71 IPS अधिकारियों का तबादला, कुंदन कृष्णन बने STF चीफ, कई जिलों के SP बदले

71 IPS

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 71 IPS अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव से न केवल पुलिस मुख्यालय के समीकरण बदले हैं, बल्कि कई जिलों की सुरक्षा कमान भी नए हाथों में सौंपी गई है।

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जिलों की नई कमान: प्रमुख SP और SSP की तैनाती

बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए नए पुलिस कप्तानों की नियुक्ति की गई है। इस कड़ी में सुशील कुमार को गया जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बनाया गया है, जबकि कांतेश कुमार मिश्रा अब मुजफ्फरपुर के SSP की जिम्मेदारी संभालेंगे। भागलपुर की सुरक्षा का जिम्मा प्रमोद कुमार यादव को सौंपा गया है और विनीत कुमार को सारण (छपरा) का नया SSP नियुक्त किया गया है।

गोपालगंज जिले के पुलिस कप्तान के रूप में विनय तिवारी की वापसी हुई है, जो अपनी विशेष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमावर्ती जिले किशनगंज में संतोष कुमार और अररिया में जितेंद्र कुमार को SP बनाया गया है। वहीं, सीवान में पूरन कुमार झा, लखीसराय में अवधेश दीक्षित और अरवल में नवजोत सिमी को जिले की कमान सौंपी गई है। राजधानी पटना के यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए सागर कुमार को नया ट्रैफिक SP नियुक्त किया गया है।

पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में बदलाव

जिलों के अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अब एसटीएफ (STF) के महानिदेशक (DG) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, साथ ही वे ऑपरेशन और स्पेशल ब्रांच का जिम्मा भी देखेंगे। सुनील कुमार, जो पहले स्पेशल ब्रांच में थे, अब एडीजी (मुख्यालय) के पद पर तैनात किए गए हैं। प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का अध्यक्ष सह एमडी बनाया गया है, जबकि अमित कुमार जैन मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के नए एडीजी होंगे।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी (साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई) की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, हृदयकांत को एटीएस (ATS) का नया एसपी और अनंत कुमार को पटना का रेल एसपी नियुक्त किया गया है।

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रेंज और प्रमंडल स्तर पर नई नियुक्तियां

प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर भी अधिकारियों को बदला गया है। विवेकानंद को पूर्णिया प्रमंडल का नया आईजी (IG) बनाया गया है, जिससे सीमांचल के जिलों में निगरानी तेज होगी। आनंद कुमार को डीआईजी (विधि-व्यवस्था, पटना) के पद पर तैनात किया गया है, जिनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना होगा। कोसी प्रमंडल की जिम्मेदारी अब डीआईजी के रूप में कुमार आशीष संभालेंगे, जबकि मनोज कुमार को पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर पदस्थापित किया गया है। आर. मलार विजी को एडीजी (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) का अतिरिक्त प्रभार देकर सशस्त्र बलों के प्रबंधन को और मजबूती दी गई है।

आपकी क्या राय है? क्या नए पुलिस कप्तानों की तैनाती से बिहार में अपराध की स्थिति में सुधार होगा? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

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Nitish Kumar Launch Bihar Diary & Calendar 2026: ‘सात निश्चय-3’ के साथ विकसित बिहार का नया रोडमैप जारी!

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Patna, 2 January 2026: नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने Bihar के विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए ‘Bihar Diary 2026’ और ‘राजकीय कैलेंडर 2026’ का विमोचन किया है। पटना स्थित ‘संकल्प’ कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए बिहार की नई विकास नीति ‘सात निश्चय-3.0’ की झलक पेश की।

यह कैलेंडर सिर्फ तारीखें बताने वाला पन्ना नहीं है, बल्कि यह 2025 से 2030 तक के ‘विकसित बिहार’ के संकल्प का एक विजुअल दस्तावेज है।

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क्या है इस साल के कैलेंडर में खास?

