बिहार में थमा लाखों पक्के घरों का निर्माण, नीतीश सरकार ने केंद्र से मांगे 3000 करोड़ रुपये; जानें क्या है पूरा मामला

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बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपना पक्का घर बनाने का सपना देख रहे लाखों लाभार्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत लंबित 3,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। यह मांग ऐसे समय में की गई है जब राज्य में तकनीकी कारणों से करीब 9 लाख से अधिक घरों का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

SNA खाते का पेच और फंड में देरी

बिहार विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने स्वीकार किया कि ‘सिंगल नोडल अकाउंट’ (SNA) खोलने में हुई देरी के कारण केंद्र से फंड मिलने में समस्या आ रही है। दरअसल, केंद्र सरकार के नए नियमों के अनुसार, अब सभी योजनाओं का पैसा डिजिटल निगरानी के लिए SNA खाते के जरिए ही जारी किया जाना है। बिहार में अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, जिसकी वजह से करोड़ों की राशि अटकी हुई है।

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पक्के घरों

9 लाख से ज्यादा घर अभी भी अधूरे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए बिहार को कुल 12.19 लाख आवासों का लक्ष्य मिला था। इनमें से 12.08 लाख आवासों को स्वीकृति तो दे दी गई है, लेकिन फंड की कमी के कारण

9,16,709 आवासों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

मंत्री ने बताया कि लगभग 72,492 लाभार्थियों को अभी पहली किस्त मिलना बाकी है, जबकि 3.26 लाख से अधिक लोग दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं। बिना अगली किस्त मिले, गरीब परिवारों के लिए छत डालना नामुमकिन हो गया है।

केंद्र से विशेष रियायत की मांग

राज्य सरकार ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया है कि जब तक SNA खाता पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक नियमों में ढील देते हुए 31 मार्च, 2026 तक की राशि पुराने माध्यम से ही जारी कर दी जाए। इससे पहले जनवरी 2026 में केंद्र ने इसी तरह की राहत देते हुए 91 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिससे कुछ लाभार्थियों को लाभ मिला था। अब सरकार की कोशिश है कि होली और वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले बाकी 3000 करोड़ रुपये भी मिल जाएं

लाभार्थियों पर क्या होगा असर?

अगर केंद्र सरकार यह फंड जारी कर देती है, तो बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। 31 मार्च की समयसीमा के भीतर आवास पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दावा है कि फंड मिलते ही सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों (DBT) के जरिए किस्तों का भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि मानसून शुरू होने से पहले लोग अपने नए घरों में प्रवेश कर सकें।

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PM Modi and Nitish Kumar

प्रमुख बिंदु (Quick Facts):

मांगी गई राशि: 3,000 करोड़ रुपये।

अधूरे आवास: 9,16,709 घर।

रुकी हुई किस्तें: पहली किस्त के लिए 72,492 और दूसरी के लिए 3.26 लाख लाभार्थी लंबित।

डेडलाइन: 31 मार्च 2026 तक फंड वितरण का लक्ष्य।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका: अप्रैल 2026 से 4 गुना तक बढ़ेंगे रेट्स, जानें आपके जिले का हाल

बिहार जमीन रजिस्ट्री

बिहार में अपना घर बनाने या निवेश के लिए जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) में आमूलचूल बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत, 1 अप्रैल 2026 से बिहार के सभी 38 जिलों में जमीन की रजिस्ट्री की सरकारी दरें कई गुना तक बढ़ जाएंगी। यह बदलाव न केवल रियल एस्टेट मार्केट की सूरत बदलेगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी सीधा असर डालेगा।

