Bihar New CM Update: बिहार में सम्राट ‘राज’, नीतीश कुमार का इस्तीफा और एनडीए की नई रणनीति

Bihar New CM Update

बिहार की राजनीति में पिछले 24 घंटों में जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि, यह इस्तीफा अचानक नहीं था; इसके पीछे एनडीए के भीतर चल रही लंबी मंत्रणा और भविष्य की चुनावी रणनीतियां शामिल थीं।

नीतीश कुमार का इस्तीफा: एक युग का समापन

नीतीश कुमार ने आज पटना के राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंपा। इस्तीफे से पहले उन्होंने अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक की, जिसमें मंत्रियों को धन्यवाद दिया। नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार में उनके सबसे लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के एक बड़े हिस्से पर विराम लग गया है। अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि हाल ही में उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी शपथ ली थी।

सम्राट चौधरी: भाजपा का वो ‘भगवा चेहरा’ जो बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री

भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया गया है। सम्राट चौधरी, जो वर्तमान में उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे थे, अब बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में कल यानी 15 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे शपथ लेंगे।

सम्राट चौधरी का चयन भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वे कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं और बिहार में ओबीसी (OBC) राजनीति का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। भाजपा ने उन्हें आगे करके ‘लव-कुश’ समीकरण में सेंध लगाने और अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।

शपथ ग्रहण समारोह और दिग्गजों का जमावड़ा

कल पटना के लोक भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित एनडीए के कई बड़े नेता पटना पहुंच रहे हैं। सम्राट चौधरी के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। चर्चा है कि विजय सिन्हा और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे जा सकते हैं।

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बिहार की राजनीति पर क्या होगा असर?

भाजपा के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि पहली बार बिहार में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री होगा। अब तक भाजपा बिहार में ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रही है, लेकिन सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विपक्ष, विशेषकर आरजेडी (RJD) ने इस बदलाव को ‘जनादेश का अपमान’ बताया है, जबकि एनडीए इसे ‘विकसित बिहार’ की ओर बढ़ता कदम बता रहा है।

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नवादा में स्कूल पिकअप 20 फीट गहरी खाई में पलटी, मासूम आरोही की मौत, मची चीख-पुकार

नवादा

बिहार के नवादा जिले में शनिवार (12 अप्रैल 2026) को एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। गोविंदपुर प्रखंड के कमलापुर रोड पर बच्चों से भरी एक निजी स्कूल की पिकअप टेंपो अनियंत्रित होकर सड़क से 20 फीट नीचे जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन गिरने के दौरान चार बार पलटा, जिससे उसमें सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई। इस भीषण दुर्घटना में 8 वर्षीय मासूम बच्ची आरोही (आयुषी) कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक बच्चे घायल हुए हैं।

कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा?

यह घटना उस समय हुई जब स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चे अपने घरों को लौट रहे थे। कमलापुर रोड पर चालक ने तेज रफ्तार वाहन से अपना नियंत्रण खो दिया। चश्मदीदों का कहना है कि गाड़ी की गति इतनी अधिक थी कि वह सीधे सड़क किनारे खेत में जा गिरी। पास के खेतों में गेहूं की कटाई कर रहे ग्रामीणों ने जब बच्चों की चीखें सुनीं, तो वे तुरंत मौके पर दौड़े। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बच्चों को गाड़ी के शीशे तोड़कर बाहर निकाला और निजी वाहनों व एंबुलेंस के जरिए सदर अस्पताल पहुंचाया।

क्षमता से दुगुने बच्चे: स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही

हादसे के बाद जो सच्चाई सामने आई है, वह शिक्षा व्यवस्था और परिवहन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस वाहन में महज 12 से 15 बच्चों के बैठने की जगह थी, उसमें स्कूल प्रशासन ने 25 मासूमों को जानवरों की तरह ठूंस रखा था। ओवरलोडिंग के कारण गाड़ी का संतुलन बिगड़ना हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ड्राइवर नशे में था और तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहा था। पुलिस ने आक्रोशित भीड़ से ड्राइवर को बचाकर हिरासत में ले लिया है।

नवादा में स्कूल पिकअप 20 फीट गहरी खाई
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अस्पताल में अफरा-तफरी, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

सदर अस्पताल में भर्ती घायल बच्चों में से कई की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। मृतका आरोही कुमारी गोविंदपुर बाजार के अमित कुमार की पुत्री थी। उसकी मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। अस्पताल परिसर में बदहवास माता-पिता स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए स्कूल भेजा था, न कि मौत के मुंह में।

प्रशासन की जांच और सुरक्षा के दावे

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि स्कूल संचालक और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन केवल हादसों के बाद ही जागता है? जिले में धड़ल्ले से चल रहे अनफिट और ओवरलोडेड स्कूली वाहनों पर नियमित चेकिंग क्यों नहीं की जाती?