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) द्वारा प्रकाशित इस कैलेंडर के हर पन्ने पर बिहार की बदलती तस्वीर और भविष्य के लक्ष्यों को दर्शाया गया है।

थीम: इस बार के कैलेंडर की मुख्य थीम ‘सात निश्चय-3’ है।

विजुअल्स: कैलेंडर के 12 पन्नों पर राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शानदार तस्वीरें लगाई गई हैं।

अंतिम पृष्ठ: कैलेंडर के आखिरी पन्ने पर बिहार के ‘सुपर फूड मखाना’ को जगह दी गई है, जो अब बिहार की वैश्विक पहचान बन चुका है।

सात निश्चय-3.0: विकसित बिहार के 7 स्तंभ

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात निश्चय-1 और 2 की सफलता के बाद अब ‘सात निश्चय-3’ के जरिए बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

दोगुना रोजगार – दोगुनी आय: युवाओं के लिए 1 करोड़ नौकरियों और स्वरोजगार के अवसरों का लक्ष्य।

समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार: MSME और निजी निवेश को बढ़ावा देना।

खेती से खुशहाली: चौथे कृषि रोडमैप के जरिए किसानों की आय बढ़ाना।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।

सुलभ स्वास्थ्य सेवा: गांवों तक बेहतर मेडिकल सुविधाएं और ‘नो प्राइवेट प्रैक्टिस’ नीति का कड़ाई से पालन।

आधुनिक बुनियादी ढांचा: नए एक्सप्रेस-वे, मेट्रो विस्तार और स्मार्ट शहरों का निर्माण।

सबका सम्मान – आसान जीवन: तकनीक और नवाचार के जरिए सुशासन (Good Governance)।

युवाओं और महिलाओं के लिए खास क्या है?

इस नए रोडमैप में जाति आधारित गणना 2023 में पहचाने गए 94 लाख गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ के तहत आर्थिक मदद को और सरल बनाया गया है। साथ ही, फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बिहार में नए फिल्म सिटी के निर्माण का विज़न भी इस डायरी में साझा किया गया है।

नीतीश सरकार का यह कैलेंडर 2026 यह संदेश देता है कि सरकार अब ‘सर्वांगीण विकास’ (All-round Development) की ओर कदम बढ़ा चुकी है। चाहे वो मखाना का निर्यात हो या आईटी पॉलिसी 2024, बिहार अब रुकने वाला नहीं है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

• बिहार डायरी 2026 कहाँ से मिलेगी? यह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के काउंटरों और प्रमुख सरकारी कार्यालयों में वितरण के लिए उपलब्ध होगी।

• सात निश्चय-3 कब तक चलेगा? यह योजना 2025 से 2030 तक के लिए तैयार की गई है।

क्या आप सात निश्चय-3 के तहत आने वाली नई नौकरियों की लिस्ट देखना चाहते हैं? मुझे बताएं, मैं पूरी जानकारी दे दूँगा।

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Bihar PACS Membership Campaign 2026: अब पंचायत स्तर पर मिलेंगी 25+ सरकारी सेवाएं, जानें कैसे बनें सदस्य!

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बिहार के ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 2 जनवरी 2026 से राज्य के हर पंचायत में पैक्स (PACS) सदस्यता सह जागरूकता अभियान की शुरुआत होने जा रही है। अब पैक्स केवल खाद और बीज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये गांव के “मिनी सचिवालय” और “सर्विस सेंटर” के रूप में काम करेंगे।

पैक्स अब सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि ‘मल्टी-सर्विस सेंटर’ है

सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार में पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया गया है। अब राज्य के किसान और ग्रामीण निवासी एक ही छत के नीचे 25 से अधिक डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

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पैक्स में मिलने वाली प्रमुख 25 सेवाएं:

पैक्स अब हाई-टेक हो चुके हैं। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सेवाओं की सूची इस प्रकार है:

• बैंकिंग सेवाएं: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालना और जमा करना।