MVR में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

बिहार में वर्तमान में लागू सरकारी दरें (सर्किल रेट) जमीनी हकीकत और बाजार मूल्य से कोसों दूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आखिरी बार 2013 और शहरी इलाकों में 2016 में दरों का संशोधन हुआ था। उदाहरण के तौर पर, पूर्णिया जैसे विकसित हो रहे शहरों में जहां बाजार भाव 5000-6000 रुपये प्रति वर्ग फीट है, वहीं सरकारी दर महज 1492 रुपये के आसपास अटकी है। इस भारी अंतर के कारण राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। अब सरकार बाजार और सरकारी मूल्य के बीच के इस “गैप” को खत्म करने जा रही है।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका

जिलों में सर्वे का काम अंतिम चरण में

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के निर्देशानुसार, सभी जिलाधिकारियों (DM) की अध्यक्षता वाली समितियों ने सर्वे का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, पटना, बेतिया और जहानाबाद जैसे जिलों में नई दरों का प्रस्ताव तैयार है। सूत्रों की मानें तो पटना के प्राइम लोकेशंस पर सर्किल रेट में 400% तक का उछाल आ सकता है। वहीं ग्रामीण इलाकों में, जहां पिछले 12 सालों से रेट नहीं बढ़े हैं, वहां भी कम से कम 2 से 3 गुना की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

रजिस्ट्री की लागत पर क्या होगा असर?

जैसे ही 1 अप्रैल 2026 से नई दरें प्रभावी होंगी, स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क सीधे तौर पर बढ़ जाएंगे। वर्तमान में जो रजिस्ट्री 1 लाख रुपये में हो जाती है, उसी के लिए भविष्य में 3 से 4 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग और उन युवाओं पर पड़ेगा जो होम लोन लेकर प्लॉट खरीदना चाहते हैं। सर्किल रेट बढ़ने से बैंक लोन की राशि तो बढ़ सकती है, लेकिन खरीदार की ‘डाउन पेमेंट’ क्षमता पर भारी दबाव पड़ेगा।

क्या रियल एस्टेट मार्केट में आएगा भूचाल?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा के बाद राज्य के निबंधन कार्यालयों में अभी से भीड़ बढ़नी शुरू हो गई है। लोग अप्रैल 2026 की समय सीमा से पहले अपनी रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं। हालांकि, दूसरी तरफ इस कदम से काले धन के निवेश पर लगाम लगने की उम्मीद है। जब सरकारी रेट बाजार मूल्य के करीब होंगे, तो जमीनों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।

विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ़्तार

सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री दरों में वृद्धि से प्राप्त अतिरिक्त राजस्व का उपयोग राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जाएगा। नए पुलों का निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण और नगर निकायों में बेहतर नागरिक सुविधाओं के लिए धन की उपलब्धता बढ़ेगी। बिहार के विकास के लिए राजस्व संग्रह को मजबूत करना अनिवार्य है, हालांकि विपक्ष और कुछ किसान संगठनों ने इसे ‘आम जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ’ बताया है।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका

आम खरीदारों के लिए विशेष टिप्स

अगर आप भी बिहार में जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अगले कुछ महीने काफी महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले अपने क्षेत्र के वर्तमान MVR की जानकारी bhumijankari.bihar.gov.in पर जाकर लें। यदि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, तो अप्रैल 2026 से पहले रजिस्ट्री कराने में ही समझदारी है। साथ ही, किसी भी सौदे से पहले वकील के माध्यम से नए प्रस्तावित रेट्स की संभावना की जांच जरूर कर लें ताकि भविष्य के बजट में कोई गड़बड़ी न हो।

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बिहार बनेगा ग्लोबल टेक हब: नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर नीति को दी मंजूरी, 50 करोड़ की सब्सिडी और 2 लाख नौकरियों की सौगात!

