History of Yoga and International Yoga Day: क्या योग सिर्फ एक कसरत है? जानिए इसका 5000 साल पुराना इतिहास और ‘योग दिवस’ शुरू होने के सबसे बड़े रहस्य

History of Yoga and International Yoga Day

आज 21 जून है और दुनिया भर के करोड़ों लोग अपनी चटाई बिछाकर एक साथ गहरी सांसें ले रहे हैं। आज का दिन भारत के लिए बेहद गर्व का दिन होता है क्योंकि ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ हमारी ही संस्कृति की देन है। लेकिन आज की इस आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोगों को लगता है कि योग सिर्फ शरीर को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ने या वजन कम करने की एक साधारण सी कसरत है।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आज आपको अपनी यह सोच बदलनी पड़ेगी। ‘Apni Vani’ की इस विस्तृत और खास रिपोर्ट में आइए उस सफर पर चलते हैं जहां से योग की शुरुआत हुई और जानते हैं कि आखिर संयुक्त राष्ट्र को इसके लिए एक खास दिन क्यों मुकर्रर करना पड़ा।

आखिर योग क्या है और क्या यह सिर्फ एक कसरत है?

सबसे पहले इस सबसे बड़े भ्रम को तोड़ना जरूरी है कि योग जिम में की जाने वाली कोई आम एक्सरसाइज है। ‘योग’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के ‘युज’ धातु से हुई है। इसका सीधा और शाब्दिक अर्थ होता है ‘जुड़ना’ या ‘मिलन’। यह केवल शरीर की मांसपेशियों को खींचने की कला नहीं है, बल्कि यह आपकी व्यक्तिगत चेतना (आत्मा) का सार्वभौमिक चेतना (परमात्मा) के साथ मिलन है। जब आप जिम जाते हैं, तो आप केवल अपने भौतिक शरीर पर काम करते हैं।

लेकिन जब आप योग करते हैं, तो आप अपने शरीर, मन, भावनाओं और अपनी सांसों को एक साथ एक ही लय में लाते हैं। महर्षि पतंजलि ने अपने ‘योग सूत्र’ में इसे बहुत स्पष्ट रूप से बताया है कि योग मन की वृत्तियों (विचारों के शोर) को शांत करने का एक अत्यंत सूक्ष्म विज्ञान है।

हजारों साल पुराना है इसका स्वर्णिम इतिहास

योग का इतिहास किसी एक या दो सदी का नहीं, बल्कि लगभग पांच हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। भारतीय पौराणिक कथाओं और ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव को सबसे पहला योगी यानी ‘आदियोगी’ माना जाता है। कहते हैं कि शिव ने ही हिमालय की कांति सरोवर झील के किनारे अपने सात शिष्यों (सप्तर्षियों) को योग का यह दिव्य ज्ञान दिया था।

इसके बाद अगर हम ऐतिहासिक और पुरातात्विक सबूतों की बात करें, तो सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में ऐसी कई मुहरें और मूर्तियां मिली हैं, जिनमें इंसान को योग और ध्यान की मुद्राओं में बैठे हुए दिखाया गया है। समय के साथ यह ज्ञान गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए आगे बढ़ा और बाद में महर्षि पतंजलि ने इसे लिखित रूप देकर पूरी दुनिया के लिए सुलभ बना दिया।

कैसे शुरू हुआ ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने का सफर?

अब सवाल यह उठता है कि हजारों साल पुरानी इस विधा के लिए अचानक एक ‘विश्व दिवस’ मनाने की जरूरत क्यों और कैसे महसूस हुई। इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव सितंबर 2014 में रखी गई थी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने ऐतिहासिक भाषण के दौरान दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था।

उन्होंने दुनिया को समझाया था कि योग जलवायु परिवर्तन से लड़ने और इंसानी भलाई का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है। भारत के इस प्रस्ताव का असर इतना जादुई था कि संयुक्त राष्ट्र के 175 सदस्य देशों ने बिना किसी मतदान के इस प्रस्ताव को भारी समर्थन के साथ स्वीकार कर लिया। यह अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड था। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर इसे वैश्विक मंजूरी दे दी।

21 जून की तारीख ही क्यों चुनी गई?

इस दिन को चुनने के पीछे भी एक बहुत बड़ा खगोलीय और आध्यात्मिक विज्ञान छिपा हुआ है। उत्तरी गोलार्ध में 21 जून साल का सबसे लंबा दिन होता है। इसे ग्रीष्म संक्रांति भी कहा जाता है। भारतीय परंपरा में संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है, और यह समय आध्यात्मिक सिद्धियों को प्राप्त करने और योग विद्या की शुरुआत करने के लिए सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इसी प्राकृतिक और आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए 21 जून को योग दिवस के लिए मुकर्रर किया गया था। साल 2015 में दुनिया ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया था।

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क्या इसे पूरी दुनिया मानती है या कुछ देश विरोध करते हैं?

यह एक बहुत ही दिलचस्प सवाल है। जब इसे वैश्विक स्तर पर लागू किया गया था, तब शुरुआत में कुछ धार्मिक कट्टरपंथियों और रूढ़िवादी समूहों ने इसका यह कहकर विरोध किया था कि यह हिंदू धर्म का हिस्सा है। कई लोगों ने ‘सूर्य नमस्कार’ जैसी क्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। लेकिन सच्चाई यह है कि योग किसी भी धर्म से नहीं जुड़ा है; यह गुरुत्वाकर्षण के नियम की तरह ही एक विशुद्ध विज्ञान है। आज की तारीख में शायद ही कोई ऐसा देश हो जहां योग न किया जाता हो।

संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से लगभग सभी इसे किसी न किसी रूप में मनाते हैं। यहां तक कि सऊदी अरब जैसे कट्टर इस्लामिक देश ने भी हाल ही के वर्षों में योग को आधिकारिक रूप से एक ‘खेल गतिविधि’ के रूप में मान्यता दे दी है और वहां भी महिलाएं खुलेआम योग का अभ्यास कर रही हैं।

Apnivani की बात

योग भारत का वह अमूल्य उपहार है जिसने बिना किसी हथियार या युद्ध के पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना लिया है। यह हमें सिखाता है कि शांति और स्वास्थ्य किसी बाजार में नहीं बिकते, बल्कि वे हमारे भीतर ही मौजूद हैं। आज के इस तनाव भरे और डिजिटल युग में, योग खुद से दोबारा जुड़ने का सबसे खूबसूरत रास्ता है।

अगर आपने अभी तक अपने जीवन में इसे शामिल नहीं किया है, तो आज 21 जून के इस खास दिन से बेहतर और कौन सा मौका हो सकता है? इस गहरी और ज्ञानवर्धक जानकारी को अपने सभी परिवार वालों और दोस्तों के साथ व्हाट्सएप पर जरूर शेयर करें, ताकि वे भी भारत की इस महान विरासत का असली मतलब समझ सकें।

