Bihar New CM Update: बिहार में सम्राट ‘राज’, नीतीश कुमार का इस्तीफा और एनडीए की नई रणनीति

Bihar New CM Update

बिहार की राजनीति में पिछले 24 घंटों में जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि, यह इस्तीफा अचानक नहीं था; इसके पीछे एनडीए के भीतर चल रही लंबी मंत्रणा और भविष्य की चुनावी रणनीतियां शामिल थीं।

नीतीश कुमार का इस्तीफा: एक युग का समापन

नीतीश कुमार ने आज पटना के राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंपा। इस्तीफे से पहले उन्होंने अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक की, जिसमें मंत्रियों को धन्यवाद दिया। नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार में उनके सबसे लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के एक बड़े हिस्से पर विराम लग गया है। अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि हाल ही में उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी शपथ ली थी।

सम्राट चौधरी: भाजपा का वो ‘भगवा चेहरा’ जो बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री

भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया गया है। सम्राट चौधरी, जो वर्तमान में उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे थे, अब बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में कल यानी 15 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे शपथ लेंगे।

सम्राट चौधरी का चयन भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वे कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं और बिहार में ओबीसी (OBC) राजनीति का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। भाजपा ने उन्हें आगे करके ‘लव-कुश’ समीकरण में सेंध लगाने और अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।

शपथ ग्रहण समारोह और दिग्गजों का जमावड़ा

कल पटना के लोक भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित एनडीए के कई बड़े नेता पटना पहुंच रहे हैं। सम्राट चौधरी के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। चर्चा है कि विजय सिन्हा और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे जा सकते हैं।

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बिहार की राजनीति पर क्या होगा असर?

भाजपा के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि पहली बार बिहार में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री होगा। अब तक भाजपा बिहार में ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रही है, लेकिन सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विपक्ष, विशेषकर आरजेडी (RJD) ने इस बदलाव को ‘जनादेश का अपमान’ बताया है, जबकि एनडीए इसे ‘विकसित बिहार’ की ओर बढ़ता कदम बता रहा है।

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बिहार के पशुपालकों की चमकेगी किस्मत: सभी 38 जिलों में शुरू हुई ‘हरा चारा मानचित्रण’ और वैज्ञानिक अध्ययन योजना

बिहार के पशुपालकों

बिहार की नीतीश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के सभी 38 जिलों में अब पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से हरा चारा उपलब्ध कराने और पशुपालन-संबंधी नई अध्ययन योजनाओं (Study Schemes) को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में आने वाली सबसे बड़ी समस्या—’चारे की कमी और बढ़ती लागत’—का स्थायी समाधान निकालना है। सरकार की इस नई रणनीति से न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बिहार के लाखों पशुपालकों की आय में भी रिकॉर्ड वृद्धि होने की उम्मीद है।

रिमोट सेंसिंग और इसरो (ISRO) की तकनीक से होगा चारे का सर्वे

बिहार सरकार ने इस योजना को पूरी तरह से डिजिटल और वैज्ञानिक स्वरूप दिया है। राज्य के सभी जिलों में “रिमोट सेंसिंग और GIS (भू-सूचना प्रणाली)” आधारित हरा चारा मानचित्रण (Green Fodder Mapping) अध्ययन शुरू किया गया है। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (COMPFED) और इसरो के संयुक्त सहयोग से चलाया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष से सैटेलाइट इमेज के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस जिले के किस क्षेत्र में कितनी चारा फसलें उगाई जा रही हैं और कहाँ सिंचाई या बीज की कमी के कारण चारा उत्पादन कम हो रहा है।

हरा चारा मानचित्रण'
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क्या है पशुपालन-संबंधी नई अध्ययन योजना?