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बिहार अब केवल खेती और श्रम शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और हाई-टेक उद्योगों के केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो ऐतिहासिक नीतियों— बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2026 और सेमीकंडक्टर नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस बड़े फैसले का उद्देश्य बिहार को नवाचार और तकनीक का वैश्विक केंद्र बनाना है।

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

GCC नीति-2026: बड़ी कंपनियों को बुलावा और भारी सब्सिडी

नई जीसीसी नीति के तहत कॉल सेंटर, वित्तीय सेवाएं, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई (AI) जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को बिहार सरकार बंपर प्रोत्साहन देगी।

50 करोड़ तक का अनुदान: जो भी कंपनियां बिहार में अपना केंद्र स्थापित करेंगी, उन्हें उनके कुल पूंजीगत व्यय (Plant & Machinery) का 30% तक अनुदान मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 50 करोड़ रुपये तय की गई है।

स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता: यदि कंपनियां बिहार के स्थानीय युवाओं को रोजगार देती हैं, तो उन्हें भर्ती और पेरोल खर्च में अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

सेमीकंडक्टर नीति: 2 लाख रोजगार और 25,000 करोड़ का निवेश

बिहार सरकार ने भविष्य की तकनीक ‘सेमीकंडक्टर’ पर भी बड़ा दांव खेला है। इस नीति के जरिए राज्य में चिप डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन और डिस्प्ले फैब जैसे उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।

रोजगार का सृजन: इस नीति से राज्य में 2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

निवेश का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य इसके माध्यम से लगभग 25,000

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है। यह नीति बिहार को देश के उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर देगी जिनके पास अपनी समर्पित सेमीकंडक्टर पॉलिसी है।

आवेदन प्रक्रिया: कैसे उठाएं लाभ?

उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार के अनुसार, इच्छुक कंपनियां बिहार उद्योग विभाग के आधिकारिक पोर्टल (industry.bihar.gov.in) या ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट’ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी।

सिंगल विंडो क्लीयरेंस: निवेशकों को भटकना न पड़े, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए वेरिफिकेशन किया जाएगा।

दस्तावेज: कंपनियों को अपना प्रोजेक्ट रिपोर्ट, निवेश योजना और रोजगार का खाका जमा करना होगा।

सत्यापन और भुगतान: प्रोजेक्ट पूरा होने और विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में जारी की जाएगी।

बिहार की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

इन नीतियों के लागू होने से बिहार की छवि एक ‘इंडस्ट्रियल स्टेट’ के रूप में उभरेगी। हाई-स्किल जॉब्स के कारण बिहार के युवाओं का पलायन रुकेगा और उन्हें अपने ही राज्य में उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलेंगी। साथ ही, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ने से राज्य के राजस्व और निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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बिहार में 2 लाख से अधिक आबादी वाले कस्बों में खुलेंगे शहरी सहकारी बैंक

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बिहार सरकार ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने और छोटे शहरों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। 21 जनवरी 2026 को की गई घोषणा के अनुसार, राज्य के उन सभी कस्बों में शहरी सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks) खोले जाएंगे जिनकी जनसंख्या 2 लाख से अधिक है।

यह कदम न केवल बैंकिंग पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार को भी नई उड़ान देगा।

बिहार सरकार

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल

यह योजना केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा नवंबर 2025 में ‘सहकार कुंभ’ (Co-op Kumbh) के दौरान शुरू किए गए विजन का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सहकारी बैंकिंग के बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करना है। बिहार सरकार ने अब इस योजना को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है।

इस योजना के मुख्य उद्देश्य:

• वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): छोटे शहरों के हर नागरिक तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना।

• सस्ता ऋण: छोटे व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं को कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराना।

• रोजगार के अवसर: नए बैंक खुलने से बैंकिंग सेक्टर में स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।

• डिजिटल बैंकिंग: ‘सहकार डिजी-पे’ जैसे माध्यमों से कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देना।

बिहार के 50 से ज्यादा कस्बों को मिलेगा लाभ

बिहार सहकारिता विभाग ने नए वित्तीय वर्ष (2026-27) से इस योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया कि सहकारी बैंकों को PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समिति) से जोड़ा जाएगा।

संभावित लाभान्वित क्षेत्र:

इस योजना के तहत पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर के उप-नगरों के अलावा बिहार के लगभग 50 से ज्यादा बड़े कस्बे शामिल होंगे। इससे ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी कम होगी।

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तकनीकी सुधार और सुरक्षा

सहकारी बैंकों की छवि सुधारने के लिए सरकार ने इनके प्रबंधन और तकनीक पर विशेष ध्यान दिया है:

• NPA में गिरावट: बेहतर प्रबंधन के कारण इन बैंकों का NPA (Non-Performing Assets) 2.8% से घटकर मात्र 0.6% रह गया है, जो इनकी वित्तीय मजबूती को दर्शाता है।

• स्मार्ट बैंकिंग: ग्राहकों के लिए ‘सहकार डिजी-पे’ और ‘सहकार डिजी-लोन’ जैसे आधुनिक मोबाइल ऐप्स लॉन्च किए गए हैं।

• पारदर्शिता: बैंकिंग प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है ताकि ग्राहकों का भरोसा बढ़ सके।

छोटे व्यापारियों और किसानों के लिए वरदान

सहकारी बैंक अपनी सरल ऋण प्रक्रियाओं के लिए जाने जाते हैं। इस विस्तार से बिहार के सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSMEs) को समय पर पूंजी मिल सकेगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रबंधन होने के कारण लोगों को इन बैंकों के साथ लेनदेन करने में आसानी होती है।

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अस्पताल में धुआं उड़ाते दिखे बाहुबली विधायक अनंत सिंह, वायरल वीडियो ने बिहार की राजनीति में मचाया हड़कंप

अनंत सिंह

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो ने भूचाल ला दिया है। जेल में बंद जदयू (JDU) के बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। इस वीडियो में विधायक जी पटना के IGIMS अस्पताल में सरेआम सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद विपक्ष, खासकर आरजेडी (RJD), नीतीश सरकार पर हमलावर हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

बेउर जेल में बंद मोकामा विधायक अनंत सिंह को नियमित स्वास्थ्य जांच (Check-up) के लिए पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) लाया गया था। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि अस्पताल परिसर के भीतर, जहां ‘नो स्मोकिंग’ का सख्त नियम होता है, वहां विधायक अनंत सिंह बेफिक्र होकर सिगरेट के कश लगा रहे हैं।

अनंत सिंह

बता दें कि अनंत सिंह हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं, लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने जेल में रहते हुए भी मोकामा सीट से 28,260 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।

RJD ने उठाए गंभीर सवाल: “क्या यही है सुशासन?”

वीडियो वायरल होते ही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नीतीश सरकार की कानून-व्यवस्था और ‘सुशासन’ के दावों पर कड़े प्रहार किए हैं:

• प्रियंका भारती (RJD प्रवक्ता): उन्होंने वीडियो साझा करते हुए तंज कसा कि अनंत सिंह कानून और सुशासन को धुएं में उड़ा रहे हैं।

• एजाज अहमद (RJD नेता): उन्होंने सवाल किया कि “जो सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है, वह अपने विधायक की इस वीआईपी (VIP) संस्कृति पर चुप क्यों है? क्या जेल के नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?”

NDA और भाजपा की सफाई

मामले के तूल पकड़ने पर भाजपा प्रवक्ता कौशल कृष्ण ने इस घटना को “अस्वीकार्य और निंदनीय” बताया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में धूम्रपान करना नियमों का उल्लंघन है और अनंत सिंह को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।

अनंत सिंह

जनता में भारी आक्रोश

सोशल मीडिया पर आम लोग इस वीडियो को लेकर काफी नाराज हैं। यूजर्स का कहना है कि एक तरफ आम आदमी पर सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर जुर्माना लगाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ एक सजायफ्ता विधायक अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर कानून की धज्जियां उड़ा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब अनंत सिंह सुर्खियों में हैं, लेकिन अस्पताल के भीतर सिगरेट पीने के इस कृत्य ने बिहार की जेल प्रणाली और पुलिस अभिरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस पर कोई कड़ा संज्ञान लेता है या यह मामला भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा।

