PM Kisan Samman Nidhi योजना को छोटे और सीमांत किसानों की आमदनी स्थिर करने के लिए शुरू किया गया था—जहाँ हर साल ₹6,000 की राशि तीन किस्तों में सीधे DBT से किसानों के खाते में पहुंचती है। अगस्त 2025 में सरकार ने 20वीं किस्त जारी की, जिसमें 9.7 करोड़ किसानों को ₹20,500 करोड़ का भुगतान हुआ।अब नज़रें टिकी हैं 21वीं किस्त पर, जिसकी उम्मीद नवंबर के मध्य से दिसंबर–फरवरी के भुगतान चक्र में है। लेकिन ज़रूरी शर्तें—eKYC, आधार लिंकिंग, बैंक डिटेल अपडेट—पूरी नहीं होंगी, तो किस्त अटक सकती है।
कौन-से किसान होंगे लाभार्थी?
योजना का फायदा केवल उन्हीं किसानों को मिलता है जिनके पास खुद की दर्ज जमीन है और परिवार (पति-पत्नी, अविवाहित बच्चे) के नाम से कृषि रिकॉर्ड साफ अपडेट है। लेकिन—आयकर दाता, बड़े ज़मीनदार, सरकारी नौकरी/पेंशनधारी, विधायक-सांसद, और एनआरआई इस योजना के लिए पात्र ही नहीं हैं। योजना की एक खास बात यह भी है कि जिस किसान का डाटा सही है, उसकी किस्त बिना आवेदन के ही हर तिमाही खाते में आ जाती है।

जमीनी हकीकत: राहत है… पर सवाल भी बहुत
PM-Kisan ने लाखों परिवारों को बीज, खाद, और बुवाई जैसे खर्चों में सीधा सहारा दिया है। कई रिपोर्टों में यह साफ है कि इससे छोटे किसानों की नकद ज़रूरतें काफी हद तक पूरी होती हैं और ग्रामीण बाज़ारों में भी आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं।
लेकिन दूसरी तरफ समस्याएँ भी हैं—
- कई राज्यों में पात्रता-सत्यापन धीमा है।कुछ जगह गलत डाटा की वजह से अपात्र लोगों को किस्त,असली किसान को पैसा मिलने में देरी,और eKYC–आधार अपडेट न होने के कारण लाखों खाते “रोक” की स्थिति भी बन जाती है।
किसानों के लिए राहत… लेकिन सुधार की ज़रूरत
PM-KISAN छोटे किसानों के लिए एक स्थिर आर्थिक सहारा जरूर साबित हुई है, लेकिन अंतिम किसान तक पारदर्शी और तेज़ भुगतान पहुँचाना अभी भी चुनौती है।
सवाल वही है—
- क्या 6,000 रुपये असली खेती की लागत का हल हैं, या सिर्फ शुरुआत?
- क्या सरकार अगले फेज में राशि बढ़ाने या व्यवस्थाओं को और आसान बनाने पर काम करेगी?
किसानों की उम्मीदें ऊँची हैं—अब बारी सिस्टम की है कि वे इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।
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