Patna student protest July Details: NEET बवाल से लेकर यूनिवर्सिटी मार्च तक, जानें 3 बड़े प्रदर्शनों की पूरी सच्चाई!

Patna student protest

बिहार की राजधानी पटना इन दिनों भारी तनाव और विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गई है। एक ओर नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का गुस्सा सड़क से लेकर विधानसभा तक गूँज रहा है, तो दूसरी ओर पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक अपने स्वाभिमान के लिए पुलिस के बैरिकेड्स से टकरा रहे हैं। Apni Vani आज आपके लिए किसी सुनी-सुनाई बात की नहीं, बल्कि जुलाई 2026 के आखिरी हफ्ते में हुए इन बड़े प्रदर्शनों की एकदम ज़मीनी और प्रामाणिक रिपोर्ट लेकर आया है। हम विस्तार से जानेंगे कि गांधी मैदान से लेकर लोक भवन तक प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच क्या-क्या हुआ।

NEET पेपर लीक और गांधी मैदान का ‘लोक भवन मार्च’

बुधवार, 22 जुलाई 2026 को पटना की सड़कों पर उस वक्त हालात बेकाबू हो गए, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन के बैनर तले हज़ारों छात्रों ने ‘लोक भवन मार्च’ निकाल दिया। छात्र नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की सख्त मांग कर रहे थे। जब यह विशाल भीड़ गांधी मैदान के पास पहुँची, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और जमकर लाठीचार्ज किया।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी झड़प हुई, जिसमें पत्थरबाजी भी देखने को मिली। कई पुलिसकर्मियों को सिर में गहरी चोटें आईं और प्रदर्शन कर रहे कई छात्र भी घायल हुए, जिन्हें तुरंत पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए पटना में 40 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में 600 से अधिक अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज की है।

वॉटर कैनन के नीचे छात्रों का ‘डांस’ और वायरल तस्वीरें

इस भीषण तनाव के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन से कुछ ऐसे अनोखे दृश्य भी सामने आए, जिन्होंने इंटरनेट पर लाखों व्यूज बटोर लिए। जब पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन चालू किया, तो छात्र पीछे हटने के बजाय उसी पानी की बौछार के नीचे खुशी से नाचने और गाने लगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर वायरल हुए वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि छात्र पुलिस के बैरिकेड्स पर किसी खिलौने की तरह झूल रहे हैं।

एक छात्र ने तो मज़ाकिया अंदाज़ में पुलिस से यहाँ तक पूछ लिया कि क्या उन्होंने आंसू गैस का इंतज़ाम किया है, क्योंकि उसे पानी का इस्तेमाल होता नहीं दिख रहा। छात्रों के इस रवैये ने इस विरोध प्रदर्शन को इंटरनेट पर एक नई ही पहचान दे दी है।

विधानसभा में भारी हंगामा और विधायकों पर हमला

सड़कों पर मचे इस बवाल की गूंज गुरुवार (23 जुलाई) को बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में भी सुनाई दी। सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी दलों के बीच हुए भारी हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। एनडीए के विधायकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बुधवार को हुए इस प्रदर्शन में छात्र नहीं, बल्कि असामाजिक तत्व और गुंडे शामिल थे।

इस हिंसा की चपेट में भाजपा के दो विधायक, विनय बिहारी और रोहित पांडे भी आ गए, जिन पर मानसून सत्र में भाग लेने जाते समय प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया था। हालांकि, इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सीपीआई लिबरेशन के विधायक संदीप सौरभ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह देश के युवाओं का स्वाभाविक गुस्सा है।

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Apnivani

पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का स्वाभिमान मार्च

नीट का बवाल थमा भी नहीं था कि गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को पटना यूनिवर्सिटी (PU) के सैकड़ों शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्रों ने एक बड़ा मोर्चा खोल दिया। यह प्रदर्शन प्रस्तावित विधायी संशोधनों के खिलाफ था, जिसके तहत 1976 के पटना यूनिवर्सिटी एक्ट और बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज एक्ट का विलय करके एक नया ढांचा बनाने की तैयारी है। पुटा (PUTA) और पीयू (PU) एम्प्लॉइज एसोसिएशन के नेतृत्व में यह मार्च अशोक राजपथ से होते हुए लोक भवन की ओर जा रहा था, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें पटना कॉलेज गेट के पास ही रोक दिया।

इसके चलते प्रदर्शनकारी राज्यपाल सह कुलाधिपति सैयद अता हसनैन को अपना ज्ञापन नहीं सौंप पाए। इस 108 साल पुरानी यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि सरकार इस कदम से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता (Autonomy) को खत्म करना चाहती है। इसके विरोध में सभी शिक्षक और कर्मचारी शुक्रवार तक सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं, जिससे पूरी शैक्षणिक व्यवस्था ठप हो गई है।

Apnivani की बात

पटना का मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल बेहद गर्म है। सरकार और प्रशासन दोनों ही मोर्चों पर भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।

क्या छात्रों पर आंसू गैस छोड़ना और शिक्षकों को उनका ज्ञापन सौंपने से रोकना प्रशासन का सही कदम है? अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएँ!