नवादा में स्कूल पिकअप 20 फीट गहरी खाई
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Quick Details Table

नवादा के इस भीषण हादसे की मुख्य जानकारियों को यदि हम सारांश के रूप में देखें, तो यह घटना 12 अप्रैल 2026 को बिहार के नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत कमलापुर रोड पर घटित हुई। इस दुखद दुर्घटना में गोविंदपुर बाजार निवासी अमित कुमार की 8 वर्षीय पुत्री आरोही कुमारी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन में सवार 20 से 25 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं। प्राथमिक जांच में हादसे का सबसे बड़ा कारण वाहन का ओवरलोडेड होना और चालक की तेज रफ्तार के साथ-साथ लापरवाही को माना गया है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।

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बिहार के पशुपालकों की चमकेगी किस्मत: सभी 38 जिलों में शुरू हुई ‘हरा चारा मानचित्रण’ और वैज्ञानिक अध्ययन योजना

बिहार के पशुपालकों

बिहार की नीतीश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के सभी 38 जिलों में अब पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से हरा चारा उपलब्ध कराने और पशुपालन-संबंधी नई अध्ययन योजनाओं (Study Schemes) को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में आने वाली सबसे बड़ी समस्या—’चारे की कमी और बढ़ती लागत’—का स्थायी समाधान निकालना है। सरकार की इस नई रणनीति से न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बिहार के लाखों पशुपालकों की आय में भी रिकॉर्ड वृद्धि होने की उम्मीद है।

रिमोट सेंसिंग और इसरो (ISRO) की तकनीक से होगा चारे का सर्वे

बिहार सरकार ने इस योजना को पूरी तरह से डिजिटल और वैज्ञानिक स्वरूप दिया है। राज्य के सभी जिलों में “रिमोट सेंसिंग और GIS (भू-सूचना प्रणाली)” आधारित हरा चारा मानचित्रण (Green Fodder Mapping) अध्ययन शुरू किया गया है। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (COMPFED) और इसरो के संयुक्त सहयोग से चलाया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष से सैटेलाइट इमेज के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस जिले के किस क्षेत्र में कितनी चारा फसलें उगाई जा रही हैं और कहाँ सिंचाई या बीज की कमी के कारण चारा उत्पादन कम हो रहा है।

हरा चारा मानचित्रण'
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क्या है पशुपालन-संबंधी नई अध्ययन योजना?

बिहार सरकार केवल चारे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन को एक “लाभकारी बिजनेस” बनाने के लिए जिला स्तर पर विशेष अध्ययन योजनाएं शुरू कर रही है। इन योजनाओं के तहत पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य, बेहतर जनन (Breeding), और आधुनिक डेयरी प्रबंधन के बारे में शिक्षित किया जाएगा। पटना में हाल ही में आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला में पशु संसाधन विभाग के सचिव और कॉम्फेड के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। अब यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर पशुपालकों तक पहुँचाया जाएगा, ताकि वे पारंपरिक तरीकों को छोड़ वैज्ञानिक पद्धति अपना सकें।

चारा लागत में 70% तक की कमी लाने का लक्ष्य

एक औसत डेयरी फार्म में कुल खर्च का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा केवल पशु आहार और चारे पर खर्च होता है। बिहार में अक्सर सूखे या बाढ़ के कारण हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे पशुपालकों को महंगा सूखा भूसा या दाना खरीदना पड़ता है। इस नई मैपिंग और अध्ययन योजना के बाद, सरकार जिलों में ऐसी चारा फसलों की किस्मों को बढ़ावा देगी जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें। जब पशुपालकों को साल भर सस्ता और पौष्टिक हरा चारा मिलेगा, तो दूध उत्पादन की लागत अपने आप कम हो जाएगी और सीधे तौर पर किसान का मुनाफा बढ़ जाएगा।

युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर

बिहार सरकार की यह योजना केवल मौजूदा पशुपालकों के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक वरदान साबित हो सकती है। “समग्र गव्य विकास योजना” के साथ इस अध्ययन योजना को जोड़कर, सरकार युवाओं को डेयरी उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही है। जिलों में होने वाले इन अध्ययनों से यह डेटा तैयार होगा कि कहाँ नई डेयरी यूनिट्स लगाई जा सकती हैं। इसके साथ ही, उन्नत चारे के बीज उत्पादन और साइलेज (Silage) मेकिंग में भी युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

हरा चारा मानचित्रण'
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डेयरी हब बनने की ओर अग्रसर बिहार

बिहार में कॉम्फेड और सुधा डेयरी पहले ही एक ब्रांड के रूप में स्थापित हैं, लेकिन अब सरकार का लक्ष्य बिहार को देश का प्रमुख “डेयरी हब” बनाना है। वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे इस सर्वे से राज्य सरकार के पास सटीक डेटा होगा, जिससे आने वाले समय में खाद, बीज और सब्सिडी का वितरण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री के आत्मनिर्भर बिहार के विजन को सफल बनाने में पशुपालन विभाग की यह नई पहल एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

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बिहार में माफिया राज का अंत: दूसरे राज्यों से अवैध बालू लाने पर लगेगा 25 गुना जुर्माना, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

बिहार

पटना, 5 अप्रैल 2026: बिहार में बालू माफिया और अवैध खनन के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे कठोर निर्णय लिया है। उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग की समीक्षा बैठक के बाद एक बड़ा ऐलान किया है। अब यदि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी दूसरे राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश या झारखंड) से बिना वैध अनुमति और चालान के बालू या अन्य खनिज बिहार की सीमा में लाता है, तो उस पर खनिज के मूल मूल्य का 25 गुना जुर्माना वसूला जाएगा।

राजस्व रिकॉर्ड तोड़ने के बाद और सख्ती

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 बिहार के खनन विभाग के लिए ऐतिहासिक रहा है। इस अवधि में विभाग ने 3592.60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 56 करोड़ रुपये अधिक है। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल सख्ती और पारदर्शी नीतियों के कारण संभव हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 78 बालू घाटों के सरेंडर होने से सरकार को करीब 600 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ा है।

विजय कुमार सिन्हा
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सरेंडर करने वाली कंपनियों पर ‘ब्लैकलिस्ट’ की तलवार

सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है जिन्होंने घाटे का बहाना बनाकर बीच में ही बालू घाटों का ठेका छोड़ दिया (सरेंडर कर दिया)। विजय सिन्हा ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी कंपनियों को भविष्य में होने वाले किसी भी नए टेंडर (Bidding) में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। चाहे वे अपना नाम बदल लें या नई कंपनी बना लें, विभाग की तकनीक उन्हें पहचान कर बाहर का रास्ता दिखाएगी। सरकार का मानना है कि इन कंपनियों ने अवैध खनन के जरिए “शॉर्टकट” कमाई की कोशिश की, लेकिन विभाग की मुस्तैदी ने उनकी दाल नहीं गलने दी।

‘बिहारी योद्धा’ को इनाम और अवैध परिवहन पर नकेल

अवैध खनन को रोकने के लिए ‘जन भागीदारी’ मॉडल को अपनाते हुए सरकार ने “बिहारी योद्धा पुरस्कार” की शुरुआत की है। इसके तहत अवैध खनन की सूचना देने वाले मुखबिरों को नकद इनाम दिया जा रहा है। हाल ही में विभाग ने 71 मुखबिरों के बैंक खातों में 37 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की है।

कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

छापेमारी: प्रदेश भर में 50,000 से अधिक औचक निरीक्षण और छापेमारी की गई है।

भारी जुर्माना: ओवरलोडिंग और बिना लाइसेंस परिवहन करने वाले वाहनों पर 1 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।

पत्थर उद्योग: बालू के साथ-साथ अब सरकार पत्थर खनन के पट्टे (Lease) भी जल्द जारी करने वाली है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विजय कुमार सिन्हा
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माफिया मुक्त बिहार की ओर कदम

बिहार सरकार की यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सीधे तौर पर उन सिंडिकेट्स को चेतावनी है जो बॉर्डर पार से अवैध तरीके से खनिज लाकर राज्य के राजस्व को चूना लगाते हैं। 25 गुना जुर्माने का प्रावधान न केवल एक आर्थिक दंड है, बल्कि यह अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ने की एक रणनीतिक तैयारी है।

