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World’s Largest Shivling: 210 टन वजन और 33 फीट ऊंचाई! बिहार में इस जगह स्थापित होगा दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग, जानिए 5 बड़ी बातें

“हर हर महादेव!” के उद्घोष से पूरा बिहार गूंज उठा है। एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। वजह है—दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग (World’s Largest Shivling), जो हजारों किलोमीटर का सफर तय करके बिहार की धरती पर पहुंच चुका है। क्या आप जानते हैं कि यह शिवलिंग इतना विशाल है कि इसे लाने के लिए 96 पहियों वाले एक विशेष ट्रक का इस्तेमाल करना पड़ा? यह सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और आस्था का एक अद्भुत नमूना है।

यह शिवलिंग कहां स्थापित होगा? इसे क्यों लाया गया है? और इसकी खासियत क्या है? आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस महा-शिवलिंग से जुड़ी हर एक डिटेल बताएंगे जो आपको जाननी चाहिए।

World's Largest Shivling

कहां स्थापित होगा यह महा-शिवलिंग? (Location)

यह विशाल शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण (East Champaran) जिले में स्थापित किया जाएगा।

यहाँ के कैथवलिया-जानकीनगर (चकिया और केसरिया के बीच) में बन रहे विश्व प्रसिद्ध ‘विराट रामायण मंदिर’ (Viraat Ramayan Mandir) के गर्भगृह में यह विराजमान होगा।

यह मंदिर पटना से करीब 120 किलोमीटर दूर है। यह महावीर मंदिर ट्रस्ट (पटना) का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसका नेतृत्व आचार्य किशोर कुणाल कर रहे हैं।

शिवलिंग की भव्यता: आंकड़े कर देंगे हैरान (Size & Dimensions)

इस शिवलिंग को “दुनिया का सबसे बड़ा” ऐसे ही नहीं कहा जा रहा। इसके आंकड़े सुनकर आप दंग रह जाएंगे:

सामग्री (Material): यह ब्लैक ग्रेनाइट (Black Granite) पत्थर से बना है, जो सैकड़ों सालों तक खराब नहीं होता।

सहस्त्रलिंगम: इस शिवलिंग पर 1,008 छोटे शिवलिंग भी उकेरे गए हैं, जिसे ‘सहस्त्रलिंगम’ कहा जाता है।

अभी तक तमिलनाडु के तंजावुर (Thanjavur) का शिवलिंग सबसे बड़ा माना जाता था, लेकिन अब बिहार का यह शिवलिंग उस रिकॉर्ड को तोड़ देगा।

महाबलीपुरम से बिहार तक का अद्भुत सफर (The Journey)

इस शिवलिंग को बिहार लाना कोई बच्चों का खेल नहीं था।

इस दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस महा-शिवलिंग को विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए पांच पवित्र स्थलों—कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और सोनपुर—से जल लाया गया है।

विराट रामायण मंदिर: 2030 तक होगा तैयार

जिस मंदिर में यह शिवलिंग लग रहा है, वह खुद एक अजूबा होगा।

विश्व का सबसे बड़ा मंदिर: बनने के बाद यह कंबोडिया के अंकोरवाट (Angkor Wat) से भी ऊंचा और बड़ा होगा।

दक्षिण की कला और उत्तर की आस्था

यह शिवलिंग सिर्फ बिहार नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है। दक्षिण भारत की कला (महाबलीपुरम) और उत्तर भारत की आस्था (बिहार) का यह संगम अद्भुत है। 17 जनवरी को जब यह स्थापित होगा, तो इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।

अगर आप भी शिवभक्त हैं, तो एक बार पूर्वी चंपारण जाकर इस अद्भुत शिवलिंग के दर्शन जरूर करें।

ॐ नमः शिवाय!”

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