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Russia Ban Social Media: दुनिया जाग गई, भारत कब लेगा एक्शन? बच्चों पर ‘Digital Lock’ लगाने के 3 बड़े कारण

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रूस (Russia) ने फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ताला लगा दिया है (भले ही उनके कारण राजनीतिक हों)। उधर, ऑस्ट्रेलिया (Australia) ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कानून पास किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया चलाना अब गैर-कानूनी होगा। दुनिया के बड़े-बड़े देश समझ चुके हैं कि सोशल मीडिया बच्चों के लिए ‘बारूद’ है। लेकिन सवाल यह है कि भारत (India) में इस मुद्दे पर इतना सन्नाटा क्यों है? हमारे यहाँ 10 साल का बच्चा हाथ में किताब पकड़ने के बजाय ‘रील्स’ स्क्रॉल कर रहा है।

क्या हमें भी एक सख्त कानून की जरूरत नहीं है? क्या बच्चों की नाराजगी के डर से हम उन्हें बर्बाद होने दें? आज हम इसी कड़वे सच का विश्लेषण करेंगे।

दुनिया ने दिखाई सख्ती: रूस और ऑस्ट्रेलिया का मॉडल

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि दुनिया अब ‘अनलिमिटेड इंटरनेट’ के खिलाफ खड़ी हो रही है।

जब ये विकसित देश ऐसा कर सकते हैं, तो भारत—जहाँ सबसे ज्यादा युवा आबादी है—पीछे क्यों है?

Russian president and Indian President

भारत क्यों नहीं ले रहा कोई ‘Step’? (The Big Question)

भारत में सरकार ‘डेटा प्रोटेक्शन’ (DPDP Act) की बात तो करती है, लेकिन सोशल मीडिया की उम्र सीमा (Age Limit) पर कोई सख्त ‘डंडा’ नहीं चलाती। इसके पीछे कुछ बड़े कारण हो सकते हैं:

लेकिन क्या बिजनेस और तकनीक, बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी है? शायद नहीं।

अगर भारत में ‘Age Limit’ लगी, तो क्या होगा? (Parents vs Kids)

अगर कल को भारत सरकार यह ऐलान कर दे कि 16 या 18 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया नहीं चलाएंगे, तो समाज दो हिस्सों में बंट जाएगा।

माता-पिता की प्रतिक्रिया (The Happy Parents):

पुराने विचारों वाले या समझदार माता-पिता (Parents) के लिए यह खबर किसी ‘दिवाली गिफ्ट’ से कम नहीं होगी। वे खुश होंगे कि उनका बच्चा अब फोन छोड़कर परिवार से बात करेगा। पढ़ाई पर फोकस बढ़ेगा और ‘ऑनलाइन खतरों’ का डर खत्म होगा। हर भारतीय माँ-बाप यही तो चाहते हैं— “बला टली!”

बच्चों की प्रतिक्रिया (The Angry Gen-Z):

नई पीढ़ी (Kids & Teens) इसे अपनी ‘आजादी पर हमला’ मानेगी। वे विरोध करेंगे, वीपीएन (VPN) का रास्ता खोजेंगे और कहेंगे कि सरकार पिछड़े ख्यालों की है। क्योंकि वे नासमझ हैं, उन्हें नहीं पता कि वे ‘मनोरंजन’ नहीं, बल्कि ‘डोपामाइन एडिक्शन’ (Dopamine Addiction) के शिकार हैं।

कड़वी गोली जरूरी है: हम सही करना नहीं छोड़ सकते

बच्चे तो इंजेक्शन लगवाने से भी डरते हैं और रोते हैं, तो क्या हम उन्हें दवा देना बंद कर देते हैं? नहीं न? क्योंकि हमें पता है कि यह उनके भले के लिए है। सोशल मीडिया बैन या एज-लिमिट (Age Limit) भी वही ‘कड़वी गोली’ है।

बच्चे अभी नाराज होंगे, लेकिन 10 साल बाद वही बच्चे इस फैसले के लिए धन्यवाद देंगे कि उन्हें एक ‘नकली दुनिया’ से बचा लिया गया।

ApniVani का निष्कर्ष

रूस ने जो किया या ऑस्ट्रेलिया ने जो किया, वो उनका फैसला था। लेकिन भारत को अब ‘डिजिटल लक्ष्मण रेखा’ खींचनी ही होगी। पूरी तरह बैन न भी हो, तो कम से कम 16 साल की सख्त उम्र सीमा और KYC वेरिफिकेशन जरूरी है। अगर हमने आज बच्चों के हाथ से यह ‘झुनझुना’ नहीं छीना, तो कल एक ऐसा समाज बनेगा जो शारीरिक रूप से तो जवान होगा, लेकिन मानसिक रूप से बीमार।

आपकी राय: क्या आप चाहते हैं कि भारत में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन हो? एक अभिभावक (Parent) या छात्र के तौर पर अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।

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