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IPL 2027 Mega Trade: लखनऊ और दिल्ली के बीच होगी सबसे बड़ी अदला-बदली! जानिए पंत और कुलदीप से जुड़े 5 हैरान करने वाले अपडेट

IPL 2027 Mega Trade

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 2027 सीजन का रोमांच शुरू होने में अभी महीनों का वक्त बाकी है। लेकिन क्रिकेट के इस सबसे बड़े महाकुंभ के लिए फ्रेंचाइजियों ने अभी से अपनी शतरंज की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पर्दे के पीछे एक ऐसा बड़ा ‘महा-उलटफेर’ आकार ले रहा है जो रातों-रात पूरे टूर्नामेंट का गणित बदलकर रख सकता है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक ताजा और बेहद पुख्ता रिपोर्ट के मुताबिक, संजीव गोयनका की टीम लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच आईपीएल इतिहास की एक सबसे बड़ी ‘ट्रेड डील‘ होने जा रही है।

बातचीत लगभग अपने अंतिम और निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। ‘Apni Vani’ की इस एक्सक्लूसिव स्पोर्ट्स रिपोर्ट में आइए एक कहानी की तरह समझते हैं कि कैसे ऋषभ पंत की दिल्ली में ‘घर वापसी’ हो रही है और कुलदीप यादव क्यों नवाबों के शहर लखनऊ का रुख करने वाले हैं।

ऋषभ पंत का लखनऊ में निराशाजनक सफर और घर वापसी

यह ट्रेड डील असल में ऋषभ पंत के लखनऊ में हुए खराब प्रदर्शन का ही नतीजा मानी जा रही है। आपको याद होगा कि आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स ने पंत को 27 करोड़ रुपये की भारी-भरकम और रिकॉर्ड कीमत देकर अपनी टीम में शामिल किया था। इस कीमत के साथ पंत लीग इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए थे। लेकिन बल्ले और कप्तानी, दोनों ही मोर्चों पर पंत पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुए।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पंत ने 2025 के सीजन में केवल 269 रन बनाए थे, जबकि 2026 में वे सिर्फ 312 रन ही जोड़ सके। उनकी कप्तानी में लखनऊ की टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। टीम 2025 में सातवें पायदान पर रही और 2026 के सीजन में तो अंक तालिका में सबसे आखिरी स्थान पर खिसक गई। इसी भारी दबाव और नाकामी के चलते पंत ने 2026 सीजन के बाद खुद ही कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था।

लखनऊ के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट टॉम मूडी ने भी पुष्टि की है कि पंत ने खुद फ्रेंचाइजी से पद छोड़ने का अनुरोध किया था, जिसे सम्मानपूर्वक स्वीकार कर लिया गया। अब पंत अपनी पुरानी टीम दिल्ली कैपिटल्स में लौटने के लिए बेकरार हैं, जहां से उन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत की थी।

कुलदीप यादव का लखनऊ जाना लगभग तय

इस बड़ी अदला-बदली के दूसरे सबसे बड़े मोहरे भारत के स्टार चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव हैं। कुलदीप साल 2022 से ही दिल्ली कैपिटल्स के गेंदबाजी आक्रमण की रीढ़ रहे हैं। 2025 के आईपीएल से पहले दिल्ली ने उन्हें 13.25 करोड़ रुपये की बड़ी रकम देकर रिटेन किया था। अपने पहले ही सीजन (2022) में कुलदीप ने दिल्ली के लिए 14 मैचों में शानदार 21 विकेट चटकाए थे। लेकिन आईपीएल 2026 में उनका जादू थोड़ा फीका रहा और वे 12 मैचों में 10.29 की महंगी इकॉनमी रेट से केवल 10 विकेट ही निकाल पाए।

दूसरी ओर, लखनऊ की टीम पिछले कुछ समय से इकाना स्टेडियम की धीमी और स्पिन की मददगार पिच के लिए एक बेहतरीन फ्रंटलाइन भारतीय स्पिनर की तलाश में है। कुलदीप यादव लखनऊ की इस जरूरत को एकदम सटीक तरीके से पूरा करते हैं। इसी रणनीति के तहत लखनऊ का मैनेजमेंट कुलदीप को अपनी टीम में शामिल करने के लिए दिल्ली के साथ इस ‘स्वैप डील’ को अंजाम दे रहा है।

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क्या दिल्ली में फिर से कप्तान बनेंगे ऋषभ पंत?

इस डील के साथ ही क्रिकेट के गलियारों में एक और बड़ी बहस छिड़ गई है कि क्या दिल्ली कैपिटल्स में वापसी के बाद ऋषभ पंत को दोबारा कप्तानी सौंपी जाएगी? हालांकि, अभी इसके लिए कोई भी पक्का फैसला नहीं लिया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले कुछ समय से दिल्ली की कप्तानी अक्षर पटेल और केएल राहुल जैसे दिग्गजों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। राहुल को लखनऊ से दिल्ली लाया गया था, लेकिन फिलहाल कप्तानी को लेकर दिल्ली का मैनेजमेंट राहुल के नाम पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। पंत की वापसी के बाद टीम के संतुलन और कप्तानी के बंटवारे को लेकर फ्रेंचाइजी के भीतर कई दौर की लंबी चर्चाएं होने की संभावना है।

Apnivani की बात

कुल मिलाकर, पैसों और टीम कॉम्बिनेशन के गणित को देखा जाए तो यह ट्रेड दोनों ही फ्रेंचाइजियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। 27 करोड़ वाले पंत और 13.25 करोड़ वाले कुलदीप के बीच पैसों का जो बड़ा अंतर है, उसे पाटने के लिए दिल्ली को शायद कुछ नकद रकम या किसी और खिलाड़ी को भी लखनऊ के साथ जोड़ना पड़े। खैर, आईपीएल 2027 की नीलामी से पहले अगर इस डील पर आधिकारिक मुहर लग जाती है, तो यह क्रिकेट फैंस के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं होगा।

आपकी इस बड़े उलटफेर पर क्या राय है? क्या पंत का दिल्ली लौटना सही फैसला है? अपनी क्रिकेट की समझ और बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस धमाकेदार खेल खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

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NEET Special Trains 2026: 21 जून को छात्रों के लिए चलेंगी 6 स्पेशल ट्रेनें, गुजरात से लेकर साउथ बिहार तक के रूट्स की पूरी डिटेल

