पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पहले चरण के मतदान से पहले 16 जिलों में शराब की दुकानें बंद, निर्वाचन आयोग का कड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव ‘विधानसभा चुनाव 2026’ का शंखनाद हो चुका है। पहले चरण के मतदान को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग के निर्देशानुसार, राज्य के उन 16 जिलों में शराब की दुकानें पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, जहाँ 23 अप्रैल को पहले चरण के तहत वोट डाले जाने हैं।

ड्राई डे (Dry Day) का समय और नियम

निर्वाचन आयोग के नियमानुसार, मतदान खत्म होने के समय से 48 घंटे पहले ही ड्राई डे लागू कर दिया जाता है। इस आदेश के तहत 21 अप्रैल की शाम से लेकर 23 अप्रैल की शाम 6 बजे तक (मतदान प्रक्रिया समाप्त होने तक) शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह नियम केवल सरकारी देशी-विदेशी शराब की दुकानों पर ही नहीं, बल्कि होटलों, रेस्टोरेंट्स, क्लबों और बार पर भी समान रूप से लागू होगा।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026
ApniVani

कौन से जिले होंगे प्रभावित?

पहले चरण में कुल 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। इसमें उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के प्रमुख जिले शामिल हैं, जैसे:

• कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी

• दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर

• मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम

• पश्चिम बर्धमान, बांकुरा, पुरुलिया

• पश्चिम और पूर्व मेदिनीपुर तथा झाड़ग्राम।

इन इलाकों में पुलिस और आबकारी विभाग (Excise Department) की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं ताकि अवैध शराब के भंडारण या वितरण को रोका जा सके।

निर्वाचन आयोग की सख्ती: फ्लाइंग स्क्वाड तैनात

चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए शराब के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए आयोग ने विशेष ‘फ्लाइंग स्क्वाड’ का गठन किया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, बंगाल के चुनावी क्षेत्रों से करोड़ों की नकदी और भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त की जा चुकी है। आयोग ने साफ किया है कि यदि कोई दुकान चोरी-छिपे शराब बेचते पकड़ी गई, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026
ApniVani

दूसरे चरण और परिणाम के दिन की स्थिति

बंगाल चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जिसके लिए उन संबंधित 7 जिलों (कोलकाता सहित) में 27 अप्रैल से शराब बंदी रहेगी। वहीं, 4 मई को चुनाव परिणामों (Counting Day) के दिन पूरे राज्य में ड्राई डे रहेगा।प्रशासन का कहना है कि इन पाबंदियों का मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था को बनाए रखना और मतदाताओं को बिना किसी बाहरी दबाव या प्रलोभन के वोट देने के लिए प्रेरित करना है।

Read more

Samrat Choudhary Oath Taking 2026: नीतीश कुमार का इस्तीफा, आज शपथ लेंगे बिहार के पहले BJP सीएम! जानिए 5 बड़ी बातें

Samrat Choudhary Oath Taking 2026

बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। दशकों तक बिहार की सत्ता के निर्विवाद केंद्र रहे नीतीश कुमार ने मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। और आज (15 अप्रैल), वो इतिहास रचा जा रहा है जिसका इंतज़ार भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले कई दशकों से कर रही थी।

आज सुबह ठीक 11 बजे, सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। ‘Ek Satya’ की इस एक्सक्लूसिव और डीप-रिसर्च राजनीतिक रिपोर्ट में आइए जानते हैं बिहार में हुए इस बड़े उलटफेर, आज के शपथ ग्रहण समारोह और सम्राट चौधरी के राजनीतिक सफर से जुड़ी 5 सबसे बड़ी और अहम बातें।

नीतीश कुमार की विदाई: ‘सुशासन बाबू’ युग का अंत

बिहार में पिछले दो दशकों से ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री के रूप में लंबा सफर अब खत्म हो गया है। हाल ही में उनके राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद, मंगलवार को उन्होंने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को पटना के ‘लोक भवन’ में अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया।

इस्तीफा देने के बाद एनडीए (NDA) विधायक दल की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक की सबसे खूबसूरत तस्वीर वो थी जब खुद नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी का फूल-मालाओं से स्वागत किया, उनकी पीठ थपथपाई और अपना आशीर्वाद दिया।

75 साल के इतिहास में पहली बार BJP का ‘अपना’ मुख्यमंत्री

यह पल भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक जीत है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में 89 विधायकों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद अब तक ‘छोटे भाई’ की भूमिका में थी।

लेकिन अब महाराष्ट्र की तर्ज़ पर बीजेपी ने यहाँ भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इसी के साथ सम्राट चौधरी बिहार के इतिहास में पहले विशुद्ध BJP मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

Samrat Choudhary Oath Taking 2026
Apni Vani

आज 11 बजे होगा शपथ ग्रहण समारोह (Oath Ceremony)

आज (बुधवार, 15 अप्रैल 2026) का दिन पटना की सड़कों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है।

समय और स्थान: सम्राट चौधरी आज सुबह ठीक 11:00 बजे पटना के प्रतिष्ठित ‘लोक भवन’ (Lok Bhavan) में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