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Rohtas power grid failure: ‘शटडाउन’ के बाद भी खंभे पर दौड़ा करंट, मिस्त्री की दर्दनाक मौत!

Rohtas power grid failure

बिहार में इन दिनों बारिश का मौसम चल रहा है और हर साल की तरह इस बार भी बिजली विभाग की जर्जर व्यवस्था लोगों की जान ले रही है। ताज़ा और बेहद दर्दनाक मामला रोहतास जिले के चेनारी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मल्हीपुर से सामने आया है। यहाँ एक बिजली मिस्त्री की खंभे पर काम करने के दौरान करंट लगने से तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

इंटरनेट पर वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर किसी की भी रूह कांप सकती है, जहाँ साफ दिख रहा है कि पंजाब नेशनल बैंक के बगल वाले खंभे पर काम कर रहा मिस्त्री अचानक करंट की चपेट में आकर धड़ाम से नीचे गिर पड़ता है। Apni Vani आज सिर्फ इस मौत की खबर नहीं दे रहा, बल्कि उस भ्रष्ट और लापरवाह सिस्टम से सवाल पूछ रहा है जिसने इस मिस्त्री की जान ली है।

शटडाउन के बाद लाइन में करंट कैसे आया?

इस पूरी घटना का सबसे खौफनाक और हैरान करने वाला पहलू यह है कि मिस्त्री ने खंभे पर चढ़ने से पहले विधिवत ‘शटडाउन’ (बिजली कटवाने की प्रक्रिया) लिया था। वीडियो में मौजूद स्थानीय लोग और चश्मदीद साफ तौर पर कह रहे हैं कि लाइन ऑफ करवा दी गई थी। वहां मौजूद लोग संतोष और धीरज नाम के ऑपरेटरों का जिक्र कर रहे हैं, जिनकी ड्यूटी लाइन काटने की थी।

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जब लाइन कटी हुई थी, तो अचानक खंभे में करंट कैसे दौड़ गया? खुद बिजली विभाग के अधिकारी कैमरे पर यह कबूल कर रहे हैं कि शटडाउन दिया गया था, लेकिन लाइन अचानक कहाँ से चालू हो गई, इसकी जाँच की जा रही है। यह कोई छोटी तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक आपराधिक लापरवाही है।

बिना सुरक्षा उपकरणों के मौत के मुँह में धकेले जाते मज़दूर

ग्रामीणों ने घायल अवस्था में मिस्त्री को तुरंत अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ग्राउंड रियलिटी यह है कि ठेके पर काम करने वाले इन गरीब मिस्त्रियों को विभाग की तरफ से न तो सही सेफ्टी ग्लव्स दिए जाते हैं, न सेफ्टी बेल्ट और न ही इंसुलेटेड जूते। अपनी रोज़ी-रोटी के लिए ये मज़दूर अपनी जान हथेली पर रखकर खंभों पर चढ़ते हैं। जब अधिकारियों से सवाल पूछा जाता है, तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है कि ‘मामले की जाँच की जा रही है’। लेकिन क्या इस कागज़ी जाँच से उस गरीब परिवार का कमाने वाला सदस्य वापस लौट आएगा?

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जनता और विभाग दोनों के लिए कड़ी चेतावनी

आजकल बारिश का मौसम चल रहा है, और ऐसे समय में बिजली के तार, जर्जर खंभे और खुले हुए ट्रांसफॉर्मर मौत का खुला निमंत्रण बन जाते हैं। पिछले कुछ हफ्तों में करंट लगने से मौतों का आँकड़ा तेज़ी से बढ़ा है। यह समय है कि बिजली विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे और जगह-जगह लटकते तारों की तुरंत मरम्मत करवाए।

इसके साथ ही, Apni Vani की पूरी जनता से यह खास अपील है कि इस मौसम में खुद भी बेहद सतर्क रहें। बारिश के समय किसी भी बिजली के खंभे, ट्रांसफॉर्मर या लोहे के ग्रिल को बिल्कुल न छुएं। अगर आपके इलाके में तार टूट कर गिरा है, तो तुरंत बिजली विभाग को सूचित करें और बच्चों को ऐसी जगहों से दूर रखें।

अब आप बेबाक होकर बताइये: क्या शटडाउन के बाद लाइन चालू करने वाले उन लापरवाह ऑपरेटरों और अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए? अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर दें और ऐसे ही समाचारों की अधिसूचना के लिए सब्स्क्राइब करे!