• डिजिटल इंडिया सेवाएं: पैन कार्ड, आधार अपडेट, और बिजली बिल का भुगतान।

• कृषि इनपुट: खाद, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता।

• जन औषधि केंद्र: सस्ती और जेनेरिक दवाओं की बिक्री (302 पैक्स को मंजूरी)।

• अन्न भंडारण: ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदाम की सुविधा।

• प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र: मिट्टी जांच और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।

• पेट्रोल और डीजल डीलरशिप: चुनिंदा पैक्स पर अब पेट्रोल पंप भी खुल रहे हैं।

• एलपीजी वितरण: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की आसान पहुंच।

• सब्जी आउटलेट: ‘तरकारी’ ब्रांड के तहत ताजी सब्जियों का विपणन।

• बीमा और पेंशन: फसल बीमा (PMFBY) और ई-श्रम पंजीकरण जैसी सुविधाएं।

2 जनवरी से सदस्यता अभियान: आप कैसे जुड़ सकते हैं?

बिहार में वर्तमान में लगभग 1.38 करोड़ पैक्स सदस्य हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि सहकारी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

• योग्यता: आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी पंचायत का स्थाई निवासी होना चाहिए।

• आयु सीमा: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

• प्रक्रिया: आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सदस्य बन सकते हैं। 2 जनवरी से आपके पंचायत मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

• MSP पर धान खरीद: इस सीजन में अब तक 9.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है।

• गोल्ड लोन की सुविधा: बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से अब पैक्स के जरिए गोल्ड लोन भी दिया जा रहा है।

• बिचौलियों से मुक्ति: डिजिटल होने के कारण अब खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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बदल रहा है ग्रामीण बिहार

पैक्स का डिजिटलीकरण और 25 सेवाओं का एकीकरण बिहार के गांवों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यदि आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, तो 2 जनवरी के अभियान का हिस्सा जरूर बनें और पैक्स के सदस्य बनकर इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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बिहार में नौकरियों की महा-बहार: 5,500 लाइब्रेरियन और 7,000 विशेष शिक्षकों की बहाली पर लगी मुहर

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बिहार के शिक्षा विभाग ने नए साल की दहलीज पर राज्य के बेरोजगार युवाओं को एक बड़ी सौगात दी है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि नीतीश सरकार राज्य के शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री जी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि बिहार में जल्द ही 5,500 लाइब्रेरियन और लगभग 7,279 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस घोषणा के बाद उन लाखों अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी लौट आई है, जो लंबे समय से रिक्तियों का इंतजार कर रहे थे।

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लाइब्रेरियन बहाली: 14 वर्षों का लंबा इंतजार होगा खत्म

बिहार के पुस्तकालयों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आपको बता दें कि राज्य में साल 2010-11 के बाद से लाइब्रेरियन की कोई बड़ी बहाली नहीं हुई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभागीय स्तर पर रोस्टर क्लीयरेंस का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इन 5,500 पदों पर नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा (Librarian Eligibility Test) का आयोजन किया जा सकता है, जिसके बाद BPSC के माध्यम से अंतिम चयन होगा। यह कदम न केवल पुस्तकालयों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि डिग्री धारक युवाओं के करियर को भी नई दिशा देगा।

दिव्यांग बच्चों के लिए 7,000 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति

समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को धरातल पर उतारने के लिए बिहार सरकार अब विशेष बच्चों की पढ़ाई पर जोर दे रही है। राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 7,279 विशेष शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इन शिक्षकों का मुख्य कार्य दिव्यांग छात्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना और उन्हें सामान्य छात्रों के साथ मुख्यधारा में लाना होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन पदों के लिए अधियाचना जल्द ही आयोग को भेजी जाएगी, ताकि समय रहते स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके।

