AIIMS Darbhanga में प्रस्तावित दूसरे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निर्माण को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। इस बार चर्चा का कारण अस्पताल की आधुनिक मशीनें या सुविधाएं नहीं, बल्कि इसका निर्माणाधीन ‘मुख्य द्वार’ (Main Gate) है। सोशल मीडिया पर AIIMS Darbhanga main gate की तस्वीरें इतनी तेजी से वायरल हो रही हैं कि लोगों ने इस पर मीम्स बनाना शुरू कर दिया है। घोषणा के 10 साल बाद भी जब लोगों को सिर्फ गेट और बाउंड्री वॉल नजर आई, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। आइए जानते हैं क्या है पूरी हकीकत और क्यों सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘दुनिया का सबसे महंगा गेट’ बता रहे हैं।
क्यों वायरल हो रहा है AIIMS दरभंगा का गेट?
बीते कुछ दिनों से X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर खूब साझा की जा रही है, जिसमें दरभंगा AIIMS का भव्य प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा है। लोग इस पर तंज कसते हुए लिख रहे हैं कि “10 साल में बिहार को सिर्फ एक गेट मिला है।” कुछ यूजर्स ने तो इसे ‘हवा महल’ की उपमा दे दी है, जहां दरवाजा तो है लेकिन पीछे अस्पताल गायब है।
यह विवाद तब गहराया जब लोगों ने इसकी तुलना अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स से करनी शुरू की। वायरल पोस्ट्स में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या 1263 करोड़ रुपये का बजट सिर्फ इस चारदीवारी और गेट के लिए था? स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे सालों से एक बड़े अस्पताल का सपना देख रहे हैं ताकि उन्हें इलाज के लिए पटना या दिल्ली न भागना पड़े, लेकिन फिलहाल उन्हें केवल पत्थर का एक ढांचा ही दिख रहा है।

निर्माण में देरी की असली वजह: क्यों अटका है प्रोजेक्ट?
दरभंगा AIIMS की कहानी साल 2015 के केंद्रीय बजट से शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक यह प्रोजेक्ट कई बाधाओं से गुजरा है। शुरुआत में जमीन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लंबी खींचतान चली। पहले इसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज (DMCH) के परिसर में बनाने की बात थी, जिसे बाद में शोभन बाइपास के पास स्थानांतरित किया गया।
देरी के मुख्य कारणों में जमीन का लो-लैंड (नीचला इलाका) होना सबसे बड़ी समस्या है। वहां मिट्टी भराई का काम अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, मानसून के दौरान जलजमाव और तकनीकी सर्वे में लगने वाले समय ने भी काम की रफ्तार धीमी कर दी। टेंडर प्रक्रिया और डीपीआर (DPR) तैयार होने में भी सालों बीत गए, जिसके कारण आम जनता में अब भारी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है।
अब तक क्या-क्या बना और आगे का प्लान क्या है?
प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति की बात करें तो निर्माण एजेंसी HSCIC इंडिया लिमिटेड के अनुसार काम तेजी से चल रहा है। निर्माण के पहले चरण में भूमि की घेराबंदी यानी बाउंड्री वॉल का काम प्राथमिकता पर रखा गया है। लगभग 5 किलोमीटर लंबी चारदीवारी और मुख्य द्वार का काम अब अंतिम चरणों में है, जिसकी लागत करीब 51 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
अस्पताल के निदेशक के अनुसार, मुख्य भवन और ओपीडी (OPD) सेवाओं के लिए सर्वे और सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया गया है। लक्ष्य रखा गया है कि साल 2028 तक अस्पताल का मुख्य ढांचा बनकर तैयार हो जाए और यहाँ मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) शुरू कर दी जाए। पूरा अस्पताल 750 से 1000 बेड का होगा, जिसमें सुपर स्पेशियलिटी विभाग, ट्रॉमा सेंटर और आधुनिक लैब होंगी।
मीम्स के जरिए जनता का दर्द
सोशल मीडिया पर चल रहे मीम्स सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि उत्तर बिहार के करोड़ों लोगों का दर्द हैं। मिथिलांचल के लोगों के लिए दरभंगा AIIMS स्वास्थ्य सुविधाओं की जीवनरेखा है। नेपाल, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों के मरीज भी इस अस्पताल पर निर्भर रहेंगे। जब लोग देखते हैं कि सालों बीतने के बाद भी धरातल पर केवल एक गेट खड़ा है, तो वे व्यंग्य का सहारा लेते हैं। एक यूजर ने लिखा, “बिहार में विकास का गेट तो खुल गया है, बस अंदर घुसने के लिए 5 साल और रुकिए।”
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों और मंत्री मंगल पांडेय के बयानों के अनुसार, सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 नवंबर 2024 को किए गए शिलान्यास के बाद फंड और संसाधनों की कमी को दूर कर लिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि एक बार मिट्टी भराई का काम पूरा हो जाने के बाद मुख्य बिल्डिंग का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू होगा।
AIIMS दरभंगा का गेट वायरल होना इस बात का प्रतीक है कि अब जनता विकास के वादों पर नहीं, बल्कि हकीकत पर भरोसा करना चाहती है। उम्मीद है कि 2028 की समयसीमा इस बार जुमला साबित नहीं होगी और मिथिला की धरती पर जल्द ही एक विश्वस्तरीय अस्पताल बनकर तैयार होगा, जहाँ गेट के साथ-साथ डॉक्टर और दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।