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मनेर गोलीबारी: कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी के घर पर खूनी हमला, 15 राउंड फायरिंग से दहला इलाका

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव

बिहार की राजधानी पटना के मनेर थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा घटनाक्रम में, बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी राजेंद्र प्रसाद के घर पर हथियारबंद अपराधियों ने भीषण हमला कर दिया। शुक्रवार की देर रात ब्यापुर गांव में हुई इस वारदात में हमलावरों ने न केवल अंधाधुंध गोलीबारी की, बल्कि तलवारों और लाठी-डंडों से भी हमला किया। इस खूनी संघर्ष में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अंधाधुंध फायरिंग और तलवारों से हमला

मिली जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक दर्जन से अधिक हथियारबंद हमलावरों ने राजेंद्र प्रसाद (मंत्री के समधी) के घर को घेर लिया और करीब 15 राउंड से अधिक गोलियां चलाईं। गोलीबारी की आवाज से पूरे ब्यापुर गांव में अफरा-तफरी मच गई। फायरिंग के बाद अपराधी घर में घुस गए और वहां मौजूद लोगों पर तलवार, ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
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हमले में घायल और अस्पताल की स्थिति

इस हिंसक हमले में तीन लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं। घायलों की पहचान इस प्रकार है:

• पप्पू सिंह (राजेश कुमार): राजेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद दानापुर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।

• मनीष उर्फ गुड्डू: स्वर्गीय भूपेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें पटना एम्स में भर्ती कराया गया है।

• नीतीश उर्फ बबलू: इनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और इनका भी इलाज पटना एम्स में चल रहा है।

नामजद आरोपियों पर पुलिस की कार्रवाई

मनेर थाना पुलिस घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और घटनास्थल से कई खाली खोखे बरामद किए। परिजनों ने इस मामले में मुकेश, दीपक (पिता स्व. सत्येंद्र) और प्रिंस समेत अन्य के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला पुराने आपसी विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। मनेर थानाध्यक्ष रजनीश सिंह ने बताया कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
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बिहार की कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल

हाई-प्रोफाइल परिवार से जुड़ी इस घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सत्ताधारी दल के मंत्री के करीबी रिश्तेदार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? सोशल मीडिया पर घटना का एक कथित वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें फायरिंग की आवाज सुनी जा सकती है। फिलहाल, पुलिस वीडियो की सत्यता और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।

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बिहार में बिजली बिल का नया गणित: 10kW से ज्यादा लोड वालों के लिए ‘टाइम-ऑफ़-यूज़’ नियम लागू, जानें कब मिलेगी सस्ती बिजली

बिहार में बिजली

बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने राज्य के भारी बिजली उपभोक्ताओं के लिए ‘टाइम-ऑफ-यूज़’ (TOU/TOD) टैरिफ सिस्टम को मंजूरी दे दी है। इस नए नियम के तहत अब आपका बिजली बिल सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि आपने कितनी यूनिट जलाई है, बल्कि इस पर भी निर्भर करेगा कि आपने किस समय बिजली का उपयोग किया है। यह कदम राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए उठाया गया है।

किन उपभोक्ताओं पर होगा असर?

बिहार सरकार और बिजली कंपनियों (NBPDCL और SBPDCL) ने स्पष्ट किया है कि यह नियम वर्तमान में उन उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य होगा जिनका स्वीकृत लोड 10 किलोवाट (kW) से अधिक है। इसमें मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक परिसर, निजी अस्पताल, छोटे कारखाने, होटल और वे बड़े घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं जो भारी एयर कंडीशनिंग या मशीनों का उपयोग करते हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले ग्राहकों के लिए यह सिस्टम सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑटोमैटिक अपडेट हो जाएगा।

तीन स्लॉट में बंटा दिन: कब सस्ती और कब महंगी होगी बिजली?