BPSC TRE-4 और शिक्षा विभाग का आगामी रोडमैप

शिक्षक बहाली के क्षेत्र में बिहार पहले से ही देश में मिसाल पेश कर रहा है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए शिक्षा मंत्री ने BPSC TRE-4 (चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति) का भी जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि जनवरी 2026 के मध्य तक करीब 25,000 से अधिक रिक्तियों की सूची आयोग को सौंप दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों में शिक्षा विभाग के अंदर खाली पड़े सभी तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों को भर लिया जाए, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आए।

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अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और तैयारी की रणनीति

इन बड़े पदों पर होने वाली बहाली को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगिता काफी कठिन होने वाली है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार न करें, बल्कि अपने संबंधित विषयों की तैयारी अभी से शुरू कर दें। विशेष रूप से लाइब्रेरियन पद के लिए तकनीकी ज्ञान और सामान्य अध्ययन (General Studies) पर पकड़ बनाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, उम्मीदवारों को अपने दस्तावेजों, जैसे शैक्षणिक प्रमाण पत्र और आरक्षण संबंधी कागजों को अपडेट रखने की सलाह दी गई है ताकि आवेदन के समय किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत न हो।

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Nitish Kumar Hijab Controversy : भरे मंच पर CM ने उतरवाया लेडी डॉक्टर का नकाब? RJD से लेकर कश्मीर तक गरमाई सियासत

Nitish Kumar Hijab Controversy

Nitish Kumar Hijab Controversy : बिहार की राजनीति और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का विवादों से चोली-दामन का साथ हो गया है. लेकिन इस बार मामला किसी राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि मर्यादा और सम्मान का है. पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश की सियासत को गरमा दिया है.क्या है पूरा मामला? क्यों विपक्ष नीतीश कुमार पर ‘नारी शक्ति’ के अपमान का आरोप लगा रहा है? आइए जानते हैं इस विस्तृत रिपोर्ट में.

क्या है पूरा मामला?

घटना 17 दिसंबर को पटना के एसके मेमोरियल हॉल (SK Memorial Hall) में आयोजित एक कार्यक्रम की है. राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों (Ayush Doctors) को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे.

सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी मंच पर एक महिला डॉक्टर अपना नियुक्ति पत्र लेने पहुंचीं. महिला डॉक्टर ने अपने चेहरे पर नकाब (या फेस कवर) लगा रखा था.

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वायरल वीडियो में क्या दिखा?

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जैसे ही महिला डॉक्टर सीएम के पास पहुंचीं, नीतीश कुमार ने उन्हें रोका. कथित तौर पर सीएम ने महिला के चेहरे की ओर हाथ बढ़ाया और उन्हें नकाब/फेस कवर हटाने का इशारा किया या उसे हटाने की कोशिश की, ताकि वे चेहरा देख सकें या फोटो सही आ सके. महिला डॉक्टर ने असहज होते हुए अपना चेहरा खोला.

हालांकि सीएम की मंशा क्या थी, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर एक महिला के कपड़ों या नकाब को लेकर ऐसी हरकत ने लोगों को हैरान कर दिया है.

विपक्ष का जोरदार हमला: “यह अपमानजनक है”

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर आया, राजनीतिक गलियारों में तूफान आ गया. विपक्षी पार्टियों ने इसे महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है.

  1. RJD और तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी RJD ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि “एक मुख्यमंत्री को सार्वजनिक मंच पर किसी महिला के पहनावे या नकाब के साथ छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है. यह पद की गरिमा के खिलाफ है.”

  1. महबूबा मुफ्ती और अन्य नेताओं का गुस्सा

बात बिहार से निकलकर कश्मीर तक पहुंच गई है. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुस्लिम महिलाओं को अपने हिसाब से कपड़े पहनने का हक है और किसी को भी उनके नकाब को जबरन हटाने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

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सोशल मीडिया पर जनता का फूटा गुस्सा

इंटरनेट यूजर्स इस घटना पर दो धड़ों में बंट गए हैं, लेकिन बहुतायत लोग सीएम के इस व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं.