NEET Special Trains 2026

मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) का री-एग्जाम 21 जून 2026 को होने जा रहा है। परीक्षा की तैयारियों के बीच लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को सबसे बड़ी चिंता अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की सता रही थी। चिलचिलाती गर्मी और बसों में होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने छात्रों को एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली राहत दी है। रेलवे प्रशासन ने परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए कई अहम रूट्स पर ‘एग्जाम स्पेशल ट्रेनें’ चलाने का फैसला किया है।

‘Apni Vani’ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि पश्चिम रेलवे से लेकर पूर्व मध्य रेलवे (बिहार) तक कौन-कौन सी स्पेशल ट्रेनें पटरियों पर दौड़ने वाली हैं और आप इनकी बुकिंग कैसे कर सकते हैं।

पश्चिम रेलवे का बड़ा ऐलान: 6 स्पेशल ट्रेनों की सौगात

गुजरात और महाराष्ट्र के लाखों छात्रों की अतिरिक्त यात्रा मांग को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे (Western Railway) ने सबसे पहले मोर्चा संभाला है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, 20 और 21 जून को विशेष किराए पर तीन जोड़ी यानी कुल 6 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इनमें सबसे प्रमुख ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई सेंट्रल के बीच चलेगी, जो उन छात्रों के लिए संजीवनी है जिनके सेंटर्स बड़े शहरों में पड़े हैं।

इसके अलावा, राज्य के आंतरिक हिस्सों को कवर करने के लिए ओखा से गांधीनगर और भावनगर से गांधीग्राम के बीच भी स्पेशल ट्रेनों के फेरे तय किए गए हैं। ये ट्रेनें पूरी तरह से परीक्षा की टाइमिंग को ध्यान में रखकर शेड्यूल की गई हैं, ताकि छात्र परीक्षा शुरू होने से काफी पहले अपने सेंटर वाले शहर में सुरक्षित पहुंच सकें।

साउथ बिहार और पूर्व मध्य रेलवे की तैयारियां

बिहार से नीट परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या देश में सबसे ज्यादा होती है। विशेषकर साउथ बिहार (जैसे गया, भागलपुर, औरंगाबाद) से पटना या अन्य शहरों की ओर जाने वाले छात्रों की भीड़ परीक्षा के दिन बेकाबू हो जाती है। इसे देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने भी अपने स्तर पर कमर कस ली है। साउथ बिहार के अहम जंक्शन्स जैसे डीडीयू (DDU), गया, पटना और भागलपुर के बीच चलने वाली नियमित इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही, 20 जून की शाम और 21 जून की सुबह पटना और गया रूट पर स्पेशल मेमू (MEMU) और एक्सप्रेस ट्रेनों के फेरे बढ़ाए गए हैं। हालांकि छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले ‘NTES’ ऐप पर अपने रूट की लाइव अपडेट जरूर चेक कर लें।

कहाँ और कैसे होगी इन ट्रेनों की बुकिंग?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन स्पेशल ट्रेनों में सीट कैसे पक्की की जाए। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम रेलवे द्वारा घोषित की गई इन स्पेशल ट्रेनों की बुकिंग आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप और सभी पीआरएस (PRS) काउंटर्स पर शुरू कर दी गई है। चूंकि ये ट्रेनें विशेष किराए (Special Fare) पर चलाई जा रही हैं, इसलिए इनमें सामान्य ट्रेनों के मुकाबले किराया थोड़ा अलग हो सकता है। अनारक्षित डिब्बों के लिए छात्र सीधे स्टेशन के यूटीएस काउंटर या RailOne app से भी परीक्षा के दिन आसानी से टिकट ले सकते हैं।

NEET Special Trains 2026
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यात्रा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

परीक्षा का दिन वैसे ही बहुत तनावपूर्ण होता है, इसलिए हमारी सलाह है कि आप अपनी टिकट की बुकिंग एडवांस में ही कर लें। स्टेशन पर अंतिम समय की भीड़ और धक्के-मुक्की से बचने के लिए ट्रेन छूटने के समय से कम से कम एक घंटा पहले प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाएं। अपने साथ अपना नीट का एडमिट कार्ड, एक ओरिजिनल फोटो आईडी, पारदर्शी पानी की बोतल और कुछ हल्का नाश्ता जरूर रखें। ट्रेन सफर के दौरान किसी भी अनजान व्यक्ति के दिए हुए खाने-पीने की चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।

Apnivani की बात

भारतीय रेलवे का यह कदम नीट के छात्रों के लिए वाकई किसी वरदान से कम नहीं है। अब आपका पूरा फोकस सिर्फ अपने रिवीजन पर होना चाहिए, सफर की चिंता अब रेलवे ने दूर कर दी है। आप सभी परीक्षार्थियों को ‘Apni Vani’ की पूरी टीम की तरफ से 21 जून के इस महामुकाबले के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।

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PM Kisan Yojana 2026 New Installment: आ गई पक्की तारीख! 18 जून को खाते में आएंगे ₹2000, बस ई-केवाईसी के इन 3 नियमों का रखें ध्यान

PM Kisan Yojana 2026 New Installment

देश के करोड़ों किसानों के लिए बहुत अच्छी खबर है। उनका लंबा इंतजार अब लगभग खत्म हो चुका है। केंद्र सरकार जल्द ही आर्थिक सहायता की नई किस्त सीधे बैंक खातों में भेजने जा रही है। हर बार की तरह इस बार भी लाभार्थी सूची में नाम आने को लेकर लोगों के बीच काफी उत्सुकता है। ‘Apni Vani’ की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि यह पैसा कब तक आपके हाथ में होगा और कौन सी छोटी गलतियां इस लाभ को रोक सकती हैं।

18 जून को जारी होगी सम्मान निधि की नई किस्त

इस बार पैसे ट्रांसफर करने की तारीख को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। कृषि मंत्रालय की ताजा तैयारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 18 जून 2026 को नई किस्त जारी होने की पूरी संभावना है।

प्रधानमंत्री एक भव्य कार्यक्रम से डिजिटल बटन दबाकर यह धनराशि डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर करेंगे। धान की बुवाई और नई फसल की तैयारी के लिए यह आर्थिक मदद बिल्कुल सही वक्त पर मिल रही है। इससे खाद और उन्नत बीज खरीदने में काफी सहूलियत होगी।

एक छोटी सी चूक से अटक सकता है पैसा

लेकिन, एक छोटी सी लापरवाही आपका पैसा रोक सकती है। फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने ई-केवाईसी (e-KYC) को शत-प्रतिशत अनिवार्य कर दिया है।

जिन लाभार्थियों ने यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं की है, उनका नाम फाइनल लिस्ट से बिना किसी नोटिस के हटा दिया जाएगा। सरकार का सख्त निर्देश है कि लाभ सिर्फ असली और योग्य काश्तकारों तक ही पहुंचना चाहिए।

