जम्मू-कश्मीर की 18 वर्षीय पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई कमी मंज़िल पाने से नहीं रोक सकती। जन्म से ही बिना हाथों के बिना पैदा हुईं शीतल अब भारत की सक्षम (एबल-बॉडी) जूनियर तीरंदाजी टीम में चुनी गई हैं। वह जेद्दा (सऊदी अरब) में होने वाले आगामी एशिया कप स्टेज-3 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
यह पहली बार है जब कोई भारतीय पैरा-एथलीट सक्षम खिलाड़ियों की टीम का हिस्सा बनी है — यानी अब शीतल उन खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करेंगी जिनके पास शारीरिक रूप से कोई कमी नहीं है।
कैसे किया चयन
पैरों से तीर चलाकर 60 से ज़्यादा खिलाड़ियों को पछाड़ा सोनीपत में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय चयन ट्रायल में शीतल देवी ने इतिहास रच दिया।
उन्होंने अपने पैरों से तीर चलाते हुए 60 से अधिक सक्षम तीरंदाजों को पछाड़ते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने 703 अंक बनाए — जो शीर्ष क्वालिफायर तेजल साल्वे के स्कोर के बराबर था। उनके इस प्रदर्शन को देखकर चयन समिति ने उन्हें सीधे एशिया कप टीम में जगह दी।
एक साल पुराना सपना हुआ पूरा शीतल का यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं। पिछले साल उन्होंने एक टीवी शो में कहा था कि उनका सपना है एक दिन सक्षम खिलाड़ियों के साथ खेलना। आज वह सपना सच हो गया है।
टीम में चयन के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा —
“जब मैंने प्रतिस्पर्धा शुरू की थी, तब मेरा एक छोटा सा सपना था — एक दिन सक्षम तीरंदाजों के साथ मुकाबला करने का। आज वह सपना एक कदम और करीब आ गया है।”
प्रेरणा की मिसाल:
पैरों से चलाती हैं तीर, मन से जीतती हैं दिल जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले की रहने वाली शीतल देवी बचपन से ही हाथों के बीना हैं। उन्होंने इस कमी को अपनी ताकत बना लिया। वह अपने पैरों से धनुष पकड़ती हैं और तीर चलाती हैं — बिल्कुल सटीक निशाने के साथ।
शीतल इस समय कटरा के श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कोच सुभाष शर्मा के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रही हैं। पेरिस पैरालंपिक से एशिया कप तक —

एक विजेता की यात्रा
शीतल देवी ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया था। वह तुर्की की पैरा तीरंदाज ओजनूर क्यूर गिर्डी से प्रेरणा लेती हैं — जो विश्व स्तर पर सक्षम खिलाड़ियों की स्पर्धाओं में भी हिस्सा लेती हैं। अब शीतल उसी राह पर चल पड़ी हैं।
आने वाला एशिया कप — भारत की नज़र शीतल पर
शीतल देवी अब एशिया कप में महिला कंपाउंड वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनसे न सिर्फ पैरा खेल जगत बल्कि पूरा देश उम्मीद कर रहा है कि वह इस टूर्नामेंट में भी अपनी सटीकता और साहस से नया कीर्तिमान बनाएंगी।
क्यों है शीतल देवी सभी के लिए प्रेरणा
- उन्होंने जन्म से मिली कमी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
- अपने पैरों से वो वही कर दिखाती हैं जो लोग हाथों से भी नहीं कर पाते।
- वह साबित करती हैं कि “असंभव” सिर्फ एक शब्द है, हौसले के सामने नहीं।
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