बिहार सरकार केवल चारे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन को एक “लाभकारी बिजनेस” बनाने के लिए जिला स्तर पर विशेष अध्ययन योजनाएं शुरू कर रही है। इन योजनाओं के तहत पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य, बेहतर जनन (Breeding), और आधुनिक डेयरी प्रबंधन के बारे में शिक्षित किया जाएगा। पटना में हाल ही में आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला में पशु संसाधन विभाग के सचिव और कॉम्फेड के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। अब यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर पशुपालकों तक पहुँचाया जाएगा, ताकि वे पारंपरिक तरीकों को छोड़ वैज्ञानिक पद्धति अपना सकें।

चारा लागत में 70% तक की कमी लाने का लक्ष्य

एक औसत डेयरी फार्म में कुल खर्च का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा केवल पशु आहार और चारे पर खर्च होता है। बिहार में अक्सर सूखे या बाढ़ के कारण हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे पशुपालकों को महंगा सूखा भूसा या दाना खरीदना पड़ता है। इस नई मैपिंग और अध्ययन योजना के बाद, सरकार जिलों में ऐसी चारा फसलों की किस्मों को बढ़ावा देगी जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें। जब पशुपालकों को साल भर सस्ता और पौष्टिक हरा चारा मिलेगा, तो दूध उत्पादन की लागत अपने आप कम हो जाएगी और सीधे तौर पर किसान का मुनाफा बढ़ जाएगा।

युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर

बिहार सरकार की यह योजना केवल मौजूदा पशुपालकों के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक वरदान साबित हो सकती है। “समग्र गव्य विकास योजना” के साथ इस अध्ययन योजना को जोड़कर, सरकार युवाओं को डेयरी उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही है। जिलों में होने वाले इन अध्ययनों से यह डेटा तैयार होगा कि कहाँ नई डेयरी यूनिट्स लगाई जा सकती हैं। इसके साथ ही, उन्नत चारे के बीज उत्पादन और साइलेज (Silage) मेकिंग में भी युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

हरा चारा मानचित्रण'
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डेयरी हब बनने की ओर अग्रसर बिहार

बिहार में कॉम्फेड और सुधा डेयरी पहले ही एक ब्रांड के रूप में स्थापित हैं, लेकिन अब सरकार का लक्ष्य बिहार को देश का प्रमुख “डेयरी हब” बनाना है। वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे इस सर्वे से राज्य सरकार के पास सटीक डेटा होगा, जिससे आने वाले समय में खाद, बीज और सब्सिडी का वितरण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री के आत्मनिर्भर बिहार के विजन को सफल बनाने में पशुपालन विभाग की यह नई पहल एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

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मनेर गोलीबारी: कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी के घर पर खूनी हमला, 15 राउंड फायरिंग से दहला इलाका

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव

बिहार की राजधानी पटना के मनेर थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा घटनाक्रम में, बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी राजेंद्र प्रसाद के घर पर हथियारबंद अपराधियों ने भीषण हमला कर दिया। शुक्रवार की देर रात ब्यापुर गांव में हुई इस वारदात में हमलावरों ने न केवल अंधाधुंध गोलीबारी की, बल्कि तलवारों और लाठी-डंडों से भी हमला किया। इस खूनी संघर्ष में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अंधाधुंध फायरिंग और तलवारों से हमला

मिली जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक दर्जन से अधिक हथियारबंद हमलावरों ने राजेंद्र प्रसाद (मंत्री के समधी) के घर को घेर लिया और करीब 15 राउंड से अधिक गोलियां चलाईं। गोलीबारी की आवाज से पूरे ब्यापुर गांव में अफरा-तफरी मच गई। फायरिंग के बाद अपराधी घर में घुस गए और वहां मौजूद लोगों पर तलवार, ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
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हमले में घायल और अस्पताल की स्थिति

इस हिंसक हमले में तीन लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं। घायलों की पहचान इस प्रकार है:

• पप्पू सिंह (राजेश कुमार): राजेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद दानापुर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।

• मनीष उर्फ गुड्डू: स्वर्गीय भूपेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें पटना एम्स में भर्ती कराया गया है।

• नीतीश उर्फ बबलू: इनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और इनका भी इलाज पटना एम्स में चल रहा है।

नामजद आरोपियों पर पुलिस की कार्रवाई

मनेर थाना पुलिस घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और घटनास्थल से कई खाली खोखे बरामद किए। परिजनों ने इस मामले में मुकेश, दीपक (पिता स्व. सत्येंद्र) और प्रिंस समेत अन्य के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला पुराने आपसी विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। मनेर थानाध्यक्ष रजनीश सिंह ने बताया कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
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बिहार की कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल

हाई-प्रोफाइल परिवार से जुड़ी इस घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सत्ताधारी दल के मंत्री के करीबी रिश्तेदार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? सोशल मीडिया पर घटना का एक कथित वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें फायरिंग की आवाज सुनी जा सकती है। फिलहाल, पुलिस वीडियो की सत्यता और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।

