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Punch Monkey Viral Video: खिलौने में मां ढूंढते अनाथ बंदर की कहानी! इंसानों को भी रुला देंगी ये 3 बातें

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क्या एक बेजान खिलौना किसी की असली ‘मां’ बन सकता है? इन दिनों सोशल मीडिया (Instagram, X, YouTube) पर एक नन्हे बंदर का वीडियो आग की तरह फैल रहा है। इस बंदर को देखकर लोग हंस नहीं रहे हैं, बल्कि उनकी आंखें नम हो रही हैं।

इस नन्हे जापानी बंदर का नाम ‘पंच’ (Punch-kun) है। यह कोई करतब नहीं दिखा रहा, बल्कि बस एक नारंगी रंग के ‘सॉफ्ट टॉय’ (खिलौने) को अपनी छाती से चिपकाए हुए घूमता है। जब भी दूसरे बड़े बंदर इसे मारते या डराते हैं, तो यह रोता हुआ भागकर अपने उसी खिलौने के गले लग जाता है।

आज ‘ApniVani’ पर हम सिर्फ इस वायरल वीडियो की कहानी नहीं बताएंगे, बल्कि इसका ‘डीप एनालिसिस’ करेंगे। आखिर इस बंदर का यह व्यवहार क्यों है? और सबसे बड़ा सवाल—हम इंसान एक बंदर के दर्द को देखकर खुद को इतना अकेला क्यों महसूस कर रहे हैं?

Punch and Ora
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कौन है ‘पंच’ और उसकी ‘ओरा-मामा’ की कहानी?

जापान के ‘इचिकावा सिटी जू’ (Ichikawa City Zoo) में जुलाई 2025 में इस जापानी मैकाक (Macaque) का जन्म हुआ था। जन्म के तुरंत बाद ही इसकी मां ने इसे अपनाने से इनकार कर दिया और इसे मरने के लिए अकेला छोड़ दिया।

जब चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने देखा कि यह बच्चा मां की गर्मी के बिना मर जाएगा, तो उन्होंने इसे ‘IKEA’ कंपनी का एक ऑरंगुटान सॉफ्ट टॉय दे दिया। बस फिर क्या था! ‘पंच’ ने उस बेजान खिलौने को ही अपनी असली मां मान लिया। इंटरनेट की दुनिया ने इस खिलौने का नाम ‘ओरा-मामा’ (Ora-mama) रख दिया है। पंच सोता, जागता और खाता भी इसी खिलौने को पकड़कर है।

प्राकृतिक व्यवहार: क्या बंदर सच में खिलौने से प्यार करते हैं?

विज्ञान और जानवरों की साइकोलॉजी (Animal Psychology) के नजरिए से देखें, तो पंच का यह बर्ताव बिल्कुल प्राकृतिक है। जंगली बंदरों के बच्चे जन्म के बाद कई महीनों तक अपनी मां के पेट या पीठ से शारीरिक रूप से चिपके रहते हैं। यह उन्हें न सिर्फ शिकारियों से बचाता है, बल्कि उनके दिमाग को ‘इमोशनल सिक्योरिटी’ (भावनात्मक सुरक्षा) देता है।

जब पंच को असली मां नहीं मिली, तो उसके दिमाग ने सर्वाइवल (जिंदा रहने) के लिए उस मुलायम खिलौने को ही मां का विकल्प मान लिया। इसे विज्ञान में ‘टैक्टाइल कम्फर्ट’ (स्पर्श से मिलने वाला सुकून) कहते हैं।

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इंसानों से तुलना: हम पंच में खुद को क्यों देख रहे हैं?

इस वीडियो के वायरल होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि इंसान इस बंदर में खुद की परछाई देख रहा है। इंसानी व्यवहार और पंच की कहानी में 3 बहुत गहरी समानताएं हैं:

ApniVani की बात: क्या पंच को परिवार मिल पाया?

लगातार धक्के खाने और इंटरनेट पर लोगों के रोने के बाद, अब एक अच्छी खबर भी आई है। हालिया अपडेट्स के मुताबिक, अब चिड़ियाघर के कुछ बड़े बंदरों (जिनमें ‘ओनसिंग’ नाम का एक बंदर शामिल है) ने धीरे-धीरे पंच को अपनाना शुरू कर दिया है। वो उसे गले लगाते हैं और उसके बाल संवारते (Grooming) हैं, जो बंदरों की दुनिया में ‘प्यार और स्वीकृति’ का सबसे बड़ा सबूत है।

पंच की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे इंसान हो या जानवर, दुनिया में सर्वाइव करने के लिए सिर्फ रोटी ही नहीं, बल्कि ‘किसी के साथ और प्यार’ की भी जरूरत होती है।

आपकी राय: जब आपने ‘पंच’ को अपने खिलौने के साथ रोते हुए देखा, तो आपके मन में पहला ख्याल क्या आया? क्या जानवरों में भी इंसानों जैसी भावनाएं होती हैं? कमेंट करके जरूर बताएं!

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