इस भव्य समारोह में केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान सहित एनडीए के कई दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री मौजूद रहेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह सातवें आसमान पर है और पूरे पटना को नए मुख्यमंत्री के स्वागत वाले बैनरों से पाट दिया गया है।

सत्ता का नया समीकरण: JD(U) से होंगे 2 डिप्टी सीएम

बीजेपी भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो गई है, लेकिन गठबंधन (NDA) के समीकरण को साधे रखने के लिए एक नया फॉर्मूला तैयार किया गया है।

राजनीतिक सूत्रों और ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई सरकार में जनता दल यूनाइटेड (JD(U)) के सम्मान को बनाए रखने के लिए JD(U) कोटे से दो उपमुख्यमंत्री (Deputy CMs) बनाए जाने की पूरी संभावना है। यह सत्ता का एक ऐसा बैलेंस है जो यह सुनिश्चित करेगा कि 2026 के इस राजनीतिक बदलाव के बाद भी NDA पूरी मजबूती से काम करे।

राबड़ी देवी के मंत्री से लेकर BJP के CM तक का सफर

आखिर सम्राट चौधरी ही क्यों? सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प और कड़े संघर्षों वाला रहा है। एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आने वाले सम्राट ने 1999 में ‘राष्ट्रीय जनता दल’ (RJD) से शुरुआत की थी और राबड़ी देवी सरकार में मंत्री भी रहे।

BJP में उदय: 2018 में बीजेपी ज्वाइन करने के बाद, उन्होंने कोइरी-कुशवाहा (OBC) समाज में पार्टी की पैठ बनाई।

आक्रामक छवि: वह अपनी आक्रामक बयानबाजी और सिर पर बंधी पगड़ी (मुरैठा) के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कभी संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश कुमार को गद्दी से नहीं हटा देंगे, तब तक पगड़ी नहीं खोलेंगे। आज राजनीति का यह अजब संयोग है कि वह उन्हीं नीतीश कुमार से सत्ता का हस्तांतरण ले रहे हैं।

Apnivani की बात

नीतीश कुमार का यूं शांति से सत्ता छोड़ना और सम्राट चौधरी का सीएम बनना, भारतीय राजनीति का एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। एक ऐसे राज्य में जहाँ जातिगत समीकरण सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं, वहां एक मजबूत OBC चेहरे को आगे करके बीजेपी ने एक दूरदर्शी दांव खेला है। अब पूरा बिहार यह देखने को उत्सुक है कि ‘नए सम्राट’ के नेतृत्व में राज्य में विकास और रोजगार की क्या नई कहानी लिखी जाती है।

राजनीति की पल-पल की सटीक और सच्ची अपडेट्स के लिए ‘Apnivani’ के साथ जुड़े रहें। इस ऐतिहासिक खबर को अपने दोस्तों और परिवार के व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!

Read more

Bihar New CM Update: बिहार में सम्राट ‘राज’, नीतीश कुमार का इस्तीफा और एनडीए की नई रणनीति

Bihar New CM Update

बिहार की राजनीति में पिछले 24 घंटों में जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि, यह इस्तीफा अचानक नहीं था; इसके पीछे एनडीए के भीतर चल रही लंबी मंत्रणा और भविष्य की चुनावी रणनीतियां शामिल थीं।

नीतीश कुमार का इस्तीफा: एक युग का समापन

नीतीश कुमार ने आज पटना के राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंपा। इस्तीफे से पहले उन्होंने अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक की, जिसमें मंत्रियों को धन्यवाद दिया। नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार में उनके सबसे लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के एक बड़े हिस्से पर विराम लग गया है। अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि हाल ही में उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी शपथ ली थी।

सम्राट चौधरी: भाजपा का वो ‘भगवा चेहरा’ जो बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री

भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया गया है। सम्राट चौधरी, जो वर्तमान में उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे थे, अब बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में कल यानी 15 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे शपथ लेंगे।

सम्राट चौधरी का चयन भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वे कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं और बिहार में ओबीसी (OBC) राजनीति का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। भाजपा ने उन्हें आगे करके ‘लव-कुश’ समीकरण में सेंध लगाने और अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।

शपथ ग्रहण समारोह और दिग्गजों का जमावड़ा

कल पटना के लोक भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित एनडीए के कई बड़े नेता पटना पहुंच रहे हैं। सम्राट चौधरी के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। चर्चा है कि विजय सिन्हा और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे जा सकते हैं।

Bihar New CM Update
Apni Vani

बिहार की राजनीति पर क्या होगा असर?

