दिल्ली में 200 एंटी-स्मॉग गन तैनात : PWD’s ₹5.88 Crore battle plan to clean the air

पर्यावरण संकट की चपेट में रहने वाली दिल्ली ने एक और बड़ा कदम उठाया है। Public Works Department, Delhi (PWD) ने 200 ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन किराए पर लेने का फैसला किया है जिसका बजट लगभग ₹5.88 करोड़ तय हुआ है।

योजना का ढांचा: कब, कैसे और कितने समय के लिए

इन Anti-Smog गनों को अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 (5 महीने) तक, दो शिफ्ट में काम करने के लिए प्लान किया गया है।प्रत्येक मशीन ट्रक-माउंटेड होगी और 50 मीटर तक क्षैतिज दायरा और 330° घुमाव वाली प्रणाली से धूल और PM2.5 कणों को नियंत्रित करेगी। मशीनों पर पर्यावरण जागरूकता के स्लोगन भी छापे जाएंगे—सिर्फ सफाई ही नहीं, संदेश भी शामिल है।

क्यों जरुरी है यह कदम?

दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है| रास्तों की धूल, निर्माण गतिविधि, ट्रैफिक उत्सर्जन और बाहरी राज्यों से आने वाला प्रदूषण मिलकर AQI को खतरनाक स्तर तक ले जा रहा है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि रस्ते की धूल (road dust) व निर्माण कार्यों की उड़ती मिट्टी भी PM 10 तथा PM 2.5 के बड़े स्रोत हैं। तेज़ी से सफाई नहीं की गई तो श्वसन संबंधी बीमारियाँ और बढ़ेंगी।

एंटी-स्मॉग गन

क्या ये उपाय पर्याप्त है या सिर्फ ‘पलटाव’ है?

इस तरह की तकनीकी एवं तात्कालिक कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है—क्या यह स्थायी समाधान बनेगी या सिर्फ इस सर्दी-मौसम तक का असर होगा?ट्रक-गन द्वारा धूल को नीचे गिराना मददगार है, लेकिन निर्माण-स्थलों, वाहनों, बाहरी राज्यों से आने वाली धूल के स्रोतों को पहले से नियंत्रित करना ज़रूरी है।इसकी लागत, मशीनों की निगरानी,Maintenance और संचालन की निरंतरता चुनौती बने रहेंगे।नागरिकों, ठेकेदारों, निर्माण कंपनियों का सहयोग हों बिना यह सिर्फ एक प्रदर्शनी जैसा रह सकता है।

आगे का रास्ता: सरकार और नागरिक मिलकर क्या कर सकते हैं?

PWD ने साथ ही रोड क्लीनिंग, सड़क मरम्मत, पेड़ों की छंटाई और साइनबोर्ड सुधार जैसी गतिविधियों की भी योजना बनाई है—जिससे सड़क-धूल और उड़ने वाली मिट्टी को कम किया जा सकेगा।नागरिकों को भी जागरूक होना होगा, वाहन की सर्विस-स्थिति, निर्माण-साइट्स पर धूल नियंत्रण और व्यक्तिगत स्तर पर वायु शुद्धता का ध्यान रखना होगा।

सबसे अहम : कॉन्ट्रैक्टरों द्वारा धूल-उत्सर्जन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, निरंतर मॉनिटरिंग आवश्यक है।

दिल्ली की हवा को क्या उम्मीद है?

यह कदम दिल्ली में एक सकारात्मक संकेत है—ठोस तकनीक ,पर्याप्त बजट और समन्वित कोशिशें मिलकर कुछ असर दिखा सकती हैं। लेकिन, इससे भी बड़ी चुनौती है स्रोतों को बंद करना और व्यवहार में बदलाव लाना। यदि सिर्फ मशीनें लगाई जाएँ पर निर्माण-धूल, वाहनों और बाहरी धूल स्रोतों पर ध्यान न दिया जाए, तो यह प्रयास स्थायी सुधार नहीं, बल्कि क्षणिक राहत साबित होगा।

आखिरकार, दिल्ली की हवा में सांस लेने-योग्य बदलाव तब आएगा जब प्रौद्योगिकी, नीति, सिस्टम निगरानी और नागरिक भागीदारी सब साथ मिलकर काम करें वर्ना हर साल स्मॉग फिर से दस्तक देगा।

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