नए TOU टैरिफ को समझने के लिए दिन को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। उपभोक्ताओं को अपना काम इसी हिसाब से शेड्यूल करना होगा ताकि बिल कम आए:

बिहार में बिजली
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1. ऑफ-पीक आवर (सबसे सस्ती बिजली)

समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक

दिन के इस समय सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक होती है और ग्रिड पर दबाव कम होता है। इसलिए, इस दौरान बिजली की दरें सामान्य से लगभग 10% से 20% तक सस्ती रहेंगी। यदि आप अपनी मोटर, वाशिंग मशीन या भारी मशीनें इस समय चलाते हैं, तो आपको सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

2. पीक आवर (सबसे महंगी बिजली)

समय: शाम 5:00 बजे से रात 11:00 बजे तक

यह वह समय है जब पूरे राज्य में बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है। ग्रिड को संतुलित करने के लिए इस स्लॉट में बिजली 20% तक महंगी होगी। शाम के समय एयर कंडीशनर और अन्य भारी उपकरणों का अनावश्यक उपयोग आपके मासिक बजट को बिगाड़ सकता है।

3. सामान्य दर (Normal Rates)

समय: रात 11:00 बजे से सुबह 9:00 बजे तक

देर रात से सुबह होने तक बिजली की दरें सामान्य रहेंगी। इसमें न तो कोई अतिरिक्त पेनाल्टी होगी और न ही कोई विशेष छूट।

आम जनता और छोटे उपभोक्ताओं के लिए राहत

राहत की बात यह है कि बिहार सरकार की 125 यूनिट फ्री बिजली और सब्सिडी योजना छोटे उपभोक्ताओं के लिए पहले की तरह जारी रहेगी। 10 किलोवाट से कम लोड वाले सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं पर फिलहाल इस नए टैरिफ का सीधा दबाव नहीं डाला गया है, लेकिन भविष्य में स्मार्ट मीटरिंग के विस्तार के साथ इसे सभी के लिए वैकल्पिक बनाया जा सकता है।

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कैसे बचाएं अपना पैसा? एक्सपर्ट टिप्स

अगर आपका लोड 10kW से ज्यादा है, तो इन आसान तरीकों से आप अपना बिल कम कर सकते हैं:

भारी काम दिन में निपटाएं: पानी की मोटर, कपड़े धोना या इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुबह 9 से शाम 5 के बीच ही करें।

सोलर पैनल का उपयोग: अगर आपके पास सोलर सिस्टम है, तो पीक ऑवर्स (शाम 5-11) के दौरान ग्रिड की जगह अपनी बैटरी या सोलर पावर का इस्तेमाल करें।

शिफ्ट मैनेजमेंट: छोटे कारखाने अपनी भारी मशीनरी वाली शिफ्ट को सुबह के समय में ट्रांसफर करके हजारों रुपये बचा सकते हैं।

बिहार में बिजली क्षेत्र का यह ‘टाइम-ऑफ-यूज़’ रिफॉर्म एक आधुनिक कदम है। यह न केवल उपभोक्ताओं को जागरूक बनाएगा बल्कि राज्य में बिजली कटौती की समस्या को भी कम करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि लोग उस समय बिजली का अधिक उपयोग करें जब वह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो, ताकि पीक ऑवर्स में ग्रिड फेलियर या ओवरलोडिंग की समस्या न हो।

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बिहार में ‘हरा सोना’ बदलेगा गांवों की तकदीर: बांस उद्योग को मिला आधुनिक अवतार, किसानों को 50% सब्सिडी

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बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव की सुग़बुगाहट शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने पारंपरिक खेती से इतर अब बांस (Bamboo) को एक पूर्णकालिक आधुनिक उद्योग के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया है। “बिहार बांस अर्थव्यवस्था शिखर सम्मेलन-2026” के दूरगामी परिणामों के बाद, अब धरातल पर बांस क्लस्टर और प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। यह कदम न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि बिहार के हज़ारों युवाओं और महिलाओं के लिए रोज़गार के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा।

बांस अब केवल लकड़ी नहीं, एक ‘ग्रीन इंडस्ट्री’ है

सालों से बांस को केवल निर्माण कार्यों या टोकरियाँ बनाने तक सीमित माना जाता था। लेकिन बिहार सरकार के नए विजन के तहत इसे ‘ग्रीन गोल्ड’ के रूप में देखा जा रहा है। कृषि मंत्री के अनुसार, राज्य में अब बांस की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिहार को बांस-आधारित उत्पादों (जैसे कि फर्नीचर, फैब्रिक, इथेनॉल और अगरबत्ती स्टिक) का हब बनाना है। इस योजना के केंद्र में कोसी क्षेत्र का मधेपुरा जिला है, जहाँ राज्य का पहला मॉडल ‘बांस क्लस्टर’ विकसित किया जा रहा है।