भाजपा के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि पहली बार बिहार में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री होगा। अब तक भाजपा बिहार में ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रही है, लेकिन सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विपक्ष, विशेषकर आरजेडी (RJD) ने इस बदलाव को ‘जनादेश का अपमान’ बताया है, जबकि एनडीए इसे ‘विकसित बिहार’ की ओर बढ़ता कदम बता रहा है।

Read more

First LGBTQ MP India Menaka Guruswamy: सुप्रीम कोर्ट से संसद तक! जानिए देश की पहली LGBTQ+ सांसद की 5 बड़ी बातें

First LGBTQ MP India Menaka Guruswamy

भारतीय संसद के इतिहास में 6 अप्रैल 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। देश की जानी-मानी सुप्रीम कोर्ट वकील डॉ. मेनका गुरुस्वामी (Dr. Menaka Guruswamy) ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली है। इसी के साथ वह भारत की पहली खुले तौर पर ‘LGBTQ+’ (क्वीर) सांसद बन गई हैं।

ममता बनर्जी की पार्टी ‘तृणमूल कांग्रेस’ (TMC) ने उन्हें पश्चिम बंगाल से अपना उम्मीदवार बनाकर उच्च सदन में भेजा है। लेकिन मेनका गुरुस्वामी आखिर हैं कौन? एक मशहूर वकील को अचानक राजनीति में क्यों लाया गया और उनके संसद पहुँचने से देश की राजनीति पर क्या पॉजिटिव और नेगेटिव असर पड़ेगा? आइए ‘ApniVani’ के इस विशेष राजनीतिक विश्लेषण में समझते हैं।

कौन हैं डॉ. मेनका गुरुस्वामी? (Who is Menaka Guruswamy?)

डॉ. मेनका गुरुस्वामी कोई आम नाम नहीं हैं। उनका जन्म 1974 में हैदराबाद में हुआ था। वह देश की उन चुनिंदा महिलाओं में से हैं जिन्होंने ‘ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी’ (Oxford University) और ‘हार्वर्ड लॉ स्कूल’ (Harvard Law School) जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कानून की पढ़ाई की है।

वह सुप्रीम कोर्ट की एक सीनियर एडवोकेट हैं। उनका नाम 2019 में प्रतिष्ठित ‘Time Magazine’ की दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में भी शामिल हो चुका है।

धारा 377 को खत्म कराने में रहा है सबसे बड़ा हाथ

अगर आज भारत में LGBTQ+ कम्युनिटी को सम्मान की नज़र से देखा जा रहा है, तो उसका बहुत बड़ा श्रेय मेनका गुरुस्वामी को जाता है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के जिस ऐतिहासिक फैसले ने ‘धारा 377’ (Section 377) को खत्म कर भारत में समलैंगिकता (Homosexuality) को अपराध की श्रेणी से बाहर किया था, मेनका गुरुस्वामी उस केस की लीड वकील थीं। उन्होंने ही कोर्ट में दलील दी थी कि “प्यार और सहमति से बने रिश्तों को अपराध नहीं माना जा सकता।”

TMC ने उन्हें राज्यसभा का टिकट क्यों दिया? (राजनीतिक मायने)

ममता बनर्जी ने मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा भेजकर एक बहुत बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है।

पहला, TMC संसद में ऐसे तेज़-तर्रार वकीलों को खड़ा करना चाहती है जो संविधान और कानून के मुद्दे पर सत्ता पक्ष (सरकार) को जोरदार तरीके से घेर सकें।

दूसरा, इस फैसले से TMC ने खुद को एक बेहद ‘प्रोग्रेसिव’ (Progressive) और आधुनिक सोच वाली पार्टी के रूप में प्रोजेक्ट किया है, जो समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों को मुख्यधारा में ला रही है।

First LGBTQ MP India Menaka Guruswamy
Apni Vani

इस फैसले का ‘पॉजिटिव’ (Positive) असर क्या होगा?

मेनका गुरुस्वामी का संसद पहुँचना कई मायनों में बहुत सकारात्मक (Positive) है:

  • असली प्रतिनिधित्व (True Representation): अब तक LGBTQ+ कम्युनिटी की आवाज़ संसद में उठाने वाला कोई अपना नहीं था। अब उनके हक और अधिकारों पर सीधा कानून बनाने में एक अनुभवी वकील की भूमिका होगी।
  • संविधान की रक्षा: एक संवैधानिक विशेषज्ञ होने के नाते, वह संसद में पास होने वाले नए कानूनों की बारीकी से समीक्षा कर सकेंगी ताकि किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन न हो।
  • युवाओं को प्रेरणा: यह उन लाखों युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी जीत है जो अपनी ‘आइडेंटिटी’ (Identity) को लेकर डरे रहते हैं।

चुनौतियां और ‘नेगेटिव’ (Negative) पहलू क्या हो सकते हैं?

