बिहार में 2 लाख से अधिक आबादी वाले कस्बों में खुलेंगे शहरी सहकारी बैंक

बिहार सरकार ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने और छोटे शहरों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। 21 जनवरी 2026 को की गई घोषणा के अनुसार, राज्य के उन सभी कस्बों में शहरी सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks) खोले जाएंगे जिनकी जनसंख्या 2 लाख से अधिक है।

यह कदम न केवल बैंकिंग पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार को भी नई उड़ान देगा।

बिहार सरकार

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल

यह योजना केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा नवंबर 2025 में ‘सहकार कुंभ’ (Co-op Kumbh) के दौरान शुरू किए गए विजन का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सहकारी बैंकिंग के बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करना है। बिहार सरकार ने अब इस योजना को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है।

इस योजना के मुख्य उद्देश्य:

• वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): छोटे शहरों के हर नागरिक तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना।

• सस्ता ऋण: छोटे व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं को कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराना।

• रोजगार के अवसर: नए बैंक खुलने से बैंकिंग सेक्टर में स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।

• डिजिटल बैंकिंग: ‘सहकार डिजी-पे’ जैसे माध्यमों से कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देना।

बिहार के 50 से ज्यादा कस्बों को मिलेगा लाभ

बिहार सहकारिता विभाग ने नए वित्तीय वर्ष (2026-27) से इस योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया कि सहकारी बैंकों को PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समिति) से जोड़ा जाएगा।

संभावित लाभान्वित क्षेत्र:

इस योजना के तहत पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर के उप-नगरों के अलावा बिहार के लगभग 50 से ज्यादा बड़े कस्बे शामिल होंगे। इससे ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी कम होगी।

बिहार

तकनीकी सुधार और सुरक्षा

सहकारी बैंकों की छवि सुधारने के लिए सरकार ने इनके प्रबंधन और तकनीक पर विशेष ध्यान दिया है:

• NPA में गिरावट: बेहतर प्रबंधन के कारण इन बैंकों का NPA (Non-Performing Assets) 2.8% से घटकर मात्र 0.6% रह गया है, जो इनकी वित्तीय मजबूती को दर्शाता है।

• स्मार्ट बैंकिंग: ग्राहकों के लिए ‘सहकार डिजी-पे’ और ‘सहकार डिजी-लोन’ जैसे आधुनिक मोबाइल ऐप्स लॉन्च किए गए हैं।

• पारदर्शिता: बैंकिंग प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है ताकि ग्राहकों का भरोसा बढ़ सके।

छोटे व्यापारियों और किसानों के लिए वरदान

सहकारी बैंक अपनी सरल ऋण प्रक्रियाओं के लिए जाने जाते हैं। इस विस्तार से बिहार के सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSMEs) को समय पर पूंजी मिल सकेगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रबंधन होने के कारण लोगों को इन बैंकों के साथ लेनदेन करने में आसानी होती है।

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