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किसानों के लिए लॉटरी: 50% सब्सिडी और सरकारी सहायता

राज्य के 27 जिलों में राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) के तहत भारी अनुदान दिया जा रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है।

• निजी जमीन पर खेती: अगर कोई किसान अपनी खाली जमीन पर बांस लगाता है, तो उसे ₹1.20 लाख प्रति हेक्टेयर की लागत पर ₹60,000 की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जा रही है।

• मेड़ पर वृक्षारोपण: जो किसान अपनी मुख्य फसल को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते, वे खेत की मेड़ों पर बांस लगा सकते हैं। इसके लिए प्रति पौधा ₹150 का अनुदान सरकार दे रही है।

• भुगतान की प्रक्रिया: यह राशि दो वर्षों में 60:40 के अनुपात में दी जाती है, जिससे पौधों के रखरखाव की निरंतरता बनी रहे।

कोसी से निकलेगी समृद्धि की राह: मधेपुरा क्लस्टर मॉडल

सरकार ने रणनीति के तहत कोसी क्षेत्र को इसके लिए चुना है क्योंकि यहाँ की मिट्टी और जलवायु बांस के लिए सर्वोत्तम है। मधेपुरा में बन रहे कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) में किसानों को न केवल उच्च गुणवत्ता वाले ‘टिशू कल्चर’ पौधे मिलेंगे, बल्कि उन्हें बांस काटने, सुखाने और प्राथमिक प्रोसेसिंग की मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसान सीधे उद्योगों को अपना माल बेच सकेंगे।

महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण रोज़गार

इस योजना का सबसे उज्ज्वल पक्ष महिलाओं की भागीदारी है। जीविका दीदियों और महिला स्वयं-सहायता समूहों को बांस से हस्तशिल्प और सजावटी सामान बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यूनिट्स लगने से पलायन में कमी आने की उम्मीद है। जब गांव में ही प्रोसेसिंग यूनिट होगी, तो युवाओं को रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

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पर्यावरण संरक्षण और भविष्य का बाज़ार

बांस अन्य पेड़ों की तुलना में 35% अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है और कार्बन उत्सर्जन को सोखने में बेजोड़ है। वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बांस की मांग जिस तरह बढ़ रही है, उसे देखते हुए बिहार का ₹1,160 करोड़ से अधिक का निर्यात लक्ष्य अब दूर नहीं लगता।

कैसे करें आवेदन?

बिहार का कोई भी किसान या उद्यमी जो इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाना चाहता है, वह उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (horticulture.bihar.gov.in) पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकता है। “पहले आओ, पहले पाओ” की नीति के कारण आवेदन में देरी करना नुकसानदेह हो सकता है।

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रामनवमी पर छावनी में बदला बिहार: 45 कंपनियां तैनात और पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द, जानें सुरक्षा का पूरा प्लान

रामनवमी

बिहार में रामनवमी के पावन पर्व को लेकर हर्षोल्लास के साथ-साथ प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में है। राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस संपन्न कराने के लिए नीतीश सरकार ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को ‘टाइट’ कर दिया गया है।

पुलिस मुख्यालय का बड़ा फैसला: रद्द हुईं छुट्टियां

त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही अवकाश की अनुमति दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर पुलिस की दृश्यता (Visibility) बढ़ाना और किसी भी अप्रिय घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया देना है। फील्ड में तैनात जवानों से लेकर आला अधिकारियों तक को अगले 48 घंटों के लिए ‘ऑन ड्यूटी’ रहने का आदेश दिया गया है।

रामनवमी
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सुरक्षा का अभेद्य किला: BISAP और रिजर्व बल की 45 कंपनियां तैनात

बिहार की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार ने भारी संख्या में अतिरिक्त बलों की मांग और तैनाती की है। आंकड़ों के अनुसार, BISAP (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) और अन्य रिजर्व बलों की लगभग 45 कंपनियां विभिन्न जिलों में भेजी गई हैं।

• BISAP की 30 कंपनियां: इन्हें विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च के लिए लगाया गया है।

• रिजर्व फोर्स की 12 कंपनियां: किसी भी आपात स्थिति के लिए इन्हें स्टैंडबाय पर रखा गया है।

• केंद्रीय बल: शांति बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 3 कंपनियों को भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।