राजनीति का मैदान कोर्टरूम से बहुत अलग और कठोर होता है:

  • रूढ़िवादी ताकतों का विरोध: भारतीय समाज और राजनीति आज भी काफी हद तक पारंपरिक (Traditional) है। उन्हें कट्टरपंथी और रूढ़िवादी राजनीतिक दलों या नेताओं के निजी हमलों का सामना करना पड़ सकता है।
  • पहचान तक सीमित रहने का खतरा: सबसे बड़ा डर यह है कि कहीं मीडिया और विरोधी नेता उन्हें सिर्फ एक ‘LGBTQ+ सांसद’ के टैग तक ही सीमित न कर दें, जबकि वह एक इंटरनेशनल लेवल की वकील हैं।
  • जमीनी राजनीति से दूरी: चूँकि वह एक एलीट (Elite) बैकग्राउंड से आती हैं, इसलिए आम जनता की बुनियादी समस्याओं (सड़क, पानी, रोज़गार) से कनेक्ट करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

ApniVani की बात

डॉ. मेनका गुरुस्वामी का राज्यसभा में जाना सिर्फ एक राजनीतिक खबर नहीं, बल्कि बदलते हुए ‘नए भारत’ की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर है। यह साबित करता है कि अगर आपके पास काबिलियत है, तो समाज की कोई भी दीवार आपको देश के सर्वोच्च सदन तक पहुँचने से नहीं रोक सकती। राजनीति में उनका यह नया सफर कैसा रहेगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन उन्होंने जो इतिहास रचना था, वो रच दिया है!

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि देश की संसद में हर वर्ग और कम्युनिटी का इस तरह का प्रतिनिधित्व होना ज़रूरी है? डॉ. मेनका गुरुस्वामी के सांसद बनने पर आपकी क्या बेबाक राय है? नीचे कमेंट्स में या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें!

Read more

मनेर गोलीबारी: कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी के घर पर खूनी हमला, 15 राउंड फायरिंग से दहला इलाका

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव

बिहार की राजधानी पटना के मनेर थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा घटनाक्रम में, बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के समधी राजेंद्र प्रसाद के घर पर हथियारबंद अपराधियों ने भीषण हमला कर दिया। शुक्रवार की देर रात ब्यापुर गांव में हुई इस वारदात में हमलावरों ने न केवल अंधाधुंध गोलीबारी की, बल्कि तलवारों और लाठी-डंडों से भी हमला किया। इस खूनी संघर्ष में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अंधाधुंध फायरिंग और तलवारों से हमला

मिली जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक दर्जन से अधिक हथियारबंद हमलावरों ने राजेंद्र प्रसाद (मंत्री के समधी) के घर को घेर लिया और करीब 15 राउंड से अधिक गोलियां चलाईं। गोलीबारी की आवाज से पूरे ब्यापुर गांव में अफरा-तफरी मच गई। फायरिंग के बाद अपराधी घर में घुस गए और वहां मौजूद लोगों पर तलवार, ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
Apni Vani

हमले में घायल और अस्पताल की स्थिति

इस हिंसक हमले में तीन लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं। घायलों की पहचान इस प्रकार है:

• पप्पू सिंह (राजेश कुमार): राजेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद दानापुर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।

• मनीष उर्फ गुड्डू: स्वर्गीय भूपेंद्र सिंह के पुत्र, जिन्हें पटना एम्स में भर्ती कराया गया है।

• नीतीश उर्फ बबलू: इनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और इनका भी इलाज पटना एम्स में चल रहा है।

नामजद आरोपियों पर पुलिस की कार्रवाई

मनेर थाना पुलिस घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और घटनास्थल से कई खाली खोखे बरामद किए। परिजनों ने इस मामले में मुकेश, दीपक (पिता स्व. सत्येंद्र) और प्रिंस समेत अन्य के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला पुराने आपसी विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। मनेर थानाध्यक्ष रजनीश सिंह ने बताया कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मनेर गोलीबारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
Apni Vani

बिहार की कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल

हाई-प्रोफाइल परिवार से जुड़ी इस घटना ने एक बार फिर बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सत्ताधारी दल के मंत्री के करीबी रिश्तेदार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? सोशल मीडिया पर घटना का एक कथित वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें फायरिंग की आवाज सुनी जा सकती है। फिलहाल, पुलिस वीडियो की सत्यता और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।

Read more

Raghav Chadha AAP News: पार्टी से ‘निकाले’ जाने का पूरा सच! क्या BJP या Congress में होंगे शामिल? जानिए 5 बड़ी बातें

Raghav Chadha AAP News

भारतीय राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर मची उथल-पुथल सबसे बड़ी खबर बनी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक अफ़वाहें उड़ रही हैं कि पार्टी के सबसे युवा और चर्चित चेहरे राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को AAP से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और वो जल्द ही बीजेपी या कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।

लेकिन राजनीति में जो दिखता है, वो अक्सर पूरा सच नहीं होता। आज के इस विस्तृत न्यूज़ ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि आखिर आम आदमी पार्टी के अंदर पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा है और राघव चड्ढा के खिलाफ हुए इस कड़े एक्शन की असली हकीकत क्या है।

पार्टी से नहीं, बल्कि ‘इस’ अहम पद से हुई है छुट्टी

सबसे पहले यह बहुत बड़ी गलतफहमी दूर कर लीजिए कि AAP ने राघव चड्ढा को पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। असल में, पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में ‘उपनेता’ (Deputy Leader) के पद से हटाया है।

