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Swasth Nari Sashakt Parivar : प्रधानमंत्री मोदी ने किया महत्वाकांक्षी मिशन का शुभारंभ , अब महिलाओ को नहीं होगी दिक्कत

Swasth Nari Sashakt Parivar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के भारत मंडपम परिसर में आयोजित एक विशेष समारोह में देशभर के लिए “Swasth Nari Sashakt Parivar” मिशन की शुरुआत की। यह कार्यक्रम महिलाओं के स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर परिवार और समाज की समग्र प्रगति को आगे बढ़ाने का उद्देश्य रखता है। इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्रियों, राज्य स्वास्थ्य मंत्रियों, आशा कार्यकर्ताओं और देशभर से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

महिलाओं के स्वास्थ्य को विकास का आधार बताया अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है जब उसकी महिलाएँ स्वस्थ और आत्मनिर्भर हों। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि बीते दस वर्षों में मातृ मृत्यु दर में 30% की कमी आई है, लेकिन एनीमिया अब भी 57% भारतीय महिलाओं को प्रभावित करता है। साथ ही स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसी बीमारियाँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, “परिवार तब ही सुरक्षित है जब उसकी माताएँ, बेटियाँ और बहनें स्वस्थ, जागरूक और आर्थिक रूप से सशक्त हों।”

Swasth Nari Sashakt Parivar मिशन के चार मज़बूत स्तंभ

  1. निवारक स्वास्थ्य – 10 से 19 वर्ष की हर किशोरी का तिमाही आधार पर एनीमिया टेस्ट किया जाएगा और आयरन-फॉलिक सप्लीमेंट दिए जाएंगे। वहीं, 30 साल से ऊपर की महिलाओं को हर दो वर्ष में स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए देशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
  2. पोषण सुरक्षा – 40 उच्च-जोखिम वाले जिलों में “पोषण पंचायत” स्थापित किए जाएंगे। यहां पर स्थानीय स्तर पर तैयार बाजरा-आधारित पौष्टिक राशन वितरित होगा। सरकार ने इस दिशा में एक ₹900 करोड़ का कोष बनाया है ताकि खाद्य पदार्थों और तेलों में फोर्टिफिकेशन को बढ़ावा दिया जा सके।
  3. डिजिटल सशक्तिकरण – महिलाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए “नारी-सेतु मोबाइल ऐप” लॉन्च किया गया है। यह ऐप टीकाकरण की याद दिलाने, टेली-कंसल्टेशन की सुविधा देने और व्यक्तिगत स्वास्थ्य इतिहास को ट्रैक करने का काम करेगा। इसे 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा ताकि देश के हर हिस्से की महिलाएँ इसका लाभ उठा सकें।
  4. आर्थिक मज़बूती – दो लाख स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज ऋण दिया जाएगा। इसके जरिए महिलाएँ सेनेटरी नैपकिन निर्माण इकाइयाँ, मिलेट प्रोसेसिंग क्लस्टर और डायग्नोस्टिक कियोस्क चला सकेंगी। अनुमान है कि इस पहल से 8 लाख महिलाओं को सीधा रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।

लागू करने की रूपरेखा

इस मिशन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय मुख्य समन्वयक होगा और महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण विकास और शिक्षा मंत्रालय इसका सहयोग करेंगे। प्रत्येक जिले में एक जिला स्वास्थ्य राजदूत नियुक्त किया जाएगा, जिसमें महिला डॉक्टर या अनुभवी आशा कार्यकर्ता को प्राथमिकता दी जाएगी। केंद्र सरकार 60% खर्च वहन करेगी, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह हिस्सा 90% होगा।इसके अतिरिक्त, नीति आयोग और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) मिलकर इस मिशन का वार्षिक आकलन करेंगे। इसमें एनीमिया की दर, कैंसर स्क्रीनिंग की सफलता और स्वयं सहायता समूहों की आय में वृद्धि जैसे पहलुओं को मापा जाएगा।

प्रतिक्रियाएँ

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस पहल को भारत का अब तक का सबसे व्यापक महिला स्वास्थ्य अभियान बताया। वहीं, डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया निदेशक डॉ. सायमा वाजेद ने कहा कि यह कदम हजारों महिलाओं की जान बचा सकता है।हालाँकि, सामाजिक कार्यकर्ता पूनम मुत्तरेजा ने चेतावनी दी कि योजना तभी सफल होगी जब “आखिरी पायदान तक पहुँचने वाली व्यवस्था और समय पर भुगतान” सुनिश्चित किए जाएँ। विपक्षी नेताओं ने भी महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने की सराहना की लेकिन बजट और कार्यान्वयन को लेकर सवाल उठाए।

जमीनी स्तर की उम्मीदें

गया (बिहार) की आशा कार्यकर्ता सुनीता देवी ने कहा, “अब हमें हर किशोरी की हीमोग्लोबिन रिपोर्ट आसानी से मोबाइल पर मिल सकेगी, मोटे रजिस्टर पलटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।”

बेंगलुरु की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. फातिमा खान ने कहा, “कैंसर की स्क्रीनिंग तभी कारगर होगी जब महिलाओं को जागरूकता और आर्थिक सहयोग भी दिया जाए, क्योंकि कई बार वे मज़दूरी छोड़कर जांच कराने नहीं आतीं।” वहीं, महाराष्ट्र की स्वयं सहायता समूह प्रमुख रेखा पवार ने कहा कि मिलेट प्रोसेसिंग से उनकी आय दोगुनी होगी और बच्चों को पौष्टिक नाश्ता मिलेगा।

आगे का लक्ष्य

सरकार ने 18 महीनों में एनीमिया के गंभीर मामलों में 15% की कमी और 1 करोड़ महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा है। वहीं, 2030 तक महिला श्रम भागीदारी दर को 38% तक पहुँचाने की योजना है, जिसमें स्वास्थ्य सुधार से आने वाली उत्पादकता वृद्धि का बड़ा योगदान होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा – “जब हर नारी स्वस्थ होगी, तभी हर परिवार समृद्ध होगा। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भारत के लिए एक जन-आंदोलन है।”

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