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Bihar liquor ban smuggling 2026: वैशाली में जलजीरा के नीचे 50 लाख का ‘जाम’! पकड़ी गई खेप ने खोली सिस्टम की पोल

Bihar liquor ban smuggling 2026

बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए कई साल बीत चुके हैं, लेकिन तस्करों और सिस्टम के भ्रष्ट अधिकारियों का गठजोड़ आज भी इस कानून की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है। ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला वैशाली जिले से सामने आया है, जहाँ से गुजर रहे एक ट्रक ने देखने वालों की आंखें खोल दीं। बाहर से देखने पर यह पूरी तरह से एक आम मालवाहक ट्रक लग रहा था, जिसमें गर्मी से राहत देने वाले ‘जलजीरा’ की बोतलें करीने से सजी हुई थीं। लेकिन जब इस जलजीरे की परतों को हटाया गया, तो नीचे से जो निकला उसने पुलिस को हैरान कर दिया।

इस ट्रक में कोई छोटी-मोटी खेप नहीं, बल्कि पूरे 50 लाख रुपये की विदेशी शराब छिपाई गई थी। Apni Vani आज सिर्फ इस जब्ती की खबर नहीं बता रहा, बल्कि उस सड़े हुए सिस्टम से कड़े सवाल पूछ रहा है जिसने बिहार को शराब माफियाओं की चरागाह बना दिया है।

ऑपरेशन नीलकंठ और जलजीरे के नीचे का काला सच

जानकारी के मुताबिक, वैशाली पुलिस इन दिनों ‘ऑपरेशन नीलकंठ’ चला रही है। इसी अभियान के तहत सदर थाना क्षेत्र में पुलिस को एक मुखबिर से गुप्त सूचना मिली थी कि जलजीरा लदे एक ट्रक में कुछ भारी और संदिग्ध सामान जा रहा है। पुलिस ने जब ट्रक को रोका और ऊपर रखी जलजीरे की कुछ पेटियां हटाईं, तो उनका शक यकीन में बदल गया। जलजीरा सिर्फ एक ‘कवर’ था, असली माल तो उसके नीचे तहखाने में छिपा था।

पुलिस ने जब पूरी खेप उतरवाई, तो उसमें से 6,132 लीटर महंगी विदेशी शराब बरामद हुई। बाजार में इस खेप की कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है। तस्करों ने शराब की बोतलों को इतने शातिर तरीके से पैक किया था कि किसी भी आम चेकिंग में यह सिर्फ एक कोल्ड-ड्रिंक का ट्रक ही नजर आता।

Bihar liquor ban smuggling 2026
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माफियाओं के नाम उजागर, लेकिन सवाल बॉर्डर चेकिंग पर

इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि पुलिस के ट्रक तक पहुँचने से पहले ही ड्राइवर और खलासी मौके से फरार हो गए। हालांकि, पुलिस ने तकनीकी जांच और गाड़ी के कागजातों के आधार पर जिले के दो बड़े शराब माफियाओं— विपिन सिंह और पंकज ठाकुर की पहचान कर ली है। पुलिस का दावा है कि इस पूरी 50 लाख की खेप के पीछे इन्ही दोनों का नेटवर्क काम कर रहा था। लेकिन यहाँ एक बड़ा और चुभने वाला सवाल खड़ा होता है।

यह 50 लाख की खेप आसमान से तो नहीं टपकी होगी? यह ट्रक किसी न किसी राज्य की सीमा (बॉर्डर) से घुसा होगा। दर्जनों टोल प्लाजा और पुलिस चेकपोस्ट को पार करते हुए यह ट्रक वैशाली के सदर इलाके तक कैसे पहुँच गया? क्या रास्ते में खड़े प्रशासन की आँखों पर पट्टी बंधी थी, या फिर हर चेकपोस्ट पर ‘सुविधा शुल्क’ देकर रास्ता खरीदा गया था?

VIP कल्चर बनाम आम आदमी की मजबूरी

बिहार का यह एक कड़वा सच है कि यहाँ शराबबंदी का कानून सिर्फ गरीबों और कमजोरों पर लागू होता है। अगर किसी गरीब के झोपड़े में आधी बोतल शराब भी मिल जाए, तो पुलिस तुरंत उसे जेल में डाल देती है और उसका घर नीलाम करने की नौबत आ जाती है। लेकिन विपिन सिंह और पंकज ठाकुर जैसे माफिया 50-50 लाख रुपये का माल ट्रकों में भरकर पूरे राज्य में घुमा रहे हैं। यह बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के बिल्कुल भी संभव नहीं है।

आज शराब तस्करी बिहार में एक समानांतर अर्थव्यवस्था (Parallel Economy) बन चुकी है, जिसमें नीचे के सिपाही से लेकर ऊपर के सफेदपोशों तक का हिस्सा फिक्स है। जब तक यह ट्रक पकड़ा नहीं गया था, तब तक सब कुछ ‘सिस्टम’ के हिसाब से चल रहा था।

