क्या आपको भी लगता है कि अगर आपने दोपहर में 4 रोटी और रात में एक प्लेट चावल खा लिया, तो आपको पूरा पोषण (Nutrition) मिल गया? क्या आप भी वजन बढ़ाने के लिए घर वालों की सलाह मानकर बस ‘भात’ (Rice) और आलू ठूंस रहे हैं? अगर हाँ, तो संभल जाइए! आज का सच यह है कि हम सिर्फ पेट भर रहे हैं, पोषण नहीं ले रहे। मेडिकल भाषा में इसे ‘Hidden Hunger‘ (छिपी हुई भूख) कहते हैं।
आज के समय में हम जो गेहूं और चावल खा रहे हैं, उसमें कार्बोहाइड्रेट के अलावा और कुछ नहीं बचा है। हमारे दादा-परदादा की ताकत और हमारी कमजोरी में जमीन-आसमान का फर्क क्यों है? और कैसे हम अपनी डाइट में थोड़ा सा बदलाव करके अपनी जान बचा सकते हैं? आज ‘ApniVani’ के इस हेल्थ ब्लॉग में हम आपकी थाली का पूरा विश्लेषण करेंगे।

रोटी और चावल का कड़वा सच: यह सिर्फ ‘फ्यूल’ है, ‘फूड’ नहीं
सबसे पहले इस गलतफहमी को दिमाग से निकाल दें कि “चावल खाने से इंसान मोटा होता है।”
- असलीयत: चावल और रोटी (गेहूं) दोनों में मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) होता है। यह शरीर को सिर्फ ऊर्जा (Energy) देता है।
- समस्या: जब आप थाली में 80% चावल/रोटी और सिर्फ 20% दाल/सब्जी रखते हैं, तो शरीर को मसल्स बनाने वाला ‘प्रोटीन’ और दिमाग चलाने वाला ‘फैट’ नहीं मिलता। नतीजा? शरीर थुलथुला हो जाता है, पेट बाहर निकल आता है, लेकिन शरीर में जान नहीं होती। सिर्फ कार्ब्स खाने से वजन तो बढ़ सकता है, लेकिन वह ‘हेल्दी वेट’ नहीं बल्कि ‘बीमारी वाला मोटापा’ होगा।
हमारे पूर्वज vs हम: तुलना करना बेवकूफी क्यों?
अक्सर घर के बुजुर्ग कहते हैं, “हम तो सूखी रोटी खाकर भी दिन भर खेत जोतते थे।” उनकी बात सही है, लेकिन आज के दौर में उस लॉजिक को अपनाना बेवकूफी है। क्यों?
- अनाज की क्वालिटी: पहले लोग सिर्फ गेहूं-चावल नहीं, बल्कि बाजरा, रागी, ज्वार (Millets) और कंद-मूल खाते थे। उनके खाने में जंगल के बेर, शहतूत (Tuut), जामुन और बेल जैसे फल शामिल थे जो अब बाजार से गायब हो चुके हैं।
- मिट्टी की ताकत: 50 साल पहले की मिट्टी में जिंक, मैग्नीशियम और खनिज भरपूर थे। आज यूरिया और पेस्टिसाइड्स ने मिट्टी को बंजर बना दिया है। आज के पालक में उतना आयरन नहीं है जितना 30 साल पहले था।
- मेहनत: वो लोग 10 किलोमीटर पैदल चलते थे, हम 10 कदम भी बाइक से जाते हैं। इसलिए, पुराने जमाने की डाइट आज के जमाने में काम नहीं करेगी। हमें ‘स्मार्ट ईटिंग’ की जरूरत है।
शरीर को सच में क्या चाहिए? (जागरूक बनें)
अगर आप चाहते हैं कि बुढ़ापे में आपकी हड्डियां और आंखें सलामत रहें, तो अपनी थाली में इन 3 चीजों को आज ही शामिल करें:
- प्रोटीन (Protein): शरीर की ईंटें – जैसे बिना ईंट के घर नहीं बनता, वैसे ही बिना प्रोटीन के शरीर नहीं बनता। बाल झड़ना, थकान रहना, गाल पिचकना—ये सब प्रोटीन की कमी है। दाल (गाढ़ी), सोयाबीन, पनीर, दही, चने। अगर नॉन-वेज खाते हैं तो अंडा और चिकन बेस्ट है। हर खाने में थोड़ा प्रोटीन जरूर होना चाहिए।
- गुड फैट्स (Healthy Fats): दिमाग की खुराक – “घी खाने से हार्ट अटैक आता है”—यह सबसे बड़ा झूठ है। रिफाइंड तेल (Refined Oil) जहर है, लेकिन शुद्ध घी, सरसों का तेल और सूखे मेवे (Badam/Akhrot) शरीर के लिए अमृत हैं। आपके जोड़ों (Joints) की ग्रीसिंग और दिमाग की याददाश्त के लिए ‘गुड फैट्स’ बहुत जरूरी हैं।
- विटामिन और मिनरल्स (Vitamins & Minerals): सुरक्षा कवच – रोटी-सब्जी से विटामिन नहीं मिलते। इसके लिए आपको ‘जिंदा खाना’ (Raw Food) खाना पड़ेगा। महंगे कीवी या एवोकाडो के पीछे मत भागिए। जो मौसम का सस्ता फल है (अमरूद, पपीता, केला), वही सबसे बेस्ट है। रोज एक कच्चा फल या सलाद जरूर खाएं।
ApniVani की बात
प्रकृति बदल चुकी है, हवा-पानी बदल चुका है। अब पुराने नियमों पर चलकर हम स्वस्थ नहीं रह सकते। अपनी थाली को ‘इंद्रधनुष’ (Rainbow) की तरह रंगीन बनाएं। अगर थाली में सिर्फ सफेद (चावल/रोटी) और पीला (दाल) दिख रहा है, तो आपमें Nutritional Deficiency दिखेगी ही। उसमें हरा (सब्जी), लाल (सलाद) और सफेद (दही/पनीर) भी जोड़ें। याद रखें, शरीर वह नहीं है जो आप खाते हैं; शरीर वह बनता है जो वह पचाता (Absorb) है। आज ही से अपनी डाइट को अपडेट करें!
आपकी राय: क्या आपके घर में भी सुबह-शाम सिर्फ रोटी-सब्जी या दाल-चावल ही बनता है? क्या आप सलाद और फल रोज खाते हैं? कमेंट करके सच-सच बताएं!
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