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बिहार: अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति! नीतीश सरकार ने लॉन्च की ‘जनता द्वार योजना’, घर बैठे मिलेंगी 25 सेवाएं

नीतीश

बिहार में सुशासन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता को सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ से बचाने के लिए महत्वाकांक्षी ‘जनता द्वार योजना’ का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब जाति प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड तक की सुविधाएं सीधे लोगों के मोबाइल और घर तक पहुंचेंगी।

सुशासन का नया मॉडल: क्या है ‘जनता द्वार योजना’?

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना का उद्घाटन करते हुए इसे बिहार के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव बताया। इस योजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

• जनता द्वार ऐप: सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जहाँ 25 से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

नीतीश सरकार

• 48 घंटे में डिलीवरी: जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और पेंशन संबंधी आवेदनों का निपटारा अब अधिकतम 48 घंटों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

• IT-साक्षर केंद्र: राज्य के हर जिले में 50 ‘जनता द्वार केंद्र’ खोले जाएंगे। ये केंद्र उन लोगों की मदद करेंगे जो तकनीक के साथ सहज नहीं हैं।

• टोल-फ्री हेल्पलाइन: शिकायतों और जानकारी के लिए सरकार ने 1800-XXX-XXXX नंबर जारी किया है, जिससे अधिकारी सीधे जनता से जुड़ेंगे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: “अब जनता नहीं, काम उनके पास जाएगा”

उद्घाटन के दौरान CM नीतीश कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। यह डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बिहार का बड़ा कदम है।”

वहीं, डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने इस योजना को ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

विपक्ष का रुख: स्वागत के साथ सतर्कता

विपक्ष (RJD) ने इस डिजिटल पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी प्रवक्ताओं का कहना है कि कागजों पर योजनाएं अच्छी होती हैं, लेकिन असली चुनौती ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और सर्वर की समस्याओं को दूर करना है।

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भ्रष्टाचार पर चोट और रोजगार के अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार, 500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘जनता द्वार केंद्रों’ के माध्यम से हजारों आईटी-साक्षर युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। सरकार ने अगले 6 महीनों में 1 करोड़ आवेदनों को डिजिटल माध्यम से संसाधित करने का लक्ष्य रखा है।

पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे बड़े शहरों से शुरू हुई यह योजना जल्द ही बिहार के हर गांव तक पहुंचेगी। इसमें भविष्य में AI-आधारित चैटबॉट जोड़ने की भी योजना है, जो लोगों के सवालों के तुरंत जवाब देगा।

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71 IPS अधिकारियों का तबादला, कुंदन कृष्णन बने STF चीफ, कई जिलों के SP बदले

71 IPS

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 71 IPS अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव से न केवल पुलिस मुख्यालय के समीकरण बदले हैं, बल्कि कई जिलों की सुरक्षा कमान भी नए हाथों में सौंपी गई है।

71 IPS

जिलों की नई कमान: प्रमुख SP और SSP की तैनाती

बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए नए पुलिस कप्तानों की नियुक्ति की गई है। इस कड़ी में सुशील कुमार को गया जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बनाया गया है, जबकि कांतेश कुमार मिश्रा अब मुजफ्फरपुर के SSP की जिम्मेदारी संभालेंगे। भागलपुर की सुरक्षा का जिम्मा प्रमोद कुमार यादव को सौंपा गया है और विनीत कुमार को सारण (छपरा) का नया SSP नियुक्त किया गया है।