हाल ही में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र भेजा, जिसमें स्पष्ट किया गया कि अब उपनेता की कुर्सी पर राघव चड्ढा की जगह पंजाब से ही सांसद ‘अशोक मित्तल’ बैठेंगे। इतना ही नहीं, पार्टी ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्यसभा में बोलने के लिए तय समय अब राघव को नहीं दिया जाएगा। इसके बाद राघव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर सीधा तंज कसा— “मुझे चुप कराया गया है, हराया नहीं गया है।”

केजरीवाल के ‘चहेते’ से इतनी दूरी क्यों? (विवाद की असली वजहें)

राघव चड्ढा किसी समय अरविंद केजरीवाल की आंखों के सबसे बड़े तारे हुआ करते थे। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि पार्टी ने उनके पर कतर दिए? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है उनका ‘मुश्किल वक्त में साथ न देना’।

जब दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था, तब राघव चड्ढा भारत में नहीं थे। वह अपनी आंखों के इलाज का हवाला देकर महीनों तक लंदन में रहे। पार्टी हाईकमान को उनका यह रवैया बिल्कुल रास नहीं आया कि जब पार्टी सबसे बड़े संकट में थी, तब उनका सबसे मुखर नेता विदेश में बैठा था।

Raghav Chadha AAP News
Apni Vani

संजय सिंह के साथ ‘पॉवर गेम’ की टकराहट

AAP के अंदरूनी सूत्रों का यह भी दावा है कि जब अक्टूबर 2023 में संजय सिंह जेल में थे, तब राघव चड्ढा ने राज्यसभा में खुद को पार्टी का ‘सुप्रीमो’ नेता घोषित करवाने के लिए पर्दे के पीछे से काफी जोड़-तोड़ की थी। अब जब संजय सिंह बाहर हैं और पार्टी में उनका कद फिर से मजबूत हो गया है, तो इसे राघव चड्ढा के उस पॉवर गेम का पलटवार माना जा रहा है।

क्या BJP में शामिल होंगे राघव चड्ढा?

जैसे ही राघव को पद से हटाया गया, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस राजनीतिक मौके को हाथों-हाथ लिया। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने सीधा तंज कसते हुए कहा कि राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व से खुद को अलग कर लिया है।

वहीं, AAP के नेताओं का आरोप है कि बीजेपी जानबूझकर राघव चड्ढा को प्रमोट कर रही है क्योंकि राघव संसद में सरकार के खिलाफ अब कड़े मुद्दे नहीं उठा रहे थे। हालांकि, अभी तक राघव चड्ढा या बीजेपी की तरफ से उनके पार्टी में शामिल होने को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है।

कांग्रेस (Congress) का इस पूरे विवाद पर क्या रुख है?

कांग्रेस भी इस राजनीतिक खींचतान पर गिद्ध जैसी नज़र बनाए हुए है। पंजाब कांग्रेस के बड़े नेताओं का दावा है कि राघव का पार्टी से मोहभंग लंदन ट्रिप के समय ही हो गया था और अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि वह आम आदमी पार्टी से अंदरूनी तौर पर अलग हो चुके हैं। बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही इस स्थिति का फायदा उठाना चाहते हैं, लेकिन राघव फिलहाल खामोशी से सही वक्त का इंतज़ार कर रहे हैं।

ApniVani की बात

स्वाति मालीवाल के बाद राघव चड्ढा दूसरे ऐसे बड़े नेता बन गए हैं, जिनके और AAP हाईकमान के बीच की दरार दुनिया के सामने आ गई है। फिलहाल, राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बने रहेंगे। लेकिन राजनीति में कोई भी स्थिति स्थायी नहीं होती। अगर आने वाले समय में AAP और राघव के बीच रिश्ते नहीं सुधरते हैं, तो पंजाब और दिल्ली की राजनीति कोई बहुत बड़ा मोड़ ले सकती है।

आपकी राय: आम आदमी पार्टी का राघव चड्ढा को पद से हटाना आपके हिसाब से सही फैसला है या गलत? क्या आपको लगता है कि राघव चड्ढा जल्द ही ‘कमल’ या ‘हाथ’ का साथ पकड़ लेंगे? अपनी बेबाक राजनीतिक राय नीचे कमेंट्स में या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें!

Read more

Nitin Nabin Resignation: 20 साल बाद बांकीपुर से विदाई! जानिए नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफे की 4 बड़ी इनसाइड स्टोरी

Nitin Nabin Resignation

बिहार की राजनीति में आज (30 मार्च 2026) का दिन बेहद हलचल भरा रहा है। पटना की सबसे वीआईपी सीट ‘बांकीपुर’ (Bankipur) से लगातार 5 बार चुनाव जीतते आ रहे दिग्गज नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज विधायक पद से अपना इस्तीफा दे दिया है।

लगातार 20 सालों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता का इस तरह अचानक विधानसभा छोड़ना कई लोगों को हैरान कर रहा है। कल तक उनके इस्तीफे पर जो सस्पेंस बना हुआ था, वो आज टूट गया है। आज ‘ApniVani’ के इस विशेष राजनीतिक विश्लेषण में आइए जानते हैं कि आखिर उन्होंने यह इस्तीफा क्यों दिया और इसके पीछे का पूरा गणित क्या है।

