NEET UG 2026 Cancelled: छात्रों की मेहनत पर फिरा पानी! पेपर लीक के बाद NEET परीक्षा रद्द, जानिए NTA की नाकामी के 3 बड़े कारण और अगला कदम

NEET UG 2026 Cancelled News

डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले देश के 24 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए आज का दिन किसी बुरे सपने जैसा है। दिन-रात की गई मेहनत, अनगिनत मॉक टेस्ट और आंखों की नींद… सब कुछ एक झटके में तबाह हो गया जब सरकार ने ऐलान किया कि 3 मई 2026 को हुई NEET UG की परीक्षा रद्द कर दी गई है।

सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक सिर्फ छात्रों का गुस्सा और रोते हुए पैरेंट्स की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। आखिर इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? ‘ApniVani’ की इस विस्तृत एजुकेशन रिपोर्ट में आइए गहराई से समझते हैं कि यह परीक्षा क्यों रद्द हुई, सिस्टम में कहां सेंध लगी, और अब बीच मझधार में फंसे छात्रों को आगे क्या करना होगा।

क्या सच में रद्द हो गई है परीक्षा? (NTA का ऑफिशियल बयान)

हां, यह बिल्कुल सच है। आज (12 मई 2026) को NTA ने एक प्रेस रिलीज जारी कर आधिकारिक तौर पर 3 मई को हुई NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है।

NTA का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह कड़ा फैसला लिया गया है। अब यह परीक्षा दोबारा (Re-Exam) आयोजित की जाएगी। इसके लिए नई तारीखों का ऐलान जल्द ही NTA की वेबसाइट पर किया जाएगा।

परीक्षा रद्द होने के 3 सबसे बड़े और खौफनाक कारण

आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा? इसके पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े कारण सामने आए हैं:

  • ‘गेस पेपर’ (Guess Paper) का खेल: राजस्थान SOG (Special Operations Group) की जांच में खुलासा हुआ है कि परीक्षा से 15-20 दिन पहले ही एक ‘गेस पेपर’ व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर लाखों रुपये में बिक रहा था।
  • हूबहू मिले 120 सवाल: जब जांच एजेंसियों ने उस वायरल ‘गेस पेपर’ को असली प्रश्न पत्र से मिलाया, तो सबके होश उड़ गए। उसमें से 120 सवाल (खासकर बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 30 सवाल) असली पेपर से बिल्कुल मैच कर गए।
  • CBI जांच का आदेश: मामले की गंभीरता और ‘सॉल्वर गैंग’ के बड़े नेटवर्क को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत पूरी जांच CBI को सौंप दी है, जिसके बाद परीक्षा को रद्द करना ही इकलौता विकल्प बचा था।

क्या NTA एक ‘काबिल’ (Eligible) संस्था नहीं है? ऐसा क्यों होता है?

हर छात्र के मन में यही सवाल है कि क्या NTA इतनी बड़ी परीक्षा कराने के लायक नहीं है?

देखिए, NTA के पास परीक्षा कराने का कानूनी अधिकार (Mandate) तो है, लेकिन उनकी ‘सिक्योरिटी व्यवस्था’ पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई है। NTA एक साथ 24 लाख बच्चों का एग्जाम कराती है। पेपर को प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जो चेन (Supply Chain) होती है, उसमें कई जगह प्राइवेट स्कूलों और लोकल ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल होता है।

यहीं पर शिक्षा माफिया और ‘सॉल्वर गैंग’ करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर सिस्टम में सेंध लगा देते हैं। यह NTA की ग्राउंड-लेवल की मॉनिटरिंग का सबसे बड़ा फेलियर है, जिसकी कीमत आज ईमानदार छात्रों को चुकानी पड़ रही है।

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Siksha Nation

अब छात्रों को क्या करना चाहिए? (आपका अगला कदम)

यह समय पैनिक करने का नहीं, बल्कि खुद को मानसिक रूप से मजबूत करने का है:

  • कोई नई फीस नहीं: आपको दोबारा रजिस्ट्रेशन या कोई फीस नहीं भरनी होगी। आपके पुराने रजिस्ट्रेशन ही मान्य होंगे।
  • नए एडमिट कार्ड: NTA जल्द ही नई परीक्षा तारीख के साथ नए एडमिट कार्ड जारी करेगा। पुरानी सिटी स्लिप या एडमिट कार्ड अब अमान्य हो चुके हैं।
  • रिवीजन मोड ऑन करें: एक-दो दिन का ब्रेक लें, अपना गुस्सा और निराशा बाहर निकालें। उसके बाद अपनी एनसीईआरटी (NCERT) किताबें उठाएं और फिर से रिवीजन में जुट जाएं। याद रखें, आपका ज्ञान आपसे कोई पेपर लीक करने वाला नहीं छीन सकता।

ApniVani की बात

NEET जैसी परीक्षा में पेपर लीक होना सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि देश के भविष्य और स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ किया गया एक जघन्य अपराध है। सरकार को CBI जांच के जरिए उन सभी सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करना चाहिए जो चंद पैसों के लिए लाखों होनहार छात्रों के भविष्य का सौदा करते हैं।

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Rinku Singh Father Death: टी20 वर्ल्ड कप के बीच रिंकू सिंह पर टूटा दुखों का पहाड़! पिता के संघर्ष की रुला देने वाली बातें

Rinku Singh Father Death

भारतीय क्रिकेट फैंस और टीम इंडिया के धाकड़ बल्लेबाज रिंकू सिंह के लिए आज एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मैदान पर अपने लंबे छक्कों से करोड़ों भारतीयों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले रिंकू सिंह आज गहरे सदमे में हैं। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच उनके पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया है।
आज ‘ApniVani’ के इस विशेष लेख में हम आपको इस दुखद खबर की पूरी जानकारी देंगे, और साथ ही बताएंगे कि कैसे एक आम इंसान ने तमाम मुश्किलें सहकर अपने बेटे को टीम इंडिया का सुपरस्टार बना दिया।

कैंसर से जंग हार गए पिता खानचंद सिंह

रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह पिछले काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह स्टेज-4 के लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही के दिनों में उनकी तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें ग्रेटर नोएडा के ‘यथार्थ हॉस्पिटल’ में भर्ती कराया गया था।
यथार्थ अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. सुनील कुमार ने भी पुष्टि की है कि खानचंद सिंह लिवर कैंसर से लड़ रहे थे। अस्पताल में उनकी हालत इतनी गंभीर बनी हुई थी कि उन्हें लगातार मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। डॉक्टरों की टीम उन्हें स्थिर करने की पूरी कोशिश कर रही थी और उनकी लगातार ‘किडनी रिप्लेसमेंट थेरेपी’ भी चल रही थी। लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद, शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे उन्होंने अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली।

Rinku Singh

वर्ल्ड कप छोड़कर पिता के पास भागे थे रिंकू

रिंकू सिंह इस समय भारतीय टीम के साथ टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेल रहे हैं। जब उन्हें अपने पिता की गंभीर हालत की खबर मिली, तो वह 24 फरवरी को चेन्नई में टीम का अभ्यास सत्र (ट्रेनिंग सेशन) छोड़कर तुरंत अपने पिता से मिलने पहुंच गए थे।
पिता से मिलकर और उनके साथ वक्त बिताकर रिंकू वापस चेन्नई लौट गए थे और 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ हुए मैच से पहले टीम के साथ जुड़ भी गए थे। हालांकि, उस मैच की प्लेइंग इलेवन (Playing 11) में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला था। भारत ने यह मैच 72 रनों से जीतकर सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखा है। अब पिता के निधन की खबर के बाद रिंकू वापस लौट रहे हैं। देखना होगा कि वह 1 मार्च को वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले सुपर-8 के आखिरी मैच से पहले टीम से जुड़ पाएंगे या नहीं।

Rinku Singh Family

अलीगढ़ की गलियों से लेकर सुपरस्टार बेटे तक का सफर

रिंकू सिंह आज भले ही करोड़ों की दौलत और शोहरत के मालिक हैं, लेकिन उनके पिता खानचंद सिंह ने उन्हें यहां तक पहुंचाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी संघर्षों में गुजार दी। यूपी के अलीगढ़ के रहने वाले 28 वर्षीय रिंकू के पिता घर-घर जाकर एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर बांटने का काम करते थे।
परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने मेहनत से कभी कोई समझौता नहीं किया। सबसे हैरानी और गर्व की बात तो यह है कि जब रिंकू सिंह आईपीएल (IPL) और भारतीय टीम के स्टार बन गए, उसके बावजूद उनके पिता ने काफी समय तक अपना सिलेंडर पहुंचाने का काम बंद नहीं किया था। रिंकू की मां वीणा देवी एक हाउसवाइफ हैं और उनकी बहन नेहा सिंह एक सोशल मीडिया वीडियो क्रिएटर हैं। पूर्व दिग्गज क्रिकेटर हरभजन सिंह समेत पूरे क्रिकेट जगत ने रिंकू के पिता के निधन पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

