और नीट की परीक्षा को ‘पेन-पेपर मोड’ (ओएमआर शीट) से बदलकर कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराया जाए। डॉक्टरों के संगठनों का तर्क है कि डिजिटल और कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम होने से पेपर लीक की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी, जैसा कि JEE और अन्य बड़े एग्जाम्स में होता है।
‘कागज़ों’ पर सिमटी जांच, CBI से सच उगलवाने की ज़िद्द
नीट पेपर लीक मामले में अब तक कई राज्यों की पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOI) जांच कर रही हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं का मानना है कि यह घोटाला अंतर-राज्यीय (Inter-State) है।
इसके तार कई राज्यों से जुड़े हैं, इसलिए इस पूरे मामले की CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से गहन जांच करानी बेहद जरूरी है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी इस मामले के पीछे छिपे ‘सॉल्वर गैंग’ और बड़े चेहरों का पर्दाफाश नहीं करती, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो पाएगा।

कोर्ट के नोटिस पर केंद्र और NTA की रहस्यमयी चुप्पी!
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस हफ्ते की शुरुआत में ही केंद्र सरकार, NTA और CBI को नोटिस जारी कर चुका है।
कोर्ट ने इन सभी से इस पूरे विवाद पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। लेकिन आज सुनवाई का दिन होने के बावजूद, अब तक केंद्र सरकार या NTA की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब (Reply) कोर्ट में सबमिट नहीं किया गया है। प्रशासन की इस चुप्पी ने छात्रों और कोर्ट के मन में संशय को और बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि आज सुनवाई के दौरान सरकारी वकील कोर्ट के सामने क्या दलीलें पेश करते हैं।
ApniVani की बात
नीट का यह विवाद अब सिर्फ कुछ नंबरों या ग्रेस मार्क्स का नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के 24 लाख छात्रों के भरोसे और भारत के मेडिकल सिस्टम की क्रेडिबिलिटी का सवाल बन चुका है। आज सुप्रीम कोर्ट का रुख यह तय करेगा कि क्या छात्रों को उनका खोया हुआ हक मिलेगा या उन्हें एक बार फिर लंबी कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा। उम्मीद है कि देश की शीर्ष अदालत आज कोई ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाएगी जिससे भविष्य में फिर कभी किसी होनहार बच्चे का डॉक्टर बनने का सपना सिस्टम की लापरवाही की भेंट न चढ़े।
आपकी क्या राय है?
क्या NTA को सचमुच भंग कर देना चाहिए? क्या कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षा कराने से पेपर लीक हमेशा के लिए रुक जाएगा? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस खबर को नीट के छात्रों के साथ तुरंत शेयर करें!