इसके अलावा, हाल ही में पास आउट हुए 21 हजार से ज्यादा प्रशिक्षु सिपाहियों को भी सुरक्षा घेरे को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ड्रोन और CCTV से ‘तीसरी आंख’ की निगरानी

राजधानी पटना के महावीर मंदिर सहित राज्य के सभी बड़े मंदिरों और शोभायात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है। पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सायबर सेल सक्रिय है और उनके विरुद्ध आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

DJ पर पूर्ण प्रतिबंध और शोभायात्रा के नियम

इस बार रामनवमी पर प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण और तनाव की स्थिति को रोकने के लिए डीजे (DJ) बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। शोभायात्रा निकालने के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है और केवल उन्हीं रूटों पर जुलूस की अनुमति दी गई है जो पहले से निर्धारित हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी समिति नियमों का उल्लंघन करती है या निर्धारित रूट से भटकती है, तो आयोजकों पर सीधी कार्रवाई होगी।

रामनवमी
रामनवमी

संवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस

मुजफ्फरपुर, नालंदा, सासाराम, भागलपुर और गया जैसे संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। इन इलाकों में सादी वर्दी में भी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि उपद्रवियों की पहचान गुप्त रूप से की जा सके। प्रशासन ने स्थानीय ‘शांति समितियों’ के साथ बैठक कर आम जनता से भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।

बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन का यह सख्त रुख स्पष्ट करता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारी बल की तैनाती और तकनीक के इस्तेमाल से रामनवमी के पर्व को सुरक्षित और गरिमामय बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।

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बिहार में अब 21 दिन का इंतज़ार खत्म: सिर्फ 24 घंटे में मिलेगा डेथ सर्टिफिकेट, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

डेथ सर्टिफिकेट

बिहार में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में नीतीश सरकार ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को अपने परिजनों की मृत्यु के बाद ‘डेथ सर्टिफिकेट’ (Death Certificate) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही 21 दिनों का लंबा इंतज़ार करना होगा। पंचायती राज विभाग ने एक नया ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत अब आवेदन के मात्र 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

पुराने नियमों में बदलाव: 21 दिन की बाध्यता समाप्त

अब तक की व्यवस्था के अनुसार, मृत्यु की सूचना देने और प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी जटिल थी। नियमानुसार 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य था, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और सुस्त सरकारी मशीनरी के कारण लोगों को हफ्तों तक इंतज़ार करना पड़ता था। इस देरी की वजह से मृतक के आश्रितों को बैंक क्लेम, जमीन का नामांतरण (Mutation), और बीमा राशि प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बिहार सरकार की नई नियमावली “बिहार जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2025” ने अब इन सभी बाधाओं को दूर कर दिया है।

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पंचायत स्तर पर ही होगा समाधान: वार्ड सदस्य और सचिव की भूमिका

नई व्यवस्था के तहत, सरकार ने पंचायतों को सीधे तौर पर सशक्त बनाया है। अब मृत्यु की सूचना मिलते ही संबंधित पंचायत सचिव और वार्ड सदस्य की सक्रियता से डेटा को तुरंत डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। सरकार एक विशेष मोबाइल ऐप भी लॉन्च करने जा रही है, जिससे मौके पर ही सत्यापन (Verification) कर डिजिटल सर्टिफिकेट जेनरेट किया जा सकेगा। यह सर्टिफिकेट सीधे आवेदक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाएगा, जिसे कहीं भी कानूनी दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

जमीन विवाद और भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

बिहार में भूमि विवादों का एक मुख्य कारण मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली देरी भी रहा है। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने से वंशावली और जमीन के बंटवारे जैसे मामले सालों तक लटके रहते थे। अब 24 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र मिलने से ‘दाखिल-खारिज’ की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने से बिचौलियों और भ्रष्टाचार का खात्मा होगा। पंचायती राज मंत्री के अनुसार, यह व्यवस्था पारदर्शिता लाने और आम आदमी के समय की बचत करने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

डेथ सर्टिफिकेट
डेथ सर्टिफिकेट

डिजिटल डेटाबेस और भविष्य की योजनाएं

यह नई व्यवस्था न केवल तात्कालिक राहत देगी, बल्कि बिहार के सेंट्रल डेटाबेस को भी मज़बूत करेगी। हर मृत्यु का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में पुराने रिकॉर्ड खोजने में आसानी होगी। श्मशान घाट और कब्रिस्तानों के पास स्थित वार्ड सदस्यों को इस प्रक्रिया की पहली कड़ी बनाया गया है, ताकि सूचना तंत्र में कोई कमी न रहे।