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सिस्टम की नाकामी और हमारी ज़िम्मेदारी

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि तस्कर हर दिन नए जुगाड़ खोज रहे हैं, कभी एम्बुलेंस में, कभी दूध के टैंकर में, तो कभी जलजीरे के नीचे। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जब 50 लाख की एक खेप पकड़ी जाती है, तो न जाने ऐसी कितनी और खेपें सफलतापूर्वक अपनी मंजिल तक पहुँच चुकी होती हैं। सरकार सिर्फ यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती कि उसने शराब पकड़ ली। असली कार्रवाई तब होगी जब उन अधिकारियों की भी वर्दी उतरेगी जिनके इलाकों से गुजरकर यह मौत का सामान बिहार के अंदर घुसा।

अब आप बेबाक होकर बताइये: क्या आपको लगता है कि बिहार में शराब की इतनी बड़ी खेप बिना किसी बड़े नेता या पुलिस अधिकारी की मिलीभगत के बॉर्डर पार कर सकती है? अपनी बेबाक राय हमें कमेंट्स में ज़रूर दें!

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Bihar Latest Government Decisions: फाइलेरिया पर ऐतिहासिक सफलता, स्कूलों में नया शिक्षक नियम और भूजल कानून की तैयारी

Bihar Latest Government Decisions

बिहार में पिछले कुछ दिनों के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा और जल प्रबंधन से जुड़े तीन बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) के खिलाफ मिली बड़ी सफलता की हो रही है। इसके अलावा प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी और भूजल संरक्षण के लिए नए कानून पर काम भी राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
आइए जानते हैं कि इन तीनों मामलों में क्या बदला है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।

फाइलेरिया के खिलाफ बिहार की बड़ी उपलब्धि

बिहार ने फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार राज्य के 57 में से 55 Implementation Units ने Transmission Assessment Survey-1 (TAS-1) सफलतापूर्वक पास कर लिया है।

इसके बाद अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों में शिक्षक सुनिश्चित करने Drug Administration (MDA) अभियान को रोकने की अनुमति मिल गई है, क्योंकि वहां संक्रमण का स्तर तय सीमा से नीचे पहुंच चुका है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि बिहार के सभी 38 जिले फाइलेरिया प्रभावित रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) और WHO की संयुक्त निगरानी, बेहतर माइक्रोप्लानिंग और Directly Observed Treatment (DOT) रणनीति ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि पूरा बिहार WHO के फाइलेरिया उन्मूलन मानदंड पूरी तरह हासिल कर चुका है। फिलहाल राज्य ने इस दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है।

प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक व्यवस्था होगी और मजबूत

राज्य सरकार प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक उपलब्धता सुधारने की दिशा में भी काम कर रही है। नई व्यवस्था के तहत लक्ष्य यह रखा गया है कि छात्रों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की तैनाती अधिक संतुलित हो। प्रस्तावित ढांचे में लगभग 30 छात्रों पर एक शिक्षक सुनिश्चित करने और प्रत्येक कक्षा में कम-से-कम एक शिक्षक उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो छोटे बच्चों की पढ़ाई, कक्षा संचालन और सीखने की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती है।

भूजल बचाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी

बिहार में लगातार बढ़ती पानी की मांग और कई इलाकों में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए राज्य सरकार नया Groundwater Regulation Law तैयार कर रही है।
सरकार का उद्देश्य कृषि, उद्योग और शहरी क्षेत्रों में भूजल के उपयोग को संतुलित करना है। प्रस्तावित कानून के जरिए भूजल दोहन पर निगरानी, जल संरक्षण को बढ़ावा और भविष्य की जरूरतों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नियम लागू किए गए तो आने वाले वर्षों में जल संकट की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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इन तीनों फैसलों का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

इन तीनों पहल का सीधा संबंध लोगों के दैनिक जीवन से है। फाइलेरिया नियंत्रण में सफलता लाखों लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाने में मदद करेगी। शिक्षा क्षेत्र में शिक्षक व्यवस्था मजबूत होने से सरकारी स्कूलों के छात्रों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिल सकता है। वहीं भूजल संरक्षण से भविष्य में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए राहत मिलने की उम्मीद है।

Apnivani की बात

स्वास्थ्य, शिक्षा और जल संरक्षण—इन तीनों क्षेत्रों में बिहार तेजी से सुधार की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। हालांकि कुछ योजनाएं अभी तैयारी के चरण में हैं, लेकिन फाइलेरिया नियंत्रण में मिली सफलता यह दिखाती है कि लगातार प्रयास और बेहतर निगरानी से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। आने वाले समय में इन नीतियों का प्रभाव जमीन पर कितना दिखता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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Lockdown In Bodhgaya: वियतनाम राष्ट्रपति के दौरे से आम जनता और पर्यटकों की बढ़ी मुश्किलें?