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बिहार के गन्ना किसानों की चमकेगी किस्मत: 50-60% सब्सिडी पर मिलेंगी मशीनें, 324 किसानों को परमिट जारी

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बिहार में कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के गन्ना उद्योग विभाग ने ‘मुख्यमंत्री गन्ना यंत्रीकरण योजना‘ के तहत तीसरे और चौथे रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस चरण में कुल 324 प्रगतिशील किसानों का चयन किया गया है, जिन्हें आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद के लिए आधिकारिक परमिट जारी कर दिए गए हैं।

इस योजना के माध्यम से अब गन्ने की खेती केवल पसीने का काम नहीं, बल्कि मशीनों के दम पर मुनाफे का सौदा साबित होगी। सरकार का लक्ष्य खेती की लागत को कम करना और गन्ना उत्पादन में बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है।

मशीनीकरण से खेती होगी आसान: जानें सब्सिडी का गणित

बिहार सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी वित्तीय सहायता दी जा रही है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, सामान्य श्रेणी के किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान मिलेगा। वहीं, सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए अति पिछड़ा वर्ग (EBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों के लिए इस सब्सिडी की सीमा 60 प्रतिशत तय की गई है।

सबसे खास बात यह है कि यह सब्सिडी डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो जाएगी।

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इन 11 आधुनिक यंत्रों पर मिलेगी छूट

गन्ने की बुवाई से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए विभाग ने यंत्रों की एक विस्तृत सूची तैयार की है। चयनित 324 किसान अपनी जरूरत के अनुसार निम्नलिखित मशीनों की खरीद कर सकते हैं:

मिनी ट्रैक्टर: छोटे और मध्यम खेतों के लिए उपयुक्त।

लेजर लैंड लेवलर: खेत को समतल कर पानी की खपत कम करने के लिए।

ट्रेंचर: गन्ने की गहरी बुवाई के लिए उपयोगी।

रोटावेटर और कटर: फसल के अवशेषों के प्रबंधन और मिट्टी की तैयारी के लिए।

पावर टिलर और रिजर: गन्ने की पंक्तियों के बीच मिट्टी चढ़ाने के काम को आसान बनाने हेतु।

समय सीमा और चयन प्रक्रिया: क्या है ताजा अपडेट?

गन्ना उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि चयनित किसानों को तय समय सीमा के भीतर यंत्रों की खरीद सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि, पूर्व में खरीद की समयसीमा 3 मार्च थी, जिसे किसानों की सुविधा के लिए बढ़ाकर 19 मार्च तक किया गया था, ताकि किसी भी तकनीकी या वित्तीय कारण से किसान इस लाभ से वंचित न रह जाएं।

चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों में से कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन के जरिए लाभार्थियों को चुना गया है। वर्तमान में पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

बिहार के चीनी उद्योग को मिलेगी नई मजबूती

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने की खेती में सबसे बड़ी चुनौती ‘मजदूरों की कमी’ और ‘उच्च लागत’ है। मशीनीकरण होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रति एकड़ पैदावार में भी 20-30 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। जब किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें मिलेंगी, तो वे गन्ने की खेती के प्रति अधिक प्रोत्साहित होंगे, जिससे राज्य की चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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कैसे चेक करें अपना स्टेटस?

यदि आपने भी इस योजना के लिए आवेदन किया है, तो आप बिहार गन्ना उद्योग विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन स्टेटस और परमिट की स्थिति देख सकते हैं। जिन किसानों का चयन इस बार नहीं हुआ है, उन्हें अगले चरण के रैंडमाइजेशन का इंतजार करने की सलाह दी गई है।

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बिहार प्रशासन में बड़ी हलचल: 25 नए IAS अधिकारी संभालेंगे कमान, जानें किन जिलों और विभागों की बदलेगी तस्वीर

25 नए IAS

बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने के लिए नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में खाली पड़े पदों और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए 25 नए आईएएस (IAS) अधिकारियों की तैनाती की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों को 17 अप्रैल 2026 तक योगदान देने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद राज्य में कार्यरत आईएएस अधिकारियों की कुल संख्या 280 से बढ़कर 305 हो जाएगी।