घर बैठे ऐसे अपडेट करें अपना स्टेटस

अपना स्टेटस अपडेट करना अब कोई झंझट का काम नहीं रहा। बस अपने स्मार्टफोन से पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट (pmkisan.gov.in) खोलें। वहां आधार नंबर डालकर ओटीपी (OTP) के जरिए घर बैठे यह काम आसानी से हो जाएगा।

अगर फोन से कोई दिक्कत आ रही हो, तो पास के किसी भी जन सेवा केंद्र चले जाएं। वहां मामूली शुल्क देकर अंगूठा लगाकर भी बायोमेट्रिक सत्यापन करवाया जा सकता है। उसी पोर्टल पर ‘Know Your Status’ विकल्प से आप अपनी पुरानी किस्तों का रिकॉर्ड भी जांच सकते हैं।

बैंक खाते से जुड़े ये दो नियम हैं बेहद जरूरी

खाते में बिना रुकावट पैसे पाने के लिए दो शर्तें और पूरी करनी होंगी। पहला, आपका बैंक खाता आपके आधार कार्ड से अनिवार्य रूप से लिंक होना चाहिए। दूसरा, खाते में एनपीसीआई मैपिंग चालू होनी चाहिए।

अक्सर इन्ही छोटी-छोटी तकनीकी वजहों से लाखों लोगों की किस्त बीच में ही लटक जाती है। इसलिए समय रहते अपने बैंक जाकर यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी डीबीटी सर्विस एक्टिव है या नहीं।

Apnivani की बात

सम्मान निधि योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। अब जबकि पैसे आने में बस कुछ ही दिन बचे हैं, तो अपने सभी कागजात दुरुस्त कर लें। इस जरूरी जानकारी को अपने गांव के अन्य साथियों और व्हाट्सएप ग्रुप्स में जरूर साझा करें, ताकि ऐन मौके पर किसी को भी निराशा हाथ न लगे!

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UPSC Prelims Result 2026: सिविल सेवा प्रीलिम्स के नतीजे घोषित! 13,343 उम्मीदवार मेन्स के लिए हुए पास, जानिए अहम अपडेट

UPSC Prelims Result 2026

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) 2026 के नतीजे आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिए हैं। देश भर के लाखों युवा जो दिन-रात एक करके IAS और IPS बनने का सपना देखते हैं, उनके लिए 15 जून 2026 का दिन बेहद खास रहा। यूपीएससी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों के रोल नंबर की लिस्ट जारी कर दी है। ‘Apni Vani’ की इस खास एजुकेशन रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि इस साल कितने उम्मीदवारों ने बाजी मारी है और आगे होने वाली मेन्स परीक्षा के लिए छात्रों को क्या-क्या जरूरी कदम उठाने होंगे।

24 मई को हुई थी परीक्षा, 5 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने लिया था हिस्सा

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन इस साल 24 मई 2026 को देश भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर किया गया था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल लगभग 5.49 लाख उम्मीदवारों ने इस कठिन परीक्षा में हिस्सा लिया था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी तरीके से हुए इस एग्जाम के ठीक 22 दिनों के भीतर ही आयोग ने इतनी तेजी से रिजल्ट जारी करके सभी छात्रों को चौंका दिया है।

13 हजार से अधिक उम्मीदवारों का मेन्स के लिए हुआ चयन

इस साल यूपीएससी ने कुल 1,016 रिक्तियों के लिए इस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत की थी। आधिकारिक रिजल्ट के अनुसार, इन 1,016 पदों के मुकाबले कुल 13,343 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की है। यह आंकड़ा साफ तौर पर बताता है कि परीक्षा में बैठने वाले कुल 5.49 लाख छात्रों में से महज 2.4 प्रतिशत युवा ही अगले चरण यानी मेन्स (Mains) परीक्षा के लिए अपनी जगह बना पाए हैं। पिछले साल के मुकाबले देखा जाए तो 2025 में 1,087 रिक्तियों के लिए 14,161 उम्मीदवार पास हुए थे, जिसका मतलब है कि इस बार शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की संख्या थोड़ी कम है।

19 जून से भरना होगा ‘DAF’ फॉर्म

प्रीलिम्स पास करने वाले सभी सफल उम्मीदवारों को अब सिविल सेवा (मेन्स) परीक्षा 2026 में बैठना होगा। लेकिन इसके लिए उन्हें सबसे पहले आयोग के पोर्टल पर जाकर कुछ जरूरी ऑनलाइन औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। यूपीएससी ने स्पष्ट कर दिया है कि शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को 19 जून से 28 जून 2026 के बीच एक विस्तृत आवेदन पत्र यानी ‘डीएएफ’ (DAF) भरना होगा। इस दौरान उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करनी होगी, कैडर की प्राथमिकताएं चुननी होंगी और 200 रुपये की परीक्षा फीस (छूट वाले वर्गों को छोड़कर) जमा करनी होगी। अगर कोई उम्मीदवार इस तय समय सीमा के भीतर ये फॉर्मेलिटी पूरी नहीं करता है, तो उसे मेन्स परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी।

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21 अगस्त से शुरू होगी यूपीएससी मेन्स परीक्षा

यूपीएससी द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार, सिविल सेवा मेन्स परीक्षा 2026 की शुरुआत 21 अगस्त से होने जा रही है। यानी सफल उम्मीदवारों के पास अब अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए लगभग दो महीने का ही समय बचा है। मेन्स परीक्षा पूरी तरह से सब्जेक्टिव होती है और इसमें उत्तर लिखने की सबसे अहम भूमिका होती है। आयोग ने यह भी जानकारी दी है कि प्रारंभिक परीक्षा के कट-ऑफ और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत अंक मेन्स और इंटरव्यू के खत्म होने के बाद ही जारी किए जाएंगे।

कैसे चेक करें अपना रिजल्ट?

जो उम्मीदवार अभी तक अपना रिजल्ट नहीं देख पाए हैं, वे सीधे आयोग की वेबसाइट (upsc.gov.in या upsconline.nic.in) पर जा सकते हैं। वहां ‘What’s New’ सेक्शन में उन्हें रिजल्ट का पीडीएफ लिंक मिल जाएगा। पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के बाद आप ‘Ctrl+F’ की मदद से अपना रोल नंबर सर्च करके अपना रिजल्ट आसानी से चेक कर सकते हैं। ‘Apni Vani’ की टीम सफल हुए सभी 13,343 उम्मीदवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देती है।

इस बेहद जरूरी खबर को अपने उन सभी दोस्तों और स्टडी ग्रुप्स में शेयर करें जिन्होंने इस साल यूपीएससी की परीक्षा दी थी!

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RE-NEET Admit Card 2026 LIVE: 21 जून को होने वाली परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, यहां से करें डाउनलोड!