Lockdown In Bodhgaya

बोधगया, बिहार: अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया में मंगलवार को उस वक्त अफरा-तफरी और ‘लॉकडाउन’ जैसी स्थिति देखने को मिली, जब वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम अपनी उच्च स्तरीय टीम के साथ महाबोधि मंदिर पहुंचे। सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए गए कि आम पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को घंटों तक ट्रैफिक जाम और रूट डायवर्जन का सामना करना पड़ा। हालांकि यह दौरा भारत-वियतनाम के कूटनीतिक रिश्तों के लिए एक मील का पत्थर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके ‘साइड इफेक्ट्स’ भी चर्चा का विषय बने रहे।

एयरपोर्ट से मंदिर तक छावनी में तब्दील हुआ इलाका

वियतनाम के राष्ट्रपति के तीन दिवसीय भारत दौरे के दौरान बिहार के गया को विशेष महत्व दिया गया है। राष्ट्रपति तो लाम जैसे ही मंगलवार को गया अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरे, सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को सील कर दिया गया। एयरपोर्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उनका स्वागत तो किया, लेकिन इस भव्य स्वागत के पीछे की सुरक्षा घेराबंदी ने आम राहगीरों को परेशान कर दिया। एयरपोर्ट से लेकर बोधगया मंदिर तक के मुख्य मार्गों पर कई घंटों तक आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रही, जिससे चिलचिलाती धूप में लोग फंसे नजर आए।

महाबोधि मंदिर में आम श्रद्धालुओं की ‘नो-एंट्री’

राष्ट्रपति के स्वागत के लिए महाबोधि मंदिर परिसर को अभेद्य किले में बदल दिया गया था। जब राष्ट्रपति मंदिर के भीतर पूजा-अर्चना और विश्व शांति की कामना कर रहे थे, उस दौरान आम श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। सुरक्षा बलों की तैनाती इतनी सघन थी कि मंदिर की ओर जाने वाली हर गली और चौराहे पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। प्रशासन ने सुरक्षा के नाम पर जो ‘किलेबंदी’ की, उससे दूर-दराज से आए उन पर्यटकों को भारी निराशा हुई जिन्हें मंदिर के मुख्य द्वार से ही वापस लौटा दिया गया।

ट्रैफिक डायवर्जन और प्रशासनिक सख्ती का असर

प्रशासन ने राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पहले से ही रूट चार्ट जारी किया था, लेकिन जमीनी हकीकत उम्मीद से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण रही। कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू होने के कारण वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन बिना किसी पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था के सड़कों को ब्लॉक कर देने से रोजाना के कामकाज पर बुरा असर पड़ा। विशेषकर गया-बोधगया मुख्य मार्ग पर सन्नाटा पसरा रहा और दुकानों के शटर भी सुरक्षा कारणों से कई जगहों पर बंद करवा दिए गए थे।

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धार्मिक जुड़ाव बनाम स्थानीय चुनौती

वियतनाम और भारत के बीच बौद्ध धर्म एक मजबूत कड़ी है। राष्ट्रपति तो लाम का यह दौरा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वियतनाम से बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु हर साल बोधगया आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से बिहार के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच स्थानीय बुनियादी ढांचे और आम जनता की सुविधा को नजरअंदाज करना सही है?

कूटनीति सफल, पर प्रबंधन पर सवाल?

राष्ट्रपति का यह दौरा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और मुख्यमंत्री व अन्य अधिकारियों ने इसे बिहार के लिए गर्व की बात बताया। मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस दौरे को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा है। हालांकि, सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती साबित होगा, ताकि भविष्य में होने वाले ऐसे हाई-प्रोफाइल दौरों के दौरान आम आदमी को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।

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Bihar New CM Update: बिहार में सम्राट ‘राज’, नीतीश कुमार का इस्तीफा और एनडीए की नई रणनीति

Bihar New CM Update

बिहार की राजनीति में पिछले 24 घंटों में जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि, यह इस्तीफा अचानक नहीं था; इसके पीछे एनडीए के भीतर चल रही लंबी मंत्रणा और भविष्य की चुनावी रणनीतियां शामिल थीं।

नीतीश कुमार का इस्तीफा: एक युग का समापन

नीतीश कुमार ने आज पटना के राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंपा। इस्तीफे से पहले उन्होंने अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक की, जिसमें मंत्रियों को धन्यवाद दिया। नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार में उनके सबसे लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के एक बड़े हिस्से पर विराम लग गया है। अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि हाल ही में उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी शपथ ली थी।

सम्राट चौधरी: भाजपा का वो ‘भगवा चेहरा’ जो बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री

भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया गया है। सम्राट चौधरी, जो वर्तमान में उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे थे, अब बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में कल यानी 15 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे शपथ लेंगे।

सम्राट चौधरी का चयन भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वे कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं और बिहार में ओबीसी (OBC) राजनीति का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। भाजपा ने उन्हें आगे करके ‘लव-कुश’ समीकरण में सेंध लगाने और अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।

शपथ ग्रहण समारोह और दिग्गजों का जमावड़ा

कल पटना के लोक भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित एनडीए के कई बड़े नेता पटना पहुंच रहे हैं। सम्राट चौधरी के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। चर्चा है कि विजय सिन्हा और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे जा सकते हैं।

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बिहार की राजनीति पर क्या होगा असर?