प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा का संचार

बिहार में लंबे समय से अधिकारियों की कमी के कारण एक ही अधिकारी को कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा था। इस नई खेप के आने से शासन की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। इन 25 अधिकारियों में 2025 बैच के वे युवा अधिकारी भी शामिल हैं जो वर्तमान में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। इनमें से सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन अधिकारियों में 4 मूल रूप से बिहार के ही निवासी हैं, जबकि अन्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली जैसे राज्यों से आए हैं।

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इन जिलों और विभागों पर रहेगा विशेष फोकस

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इन अधिकारियों की तैनाती उन जिलों में की जाएगी जहाँ वर्तमान में जिलाधिकारी (DM) या उप-विकास आयुक्त (DDC) के पदों पर अतिरिक्त दबाव है।

ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य: राज्य की प्राथमिकताओं को देखते हुए ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग में इन नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

बाढ़ प्रबंधन: चूंकि बिहार के कई जिले बाढ़ से प्रभावित रहते हैं, इसलिए उत्तर बिहार के संवेदनशील जिलों में युवा आईएएस अधिकारियों की तैनाती की योजना है ताकि मॉनिटरिंग और राहत कार्यों को तकनीकी रूप से बेहतर बनाया जा सके।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स: पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में चल रही स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को गति देने के लिए भी विशेष सचिव स्तर पर नई नियुक्तियां संभव हैं।

आईएएस की संख्या में वृद्धि: क्या होगा असर?

बिहार में आईएएस अधिकारियों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 359 है। वर्तमान में राज्य में केवल 280 अधिकारी ही सक्रिय भूमिका में थे, क्योंकि लगभग 30 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर हैं। 25 नए अधिकारियों के जुड़ने से यह आंकड़ा 305 तक पहुँच जाएगा। इससे फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी और आम जनता की समस्याओं को जिला स्तर पर बेहतर ढंग से सुना जा सकेगा। विशेष रूप से ई-गवर्नेंस और डिजिटल बिहार के लक्ष्यों को प्राप्त करने में इन युवा अधिकारियों की तकनीकी समझ काफी मददगार साबित होगी।

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17 अप्रैल से संभालेंगे कार्यभार

बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव के स्तर से इन अधिकारियों के आवंटन की लिस्ट तैयार कर ली गई है। 17 अप्रैल तक पटना में ज्वाइन करने के बाद, इन्हें शुरुआती तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अटैच किया जाएगा ताकि वे राज्य की भौगोलिक और प्रशासनिक बारीकियों को समझ सकें। इसके तुरंत बाद इन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंपा जाएगा। इस फेरबदल को आगामी समय में राज्य में होने वाले प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बिहार के विकास की गति को और तेज करने के लिए प्रशासनिक सुधारों की यह प्रक्रिया बेहद जरूरी थी। नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण वाले ये 25 अधिकारी राज्य के सुदूर इलाकों में सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अब देखना यह है कि इस बड़े बदलाव के बाद बिहार की ब्यूरोक्रेसी में काम करने का अंदाज कितना बदलता है।

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रामनवमी पर छावनी में बदला बिहार: 45 कंपनियां तैनात और पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द, जानें सुरक्षा का पूरा प्लान

रामनवमी

बिहार में रामनवमी के पावन पर्व को लेकर हर्षोल्लास के साथ-साथ प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में है। राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस संपन्न कराने के लिए नीतीश सरकार ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को ‘टाइट’ कर दिया गया है।

पुलिस मुख्यालय का बड़ा फैसला: रद्द हुईं छुट्टियां

त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही अवकाश की अनुमति दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर पुलिस की दृश्यता (Visibility) बढ़ाना और किसी भी अप्रिय घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया देना है। फील्ड में तैनात जवानों से लेकर आला अधिकारियों तक को अगले 48 घंटों के लिए ‘ऑन ड्यूटी’ रहने का आदेश दिया गया है।

रामनवमी
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सुरक्षा का अभेद्य किला: BISAP और रिजर्व बल की 45 कंपनियां तैनात

बिहार की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार ने भारी संख्या में अतिरिक्त बलों की मांग और तैनाती की है। आंकड़ों के अनुसार, BISAP (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) और अन्य रिजर्व बलों की लगभग 45 कंपनियां विभिन्न जिलों में भेजी गई हैं।

• BISAP की 30 कंपनियां: इन्हें विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च के लिए लगाया गया है।