RE-NEET Admit Card 2026 LIVE

मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे देश भर के लाखों छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 21 जून 2026 को होने वाली ‘री-नीट’ (RE-NEET) यूजी परीक्षा के एडमिट कार्ड आधिकारिक रूप से जारी कर दिए हैं। जो भी छात्र इस री-एग्जाम में बैठने वाले हैं, वे अब आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं।

बता दें कि 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा को पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। उस परीक्षा में लगभग 22.05 लाख छात्र शामिल हुए थे। अब छात्रों के भविष्य और परीक्षा की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए यह री-एग्जाम आयोजित किया जा रहा है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि इस बार परीक्षा के स्वरूप और नियमों में क्या-क्या बड़े बदलाव किए गए हैं।

कैसे करें अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड?

एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया बेहद आसान रखी गई है। छात्रों को सबसे पहले NTA NEET की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाना होगा। वहां होमपेज पर ही ‘NEET UG 2026 Re-Exam Admit Card’ का लाइव लिंक दिया गया है। इस लिंक पर क्लिक करने के बाद आपको अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि या पासवर्ड दर्ज करना होगा।

सिक्योरिटी पिन डालने के बाद सबमिट करते ही आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर आ जाएगा। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे इसकी कई प्रिंटआउट कॉपियां निकाल कर सुरक्षित रख लें, जो परीक्षा और काउंसलिंग दोनों के समय काम आएंगी।

परीक्षा के समय और रफ वर्क में हुए बड़े बदलाव

इस बार की परीक्षा में छात्रों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा के समय को लेकर है। इस बार परीक्षा की अवधि 15 मिनट बढ़ा दी गई है, जिससे कुल समय अब 195 मिनट हो गया है। यह परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से लेकर शाम 5:15 बजे तक ऑफलाइन यानी पेन-एंड-पेपर मोड में ही आयोजित की जाएगी।

इसके अलावा, छात्रों के फीडबैक के आधार पर अब रफ वर्क के लिए 2 की जगह 4 खाली पन्ने दिए जाएंगे। साथ ही, प्रश्न पुस्तिका के डिजाइन में भी बदलाव किया गया है ताकि छात्रों को सवाल पढ़ने और हल करने में कोई परेशानी न हो।

दिल्ली के छात्रों के लिए फ्री बस सेवा

परीक्षा के दिन छात्रों को सेंटर तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए भी कुछ खास कदम उठाए गए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि 21 जून को नीट परीक्षा देने वाले सभी छात्रों के लिए दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों में यात्रा बिल्कुल मुफ्त होगी। इसके लिए छात्रों को बस में कंडक्टर को सिर्फ अपना एडमिट कार्ड दिखाना होगा। कई अन्य राज्यों में भी छात्रों की सुविधा के लिए इस तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं।

सेंटर पर किन चीजों को ले जाने की है सख्त मनाही?

पेपर लीक की घटना के बाद इस बार सुरक्षा व्यवस्था और चेकिंग बेहद कड़ी रहने वाली है। NTA ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, कैलकुलेटर और ब्लूटूथ डिवाइस परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके साथ ही, ज्योमेट्री बॉक्स, पाउच, इलेक्ट्रॉनिक पेन, स्टडी मटेरियल और किसी भी प्रकार की स्टेशनरी घर से लाने पर मनाही है।

छात्रों को केवल अपना एडमिट कार्ड, जरूरी फोटो आईडी और एक पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति दी गई है।

RE-NEET Admit Card 2026 LIVE
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2027 से कंप्यूटर बेस्ड (CBT) होगा नीट एग्जाम

भविष्य में इस तरह के पेपर लीक और धांधली को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुष्टि की है कि साल 2027 से नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में शिफ्ट कर दी जाएगी। हालांकि, 21 जून को होने वाली यह री-परीक्षा पुराने ओएमआर (OMR) और पेन-पेपर फॉर्मेट में ही होगी।

Apnivani की बात

री-नीट परीक्षा 2026 उन लाखों छात्रों के लिए अपने सपनों को पूरा करने का एक दूसरा और निष्पक्ष मौका है। एडमिट कार्ड जारी हो चुके हैं और अब सिर्फ रिवीजन का समय बचा है। ‘Apni Vani’ की टीम सभी छात्रों को सलाह देती है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें और एडमिट कार्ड पर लिखे सभी नियमों का सख्ती से पालन करें।

इस जरूरी जानकारी को अपने उन सभी दोस्तों के साथ व्हाट्सएप पर जरूर शेयर करें, जो 21 जून को यह परीक्षा देने जा रहे हैं।

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Shigella Outbreak Kerala: कोझिकोड में ‘शिगेलोसिस’ का कहर! 3 साल की बच्ची की मौत से मचा हड़कंप, जानिए इस जानलेवा संक्रमण की सबसे जरूरी बातें

Shigella Outbreak Kerala

भारत के खूबसूरत राज्य केरल से इन दिनों एक बेहद डराने वाली स्वास्थ्य रिपोर्ट सामने आ रही है। कोझिकोड जिले के लोग इन दिनों एक अजीब से खौफ के साये में जी रहे हैं। इस खौफ का नाम है ‘शिगेलोसिस’ (Shigellosis)। यह एक ऐसा खतरनाक और संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण है जिसने अचानक से दस्तक देकर पूरे इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था की नींद उड़ा दी है। ‘Apni Vani’ की इस विस्तृत स्वास्थ्य रिपोर्ट में आइए एक कहानी की तरह समझते हैं कि कैसे एक छोटे से गांव से उठी यह बीमारी अब पूरे राज्य के लिए अलर्ट बन गई है।

पेरुवायल गांव की त्रासदी और एक मासूम की दर्दनाक मौत

इस पूरी त्रासदी और संक्रमण का मुख्य केंद्र कोझिकोड जिले का एक छोटा सा गांव ‘पेरुवायल’ (Peruvayal) बना हुआ है। मार्च 2026 के इसी महीने में इस गांव के अंदर अचानक से एक के बाद एक लोग रहस्यमयी तरीके से बीमार पड़ने लगे। पेट दर्द और दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लाइन लग गई। देखते ही देखते स्वास्थ्य विभाग के पास शिगेलोसिस के 63 मामले सामने आ गए।

लेकिन पूरे इलाके में मातम और दहशत का असली माहौल तब छा गया, जब इस जानलेवा संक्रमण की चपेट में आकर एक 3 साल की मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। इतनी कम उम्र में इस बीमारी के इतने घातक साबित होने से वहां के माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए हैं।

एक्शन में स्वास्थ्य विभाग और पानी की सघन जांच

बच्ची की दर्दनाक मौत और लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए केरल का स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। पूरे कोझिकोड और खासकर पेरुवायल के आसपास मेडिकल सर्विलांस यानी निगरानी को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया है। डॉक्टरों और जांच अधिकारियों की टीमें दिन-रात यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर इस गांव में ऐसा कौन सा दूषित कुआं या जल स्रोत है, जहां से यह जानलेवा बैक्टीरिया लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं और ओआरएस (ORS) का स्टॉक बढ़ा दिया गया है।

आखिर क्या है यह जानलेवा ‘शिगेलोसिस’ संक्रमण?