भाजपा के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि पहली बार बिहार में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री होगा। अब तक भाजपा बिहार में ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रही है, लेकिन सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विपक्ष, विशेषकर आरजेडी (RJD) ने इस बदलाव को ‘जनादेश का अपमान’ बताया है, जबकि एनडीए इसे ‘विकसित बिहार’ की ओर बढ़ता कदम बता रहा है।

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नवादा में स्कूल पिकअप 20 फीट गहरी खाई में पलटी, मासूम आरोही की मौत, मची चीख-पुकार

नवादा

बिहार के नवादा जिले में शनिवार (12 अप्रैल 2026) को एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। गोविंदपुर प्रखंड के कमलापुर रोड पर बच्चों से भरी एक निजी स्कूल की पिकअप टेंपो अनियंत्रित होकर सड़क से 20 फीट नीचे जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन गिरने के दौरान चार बार पलटा, जिससे उसमें सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई। इस भीषण दुर्घटना में 8 वर्षीय मासूम बच्ची आरोही (आयुषी) कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक बच्चे घायल हुए हैं।

कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा?

यह घटना उस समय हुई जब स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चे अपने घरों को लौट रहे थे। कमलापुर रोड पर चालक ने तेज रफ्तार वाहन से अपना नियंत्रण खो दिया। चश्मदीदों का कहना है कि गाड़ी की गति इतनी अधिक थी कि वह सीधे सड़क किनारे खेत में जा गिरी। पास के खेतों में गेहूं की कटाई कर रहे ग्रामीणों ने जब बच्चों की चीखें सुनीं, तो वे तुरंत मौके पर दौड़े। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बच्चों को गाड़ी के शीशे तोड़कर बाहर निकाला और निजी वाहनों व एंबुलेंस के जरिए सदर अस्पताल पहुंचाया।

क्षमता से दुगुने बच्चे: स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही

हादसे के बाद जो सच्चाई सामने आई है, वह शिक्षा व्यवस्था और परिवहन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस वाहन में महज 12 से 15 बच्चों के बैठने की जगह थी, उसमें स्कूल प्रशासन ने 25 मासूमों को जानवरों की तरह ठूंस रखा था। ओवरलोडिंग के कारण गाड़ी का संतुलन बिगड़ना हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ड्राइवर नशे में था और तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहा था। पुलिस ने आक्रोशित भीड़ से ड्राइवर को बचाकर हिरासत में ले लिया है।

नवादा में स्कूल पिकअप 20 फीट गहरी खाई
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अस्पताल में अफरा-तफरी, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

सदर अस्पताल में भर्ती घायल बच्चों में से कई की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। मृतका आरोही कुमारी गोविंदपुर बाजार के अमित कुमार की पुत्री थी। उसकी मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। अस्पताल परिसर में बदहवास माता-पिता स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए स्कूल भेजा था, न कि मौत के मुंह में।

प्रशासन की जांच और सुरक्षा के दावे

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि स्कूल संचालक और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन केवल हादसों के बाद ही जागता है? जिले में धड़ल्ले से चल रहे अनफिट और ओवरलोडेड स्कूली वाहनों पर नियमित चेकिंग क्यों नहीं की जाती?

नवादा में स्कूल पिकअप 20 फीट गहरी खाई
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Quick Details Table

नवादा के इस भीषण हादसे की मुख्य जानकारियों को यदि हम सारांश के रूप में देखें, तो यह घटना 12 अप्रैल 2026 को बिहार के नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत कमलापुर रोड पर घटित हुई। इस दुखद दुर्घटना में गोविंदपुर बाजार निवासी अमित कुमार की 8 वर्षीय पुत्री आरोही कुमारी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन में सवार 20 से 25 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं। प्राथमिक जांच में हादसे का सबसे बड़ा कारण वाहन का ओवरलोडेड होना और चालक की तेज रफ्तार के साथ-साथ लापरवाही को माना गया है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।

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बिहार के पशुपालकों की चमकेगी किस्मत: सभी 38 जिलों में शुरू हुई ‘हरा चारा मानचित्रण’ और वैज्ञानिक अध्ययन योजना