• रिजर्व फोर्स की 12 कंपनियां: किसी भी आपात स्थिति के लिए इन्हें स्टैंडबाय पर रखा गया है।

• केंद्रीय बल: शांति बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 3 कंपनियों को भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।

इसके अलावा, हाल ही में पास आउट हुए 21 हजार से ज्यादा प्रशिक्षु सिपाहियों को भी सुरक्षा घेरे को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ड्रोन और CCTV से ‘तीसरी आंख’ की निगरानी

राजधानी पटना के महावीर मंदिर सहित राज्य के सभी बड़े मंदिरों और शोभायात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है। पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सायबर सेल सक्रिय है और उनके विरुद्ध आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

DJ पर पूर्ण प्रतिबंध और शोभायात्रा के नियम

इस बार रामनवमी पर प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण और तनाव की स्थिति को रोकने के लिए डीजे (DJ) बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। शोभायात्रा निकालने के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है और केवल उन्हीं रूटों पर जुलूस की अनुमति दी गई है जो पहले से निर्धारित हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी समिति नियमों का उल्लंघन करती है या निर्धारित रूट से भटकती है, तो आयोजकों पर सीधी कार्रवाई होगी।

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संवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस

मुजफ्फरपुर, नालंदा, सासाराम, भागलपुर और गया जैसे संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। इन इलाकों में सादी वर्दी में भी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि उपद्रवियों की पहचान गुप्त रूप से की जा सके। प्रशासन ने स्थानीय ‘शांति समितियों’ के साथ बैठक कर आम जनता से भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।

बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन का यह सख्त रुख स्पष्ट करता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारी बल की तैनाती और तकनीक के इस्तेमाल से रामनवमी के पर्व को सुरक्षित और गरिमामय बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।

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बिहार में अब 21 दिन का इंतज़ार खत्म: सिर्फ 24 घंटे में मिलेगा डेथ सर्टिफिकेट, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

डेथ सर्टिफिकेट

बिहार में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में नीतीश सरकार ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को अपने परिजनों की मृत्यु के बाद ‘डेथ सर्टिफिकेट’ (Death Certificate) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही 21 दिनों का लंबा इंतज़ार करना होगा। पंचायती राज विभाग ने एक नया ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत अब आवेदन के मात्र 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

पुराने नियमों में बदलाव: 21 दिन की बाध्यता समाप्त

अब तक की व्यवस्था के अनुसार, मृत्यु की सूचना देने और प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी जटिल थी। नियमानुसार 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य था, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और सुस्त सरकारी मशीनरी के कारण लोगों को हफ्तों तक इंतज़ार करना पड़ता था। इस देरी की वजह से मृतक के आश्रितों को बैंक क्लेम, जमीन का नामांतरण (Mutation), और बीमा राशि प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बिहार सरकार की नई नियमावली “बिहार जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2025” ने अब इन सभी बाधाओं को दूर कर दिया है।

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पंचायत स्तर पर ही होगा समाधान: वार्ड सदस्य और सचिव की भूमिका

नई व्यवस्था के तहत, सरकार ने पंचायतों को सीधे तौर पर सशक्त बनाया है। अब मृत्यु की सूचना मिलते ही संबंधित पंचायत सचिव और वार्ड सदस्य की सक्रियता से डेटा को तुरंत डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। सरकार एक विशेष मोबाइल ऐप भी लॉन्च करने जा रही है, जिससे मौके पर ही सत्यापन (Verification) कर डिजिटल सर्टिफिकेट जेनरेट किया जा सकेगा। यह सर्टिफिकेट सीधे आवेदक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाएगा, जिसे कहीं भी कानूनी दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

जमीन विवाद और भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

बिहार में भूमि विवादों का एक मुख्य कारण मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली देरी भी रहा है। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने से वंशावली और जमीन के बंटवारे जैसे मामले सालों तक लटके रहते थे। अब 24 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र मिलने से ‘दाखिल-खारिज’ की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने से बिचौलियों और भ्रष्टाचार का खात्मा होगा। पंचायती राज मंत्री के अनुसार, यह व्यवस्था पारदर्शिता लाने और आम आदमी के समय की बचत करने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

डेथ सर्टिफिकेट
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डिजिटल डेटाबेस और भविष्य की योजनाएं

