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System Failure India: NEET छात्रा का रेप और हिट-एंड-रन, कीड़े-मकोड़ों से भी सस्ती है आम आदमी की जान!

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आजकल अखबारों और टीवी चैनलों पर खबरें देखकर लगता है जैसे इस देश में आम आदमी की जान की कीमत कुछ भी नहीं है। अगर आपकी जेब में करोड़ों रुपये हैं और आपका रसूख है, तो आप 200 की स्पीड में कार चढ़ाकर भी साफ बच सकते हैं। लेकिन अगर आप गरीब या मिडिल क्लास हैं, तो या तो आप बीच सड़क के खुले गड्ढे में गिरकर मर जाएंगे या पुलिस आपको ही झूठा साबित कर देगी।

आज हम देश की उन 6 खौफनाक घटनाओं का विश्लेषण करेंगे, जिन्होंने ‘न्याय’ और ‘सिस्टम‘ की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।

Patna neet rape case

पटना NEET छात्रा केस: सत्ता और पैसे के आगे दबाई गई चीखें

सबसे पहले बात करते हैं बिहार की। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही एक मासूम छात्रा के साथ बर्बरता हुई और इलाज के दौरान उसकी दर्दनाक मौत हो गई (जनवरी 2026)। आरोप है कि रसूखदारों को बचाने के लिए पुलिस ने इसे शुरुआत में ‘सुसाइड’ बताने की पूरी कोशिश की। तीन दिन तक न कमरा सील हुआ, न सबूत जुटाए गए। बाद में जब छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म मिला, तब जाकर रेप की बात सामने आई। यह केस चीख-चीख कर बताता है कि अगर आप साधारण परिवार से हैं, तो यह सिस्टम आपकी बेटी की चीखों को भी फाइलों में दबा देगा।

बिहार के गिरते पुल: करप्शन की भेंट चढ़ती आम जनता

बिहार में सिर्फ न्याय ही नहीं, पुल भी भ्रष्टाचार की नींव पर टिके हैं। आए दिन करोड़ों की लागत से बने नए-नवेले पुल ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। नेता और ठेकेदार मिलकर जनता के टैक्स का पैसा डकार जाते हैं और आम आदमी अपनी जान हथेली पर रखकर इन्हीं टूटी सड़कों और पुलों पर चलने को मजबूर है। कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है।

कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड (शिवम मिश्रा): पैसे के नशे में चूर

फरवरी 2026 में कानपुर के अरबपति तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ने अपनी 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी कार से कई राहगीरों को बुरी तरह कुचल दिया। एक आम आदमी अगर साइकिल से भी किसी को टक्कर मार दे तो उसे जेल की हवा खानी पड़ती है। लेकिन इस रईसजादे को गिरफ्तार होने के चंद घंटों के भीतर ही 20 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिल गई। क्या इस देश का कानून सिर्फ गरीबों को डराने के लिए है?

पुणे पोर्श केस 2024: 300 शब्दों के निबंध में बिकी दो जानें

पुणे में एक रईस बिल्डर के नाबालिग बेटे (वेदांत अग्रवाल) ने शराब के नशे में अपनी करोड़ों की पोर्श कार से दो होनहार आईटी इंजीनियरों (अनीश और अश्विनी) को कुचल कर मार डाला। लेकिन सिस्टम का भद्दा मजाक देखिए, उसे सजा के नाम पर सिर्फ “300 शब्दों का निबंध” लिखने को कहा गया। पैसे के दम पर पुलिस स्टेशन में पिज्जा खिलाया गया और डॉक्टरों ने ब्लड सैंपल तक बदल दिए।

नोएडा कार नाला हादसा: 90 मिनट तक तड़पता रहा युवक

सिस्टम की बेरुखी का सबसे क्रूर चेहरा ग्रेटर नोएडा (सेक्टर 150) में दिखा। 27 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता अपनी कार समेत पानी से भरे 70 फुट गहरे खुले नाले (बेसमेंट) में गिर गया। वह कार की छत पर चढ़ गया और 90 मिनट तक मदद की भीख मांगता रहा। पुलिस और फायर ब्रिगेड वहां मौजूद थी, लेकिन ‘ठंड, गहरे पानी और कोहरे’ का बहाना बनाकर कोई उसे बचाने नहीं उतरा और उसने वहीं तड़पकर दम तोड़ दिया।

इंदौर के खूनी गड्ढे और ‘फाइल vs जेब’ का अंधा कानून

मध्य प्रदेश के इंदौर का हाल देखिए। वहां बीच सड़क के जानलेवा गड्ढों ने आम परिवारों को उजाड़ कर रख दिया है। हाल ही में एक परिवार की बाइक गड्ढे में फिसल गई, जिसमें एक 5 साल की मासूम बच्ची को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया। एक अन्य मामले में गड्ढे के कारण 18 साल के युवक की जान चली गई और एक महिला कोमा में पहुंच गई। हद तो तब हो गई जब पुलिस ने सिस्टम की गलती मानने के बजाय कोमा में गई महिला के पति पर ही ‘रैश ड्राइविंग’ का मुकदमा ठोक दिया!

दूसरी तरफ हमारे ‘न्याय’ का भद्दा मजाक देखिए। इलाहाबाद कोर्ट और रिश्वत का मामला इस सिस्टम का सबसे घिनौना सच है। एक रसूखदार सरेआम रिश्वत लेते हुए ट्रैप (Trap) में पकड़ा जाता है, उसका वीडियो सबूत (Video Evidence) भी चीख-चीख कर गवाही दे रहा होता है। लेकिन हमारा कोर्ट उसे सिर्फ इस बेतुके आधार पर बरी कर देता है कि “रिश्वत के पैसे आरोपी की जेब (Pocket) या उसके शरीर पर नहीं मिले, बल्कि पास रखी फाइल या टेबल पर मिले थे!” क्या यह मजाक नहीं है? आम आदमी सड़क के गड्ढों में अपनी जान गंवा रहा है, और भ्रष्टाचारी ‘जेब और फाइल’ के इस अंधे कानूनी लूपहोल (Loophole) का फायदा उठाकर बाइज्जत बरी हो रहे हैं!

नेताओं के ‘भक्त’ बनना छोड़ें

इन सभी घटनाओं का लब्बोलुआब सिर्फ एक है—इस देश का सिस्टम सिर्फ और सिर्फ ‘पैसों’ और ‘पावर’ से चलता है। हम और आप दिन-रात सोशल मीडिया पर बैठकर राजनेताओं और पार्टियों की भक्ति में अंधे हो जाते हैं। एक-दूसरे से लड़ते हैं कि कौन सा नेता अच्छा है और कौन सा बुरा। लेकिन कड़वा सच तो ये है कि जब आप पर मुसीबत आएगी या आपके साथ अन्याय होगा, तो कोई नेता आपको बचाने नहीं आएगा। ये नेता सिर्फ अपने रईस दोस्तों, बड़े कारोबारियों और बाहुबलियों की ढाल बनते हैं।

इसलिए, अब यह राजनैतिक अंधभक्ति छोड़िए। अपनी आंखें खोलिए और सिर्फ खुद पर मेहनत कीजिए। खूब पैसा कमाइए, अपने करियर पर ध्यान दीजिए और खुद को इतना ताकतवर बनाइए कि कोई आपको कुचल कर न जा सके। क्योंकि इस बिकाऊ सिस्टम में अगर आप कमजोर और गरीब हैं, तो आपको न्याय कभी नहीं मिलेगा; आप बस एक ‘आंकड़ा’ बनकर रह जाएंगे।

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