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तीन साल के Oliver Chu ने रचा मेडिकल इतिहास | Hunter Syndrome Gene Therapy Success

दुनिया ने मेडिकल साइंस में एक नया चमत्कार देखा है। तीन साल के Oliver Chu अब Hunter Syndrome के लिए दुनिया के पहले मरीज बन गए हैं जिन्हें एक बिल्कुल नई, pioneering gene therapy दी गई है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आई है जो इस दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं।

यह breakthrough treatment फरवरी 2025 में Royal Manchester Children’s Hospital में दिया गया—और शुरुआती नतीजों ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह थेरेपी आने वाले समय में Hunter syndrome से पीड़ित बच्चों के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है।

Hunter Syndrome क्या है –

Oliver Chu

Hunter syndrome, जिसे MPS II भी कहा जाता है, एक दुर्लभ genetic disorder है जो लगभग पूरी तरह लड़कों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में शरीर iduronate-2-sulfatase (IDS) नामक एंज़ाइम नहीं बना पाता। इसके कारण शरीर में complex sugars जमा होने लगती हैं, और नतीजा होता है—

यह बीमारी अक्सर बच्चों के बढ़ते उम्र के साथ गंभीर होती जाती है, और अभी तक इसका कोई permanent cure नहीं था।

कैसे दी गई यह Gene Therapy?

Oliver का इलाज एक बेहद हाई-टेक प्रक्रिया से गुज़रा—

1. दिसंबर 2024 में स्टेम सेल्स निकाले गए

उन्हें Manchester में इकट्ठा कर London के Great Ormond Street Hospital की लैब में भेजा गया।

2. लैब में किया गया Genetic Editing

वैज्ञानिकों ने एक specially engineered virus का इस्तेमाल करके IDS gene को Oliver के सेल्स में डाला। इस gene को इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह blood-brain barrier पार कर सके—जो कि पहले की किसी थेरेपी ने नहीं किया था।

3. फरवरी 2025 में दिया गया infusion

डॉक्टर्स का कहना है कि Oliver अब normal amount से सैकड़ों गुना ज्यादा enzyme बना रहा है—जो कि पहले बिल्कुल zero था। एक साल के भीतर Oliver की cognitive skills, speech और agility इतनी सुधर गई कि वह लगभग उन बच्चों जैसा व्यवहार करने लगा जिनमें यह condition नहीं होती।

Prof. Simon Jones ने इसे “life-changing transformation” कहा है।

पीछे की कहानी: कैसे बचा यह प्रोजेक्ट

यह ट्रायल The University of Manchester द्वारा संचालित किया जा रहा है, और इसमें Royal Manchester Children’s Hospital और Saint Mary’s Hospital भी शामिल हैं।

लेकिन यह प्रोजेक्ट लगभग 2023 में बंद होने वाला था।Biotech कंपनी Avrobio ने आर्थिक संकट के कारण अपना license वापस कर दिया।उसी समय British medical charity LifeArc आगे आई और £2.5 मिलियन (करीब 26 करोड़ रुपये) की फंडिंग से प्रोजेक्ट को बचा लिया।आज Oliver समेत कुल पाँच बच्चे इस world-first trial का हिस्सा हैं, जिन्हें कम से कम दो साल तक monitor किया जाएगा।

Gene Therapy का सफर: 1990 में हुई थी पहली सफलता-

Oliver का इलाज उस लंबी यात्रा का हिस्सा है जिसकी शुरुआत 1990 में हुई—

30 साल बाद भी Ashanthi पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रही हैं। उनके शरीर की T-cells में आज भी corrected gene मौजूद है। यह इतिहास दिखाता है कि gene therapy लगातार विकसित हो रही है, और Oliver का केस इसका अगला महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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