  • आलोचकों का कहना है: “नीतीश कुमार अपनी याददाश्त और व्यवहार पर नियंत्रण खो रहे हैं. यह एक बुजुर्ग राजनेता को शोभा नहीं देता.”
  • समर्थकों का तर्क: कुछ लोगों का कहना है कि सुरक्षा कारणों या पहचान सुनिश्चित करने के लिए सीएम ने ऐसा किया होगा, इसे धार्मिक रंग नहीं देना चाहिए.

नीतीश कुमार की सेहत और व्यवहार पर उठते सवाल

यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार अपने व्यवहार के कारण चर्चा में हैं. पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे वाकये हुए हैं—कभी पीएम मोदी के पैर छूने की कोशिश, कभी मंत्रियों के सामने अजीब हरकतें—जिन्होंने उनकी सेहत (Health Issues) को लेकर बहस छेड़ी है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसी घटनाएं JDU और NDA गठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं. विपक्ष इसे ‘मानसिक अस्थिरता’ का मुद्दा बनाकर भुनाने की पूरी कोशिश करेगा.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जानबूझकर ऐसा किया या यह अनजाने में हुई भूल थी, यह जांच का विषय हो सकता है. लेकिन एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से किसी महिला (विशेषकर एक डॉक्टर) के साथ ऐसा व्यवहार करना निश्चित रूप से स्वीकार्य नहीं माना जा रहा है. अब देखना यह होगा कि नीतीश कुमार या उनका कार्यालय इस पर क्या सफाई देता है.

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: नीतीश कुमार का लेटेस्ट विवाद क्या है?

Ans: पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र देते समय एक महिला डॉक्टर का नकाब/हिजाब हटाने के इशारे को लेकर नीतीश कुमार विवादों में हैं.

Q2: यह घटना कब और कहाँ हुई?

Ans: यह घटना 17 दिसंबर 2025 को पटना के एसके मेमोरियल हॉल में हुई.

Q3: विपक्ष ने इस पर क्या कहा?

Ans: RJD और अन्य दलों ने इसे महिला विरोधी और अपमानजनक बताया है.

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Nitish Kumar To Take Oath As CM For The 10th Time, NDA का पावर शो अब शुरू

Nitish Kumar

पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आज राजनीतिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री Nitish Kumar रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 13 से अधिक राज्यों के मुख्यमंत्री, NDA घटक दलों के प्रमुख और हजारों समर्थक मौजूद रहेंगे।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान नीतीश कुमार को शपथ दिलाएँगे, और इसके साथ ही 18–20 मंत्रियों की नई कैबिनेट भी अस्तित्व में आएगी।

नई सरकार, नया संतुलन—NDA की रणनीति अब लागू होगी

NDA नेतृत्व आज ही सीट बंटवारे, डिप्टी सीएम की भूमिकाओं और अनुभवी–युवा चेहरों के संतुलन को सार्वजनिक करेगा। नई सरकार कानून व्यवस्था, रोज़गार, शिक्षा सुधार, महिला सुरक्षा और इंफ़्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े एजेंडों पर काम शुरू करने की घोषणा करेगी।

पूरे बिहार में टीवी, OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस आयोजन का लाइव प्रसारण होगा। विपक्ष पहले से ही “जनादेश की नैतिकता” पर सवाल उठा रहा है, जबकि NDA समर्थक इसे “स्थिरता + विकास युग की नई शुरुआत” बता रहे हैं।

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शपथ के बाद क्या बदलने वाला है?

नई सरकार के गठन के तुरंत बाद पहला कदम प्रशासनिक फेरबदल, कानून व्यवस्था की मॉनिटरिंग और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स की समीक्षा होगा। शिक्षण संस्थानों, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि-नीति और सड़क नेटवर्क के लिए अगले 90 दिनों का रोडमैप पेश किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, नई कैबिनेट उद्योग निवेश, IT पार्क, महिला स्किल डेवलपमेंट, और स्मार्ट-विलेज मॉडल पर प्राथमिक काम शुरू करेगी ताकि अगले दो साल में राज्य की रैंकिंग बड़े बदलाव देख सके।

जनता की उम्मीदें—क्या यह कार्यकाल बिहार की दिशा बदलेगा?