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर यह ‘शिगेलोसिस’ है क्या जिसने इतनी तबाही मचा रखी है। मेडिकल विज्ञान की भाषा में समझें तो यह ‘शिगेला’ नाम के बैक्टीरिया से होने वाला आंतों का एक बेहद गंभीर संक्रमण है। यह बैक्टीरिया इतना ज्यादा खतरनाक और आसानी से फैलने वाला है कि इसकी बहुत ही मामूली सी मात्रा (सिर्फ 10 से 100 बैक्टीरिया) भी किसी अच्छे-भले स्वस्थ इंसान को बिस्तर पर गिरा सकती है। यह अदृश्य दुश्मन मुख्य रूप से गंदे और दूषित पानी या फिर बाहर के अनहाइजीनिक भोजन के जरिए इंसानों के पेट में पहुंचता है और वहां तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगता है।

संक्रमण के वो खतरनाक लक्षण जिन्हें पहचानना है जरूरी

इस बीमारी के लक्षण इतने स्पष्ट और तकलीफदेह होते हैं कि इन्हें नजरअंदाज करना जान पर भारी पड़ सकता है। संक्रमण के शरीर में प्रवेश करने के एक या दो दिन बाद ही मरीज को सबसे पहले खूनी दस्त शुरू हो जाते हैं, जो इसका सबसे बड़ा और खतरनाक संकेत है। इसके साथ ही मरीज का शरीर तेज बुखार से तपने लगता है और उसे ठंड के साथ कंपकंपी महसूस होती है। पेट में भयंकर दर्द, मरोड़ और लगातार उल्टी होने से शरीर पूरी तरह टूट जाता है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में यह सारे लक्षण इतनी तेजी से शरीर का पानी सुखा देते हैं कि भयंकर डिहाइड्रेशन पैदा हो जाता है, जो अंततः जानलेवा साबित होता है।

Shigella Outbreak Kerala
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बचाव का सिर्फ एक ही मंत्र

इतनी खतरनाक बीमारी होने के बावजूद, थोड़ी सी सतर्कता और साफ-सफाई से इस जानलेवा बैक्टीरिया को अपने घर में घुसने से रोका जा सकता है। चूंकि यह गंदगी और दूषित पानी से फैलता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि आप और आपका परिवार केवल अच्छी तरह उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ साफ पानी ही पिएं। शौच के बाद, बच्चों का डायपर बदलने के बाद और खाना बनाने या खाने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने की आदत डालें।

बाहर के खुले और सड़क किनारे बिकने वाले खाने से पूरी तरह बचें और घर का बना ताजा व गर्म भोजन ही करें। सब्जियों और फलों को भी पकाने या खाने से पहले साफ पानी से धोना बहुत जरूरी है।

Apnivani की बात

केरल के कोझिकोड का यह संकट हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी और स्पष्ट चेतावनी है कि जलजनित बीमारियों को मौसम के बदलाव के समय कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आपके घर में किसी को भी लगातार दस्त, पेट दर्द या तेज बुखार की शिकायत हो, तो घरेलू नुस्खों में अपना कीमती समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाएं। आपकी थोड़ी सी जागरूकता और साफ-सफाई आपके परिवार की जान बचा सकती है।

इस जरूरी हेल्थ अलर्ट को अपने परिवार और दोस्तों के व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें ताकि सभी इस नए संक्रमण को लेकर जागरूक हो सकें!

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UP Government Jobs 2027 Election: योगी सरकार का ‘मिशन रोजगार’! 9 लाख नौकरियां और 2026 में 1.5 लाख नई भर्तियों के 5 बड़े चुनावी मायने

Government UP jabs 2027 election

उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। सूबे की सत्ता पर दोबारा आने के लिए योगी सरकार ने अब उस मोर्चे पर पूरी ताकत झोंक दी है, जो किसी भी चुनाव का रुख बदलने का माद्दा रखता है— यानी ‘युवा और रोजगार’।

सरकारी आंकड़ों और दावों के जरिए सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके कार्यकाल में यूपी के युवाओं को रिकॉर्ड स्तर पर रोजगार मिला है। वहीं दूसरी तरफ, विपक्ष इन आंकड़ों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ‘Apni Vani‘ की इस विशेष राजनीतिक और आर्थिक एनालिसिस रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि सरकार के इस ‘मिशन रोजगार’ का जमीनी सच क्या है और 2026 में शुरू हुई नई भर्तियां 2027 के चुनावी समीकरणों को कैसे प्रभावित करने वाली हैं।

10 साल में 10 लाख का लक्ष्य: 9 लाख से अधिक नियुक्तियां पूरी

योगी सरकार ने अपने 10 वर्षों के कार्यकाल के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया था— सूबे के युवाओं को 10 लाख सरकारी नौकरियां देना। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2017 से लेकर साल 2026 तक विभिन्न विभागों में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।

इस आंकड़े के साथ सरकार अपने तय लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि पिछले 9 सालों में विभागों की कार्यप्रणाली में तेजी लाकर और बैकलॉग पदों को भरकर इस गति को हासिल किया गया है। अब बचे हुए कोटे को चुनाव से ठीक पहले पूरा करने की तैयारी है।

2026 में 1.5 लाख नई भर्तियों का मेगा प्लान

साल 2026 को उत्तर प्रदेश में ‘भर्ती वर्ष’ के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने चालू वर्ष में सब-इंस्पेक्टर (SI), होमगार्ड, शिक्षक, राजस्व (लेखपाल/कानूनगो) और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में 1.5 लाख से अधिक नई भर्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • पुलिस विभाग: सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के नाम पर पुलिस विभाग में अकेले 1 लाख से अधिक पदों पर बंपर भर्ती की तैयारी चल रही है।
  • शिक्षा विभाग: परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए करीब 50 हजार पदों पर नई नियुक्तियों का खाका तैयार किया गया है।

एमएसएमई और स्टार्टअप: 3 करोड़ से अधिक रोजगार का दावा

सरकारी नौकरी के अलावा, सरकार का सबसे बड़ा फोकस स्वरोजगार और निजी क्षेत्र पर रहा है। उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ बनाने की दिशा में एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप सेक्टर को रीढ़ की हड्डी माना जा रहा है।