बिहार के पशुपालकों

बिहार की नीतीश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के सभी 38 जिलों में अब पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से हरा चारा उपलब्ध कराने और पशुपालन-संबंधी नई अध्ययन योजनाओं (Study Schemes) को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में आने वाली सबसे बड़ी समस्या—’चारे की कमी और बढ़ती लागत’—का स्थायी समाधान निकालना है। सरकार की इस नई रणनीति से न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बिहार के लाखों पशुपालकों की आय में भी रिकॉर्ड वृद्धि होने की उम्मीद है।

रिमोट सेंसिंग और इसरो (ISRO) की तकनीक से होगा चारे का सर्वे

बिहार सरकार ने इस योजना को पूरी तरह से डिजिटल और वैज्ञानिक स्वरूप दिया है। राज्य के सभी जिलों में “रिमोट सेंसिंग और GIS (भू-सूचना प्रणाली)” आधारित हरा चारा मानचित्रण (Green Fodder Mapping) अध्ययन शुरू किया गया है। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (COMPFED) और इसरो के संयुक्त सहयोग से चलाया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष से सैटेलाइट इमेज के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस जिले के किस क्षेत्र में कितनी चारा फसलें उगाई जा रही हैं और कहाँ सिंचाई या बीज की कमी के कारण चारा उत्पादन कम हो रहा है।

हरा चारा मानचित्रण'
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क्या है पशुपालन-संबंधी नई अध्ययन योजना?

बिहार सरकार केवल चारे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन को एक “लाभकारी बिजनेस” बनाने के लिए जिला स्तर पर विशेष अध्ययन योजनाएं शुरू कर रही है। इन योजनाओं के तहत पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य, बेहतर जनन (Breeding), और आधुनिक डेयरी प्रबंधन के बारे में शिक्षित किया जाएगा। पटना में हाल ही में आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला में पशु संसाधन विभाग के सचिव और कॉम्फेड के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। अब यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर पशुपालकों तक पहुँचाया जाएगा, ताकि वे पारंपरिक तरीकों को छोड़ वैज्ञानिक पद्धति अपना सकें।

चारा लागत में 70% तक की कमी लाने का लक्ष्य

एक औसत डेयरी फार्म में कुल खर्च का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा केवल पशु आहार और चारे पर खर्च होता है। बिहार में अक्सर सूखे या बाढ़ के कारण हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे पशुपालकों को महंगा सूखा भूसा या दाना खरीदना पड़ता है। इस नई मैपिंग और अध्ययन योजना के बाद, सरकार जिलों में ऐसी चारा फसलों की किस्मों को बढ़ावा देगी जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें। जब पशुपालकों को साल भर सस्ता और पौष्टिक हरा चारा मिलेगा, तो दूध उत्पादन की लागत अपने आप कम हो जाएगी और सीधे तौर पर किसान का मुनाफा बढ़ जाएगा।

युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर

बिहार सरकार की यह योजना केवल मौजूदा पशुपालकों के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक वरदान साबित हो सकती है। “समग्र गव्य विकास योजना” के साथ इस अध्ययन योजना को जोड़कर, सरकार युवाओं को डेयरी उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही है। जिलों में होने वाले इन अध्ययनों से यह डेटा तैयार होगा कि कहाँ नई डेयरी यूनिट्स लगाई जा सकती हैं। इसके साथ ही, उन्नत चारे के बीज उत्पादन और साइलेज (Silage) मेकिंग में भी युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

हरा चारा मानचित्रण'
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डेयरी हब बनने की ओर अग्रसर बिहार

बिहार में कॉम्फेड और सुधा डेयरी पहले ही एक ब्रांड के रूप में स्थापित हैं, लेकिन अब सरकार का लक्ष्य बिहार को देश का प्रमुख “डेयरी हब” बनाना है। वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे इस सर्वे से राज्य सरकार के पास सटीक डेटा होगा, जिससे आने वाले समय में खाद, बीज और सब्सिडी का वितरण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री के आत्मनिर्भर बिहार के विजन को सफल बनाने में पशुपालन विभाग की यह नई पहल एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

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बिहार में माफिया राज का अंत: दूसरे राज्यों से अवैध बालू लाने पर लगेगा 25 गुना जुर्माना, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

बिहार

पटना, 5 अप्रैल 2026: बिहार में बालू माफिया और अवैध खनन के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे कठोर निर्णय लिया है। उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग की समीक्षा बैठक के बाद एक बड़ा ऐलान किया है। अब यदि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी दूसरे राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश या झारखंड) से बिना वैध अनुमति और चालान के बालू या अन्य खनिज बिहार की सीमा में लाता है, तो उस पर खनिज के मूल मूल्य का 25 गुना जुर्माना वसूला जाएगा।