यह नई व्यवस्था न केवल तात्कालिक राहत देगी, बल्कि बिहार के सेंट्रल डेटाबेस को भी मज़बूत करेगी। हर मृत्यु का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में पुराने रिकॉर्ड खोजने में आसानी होगी। श्मशान घाट और कब्रिस्तानों के पास स्थित वार्ड सदस्यों को इस प्रक्रिया की पहली कड़ी बनाया गया है, ताकि सूचना तंत्र में कोई कमी न रहे।

बिहार सरकार का यह फैसला ‘ई-गवर्नेंस’ की दिशा में एक बड़ी जीत है। इससे न केवल आम जनता की परेशानी कम होगी, बल्कि सरकारी सेवाओं में तत्परता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। अगर आप भी बिहार के निवासी हैं, तो अब आपको ब्लॉक या नगर निगम की दौड़ लगाने की ज़रूरत नहीं है—आपकी पंचायत अब आपकी सेवा के लिए 24 घंटे तैयार है।

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Nitish Kumar’s security lapse: बेगूसराय में हेलीपैड पर बैल का ‘तांडव’, जान बचाने के लिए फायर ब्रिगेड पर चढ़े पुलिसकर्मी

Nitish Kumar's security lapse

बेगूसराय, बिहार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शनिवार, 14 मार्च 2026 को बेगूसराय में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी, बल्कि सुरक्षाकर्मियों के पसीने छुड़ा दिए। सीएम के आगमन के लिए तैयार किए गए अति-संवेदनशील हेलीपैड क्षेत्र में एक बेकाबू बैल घुस गया, जिससे वहां तैनात पुलिस महकमे में भगदड़ मच गई।

हेलीपैड बना ‘अखाड़ा’, पुलिसकर्मियों को जान के लाले पड़े

घटना बेगूसराय के बीआईएडीए (BIADA) कैंपस की है, जहाँ मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लैंड करने वाला था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों का दावा किया जा रहा था, लेकिन लैंडिंग से कुछ समय पहले ही एक विशाल बैल सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे हेलीपैड के बीचों-बीच पहुँच गया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब उसे भगाने की कोशिश की, तो बैल हिंसक हो गया और उसने जवानों को ही दौड़ाना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह रही कि बैल के डर से जवान अपनी ड्यूटी छोड़ इधर-उधर भागते नजर आए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान बचाने के लिए वहां खड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ी की छत पर शरण ली। करीब 15-20 मिनट तक हेलीपैड पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

Nitish Kumar's security lapse

सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ीं

मुख्यमंत्री जैसे वीवीआईपी (VVIP) की सुरक्षा के लिए ‘नो फ्लाई ज़ोन’ और ‘क्लीन पेरिमीटर’ जैसे कड़े प्रोटोकॉल होते हैं। हेलीपैड के चारों ओर बैरिकेडिंग के बावजूद एक आवारा पशु का अंदर घुस जाना जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर यह घटना सीएम के हेलीकॉप्टर लैंड करने के दौरान होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अंततः, लाठियों और शोर-शराबे की मदद से बैल को परिसर से बाहर खदेड़ा गया, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

समृद्धि यात्रा का समापन और राजनीतिक गलियारों में हलचल

नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण के तहत बेगूसराय और शेखपुरा के दौरे पर थे। इस यात्रा का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना है, लेकिन इस सुरक्षा चूक ने पूरी चर्चा का रुख मोड़ दिया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का कहना है कि जो सरकार अपने मुख्यमंत्री को सुरक्षित हेलीपैड मुहैया नहीं करा सकती, वह आम जनता की सुरक्षा क्या करेगी?

Nitish Kumar's security lapse

नीतीश कुमार की सुरक्षा में बार-बार होती चूक

यह पहली बार नहीं है जब बिहार के मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस तरह की ढिलाई देखी गई हो।

पिछले कुछ वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो:

  • पटना (2025): एक युवक जेड प्लस सुरक्षा घेरा तोड़कर बंद लिफाफा देने सीएम के करीब पहुंच गया था।
  • बाढ़ (2024): सीएम के कार्यक्रम के ठीक बाद स्वागत गेट गिर गया था।
  • नालंदा (2022): जनसभा के दौरान सीएम के पास धमाका हुआ था और बख्तियारपुर में उन पर हमला भी किया गया था।

क्या सबक लेगा प्रशासन?