बिहार सरकार का यह फैसला ‘ई-गवर्नेंस’ की दिशा में एक बड़ी जीत है। इससे न केवल आम जनता की परेशानी कम होगी, बल्कि सरकारी सेवाओं में तत्परता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। अगर आप भी बिहार के निवासी हैं, तो अब आपको ब्लॉक या नगर निगम की दौड़ लगाने की ज़रूरत नहीं है—आपकी पंचायत अब आपकी सेवा के लिए 24 घंटे तैयार है।

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बिहार मौसम अपडेट: 8 जिलों में कुदरत का कहर! IMD का ऑरेंज अलर्ट, भागलपुर-किशनगंज में महा-तूफान की आहट

बिहार मौसम अपडेट

बिहार के आसमान पर काले बादलों का डेरा जम चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों के 8 प्रमुख जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। 20 मार्च 2026 की दोपहर से ही मौसम की बदलती चाल ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठी नम हवाओं और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के मेल ने बिहार के भागलपुर और किशनगंज जैसे जिलों में ‘वेदर बम’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। अगले 24 से 48 घंटे इन इलाकों के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं।

भागलपुर और किशनगंज में ‘ऑरेंज अलर्ट’ का मतलब और प्रभाव

IMD ने स्पष्ट किया है कि भागलपुर, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल और मधुबनी में स्थिति केवल सामान्य बारिश तक सीमित नहीं रहेगी। यहाँ ‘ऑरेंज अलर्ट’ का अर्थ है—तैयार रहें! इन जिलों में 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी चलने की संभावना है। झमाझम बारिश के साथ बड़े पैमाने पर वज्रपात (Thunderstorm) का भी खतरा है। विशेषकर सीमांचल के इलाकों में नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली ठंडी हवाएं इस सिस्टम को और अधिक आक्रामक बना रही हैं, जिससे अचानक बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

खेती और आम जनजीवन पर पड़ने वाला असर

इस बेमौसम की झमाझम बारिश और आंधी का सबसे बुरा असर बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। भागलपुर के आम के बगीचों और किशनगंज के चाय के बागानों के लिए यह मौसम किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। तेज हवाएं मंजरियों और छोटे फलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, रबी की बची हुई फसलों और नई सब्जियों की खेती पर भी संकट के बादल हैं। शहरी इलाकों में जलजमाव और बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की संभावना है। कच्ची दीवारों और पुराने मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

बिहार मौसम अपडेट
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प्रशासन की मुस्तैदी और ‘ब्लैकआउट’ का डर

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने तुरंत एक्शन लिया है। भागलपुर और किशनगंज के जिलाधिकारियों ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। बिजली विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि तेज आंधी के दौरान शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए एहतियातन बिजली काटी जा सकती है, जिससे कई इलाकों में अंधेरा (Blackout) छा सकता है। NDRF और SDRF की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। स्थानीय प्रशासन ने माइकिंग के जरिए लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों से दूर रहने की हिदायत दी है।

एक्सपर्ट ओपिनियन: क्या यह ‘क्लाइमेट चेंज’ का असर है?

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च के महीने में इस तरह का तीव्र ऑरेंज अलर्ट असामान्य है। यह ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय वायुमंडलीय अस्थिरता का परिणाम हो सकता है। वातावरण में अचानक बढ़ी नमी ने ‘थंडर क्लाउड्स’ को बहुत तेजी से विकसित किया है। यह बदलाव न केवल जान-माल के लिए खतरा है, बल्कि आने वाले मॉनसून की अनिश्चितता का भी संकेत दे रहा है।

बिहार मौसम अपडेट
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बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

घर के अंदर रहें: बिजली कड़कने के दौरान खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें।

यात्रा टालें: यदि आप भागलपुर-किशनगंज हाईवे पर हैं, तो वाहन को किसी सुरक्षित और मजबूत इमारत के पास रोकें।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: वज्रपात के खतरे को देखते हुए घर के कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें।

हेल्पलाइन नंबर: किसी भी आपात स्थिति में राज्य आपदा हेल्पलाइन नंबर 1077 पर तुरंत संपर्क करें।

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