सरकार का दावा है कि सिंगल विंडो क्लीयरेंस, आसान लोन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की नीतियों के कारण राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का जाल बिछा है। इसके माध्यम से पिछले 9 वर्षों में 3 करोड़ से ज्यादा रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। यह आंकड़ा यह दिखाने के लिए काफी है कि यूपी अब सिर्फ सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि यहां का युवा अब ‘जॉब सीकर’ की जगह ‘जॉब क्रिएटर’ बन रहा है।

भर्ती प्रक्रिया पर छिड़ा सियासी संग्राम

रोजगार के इन आंकड़ों के सामने आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी का साफ दावा है कि मौजूदा सरकार ने उत्तर प्रदेश में दशकों से चली आ रही ‘पर्ची और खर्ची’ वाली व्यवस्था को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। अब भर्तियां पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और मेरिट के आधार पर हो रही हैं।

Government UP jabs 2027 election
Apnivani

वहीं दूसरी ओर, विपक्ष इस दावे को सिरे से खारिज कर रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पूर्व में कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण युवाओं का कीमती समय बर्बाद हुआ है। विपक्ष पूर्ववर्ती सरकारों की तरह वर्तमान व्यवस्था पर भी पक्षपात के आरोप लगा रहा है, जिससे यह मुद्दा पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है।

2027 के रण में युवाओं का मूड

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2027 के विधानसभा चुनाव में युवाओं का मूड और रोजगार का मुद्दा सबसे निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है। उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां की आधी से ज्यादा आबादी युवा है।

अगर योगी सरकार चुनाव आचार संहिता लगने से पहले इन 1.5 लाख नई भर्तियों की परीक्षाओं को बिना किसी विवाद (जैसे पेपर लीक) के सफलतापूर्वक संपन्न करा लेती है और उनके परिणाम जारी कर देती है, तो यह सत्ताधारी दल के लिए एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित होगा। लेकिन अगर इन नई भर्तियों में कोई भी प्रशासनिक ढिलाई या तकनीकी खामी सामने आती है, तो विपक्ष को सरकार को घेरने का एक अचूक हथियार मिल जाएगा।

Apnivani की बात

उत्तर प्रदेश में रोजगार की यह रेस सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों के भविष्य और उम्मीदों से जुड़ी हुई है। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए आगामी महीनों में सबसे बड़ी चुनौती होगी। बहरहाल, 2026 में शुरू हुई इन डेढ़ लाख भर्तियों ने उत्तर प्रदेश के प्रतियोगी छात्रों के भीतर एक नई उम्मीद जरूर जगा दी है।

आपकी इस पर क्या राय है? क्या आपको लगता है कि योगी सरकार की ये नई भर्तियां 2027 के चुनाव में गेम चेंजर साबित होंगी? क्या आप भी इनमें से किसी भर्ती की तैयारी कर रहे हैं? अपनी राय और अनुभव नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें और इस महत्वपूर्ण विश्लेषण को अपने सभी दोस्तों के साथ शेयर करें!

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Realme P4R 5G All Details: 8000mAh बैटरी और 144Hz डिस्प्ले वाला मॉन्स्टर भारत में हुआ लॉन्च! जानिए इसके सबसे धांसू फीचर्स और कीमत

Realme P4R 5G All Details

अगर आप एक ऐसे स्मार्टफोन की तलाश में हैं जिसकी बैटरी कभी खत्म होने का नाम ही न ले और जो गेमिंग में भी एकदम स्मूथ परफॉर्मेंस दे, तो Realme ने आपकी मुराद पूरी कर दी है। भारतीय बाज़ार में मिड-रेंज यूजर्स और गेमर्स को टारगेट करते हुए, कंपनी ने अपनी ‘P सीरीज’ का नया स्मार्टफोन Realme P4R 5G launch कर दिया है।

आपकी टेक न्यूज़ वेबसाइट ‘Apni Vani’ की टेक डेस्क ने इस फोन की ऑफिशियल साइट और लॉन्च डिटेल्स को पूरी तरह से खंगाल लिया है। यह फोन अपने सेगमेंट में कई ऐसे धांसू फीचर्स लेकर आया है जो आमतौर पर महंगे फोन्स में देखने को मिलते हैं। आइए आसान भाषा में जानते हैं इस फोन के 5 सबसे बड़े फीचर्स, कीमत और उपलब्धता से जुड़ी पूरी जानकारी।

सबसे बड़ा हाईलाइट: 8000mAh की ‘Titan Battery’

इस फोन की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी बैटरी है। Realme P4R 5G में एक विशाल 8000mAh की ‘टाइटन बैटरी’ (Titan Battery) दी गई है।

कंपनी का दावा है कि सिंगल चार्ज पर यह फोन आराम से 3 दिन तक का बैकअप दे सकता है। इसके अलावा, इतनी बड़ी बैटरी को तेजी से चार्ज करने के लिए इसमें 45W की फास्ट चार्जिंग और बायपास चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलता है। सबसे कमाल की बात यह है कि इतनी बड़ी बैटरी होने के बावजूद फोन की मोटाई सिर्फ 8.8mm है।

डिस्प्ले और परफॉर्मेंस: गेमिंग में ‘नो लैग’ (No Lag) एक्सपीरियंस

फोन में 6.8 इंच का बड़ा HD+ IPS LCD ‘सनलाइट डिस्प्ले’ दिया गया है।

यह डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट और 1200 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आता है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देगी और गेमिंग का अनुभव एकदम मक्खन जैसा होगा। हुड के नीचे इसे ताकत देने के लिए MediaTek Dimensity 6300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। यह 5G प्रोसेसर मल्टीटास्किंग और ‘BGMI’ या ‘Free Fire’ जैसे हैवी गेम्स को 60fps पर बिना किसी रुकावट के चलाने में सक्षम है।

कूलिंग सिस्टम और रफ एंड टफ बिल्ड क्वालिटी

लगातार गेमिंग करने पर फोन गर्म न हो, इसके लिए Realme ने इसमें एक बड़ा 5300mm² का एयरफ्लो वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम दिया है।

बिल्ड क्वालिटी की बात करें तो यह फोन IP65 रेटिंग के साथ आता है, जो इसे धूल और पानी के छींटों से बचाता है। साथ ही, इसे मिलिट्री-ग्रेड (MIL-STD-810H) शॉक रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी मिला है, यानी यह फोन आसानी से गिरने पर टूटेगा नहीं।

50MP का AI कैमरा और लेटेस्ट सॉफ्टवेयर

फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए फोन के बैक पैनल पर 50MP का प्राइमरी कैमरा (f/1.8 अपर्चर) दिया गया है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है।