गोपालगंज जिले के पुलिस कप्तान के रूप में विनय तिवारी की वापसी हुई है, जो अपनी विशेष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमावर्ती जिले किशनगंज में संतोष कुमार और अररिया में जितेंद्र कुमार को SP बनाया गया है। वहीं, सीवान में पूरन कुमार झा, लखीसराय में अवधेश दीक्षित और अरवल में नवजोत सिमी को जिले की कमान सौंपी गई है। राजधानी पटना के यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए सागर कुमार को नया ट्रैफिक SP नियुक्त किया गया है।

पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में बदलाव

जिलों के अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अब एसटीएफ (STF) के महानिदेशक (DG) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, साथ ही वे ऑपरेशन और स्पेशल ब्रांच का जिम्मा भी देखेंगे। सुनील कुमार, जो पहले स्पेशल ब्रांच में थे, अब एडीजी (मुख्यालय) के पद पर तैनात किए गए हैं। प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का अध्यक्ष सह एमडी बनाया गया है, जबकि अमित कुमार जैन मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के नए एडीजी होंगे।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी (साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई) की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, हृदयकांत को एटीएस (ATS) का नया एसपी और अनंत कुमार को पटना का रेल एसपी नियुक्त किया गया है।

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रेंज और प्रमंडल स्तर पर नई नियुक्तियां

प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर भी अधिकारियों को बदला गया है। विवेकानंद को पूर्णिया प्रमंडल का नया आईजी (IG) बनाया गया है, जिससे सीमांचल के जिलों में निगरानी तेज होगी। आनंद कुमार को डीआईजी (विधि-व्यवस्था, पटना) के पद पर तैनात किया गया है, जिनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना होगा। कोसी प्रमंडल की जिम्मेदारी अब डीआईजी के रूप में कुमार आशीष संभालेंगे, जबकि मनोज कुमार को पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर पदस्थापित किया गया है। आर. मलार विजी को एडीजी (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) का अतिरिक्त प्रभार देकर सशस्त्र बलों के प्रबंधन को और मजबूती दी गई है।

आपकी क्या राय है? क्या नए पुलिस कप्तानों की तैनाती से बिहार में अपराध की स्थिति में सुधार होगा? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

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Nitish Kumar Launch Bihar Diary & Calendar 2026: ‘सात निश्चय-3’ के साथ विकसित बिहार का नया रोडमैप जारी!

Bihar

Patna, 2 January 2026: नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने Bihar के विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए ‘Bihar Diary 2026’ और ‘राजकीय कैलेंडर 2026’ का विमोचन किया है। पटना स्थित ‘संकल्प’ कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए बिहार की नई विकास नीति ‘सात निश्चय-3.0’ की झलक पेश की।

यह कैलेंडर सिर्फ तारीखें बताने वाला पन्ना नहीं है, बल्कि यह 2025 से 2030 तक के ‘विकसित बिहार’ के संकल्प का एक विजुअल दस्तावेज है।

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क्या है इस साल के कैलेंडर में खास?

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) द्वारा प्रकाशित इस कैलेंडर के हर पन्ने पर बिहार की बदलती तस्वीर और भविष्य के लक्ष्यों को दर्शाया गया है।

थीम: इस बार के कैलेंडर की मुख्य थीम ‘सात निश्चय-3’ है।

विजुअल्स: कैलेंडर के 12 पन्नों पर राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शानदार तस्वीरें लगाई गई हैं।

अंतिम पृष्ठ: कैलेंडर के आखिरी पन्ने पर बिहार के ‘सुपर फूड मखाना’ को जगह दी गई है, जो अब बिहार की वैश्विक पहचान बन चुका है।

सात निश्चय-3.0: विकसित बिहार के 7 स्तंभ

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात निश्चय-1 और 2 की सफलता के बाद अब ‘सात निश्चय-3’ के जरिए बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

दोगुना रोजगार – दोगुनी आय: युवाओं के लिए 1 करोड़ नौकरियों और स्वरोजगार के अवसरों का लक्ष्य।

समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार: MSME और निजी निवेश को बढ़ावा देना।

