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Unbelievable Murti in Chhattisgarh – देखिए कैसे गोबर से बनी मां सरस्वती की प्रतिमा ने देश को किया हैरान

Unbelievable Murti in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ की धरती पर चमत्कारी कला: जब गोबर से रची मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा, संस्कार और पर्यावरण दोनों का सम्मान!
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के निमोरा गांव के मूर्तिकार पीलूराम साहू ने एक अनूठी पहल के तहत गाय के गोबर से मां सरस्वती की प्रतिमा का निर्माण किया है। उनकी यह कला ‘इकोफ्रेंडली’ यानी पर्यावरण अनुकूल है और समाज में पारंपरिक धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा देती है।

इस अनोखे प्रयास की खास बातें
पर्यावरण हितैषी: गोबर से बनी मूर्तियां विसर्जन के बाद जैविक खाद में बदल जाती हैं, जिससे न तो जल प्रदूषण होता है और न ही जलचरों को कोई नुकसान पहुंचता है।

कला व संस्कृति: साहू ने प्राचीन परंपरा को आधुनिक सोच से जोड़ते हुए प्राकृतिक रंगों और केवल आंखों में ही रंग का उपयोग किया—बाकी प्रतिमा पूरी तरह प्राकृतिक रखी।

कच्चा माल: तीन अनाथ बछड़ों के गोबर का उपयोग कर 6 फीट ऊंची गऊरी और 4 फीट की अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा भी बनाई जा चुकी हैं।

संदेश: प्लास्टर ऑफ पेरिस और केमिकल से बनी मूर्तियां जहां प्रदूषण बढ़ाती हैं, वहीं गोबर की मूर्तियां पर्यावरण-हितैषी जीवनशैली को प्रोत्साहित करती हैं।

परंपरा: ग्रामीण संस्कृति में गोबर को शुद्ध और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इस शिल्प में वही संस्कृति झलकती है।

क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण?
प्रतिमा बनाते समय प्राकृतिक संसाधनों और स्वदेशी संस्कृति को सम्मान मिल रहा है।

युवा वर्ग को पर्यावरण और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की सकारात्मक पहल है।

यह नवाचार भारत की पारंपरिक कला को आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने का बेहतरीन उदाहरण है।

निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ के मूर्तिकार द्वारा गोबर से बनी मां सरस्वती की मूर्ति सिर्फ एक अनोखी कारीगरी नहीं, बल्कि स्वदेशी शिल्प, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का उत्सव है। ऐसे प्रयास बदलते भारत के लिए नजीर बन सकते हैं, जहां आस्था और प्रकृति साथ-साथ सुरक्षित रहें

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