राजस्व रिकॉर्ड तोड़ने के बाद और सख्ती

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 बिहार के खनन विभाग के लिए ऐतिहासिक रहा है। इस अवधि में विभाग ने 3592.60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 56 करोड़ रुपये अधिक है। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल सख्ती और पारदर्शी नीतियों के कारण संभव हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 78 बालू घाटों के सरेंडर होने से सरकार को करीब 600 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ा है।

विजय कुमार सिन्हा
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सरेंडर करने वाली कंपनियों पर ‘ब्लैकलिस्ट’ की तलवार

सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है जिन्होंने घाटे का बहाना बनाकर बीच में ही बालू घाटों का ठेका छोड़ दिया (सरेंडर कर दिया)। विजय सिन्हा ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी कंपनियों को भविष्य में होने वाले किसी भी नए टेंडर (Bidding) में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। चाहे वे अपना नाम बदल लें या नई कंपनी बना लें, विभाग की तकनीक उन्हें पहचान कर बाहर का रास्ता दिखाएगी। सरकार का मानना है कि इन कंपनियों ने अवैध खनन के जरिए “शॉर्टकट” कमाई की कोशिश की, लेकिन विभाग की मुस्तैदी ने उनकी दाल नहीं गलने दी।

‘बिहारी योद्धा’ को इनाम और अवैध परिवहन पर नकेल

अवैध खनन को रोकने के लिए ‘जन भागीदारी’ मॉडल को अपनाते हुए सरकार ने “बिहारी योद्धा पुरस्कार” की शुरुआत की है। इसके तहत अवैध खनन की सूचना देने वाले मुखबिरों को नकद इनाम दिया जा रहा है। हाल ही में विभाग ने 71 मुखबिरों के बैंक खातों में 37 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की है।

कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

छापेमारी: प्रदेश भर में 50,000 से अधिक औचक निरीक्षण और छापेमारी की गई है।

भारी जुर्माना: ओवरलोडिंग और बिना लाइसेंस परिवहन करने वाले वाहनों पर 1 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।

पत्थर उद्योग: बालू के साथ-साथ अब सरकार पत्थर खनन के पट्टे (Lease) भी जल्द जारी करने वाली है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विजय कुमार सिन्हा
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माफिया मुक्त बिहार की ओर कदम

बिहार सरकार की यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सीधे तौर पर उन सिंडिकेट्स को चेतावनी है जो बॉर्डर पार से अवैध तरीके से खनिज लाकर राज्य के राजस्व को चूना लगाते हैं। 25 गुना जुर्माने का प्रावधान न केवल एक आर्थिक दंड है, बल्कि यह अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ने की एक रणनीतिक तैयारी है।

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मनेर गोलीबारी: कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी के घर पर खूनी हमला, 15 राउंड फायरिंग से दहला इलाका

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव

बिहार की राजधानी पटना के मनेर थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा घटनाक्रम में, बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी राजेंद्र प्रसाद के घर पर हथियारबंद अपराधियों ने भीषण हमला कर दिया। शुक्रवार की देर रात ब्यापुर गांव में हुई इस वारदात में हमलावरों ने न केवल अंधाधुंध गोलीबारी की, बल्कि तलवारों और लाठी-डंडों से भी हमला किया। इस खूनी संघर्ष में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अंधाधुंध फायरिंग और तलवारों से हमला

मिली जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक दर्जन से अधिक हथियारबंद हमलावरों ने राजेंद्र प्रसाद (मंत्री के समधी) के घर को घेर लिया और करीब 15 राउंड से अधिक गोलियां चलाईं। गोलीबारी की आवाज से पूरे ब्यापुर गांव में अफरा-तफरी मच गई। फायरिंग के बाद अपराधी घर में घुस गए और वहां मौजूद लोगों पर तलवार, ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
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हमले में घायल और अस्पताल की स्थिति

इस हिंसक हमले में तीन लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं। घायलों की पहचान इस प्रकार है:

• पप्पू सिंह (राजेश कुमार): राजेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद दानापुर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।

• मनीष उर्फ गुड्डू: स्वर्गीय भूपेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें पटना एम्स में भर्ती कराया गया है।

• नीतीश उर्फ बबलू: इनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और इनका भी इलाज पटना एम्स में चल रहा है।

नामजद आरोपियों पर पुलिस की कार्रवाई

मनेर थाना पुलिस घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और घटनास्थल से कई खाली खोखे बरामद किए। परिजनों ने इस मामले में मुकेश, दीपक (पिता स्व. सत्येंद्र) और प्रिंस समेत अन्य के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला पुराने आपसी विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। मनेर थानाध्यक्ष रजनीश सिंह ने बताया कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
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बिहार की कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल

हाई-प्रोफाइल परिवार से जुड़ी इस घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सत्ताधारी दल के मंत्री के करीबी रिश्तेदार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? सोशल मीडिया पर घटना का एक कथित वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें फायरिंग की आवाज सुनी जा सकती है। फिलहाल, पुलिस वीडियो की सत्यता और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।

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