खेती से खुशहाली: चौथे कृषि रोडमैप के जरिए किसानों की आय बढ़ाना।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।

सुलभ स्वास्थ्य सेवा: गांवों तक बेहतर मेडिकल सुविधाएं और ‘नो प्राइवेट प्रैक्टिस’ नीति का कड़ाई से पालन।

आधुनिक बुनियादी ढांचा: नए एक्सप्रेस-वे, मेट्रो विस्तार और स्मार्ट शहरों का निर्माण।

सबका सम्मान – आसान जीवन: तकनीक और नवाचार के जरिए सुशासन (Good Governance)।

युवाओं और महिलाओं के लिए खास क्या है?

इस नए रोडमैप में जाति आधारित गणना 2023 में पहचाने गए 94 लाख गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ के तहत आर्थिक मदद को और सरल बनाया गया है। साथ ही, फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बिहार में नए फिल्म सिटी के निर्माण का विज़न भी इस डायरी में साझा किया गया है।

नीतीश सरकार का यह कैलेंडर 2026 यह संदेश देता है कि सरकार अब ‘सर्वांगीण विकास’ (All-round Development) की ओर कदम बढ़ा चुकी है। चाहे वो मखाना का निर्यात हो या आईटी पॉलिसी 2024, बिहार अब रुकने वाला नहीं है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

• बिहार डायरी 2026 कहाँ से मिलेगी? यह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के काउंटरों और प्रमुख सरकारी कार्यालयों में वितरण के लिए उपलब्ध होगी।

• सात निश्चय-3 कब तक चलेगा? यह योजना 2025 से 2030 तक के लिए तैयार की गई है।

क्या आप सात निश्चय-3 के तहत आने वाली नई नौकरियों की लिस्ट देखना चाहते हैं? मुझे बताएं, मैं पूरी जानकारी दे दूँगा।

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Bihar PACS Membership Campaign 2026: अब पंचायत स्तर पर मिलेंगी 25+ सरकारी सेवाएं, जानें कैसे बनें सदस्य!

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बिहार के ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 2 जनवरी 2026 से राज्य के हर पंचायत में पैक्स (PACS) सदस्यता सह जागरूकता अभियान की शुरुआत होने जा रही है। अब पैक्स केवल खाद और बीज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये गांव के “मिनी सचिवालय” और “सर्विस सेंटर” के रूप में काम करेंगे।

पैक्स अब सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि ‘मल्टी-सर्विस सेंटर’ है

सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार में पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया गया है। अब राज्य के किसान और ग्रामीण निवासी एक ही छत के नीचे 25 से अधिक डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

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पैक्स में मिलने वाली प्रमुख 25 सेवाएं:

पैक्स अब हाई-टेक हो चुके हैं। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सेवाओं की सूची इस प्रकार है:

• बैंकिंग सेवाएं: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालना और जमा करना।

• डिजिटल इंडिया सेवाएं: पैन कार्ड, आधार अपडेट, और बिजली बिल का भुगतान।

• कृषि इनपुट: खाद, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता।

• जन औषधि केंद्र: सस्ती और जेनेरिक दवाओं की बिक्री (302 पैक्स को मंजूरी)।

• अन्न भंडारण: ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदाम की सुविधा।

• प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र: मिट्टी जांच और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।

• पेट्रोल और डीजल डीलरशिप: चुनिंदा पैक्स पर अब पेट्रोल पंप भी खुल रहे हैं।

• एलपीजी वितरण: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की आसान पहुंच।

• सब्जी आउटलेट: ‘तरकारी’ ब्रांड के तहत ताजी सब्जियों का विपणन।

• बीमा और पेंशन: फसल बीमा (PMFBY) और ई-श्रम पंजीकरण जैसी सुविधाएं।

2 जनवरी से सदस्यता अभियान: आप कैसे जुड़ सकते हैं?