कैमरे में आपको AI Eraser 2.0, AI Unblur और Portrait Glow जैसे कई शानदार AI टूल्स भी मिलते हैं। यह फोन एकदम लेटेस्ट Android 16 पर आधारित Realme UI 7.0 पर काम करता है, जिसमें Google Gemini AI का सीधा इंटीग्रेशन भी दिया गया है।

credit- Realme

कीमत और उपलब्धता: 17 जून से शुरू होगी सेल

Realme P4R 5G तीन खूबसूरत रंगों— टाइटेनियम ग्लेयर, सिल्वर ग्लेयर, और लैवेंडर ग्लेयर में पेश किया गया है।

कीमत की बात करें तो इसके बेस वेरिएंट (4GB RAM + 128GB) की आधिकारिक कीमत ₹18,999 है। वहीं, 6GB+128GB वेरिएंट ₹20,999 और टॉप वेरिएंट (6GB+256GB) ₹22,999 में लॉन्च किया गया है। फोन की पहली सेल 17 जून 2026 से Flipkart और Realme की ऑफिशियल वेबसाइट पर शुरू होगी। लॉन्च ऑफर के तहत पहले 12 घंटों में बैंक डिस्काउंट लगाकर आप इसे 16,999 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं।

Apnivani की बात

Realme P4R 5G सही मायने में उन लोगों के लिए एक ‘पावरहाउस’ है जिन्हें दिन भर फोन इस्तेमाल करने की आदत है और जो बार-बार चार्जर ढूंढने से परेशान हैं। 8000mAh बैटरी, शानदार डिस्प्ले और धाकड़ बिल्ड क्वालिटी इसे 20 हजार रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बनाते हैं।

क्या आप भी 8000mAh बैटरी वाला यह मॉन्स्टर फोन खरीदना चाहेंगे? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और ताज़ा टेक न्यूज़ के लिए बने रहें!

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Ujjwala Yojana News: लाभार्थियों को बड़ा झटका! अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर, जानिए बड़े कारण और नए नियम

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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के करोड़ों लाभार्थियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और निराश करने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इस योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या में भारी कटौती कर दी है। अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक साल में 9 के बजाय केवल 4 एलपीजी सिलेंडरों पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

इस बड़े बदलाव के बाद से आम जनता और ग्रामीण परिवारों में काफी हलचल है, क्योंकि इसका सीधा असर उनके घरेलू बजट पर पड़ने वाला है। इस विशेष और विस्तृत रिपोर्ट में आइए पूरी सच्चाई को जानते हैं और गहराई से समझते हैं कि सरकार ने अचानक यह कटौती क्यों की है, इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण क्या हैं और इसका आपकी जेब पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है।

क्या है सरकार का नया नियम?

केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से जारी नए आदेश के अनुसार, उज्ज्वला योजना के तहत अब साल भर में सिर्फ पहले 4 गैस सिलेंडरों (14.2 किलोग्राम) पर ही 300 रुपये की तय सब्सिडी मिलेगी।

यह 300 रुपये की सब्सिडी राशि हर बार की तरह सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती रहेगी। 7 जून 2026 को घरेलू गैस की कीमतों में हुई 29 रुपये की हालिया बढ़ोतरी के बाद, राजधानी दिल्ली में एक सिलेंडर की कीमत 942 रुपये हो चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि 300 रुपये की सब्सिडी कटने के बाद, उज्ज्वला लाभार्थियों को पहले 4 सिलेंडर 642 रुपये की प्रभावी कीमत पर मिलेंगे।

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5वें सिलेंडर से चुकानी होगी पूरी कीमत

इस नए नियम का सबसे बड़ा और सीधा असर उन बड़े परिवारों पर पड़ेगा जिनकी गैस की मासिक खपत ज्यादा है। जैसे ही कोई लाभार्थी अपने कोटे का 4 सिलेंडर इस्तेमाल करने के बाद साल का 5वां या उससे अधिक सिलेंडर बुक करेगा, उसे सरकार की तरफ से कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। यानी 5वें गैस सिलेंडर से आपको बिना किसी सरकारी छूट के बाजार मूल्य (वर्तमान में 942 रुपये) का पूरा भुगतान अपनी ही जेब से करना होगा।

अचानक क्यों की गई यह भारी कटौती?

इस कड़े फैसले के पीछे सरकार और अधिकारियों ने मुख्य रूप से दो बड़े कारण स्पष्ट किए हैं:

  • औसत घरेलू खपत का गणित: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने एक ब्रीफिंग में जानकारी दी है कि यह नई संशोधित सीमा उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक आम उज्ज्वला परिवार साल भर में औसतन 4 सिलेंडर का ही इस्तेमाल करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार का भारी दबाव: पश्चिम एशिया और ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। फरवरी महीने से अब तक अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बेंचमार्क (जिसे सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस भी कहा जाता है) में 46% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सरकार को हर सिलेंडर पर हो रहा ₹700 का घाटा

सरकार ने इस फैसले का बचाव करते हुए अपना पक्ष रखा है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार दाम बढ़ने के कारण एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर को जनता तक पहुंचाने की वास्तविक लागत अब 1,600 रुपये के आंकड़े को भी पार कर चुकी है।

इतनी ज्यादा लागत होने के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियां इसे 942 रुपये में बेच रही हैं, जिसकी वजह से राज्य के स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को हर एक सिलेंडर की बिक्री पर लगभग 700 रुपये का भारी घाटा सहना पड़ रहा है। इस बढ़ते आर्थिक और सब्सिडी बोझ को संतुलित करने के लिए ही सिलेंडरों की संख्या घटाई गई है।

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12 से 4 तक कैसे पहुंची सिलेंडरों की यह संख्या?

अगर इस योजना के इतिहास पर नजर डालें, तो बदलाव कई चरणों में हुए हैं। मई 2016 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी, तब गरीब महिलाओं को स्वच्छ ईंधन देने के उद्देश्य से साल में 12 सिलेंडरों तक सब्सिडी दी जाती थी। लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण, सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए पिछले साल इस कोटे को 12 से घटाकर 9 गैस सिलेंडर कर दिया था। और अब, वैश्विक दबाव और घाटे का हवाला देते हुए यह संख्या सीधे 9 से घटाकर मात्र 4 कर दी गई है।

Apnivani की बात

सरकार का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार और वित्तीय घाटे के गणित के हिसाब से भले ही तर्कसंगत हो, लेकिन एक आम गरीब परिवार के लिए यह किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है। विशेषज्ञों को यह डर सताने लगा है कि सब्सिडी कम होने से कई निम्न-आय वाले ग्रामीण परिवार गैस की महंगाई से बचने के लिए एक बार फिर से लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक, धुएं वाले और अस्वच्छ ईंधन की ओर लौटने को मजबूर हो सकते हैं।

इस जरूरी जानकारी को अपने सभी दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ व्हाट्सएप पर तुरंत शेयर करें ताकि हर कोई इन नए नियमों से वाकिफ हो सके।

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