इस्तीफे की असली वजह क्या है? (संवैधानिक नियम)

नितिन नवीन के इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी या विवाद नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से एक ‘संवैधानिक मजबूरी’ और उनके प्रमोशन का हिस्सा है।

दरअसल, 16 मार्च 2026 को नितिन नवीन बिहार से निर्विरोध राज्यसभा सांसद (Rajya Sabha MP) चुने गए हैं। संविधान के ‘Prohibition of Simultaneous Membership Rules, 1950’ (अनुच्छेद 101/190) के तहत, कोई भी व्यक्ति एक ही समय में विधानसभा (MLA) और संसद (MP) दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। सांसद चुने जाने के 14 दिनों के भीतर उन्हें किसी एक सदन से इस्तीफा देना अनिवार्य था। आज (30 मार्च) इस 14 दिन की डेडलाइन का आखिरी दिन था, इसलिए उन्होंने अपनी विधायकी छोड़ दी।

रविवार का ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा: स्पीकर करते रहे इंतज़ार

इस इस्तीफे में एक जबरदस्त सस्पेंस भी देखने को मिला। विधानसभा सचिवालय की तरफ से आधिकारिक मैसेज जारी हुआ था कि नितिन नवीन रविवार सुबह 8:40 बजे स्पीकर प्रेम कुमार को अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

रविवार को छुट्टी के दिन भी खास तौर पर विधानसभा का कार्यालय खोला गया और स्पीकर इंतज़ार करते रहे। लेकिन नितिन नवीन अचानक असम के चुनावी दौरे पर रवाना हो गए। इसके बाद कई तरह की अफ़वाहें उड़ने लगीं। हालांकि, आज (सोमवार) को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने स्पीकर को नितिन नवीन का इस्तीफा सौंप दिया, जिसे तुरंत मंजूर कर लिया गया।

बांकीपुर की जनता के नाम भावुक चिट्ठी: 20 साल का सफर

इस्तीफे के साथ ही नितिन नवीन ने सोशल मीडिया (X) पर बांकीपुर की जनता और कार्यकर्ताओं के नाम एक बेहद भावुक खत लिखा।

उन्होंने लिखा, “आज मैं बांकीपुर क्षेत्र के विधायक पद से इस्तीफा दे रहा हूँ। मेरे स्वर्गीय पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा जी द्वारा सींचे गए इस क्षेत्र को मैंने पिछले 20 सालों से अपना परिवार माना है। यहाँ की जनता ने मुझे लगातार 5 बार अपना आशीर्वाद दिया।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी ने उन्हें जो नई और बड़ी ज़िम्मेदारी (राज्यसभा) दी है, उसके ज़रिए वे बिहार और बांकीपुर के विकास के लिए हमेशा समर्पित रहेंगे।

Nitin Nabin Resignation

सीएम नीतीश कुमार भी छोड़ेंगे MLC का पद

सिर्फ नितिन नवीन ही नहीं, बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) भी आज राज्य विधान परिषद (MLC) के पद से इस्तीफा देने वाले हैं। नीतीश कुमार भी 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। जेडीयू (JDU) सुप्रीमो के इस्तीफे की चिट्ठी उनकी तरफ से संजय गांधी द्वारा सौंपी जा रही है। यह बिहार के इतिहास में एक दुर्लभ मौका है जब सीएम और सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, दोनों एक साथ राज्यसभा का रुख कर रहे हैं।

ApniVani की बात

नितिन नवीन का बांकीपुर सीट छोड़ना सिर्फ एक विधायक का इस्तीफा नहीं है, बल्कि बिहार बीजेपी के लिए ‘जनरेशन शिफ्ट’ (पीढ़ीगत बदलाव) का संकेत है। अब वह राष्ट्रीय राजनीति (संसद) में बिहार की एक मज़बूत आवाज़ बनेंगे। बांकीपुर सीट खाली होने के बाद अब पटना की राजनीति में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी उपचुनाव में यह वीआईपी सीट किसके खाते में जाती है।

आपकी राय: बांकीपुर के विधायक के रूप में नितिन नवीन का 20 साल का कार्यकाल आपको कैसा लगा? आपको क्या लगता है, अब इस सीट से किस नए चेहरे को मौका मिलना चाहिए? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट्स में या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें!