बिहार में वर्तमान में लगभग 1.38 करोड़ पैक्स सदस्य हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि सहकारी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

• योग्यता: आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी पंचायत का स्थाई निवासी होना चाहिए।

• आयु सीमा: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

• प्रक्रिया: आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सदस्य बन सकते हैं। 2 जनवरी से आपके पंचायत मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

• MSP पर धान खरीद: इस सीजन में अब तक 9.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है।

• गोल्ड लोन की सुविधा: बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से अब पैक्स के जरिए गोल्ड लोन भी दिया जा रहा है।

• बिचौलियों से मुक्ति: डिजिटल होने के कारण अब खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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बदल रहा है ग्रामीण बिहार

पैक्स का डिजिटलीकरण और 25 सेवाओं का एकीकरण बिहार के गांवों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यदि आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, तो 2 जनवरी के अभियान का हिस्सा जरूर बनें और पैक्स के सदस्य बनकर इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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बिहार में नौकरियों की महा-बहार: 5,500 लाइब्रेरियन और 7,000 विशेष शिक्षकों की बहाली पर लगी मुहर

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बिहार के शिक्षा विभाग ने नए साल की दहलीज पर राज्य के बेरोजगार युवाओं को एक बड़ी सौगात दी है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि नीतीश सरकार राज्य के शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री जी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि बिहार में जल्द ही 5,500 लाइब्रेरियन और लगभग 7,279 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस घोषणा के बाद उन लाखों अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी लौट आई है, जो लंबे समय से रिक्तियों का इंतजार कर रहे थे।

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लाइब्रेरियन बहाली: 14 वर्षों का लंबा इंतजार होगा खत्म

बिहार के पुस्तकालयों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आपको बता दें कि राज्य में साल 2010-11 के बाद से लाइब्रेरियन की कोई बड़ी बहाली नहीं हुई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभागीय स्तर पर रोस्टर क्लीयरेंस का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इन 5,500 पदों पर नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा (Librarian Eligibility Test) का आयोजन किया जा सकता है, जिसके बाद BPSC के माध्यम से अंतिम चयन होगा। यह कदम न केवल पुस्तकालयों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि डिग्री धारक युवाओं के करियर को भी नई दिशा देगा।

दिव्यांग बच्चों के लिए 7,000 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति

समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को धरातल पर उतारने के लिए बिहार सरकार अब विशेष बच्चों की पढ़ाई पर जोर दे रही है। राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 7,279 विशेष शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इन शिक्षकों का मुख्य कार्य दिव्यांग छात्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना और उन्हें सामान्य छात्रों के साथ मुख्यधारा में लाना होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन पदों के लिए अधियाचना जल्द ही आयोग को भेजी जाएगी, ताकि समय रहते स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके।

BPSC TRE-4 और शिक्षा विभाग का आगामी रोडमैप

शिक्षक बहाली के क्षेत्र में बिहार पहले से ही देश में मिसाल पेश कर रहा है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए शिक्षा मंत्री ने BPSC TRE-4 (चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति) का भी जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि जनवरी 2026 के मध्य तक करीब 25,000 से अधिक रिक्तियों की सूची आयोग को सौंप दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों में शिक्षा विभाग के अंदर खाली पड़े सभी तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों को भर लिया जाए, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आए।

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अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और तैयारी की रणनीति

इन बड़े पदों पर होने वाली बहाली को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगिता काफी कठिन होने वाली है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार न करें, बल्कि अपने संबंधित विषयों की तैयारी अभी से शुरू कर दें। विशेष रूप से लाइब्रेरियन पद के लिए तकनीकी ज्ञान और सामान्य अध्ययन (General Studies) पर पकड़ बनाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, उम्मीदवारों को अपने दस्तावेजों, जैसे शैक्षणिक प्रमाण पत्र और आरक्षण संबंधी कागजों को अपडेट रखने की सलाह दी गई है ताकि आवेदन के समय किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत न हो।

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