बेगूसराय की यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वीवीआईपी सुरक्षा में पशु नियंत्रण (Animal Control) एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब देखना यह है कि इस गंभीर चूक के लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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बिहार Next CM: चिराग पासवान बन सकते है बिहार के मुख्यमंत्री, जानिए दिग्गज नेता की इच्छा ?

चिराग पासवान

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई लहर देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और राज्य के नेतृत्व में संभावित बदलाव ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कद्दावर नेता और सांसद अरुण भारती के एक हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इच्छा जाहिर की है कि चिराग पासवान को बिहार का Next CM बनना चाहिए। यह बयान न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर रहा है, बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी नए समीकरणों को जन्म दे रहा है।

बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की आहट क्यों?

बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस तब गहराया जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरें पुख्ता होने लगीं। एनडीए गठबंधन में भाजपा, जदयू और एलजेएपी (आरवी) के बीच अब इस बात को लेकर मंथन जारी है कि यदि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में जाते हैं, तो बिहार की कमान किसके हाथ में होगी। 2025 के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद चिराग पासवान की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे उनके समर्थकों का मानना है कि अब ‘युवा नेतृत्व’ का समय आ गया है।

Nitish Kumar and chirag Paswan
Nitish Kumar and chirag Paswan

सांसद अरुण भारती का बयान और इसके मायने

एलजेएपी (आरवी) के सांसद अरुण भारती ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपनी दिल की बात रखते हुए कहा कि वह चिराग पासवान को बिहार के मुखिया के रूप में देखना चाहते हैं। भारती का कहना है कि चिराग के पास बिहार को विकसित राज्य बनाने का विजन है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय एनडीए के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारती का यह बयान महज एक ‘निजी राय’ नहीं है, बल्कि यह पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वे चिराग को राज्य के सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ और चिराग की बढ़ती लोकप्रियता

चिराग पासवान का ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ विजन युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। हाल ही में पटना और शेखपुरा की सड़कों पर लगे पोस्टरों में नारे लिखे गए थे- “न दंगा हो न फसाद हो, बिहार का सीएम सिर्फ चिराग हो।” कार्यकर्ताओं का यह उत्साह यह दर्शाता है कि जमीन पर चिराग पासवान के प्रति एक सकारात्मक लहर है। पासवान वोट बैंक के साथ-साथ सवर्णों और युवाओं के बीच उनकी स्वीकार्यता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।

क्या भाजपा और जदयू चिराग के नाम पर सहमत होंगे?

भले ही मांग तेज हो, लेकिन एनडीए के भीतर समीकरण थोड़े जटिल हैं। भाजपा वर्तमान में बिहार में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है और वह भी अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक है। वहीं, जदयू का अपना आधार है। चिराग पासवान ने हमेशा खुद को प्रधानमंत्री मोदी का ‘हनुमान’ कहा है, लेकिन क्या हनुमान को राम (भाजपा) मुख्यमंत्री की गद्दी सौंपेंगे? यह एक बड़ा सवाल है। हालांकि, बिहार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यदि भाजपा को एक सर्वमान्य और युवा चेहरे की तलाश होगी, तो चिराग पासवान की दावेदारी को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।

चिराग पासवान
चिराग पासवान

राजनीतिक विशेषज्ञों का विश्लेषण: 2026 का रोडमैप

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान 2026 तक बिहार की राजनीति के केंद्र बिंदु बने रहेंगे। यदि गठबंधन की मजबूरियां आड़े नहीं आईं, तो चिराग पासवान बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में एक मजबूत विकल्प हैं। उनकी मां रीना पासवान पहले ही 2030 तक उनके सीएम बनने की भविष्यवाणी कर चुकी हैं, लेकिन बदलती परिस्थितियों ने इस समयसीमा को काफी करीब ला दिया है।

बिहार की जनता अब विकास और स्थिरता चाहती है। चिराग पासवान का आधुनिक दृष्टिकोण और जुझारू व्यक्तित्व उन्हें एक योग्य उम्मीदवार बनाता है। दिग्गज नेता अरुण भारती की इच्छा ने एक बहस तो छेड़ दी है, लेकिन क्या चिराग सच में बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे, यह भविष्य के गर्भ में है।

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नीतीश कुमार बिहार में खत्म करेंगे शराबबंदी? कानून के खात्मे के लिए गढ़े जा रहे हैं नए तर्क, क्या बदल जाएगी बिहार की तस्वीर?