Read more

Mahila Rojgar Yojana 2nd Installment: महिलाओं के खाते में आएंगे 20-20 हज़ार रुपये! दूसरी किस्त के लिए जान लें ये सख्त शर्तें

Mahila Rojgar Yojana 2nd Installment

महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस योजना के तहत महिलाओं को अपना खुद का काम या बिजनेस शुरू करने के लिए कुल 2 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है।

हाल ही में लाखों महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पहली किस्त के 10,000 रुपये भेजे गए थे। अब उन सभी महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी वाली अपडेट सामने आ रही है। चर्चा है कि इसी महीने (मार्च) के अंत तक योजना की दूसरी किस्त (2nd Installment) के रूप में 20-20 हज़ार रुपये ट्रांसफर किए जा सकते हैं। लेकिन, पैसा खाते में आने से पहले सरकार ने कुछ सख्त नियम बना दिए हैं। आइए ‘ApniVani’ के इस विशेष अपडेट में जानते हैं पूरी सच्चाई।

20 हज़ार की दूसरी किस्त का पूरा गणित

जिन महिलाओं ने पहली किस्त के 10,000 रुपये का सही इस्तेमाल करके अपना छोटा-मोटा रोजगार (जैसे सिलाई, दुकान या हैंडीक्राफ्ट) शुरू कर दिया है, उनके काम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार अब दूसरी किस्त जारी करने जा रही है।

इस चरण में शुरुआती सामग्री और कच्चा माल खरीदने के लिए 20,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। ऐसा नहीं है कि यह पैसा यूं ही बांट दिया जाएगा; रोजगार की प्रगति के आधार पर ही अगली किश्तें मिलेंगी।

खाते में पैसे आने से पहले पूरी करनी होंगी ये 3 सख्त शर्तें

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पैसों का सही इस्तेमाल हो और कोई बंदरबांट न हो। इसलिए दूसरी किस्त पाने के लिए महिलाओं को इन मानकों पर खरा उतरना होगा:

  • शर्त 1: 5,000 रुपये का अपना योगदान (Self Contribution): 20,000 रुपये की सरकारी मदद पाने के लिए सबसे बड़ी शर्त यह है कि महिला उद्यमी को अपने बिजनेस में अपनी तरफ से भी 5,000 रुपये का अंशदान (Investment) करना होगा।
  • शर्त 2: भौतिक सत्यापन (Physical Verification): सरकारी अधिकारी या जीविका टीम इस बात की जांच (Physical Verification) करेगी कि पहली किस्त के पैसों से सच में कोई रोजगार शुरू हुआ है या नहीं। आमदनी और खर्च का हिसाब देना भी जरूरी होगा।
  • शर्त 3: जीविका समूह से जुड़ाव: लाभार्थी महिला का ‘जीविका समूह’ (Jeevika SHG) से सक्रिय जुड़ाव होना चाहिए और बैठकों में उनकी नियमित उपस्थिति होनी चाहिए।

कुल 2 लाख रुपये कैसे मिलेंगे? (पूरी प्रक्रिया)

यह योजना एक साथ पैसे नहीं देती, बल्कि काम बढ़ने के साथ-साथ मदद बढ़ाती है:

  • पहला चरण: ₹10,000 (बिजनेस की रूपरेखा और छोटे सामान के लिए)
  • दूसरा चरण: ₹20,000 (शुरुआती सामग्री के लिए)
  • तीसरा चरण: ₹40,000 (सिलाई मशीन या अन्य उपकरणों के लिए)
  • चौथा चरण: ₹80,000 (काम को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए)
  • पांचवां चरण: ₹50,000 (ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए)

Mahila Rojgar Yojana 2nd Installment

महिलाओं की ज़िंदगी में क्या आएगा बदलाव?

इस योजना के तहत पैसा सीधा महिलाओं के खाते में जा रहा है, जिससे उन्हें किसी साहूकार या बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। 10 हज़ार के बाद अब 20 हज़ार रुपये मिलने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मज़बूत कर पाएंगी।

ApniVani की बात

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की यह दूसरी किस्त उन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो सच में मेहनत करके अपना मुकाम बनाना चाहती हैं। अगर आपने भी पहली किस्त का सही उपयोग किया है, तो अपना बैंक खाता और आधार कार्ड अपडेट रखें, क्योंकि पैसे जल्द ही ट्रांसफर होने वाले हैं।

आपकी राय: क्या आपके या आपके परिवार में किसी के खाते में इस योजना की पहली किस्त आई थी? इस योजना से जुड़ी अपनी कोई भी परेशानी या सवाल हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर पूछें!

Read more

India Geopolitics Reality: क्या किसी युद्ध में न पड़ने वाला भारत ‘डरपोक’ है? जानिए जिओ-पॉलिटिक्स के कड़वे सच

India Geopolitics Reality

आजकल इंटरनेट पर एक अलग ही युद्ध चल रहा है। मिडल-ईस्ट में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। सोशल मीडिया पर लोग दो खेमों में बंट गए हैं— कुछ ईरान को सही बता रहे हैं, तो कुछ इज़राइल और अमेरिका का झंडा उठा रहे हैं। और इसी बीच एक बहस यह भी छिड़ गई है कि “भारत किसी भी युद्ध में सीधा शामिल क्यों नहीं होता? क्या भारत की सरकार या नेता डरपोक हैं?”

