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Nepal New Prime Minister: केपी शर्मा ओली को हराकर अब ये रैपर बनने वाला है नेपाल का नया PM, जानिए पूरी खबर l

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नेपाल की राजनीति में साल 2026 एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। दशकों से चले आ रहे पुराने राजनीतिक दिग्गजों के किले ढह गए हैं और एक नया सूरज उदय हुआ है। काठमांडू के पूर्व मेयर और मशहूर रैपर बालेंद्र शाह (Balen Shah) अब नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दहलीज पर खड़े हैं। पिछले हफ्ते हुए आम चुनावों के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, वे किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। बालेंद्र शाह की राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, बल्कि संसद में भारी बहुमत (Landslide Majority) की ओर मजबूती से कदम बढ़ा दिए हैं।

झापा-5 में बड़ा उलटफेर: दिग्गज ओली की करारी हार

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला परिणाम झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से आया है। यह सीट सालों से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का अभेद्य किला मानी जाती थी। लेकिन 35 वर्षीय युवा नेता बालेंद्र शाह ने ओली को उन्हीं के गढ़ में पटखनी देकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं है, बल्कि नेपाल की जनता द्वारा पुरानी विचारधारा और पारंपरिक सत्ता को नकारने का स्पष्ट संदेश है। शाह की इस जीत ने उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।

Nepal New Prime Minister

दशकों बाद टूटा गठबंधन का तिलस्म: RSP को मिला पूर्ण बहुमत

नेपाल की चुनावी प्रणाली (Two-system format) कुछ ऐसी है कि यहाँ किसी एक पार्टी के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना हमेशा से एक टेढ़ी खीर रहा है। पिछले कई दशकों से नेपाल में गठबंधन की सरकारें ही बनती रही हैं, जिसके कारण राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना रहता था। हालांकि, 2026 के इन चुनावों ने इतिहास बदल दिया है। बालेंद्र शाह के नेतृत्व में राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी ने पहली बार अकेले दम पर जादुई आंकड़े को छू लिया है। यह नेपाल के लोकतंत्र में एक नए युग की शुरुआत है जहाँ जोड़-तोड़ की राजनीति के बजाय एक सशक्त नेतृत्व को मौका मिला है।

गगन थापा भी हारे, कांग्रेस के लिए बड़ा झटका

सिर्फ ओली ही नहीं, बल्कि नेपाल की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी ‘नेपाली कांग्रेस’ को भी इस चुनाव में गहरा जख्म मिला है। कांग्रेस के अध्यक्ष और कद्दावर नेता गगन थापा अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। थापा की हार ने यह साबित कर दिया है कि नेपाली मतदाता अब केवल बड़े नामों पर नहीं, बल्कि काम और बदलाव की राजनीति पर भरोसा कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ युवाओं का गुस्सा इस बार बैलेट बॉक्स में साफ दिखाई दिया।

क्यों बदला नेपाल का मिजाज?

5 मार्च को हुआ यह मतदान महज एक चुनाव नहीं था, बल्कि छह महीने पहले भड़के जन-आक्रोश का परिणाम था। नेपाल के युवाओं में बेरोजगारी, कुलीन वर्ग के शासन और भ्रष्टाचार को लेकर गहरा असंतोष था। ओली सरकार के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों ने सत्ता की नींव हिला दी थी। बालेंद्र शाह ने इसी आक्रोश को अपनी ताकत बनाया और ‘घंटी’ चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरे। आज काठमांडू की सड़कों पर समर्थक घंटियां बजाकर जश्न मना रहे हैं, जो उनकी पार्टी के विजय और भ्रष्टाचार के अंत का प्रतीक है।

बालेंद्र शाह के सामने चुनौतियां

प्रधानमंत्री के रूप में बालेंद्र शाह का सफर आसान नहीं होगा। उनके कंधों पर न केवल नेपाल की डगमगाती अर्थव्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी होगी, बल्कि भारत और चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसियों के साथ संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, उनकी साफ-सुथरी छवि और तकनीकी सोच (इंजीनियरिंग बैकग्राउंड) से लोगों को काफी उम्मीदें हैं।

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