बिहार के लोग इस सरकार से पिछले वर्षों की कमियों को सुधारने, युवा रोज़गार को प्राथमिकता देने, और जमीन पर विकास को महसूस कराने की उम्मीद कर रहे हैं।

सवाल यह है—क्या नीतीश कुमार का यह 10वाँ कार्यकाल वास्तव में ‘स्थिरता + सुशासन’ का नया अध्याय लिख पाएगा? क्या NDA की यह टीम बिहार की राजनीतिक गर्माहट को ठंडा कर पाएगी?

आज के बाद बिहार की राजनीतिक कहानी एक नई दिशा पकड़ने वाली है—और पूरा देश देख रहा है कि यह कदम आने वाले वर्षों को कैसे आकार देगा।

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Bihar Political Storm 2025: विधानसभा भंग, नई सरकार की शपथ कल, बिहार में नई सरकार की उल्टी गिनती शुरू

Political Storm

बिहार की सियासत में बड़ी Political Storm तब मची जब 19 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने 17वीं विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। तुरंत बाद नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया और राज्यपाल ने इसे स्वीकार भी कर लिया।

अब NDA, जिसकी चुनाव में निर्णायक जीत हुई है, नई सरकार गठन की तैयारियों में तेज़ी से जुट चुका है। सभी घटक दलों की संयुक्त बैठक में नए मंत्रियों, विभागों और सत्ता-साझेदारी पर लंबी चर्चा हुई।

20 नवंबर: गांधी मैदान में होगा भव्य शपथग्रहण

पटना का गांधी मैदान 20 नवंबर को एक ऐतिहासिक दृश्य का गवाह बनेगा, जहां नीतीश कुमार लगातार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सुबह 11:30 बजे होने वाले समारोह में 22–23 मंत्रियों की टीम भी शपथ लेगी—जिसमें JDU–BJP का बराबर प्रतिनिधित्व, साथ ही लोजपा, हम और अन्य NDA के सहयोगी दलों के चेहरे शामिल होंगे।

Political Storm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और देश के 13 से अधिक राज्यों के मुख्यमंत्री बतौर प्रमुख अतिथि इस समारोह में मौजूद रहेंगे। सुरक्षा के मद्देनज़र गांधी मैदान को शपथ तक आम जनता के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

नई विधानसभा का पहला सत्र—फ्लोर टेस्ट से लेकर बजट तक की तैयारी

शपथ के 10–15 दिनों के भीतर बिहार विधानसभा का पहला सत्र बुलाया जाएगा। इसमें नई सरकार की प्राथमिकताएँ, विभागवार चर्चा, फ्लोर टेस्ट, नए स्पीकर का चुनाव और बजट सत्र की रूपरेखा तय की जाएगी। अनुमान है कि दिसंबर के पहले सप्ताह में सदन की कार्यवाही शुरू हो जाएगी।

नई नीति-घोषणाओं के साथ सरकार विकास, कानून व्यवस्था और वेलफेयर योजनाओं पर अपनी दिशा स्पष्ट करेगी।

जनता की उम्मीदें vs विपक्ष के सवाल

जहाँ NDA इस बदलाव को जनादेश का सम्मान और विकासवाद की वापसी बता रहा है, वहीं विपक्ष सत्ता-समीकरण और विधानसभा भंग के फैसले पर सवाल खड़े कर रहा है।

उधर जनता नई सरकार से स्थिरता, तेज़ विकास, रोजगार, सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता की उम्मीद लिए बैठी है। बिहार अब एक नए राजनीतिक अध्याय की ओर बढ़ रहा है—और सबकी नजरें 20 नवंबर के शपथग्रहण पर टिकी हैं।

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