बिहार के किसानों के लिए बड़ी खबर: Farmer ID बनवाने का आखिरी मौका आज, जानें क्यों है यह जरूरी

Farmer ID

बिहार में खेती-किसानी को डिजिटल युग से जोड़ने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए नीतीश सरकार ने ‘एग्री स्टैक’ (AgriStack) परियोजना के तहत फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाना अनिवार्य कर दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पंजीकरण की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 10 जनवरी 2026 कर दिया है। अगर आप एक किसान हैं और आपने अब तक अपनी डिजिटल आईडी नहीं बनवाई है, तो आज आपके पास अंतिम अवसर है।

बिहार फार्मर आईडी पंजीकरण: 10 जनवरी तक बढ़ा समय

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य के सभी 38 जिलों में फार्मर आईडी बनाने का अभियान मिशन मोड में चल रहा है। पहले इसकी समय सीमा कम थी, लेकिन सर्वर की समस्याओं और किसानों की भारी संख्या को देखते हुए इसे 10 जनवरी तक के लिए विस्तारित किया गया है।

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राज्य के सभी पंचायत भवनों में आज विशेष शिविर (Camps) लगाए जा रहे हैं, जहाँ किसान जाकर अपना निबंधन करा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य राज्य के लगभग 2 करोड़ किसानों को इस डिजिटल डेटाबेस से जोड़ना है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।

Farmer ID क्यों है अनिवार्य? जानें इसके मुख्य लाभ

फार्मर आईडी केवल एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए सरकारी लाभ का प्रवेश द्वार है। इसके बिना भविष्य में कई योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो सकता है।

1. PM किसान सम्मान निधि की अगली किस्त

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) योजना के तहत मिलने वाली ₹6,000 की वार्षिक सहायता राशि अब केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी जिनके पास वैध फार्मर आईडी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी 22वीं किस्त के लिए डिजिटल आईडी और ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य है।

2. कृषि सब्सिडी और सरकारी योजनाएं

खाद, बीज, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी और डीजल अनुदान जैसी योजनाओं का लाभ अब इसी आईडी के माध्यम से मिलेगा। फार्मर आईडी होने से डेटा सीधे विभाग के पास रहेगा, जिससे वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।

3. जमाबंदी और भू-अभिलेखों का शुद्धिकरण

पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान राजस्व कर्मी किसान की भूमि के रिकॉर्ड (Jamabandi) का मिलान करेंगे। इससे जमीन के रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियों को सुधारा जा सकेगा और स्वामित्व विवाद कम होंगे।

पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)

यदि आप आज पंचायत भवन में लगने वाले शिविर में जा रहे हैं, तो अपने साथ निम्नलिखित दस्तावेज जरूर ले जाएं:

आधार कार्ड: पहचान और ई-केवाईसी के लिए।

मोबाइल नंबर: जो आधार से लिंक हो (OTP वेरिफिकेशन के लिए)।

जमीन की रसीद (लगान रसीद): जमीन के विवरण और जमाबंदी के सत्यापन के लिए।

बैंक पासबुक: DBT के माध्यम से पैसा प्राप्त करने के लिए।

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया: कैसे बनवाएं अपनी आईडी?

बिहार सरकार ने इस प्रक्रिया को काफी सरल बनाया है। किसान दो तरीकों से पंजीकरण करा सकते हैं:

पंचायत शिविर (Offline): अपने नजदीकी पंचायत भवन में जाएं। वहां तैनात कृषि समन्वयक (Agriculture Coordinator) या राजस्व कर्मचारी आपके दस्तावेजों की जांच करेंगे और आपका डिजिटल पंजीकरण पूरा करेंगे।

ऑनलाइन पोर्टल (Online): किसान Bihar AgriStack की आधिकारिक वेबसाइट bhfr.agristack.gov.in पर जाकर भी स्वयं या किसी साइबर कैफे (CSC Center) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

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अब तक के आंकड़े और दूसरे चरण की जानकारी

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अब तक लगभग 5.85 लाख से अधिक किसानों की डिजिटल आईडी सफलतापूर्वक बनाई जा चुकी है। अकेले गया जिले में 15,000 से अधिक नए किसानों ने इस साल निबंधन कराया है।

महत्वपूर्ण सूचना: जो किसान आज (10 जनवरी) किसी कारणवश पंजीकरण नहीं करा पाएंगे, उनके लिए सरकार द्वितीय चरण का आयोजन करेगी। दूसरा चरण 18 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक चलेगा। हालांकि, सरकारी लाभों में देरी से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रथम चरण में ही इसे पूरा कर लें।

क्या आपने अपनी फार्मर आईडी बनवा ली है? यदि आपको पंजीकरण में किसी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें कमेंट में बताएं ताकि हम आपकी मदद कर सकें।

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Bihar PACS Membership Campaign 2026: अब पंचायत स्तर पर मिलेंगी 25+ सरकारी सेवाएं, जानें कैसे बनें सदस्य!

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बिहार के ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 2 जनवरी 2026 से राज्य के हर पंचायत में पैक्स (PACS) सदस्यता सह जागरूकता अभियान की शुरुआत होने जा रही है। अब पैक्स केवल खाद और बीज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये गांव के “मिनी सचिवालय” और “सर्विस सेंटर” के रूप में काम करेंगे।

पैक्स अब सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि ‘मल्टी-सर्विस सेंटर’ है

सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार में पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया गया है। अब राज्य के किसान और ग्रामीण निवासी एक ही छत के नीचे 25 से अधिक डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

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पैक्स में मिलने वाली प्रमुख 25 सेवाएं:

पैक्स अब हाई-टेक हो चुके हैं। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सेवाओं की सूची इस प्रकार है:

• बैंकिंग सेवाएं: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालना और जमा करना।

• डिजिटल इंडिया सेवाएं: पैन कार्ड, आधार अपडेट, और बिजली बिल का भुगतान।

• कृषि इनपुट: खाद, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता।

• जन औषधि केंद्र: सस्ती और जेनेरिक दवाओं की बिक्री (302 पैक्स को मंजूरी)।

• अन्न भंडारण: ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदाम की सुविधा।

• प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र: मिट्टी जांच और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।

• पेट्रोल और डीजल डीलरशिप: चुनिंदा पैक्स पर अब पेट्रोल पंप भी खुल रहे हैं।

• एलपीजी वितरण: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की आसान पहुंच।

• सब्जी आउटलेट: ‘तरकारी’ ब्रांड के तहत ताजी सब्जियों का विपणन।

• बीमा और पेंशन: फसल बीमा (PMFBY) और ई-श्रम पंजीकरण जैसी सुविधाएं।

2 जनवरी से सदस्यता अभियान: आप कैसे जुड़ सकते हैं?

बिहार में वर्तमान में लगभग 1.38 करोड़ पैक्स सदस्य हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि सहकारी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

• योग्यता: आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी पंचायत का स्थाई निवासी होना चाहिए।

• आयु सीमा: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

• प्रक्रिया: आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सदस्य बन सकते हैं। 2 जनवरी से आपके पंचायत मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

• MSP पर धान खरीद: इस सीजन में अब तक 9.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है।

• गोल्ड लोन की सुविधा: बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से अब पैक्स के जरिए गोल्ड लोन भी दिया जा रहा है।

• बिचौलियों से मुक्ति: डिजिटल होने के कारण अब खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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बदल रहा है ग्रामीण बिहार

पैक्स का डिजिटलीकरण और 25 सेवाओं का एकीकरण बिहार के गांवों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यदि आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, तो 2 जनवरी के अभियान का हिस्सा जरूर बनें और पैक्स के सदस्य बनकर इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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