हम अक्सर जिओ-पॉलिटिक्स (Geopolitics) को किसी मोहल्ले की लड़ाई या क्रिकेट मैच की तरह देखने लगते हैं, जहाँ आपको किसी एक ‘टीम’ को चुनना ही पड़ता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सच इससे बहुत अलग और खौफनाक है। आज ‘ApniVani’ के इस विशेष विश्लेषण में हम आपको आसान भाषा में समझाएंगे कि आखिर भारत युद्धों से दूर क्यों रहता है और इसके पीछे की ‘असली पॉलिटिक्स’ क्या है।

कूटनीति का पहला नियम: ‘कोई परमानेंट दोस्त नहीं’

जिओ-पॉलिटिक्स का सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न तो कोई किसी का ‘सच्चा दोस्त’ होता है और न ही ‘पक्का दुश्मन’। यहाँ सिर्फ एक चीज़ मायने रखती है— ‘राष्ट्रीय हित’ (National Interest)।

भारत की विदेश नीति (Foreign Policy) हमेशा से ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ (Strategic Autonomy) यानी ‘रणनीतिक आज़ादी’ पर टिकी रही है। इसका मतलब है कि भारत अपने फैसले किसी दूसरे देश (चाहे वह अमेरिका हो या रूस) के दबाव में नहीं लेता। किसी देश के युद्ध में कूदकर बेवजह दुश्मनी मोल लेना ‘बहादुरी’ नहीं, बल्कि बेवकूफी मानी जाती है।

आखिर भारत युद्ध में क्यों नहीं पड़ता? (3 असली कारण)

जो लोग भारत के ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) रहने पर सवाल उठाते हैं, उन्हें ये 3 ज़मीनी हकीकतें जाननी चाहिए:

  • अर्थव्यवस्था और महंगाई का डर: भारत अपनी ज़रूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल (Crude Oil) दूसरे देशों (खासकर मिडल-ईस्ट और रूस) से खरीदता है। अगर भारत किसी एक का पक्ष लेकर युद्ध में कूद जाए, तो तेल की सप्लाई रुक जाएगी। पेट्रोल 200 रुपये लीटर हो जाएगा और देश की 140 करोड़ जनता महंगाई से त्राहि-त्राहि करने लगेगी।
  • विदेशों में बसे भारतीय (Diaspora): आज मिडल-ईस्ट (अरब देशों, ईरान, इज़राइल आदि) में लाखों भारतीय काम करते हैं, जो हर साल करोड़ों रुपये भारत भेजते हैं। अगर भारत किसी एक देश के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो वहां फंसे हमारे अपने नागरिकों की जान खतरे में पड़ जाएगी।
  • बैलेंसिंग एक्ट (Balancing Act): भारत की कूटनीति देखिए— हमारे रिश्ते इज़राइल से भी बेहतरीन हैं (जहाँ से हम तकनीक और हथियार लेते हैं) और ईरान से भी अच्छे हैं (जो हमें चाबहार पोर्ट जैसी रणनीतिक जगह देता है)। दोनों पक्षों से फायदा लेना ही असली राजनीति है।
India Geopolitics Reality
apnivani

क्या जिओ-पॉलिटिक्स सच में इतनी आसान है?

सोशल मीडिया पर बैठकर कीबोर्ड से युद्ध लड़ना बहुत आसान है। वहां लोग आसानी से कह देते हैं कि “इसे उड़ा दो” या “उसका साथ दो”। लेकिन जब एक देश कोई फैसला लेता है, तो उसे सप्लाई चेन (Supply Chain), शेयर बाज़ार, अपनी सेना की सुरक्षा और आने वाले 50 सालों के भविष्य को देखना पड़ता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इज़राइल-हमास-ईरान का मामला, भारत का स्टैंड हमेशा साफ रहा है: “यह युद्ध का युग नहीं है, बातचीत से मसले सुलझाएं।”

ApniVani की बात

भारत डरपोक नहीं है, बल्कि भारत बेहद ‘समझदार’ है। जब दो बिल्लियां लड़ती हैं, तो समझदार इंसान बीच में पड़कर अपने हाथ पर खरोंच नहीं लगवाता, बल्कि अपना घर सुरक्षित रखता है। भारत की मौजूदा ‘इंडिया फर्स्ट’ (India First) नीति ही आज के इस अशांत माहौल में सबसे सही और सुरक्षित रास्ता है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि भारत का यह ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) स्टैंड सही है, या भारत को किसी एक महाशक्ति (जैसे अमेरिका या रूस) के गुट में पूरी तरह शामिल हो जाना चाहिए? अपनी बेबाक राय हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें!

Read more

UGC Naye Niyam Kya Hai : बिना सोचे-समझे सपोर्ट करना है सबसे बड़ी गलती! आसान भाषा में समझिए इस विवाद की 3 बड़ी बातें

UGC Naye Niyam Kya Hai

UGC Naye Niyam Kya Hai : आजकल एक नया ट्रेंड चल पड़ा है— कहीं भी कोई धरना या प्रदर्शन हो रहा हो, तो लोग बिना पूरी बात जाने ही अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी एक पक्ष को सपोर्ट करने लगते हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों पटना विश्वविद्यालय और देश की बाकी यूनिवर्सिटीज में … Read more