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पुणे अस्करवाड़ी हिंसा: इफ्तार के दौरान 150 लोगों की भीड़ का हमला, 14 घायल; इलाके में तनाव

पुणे अस्करवाड़ी हिंसा

पुणे के शांत वातावरण को एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा की आग ने झकझोर कर रख दिया है। महाराष्ट्र के पुणे शहर के अस्करवाड़ी इलाके में रमजान के दौरान एक इफ्तार पार्टी पर करीब 150 लोगों की उग्र भीड़ ने घातक हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए FIR दर्ज कर ली है और आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी है।

बोपदेव घाट के पास इफ्तार पर अचानक हमला: क्या है पूरा मामला?

यह घटना 13 मार्च 2026 की शाम को पुणे के अस्करवाड़ी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बोपदेव घाट के पास एक झील किनारे घटी। जानकारी के अनुसार, करीब 14 लोग रमजान के पवित्र महीने में अपना रोजा खोलने के लिए झील के किनारे शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित हुए थे। शाम करीब 7:00 बजे जब वे इफ्तार की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक 150 से अधिक अज्ञात लोगों की भीड़ वहां पहुंची।

पुणे अस्करवाड़ी
पुणे अस्करवाड़ी हिंसा

प्रत्यक्षदर्शियों और शिकायतकर्ता फिरोज सईद (36 वर्ष) के अनुसार, भीड़ ने बिना किसी उकसावे के उन पर हमला बोल दिया। हमलावरों के हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार थे। देखते ही देखते शांतिपूर्ण इफ्तार पार्टी रणक्षेत्र में बदल गई। हमलावरों ने अपमानजनक नारेबाजी की और वहां मौजूद लोगों को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

14 घायल, गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

इस हमले में 14 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की स्थिति नाजुक बताई जा रही है। घायलों का आरोप है कि भीड़ ने उन्हें घेरकर मारा और उनके धार्मिक अनुष्ठान में बाधा डाली। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को पास के निजी और सरकारी अस्पतालों में पहुँचाया गया। पुलिस प्रशासन ने घायलों के बयान दर्ज कर लिए हैं और सुरक्षा के मद्देनजर अस्पताल के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया है।

पुलिस की कार्रवाई: 150 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

पुणे पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कोथरुद पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है। पुलिस निरीक्षक कुमार कदम ने बताया कि आईपीसी (IPC) की विभिन्न धाराओं, जिसमें धारा 307 (हत्या का प्रयास), 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाना), 147, 148, 149 (दंगा करना और गैरकानूनी सभा) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) शामिल हैं, के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस ने अब तक 3 मुख्य संदिग्धों की पहचान कर ली है और अन्य हमलावरों की तलाश में क्राइम ब्रांच की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं। पुलिस इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही है ताकि भीड़ में शामिल चेहरों की पहचान की जा सके।

अस्करवाड़ी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस घटना के बाद पुणे के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुणे पुलिस कमिश्नर ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। स्थानीय शांति समितियों के साथ बैठकें की जा रही हैं ताकि किसी भी तरह की जवाबी हिंसा को रोका जा सके।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

पुणे में हुई इस हिंसा की विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कड़ी निंदा की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रमजान जैसे पवित्र महीने में इस तरह की घटना भाईचारे को नुकसान पहुँचाने की साजिश है। वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और सरकार से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए मिसाल बने।

पुणे अस्करवाड़ी हिंसा

शांति और न्याय की मांग

अस्करवाड़ी की यह घटना हमें याद दिलाती है कि समाज में नफरत फैलाने वाले तत्व सक्रिय हैं। पुणे पुलिस की त्वरित कार्रवाई और समाज के जिम्मेदार नागरिकों का सहयोग ही इस तनाव को कम कर सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि क्या इस बड़े हमले के पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी या यह अचानक भड़का हुआ विवाद था।

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