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बिहार प्रशासन में बड़ी हलचल: 25 नए IAS अधिकारी संभालेंगे कमान, जानें किन जिलों और विभागों की बदलेगी तस्वीर

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बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने के लिए नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में खाली पड़े पदों और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए 25 नए आईएएस (IAS) अधिकारियों की तैनाती की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों को 17 अप्रैल 2026 तक योगदान देने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद राज्य में कार्यरत आईएएस अधिकारियों की कुल संख्या 280 से बढ़कर 305 हो जाएगी।

प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा का संचार

बिहार में लंबे समय से अधिकारियों की कमी के कारण एक ही अधिकारी को कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा था। इस नई खेप के आने से शासन की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। इन 25 अधिकारियों में 2025 बैच के वे युवा अधिकारी भी शामिल हैं जो वर्तमान में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। इनमें से सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन अधिकारियों में 4 मूल रूप से बिहार के ही निवासी हैं, जबकि अन्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली जैसे राज्यों से आए हैं।

25 नए IAS
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इन जिलों और विभागों पर रहेगा विशेष फोकस

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इन अधिकारियों की तैनाती उन जिलों में की जाएगी जहाँ वर्तमान में जिलाधिकारी (DM) या उप-विकास आयुक्त (DDC) के पदों पर अतिरिक्त दबाव है।

ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य: राज्य की प्राथमिकताओं को देखते हुए ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग में इन नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

बाढ़ प्रबंधन: चूंकि बिहार के कई जिले बाढ़ से प्रभावित रहते हैं, इसलिए उत्तर बिहार के संवेदनशील जिलों में युवा आईएएस अधिकारियों की तैनाती की योजना है ताकि मॉनिटरिंग और राहत कार्यों को तकनीकी रूप से बेहतर बनाया जा सके।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स: पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में चल रही स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को गति देने के लिए भी विशेष सचिव स्तर पर नई नियुक्तियां संभव हैं।

आईएएस की संख्या में वृद्धि: क्या होगा असर?

बिहार में आईएएस अधिकारियों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 359 है। वर्तमान में राज्य में केवल 280 अधिकारी ही सक्रिय भूमिका में थे, क्योंकि लगभग 30 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर हैं। 25 नए अधिकारियों के जुड़ने से यह आंकड़ा 305 तक पहुँच जाएगा। इससे फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी और आम जनता की समस्याओं को जिला स्तर पर बेहतर ढंग से सुना जा सकेगा। विशेष रूप से ई-गवर्नेंस और डिजिटल बिहार के लक्ष्यों को प्राप्त करने में इन युवा अधिकारियों की तकनीकी समझ काफी मददगार साबित होगी।

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17 अप्रैल से संभालेंगे कार्यभार

बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव के स्तर से इन अधिकारियों के आवंटन की लिस्ट तैयार कर ली गई है। 17 अप्रैल तक पटना में ज्वाइन करने के बाद, इन्हें शुरुआती तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अटैच किया जाएगा ताकि वे राज्य की भौगोलिक और प्रशासनिक बारीकियों को समझ सकें। इसके तुरंत बाद इन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंपा जाएगा। इस फेरबदल को आगामी समय में राज्य में होने वाले प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बिहार के विकास की गति को और तेज करने के लिए प्रशासनिक सुधारों की यह प्रक्रिया बेहद जरूरी थी। नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण वाले ये 25 अधिकारी राज्य के सुदूर इलाकों में सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अब देखना यह है कि इस बड़े बदलाव के बाद बिहार की ब्यूरोक्रेसी में काम करने का अंदाज कितना बदलता है।

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