नीतीश कुमार

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल सबसे ऊपर तैर रहा है— क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सबसे ‘पसंदीदा’ लेकिन विवादित शराबबंदी कानून को वापस लेने वाले हैं? करीब एक दशक से बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी अब एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां उनके अपने ही साथी और विपक्ष दोनों मिलकर इस कानून की चूलें हिलाने में लगे हैं। हालांकि, इन सबके बीच सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी और उनकी ‘बेपरवाही’ कई बड़े राजनीतिक संकेत दे रही है।

एनडीए के अंदर से उठती बगावती आवाजें

नीतीश कुमार
Sharab band by Nitish Kumar

कभी जिस कानून का समर्थन बिहार की सभी पार्टियों ने एक सुर में किया था, आज उसी कानून पर एनडीए (NDA) के भीतर दरारें दिखने लगी हैं। बीजेपी के कई कद्दावर नेता और विधायक अब दबी जुबान में नहीं, बल्कि खुलेआम यह कहने लगे हैं कि शराबबंदी कानून बिहार में बुरी तरह विफल रहा है। तर्क यह दिया जा रहा है कि कानून कागजों पर तो सख्त है, लेकिन जमीन पर ‘होम डिलीवरी’ का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बीजेपी विधायकों का कहना है कि इस कानून ने पुलिस को भ्रष्टाचार का नया अड्डा दे दिया है और राज्य को हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

राजस्व का घाटा और समानांतर अर्थव्यवस्था

आंकड़ों की बात करें तो बिहार को हर साल करीब 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है। जानकारों का मानना है कि पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा 40,000 करोड़ को पार कर चुका है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार में शराब मिलनी बंद नहीं हुई है। एक ‘समानांतर अर्थव्यवस्था’ (Parallel Economy) खड़ी हो गई है, जहां माफिया और सिंडिकेट सक्रिय हैं। तर्क यह गढ़ा जा रहा है कि जो पैसा बिहार के विकास में लगना चाहिए था, वह अब शराब माफियाओं की जेब में जा रहा है। यही वजह है कि अब मांग उठ रही है कि गुजरात मॉडल की तर्ज पर बिहार में भी कुछ रियायतें दी जाएं।

क्या नीतीश कुमार वाकई बेपरवाह हैं?

इतने दबाव के बावजूद नीतीश कुमार का रुख अब भी अटल नजर आता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश इस कानून को अपने ‘विरासत’ (Legacy) के तौर पर देखते हैं। उनके करीबियों का कहना है कि सीएम को लगता है कि शराबबंदी ने ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का वोट बैंक उनके पक्ष में मजबूती से खड़ा किया है। जेडीयू का स्पष्ट स्टैंड है कि सामाजिक सुधार राजस्व से कहीं ज्यादा कीमती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश अपनी इस ‘हठ’ को बरकरार रख पाएंगे? या फिर गठबंधन को बचाने के लिए उन्हें बीच का रास्ता निकालना होगा?

कानून की समीक्षा या सिर्फ सियासी दांव?

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार

हाल के दिनों में ‘समीक्षा’ शब्द बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि शराबबंदी के नाम पर गरीबों को जेल में ठूंसा जा रहा है, जबकि बड़े तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं। अदालतों पर बढ़ते बोझ और जहरीली शराब से होती मौतों ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। अब तर्क दिया जा रहा है कि कानून को पूरी तरह खत्म करने के बजाय, इसकी व्यावहारिक समीक्षा की जाए ताकि पर्यटन और उद्योग जगत को राहत मिल सके।

क्या होगा अगला कदम?

बिहार में शराबबंदी सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है। नीतीश कुमार जानते हैं कि अगर वे इसे वापस लेते हैं, तो विपक्ष उन्हें ‘यू-टर्न’ का उलाहना देगा, और अगर जारी रखते हैं, तो सहयोगियों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। फिलहाल, सीएम नीतीश की बेपरवाही यह दर्शाती है कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं, लेकिन राजनीति में ‘कभी नहीं’ जैसा कुछ नहीं होता। आने वाले समय में विधानसभा के भीतर और बाहर होने वाली बहसें तय करेंगी कि बिहार का यह ड्राई स्टेट अपनी पहचान बरकरार रखेगा या फिर सुरा की वापसी होगी।

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