Rinku Singh Father Death

ApniVani की बात: एक मजबूत बेटे का कड़ा इम्तिहान

रिंकू सिंह ने अपने जीवन में बहुत गरीबी देखी है। एक वक्त ऐसा था जब परिवार पालने के लिए उन्हें झाड़ू-पोछा लगाने तक का काम करना पड़ा था, लेकिन अपने पिता के त्याग की बदौलत आज वह इस मुकाम पर हैं। वर्ल्ड कप जैसे अहम टूर्नामेंट के बीच पिता का साया सिर से उठ जाना किसी भी इंसान को तोड़ सकता है। पूरा देश इस मुश्किल घड़ी में रिंकू सिंह और उनके परिवार के साथ खड़ा है।

आपकी राय: रिंकू सिंह के पिता के इस त्याग और उनकी सादगी पर आप क्या कहेंगे? अपनी संवेदनाएं और राय हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें। और हाँ, अगर आप फिल्मों और वेब सीरीज के भी दीवाने हैं, तो बेहतरीन मूवी रिव्यूज और एंटरटेनमेंट की दुनिया के ‘डीप एनालिसिस’ के लिए हमारे यूट्यूब चैनल ‘Topi Talks’ को सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूलें!

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AIIMS Darbhanga Main Gate सोशल मीडिया पर वायरल: 10 साल के इंतजार पर मीम्स की बाढ़, आखिर कब बनेगा पूरा अस्पताल?

AIIMS Darbhanga Main gate

AIIMS Darbhanga में प्रस्तावित दूसरे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निर्माण को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। इस बार चर्चा का कारण अस्पताल की आधुनिक मशीनें या सुविधाएं नहीं, बल्कि इसका निर्माणाधीन ‘मुख्य द्वार’ (Main Gate) है। सोशल मीडिया पर AIIMS Darbhanga main gate की तस्वीरें इतनी तेजी से वायरल हो रही हैं कि लोगों ने इस पर मीम्स बनाना शुरू कर दिया है। घोषणा के 10 साल बाद भी जब लोगों को सिर्फ गेट और बाउंड्री वॉल नजर आई, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। आइए जानते हैं क्या है पूरी हकीकत और क्यों सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘दुनिया का सबसे महंगा गेट’ बता रहे हैं।

क्यों वायरल हो रहा है AIIMS दरभंगा का गेट?

बीते कुछ दिनों से X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर खूब साझा की जा रही है, जिसमें दरभंगा AIIMS का भव्य प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा है। लोग इस पर तंज कसते हुए लिख रहे हैं कि “10 साल में बिहार को सिर्फ एक गेट मिला है।” कुछ यूजर्स ने तो इसे ‘हवा महल’ की उपमा दे दी है, जहां दरवाजा तो है लेकिन पीछे अस्पताल गायब है।

यह विवाद तब गहराया जब लोगों ने इसकी तुलना अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स से करनी शुरू की। वायरल पोस्ट्स में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या 1263 करोड़ रुपये का बजट सिर्फ इस चारदीवारी और गेट के लिए था? स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे सालों से एक बड़े अस्पताल का सपना देख रहे हैं ताकि उन्हें इलाज के लिए पटना या दिल्ली न भागना पड़े, लेकिन फिलहाल उन्हें केवल पत्थर का एक ढांचा ही दिख रहा है।

AIIMS Darbhanga

निर्माण में देरी की असली वजह: क्यों अटका है प्रोजेक्ट?

दरभंगा AIIMS की कहानी साल 2015 के केंद्रीय बजट से शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक यह प्रोजेक्ट कई बाधाओं से गुजरा है। शुरुआत में जमीन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लंबी खींचतान चली। पहले इसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज (DMCH) के परिसर में बनाने की बात थी, जिसे बाद में शोभन बाइपास के पास स्थानांतरित किया गया।

देरी के मुख्य कारणों में जमीन का लो-लैंड (नीचला इलाका) होना सबसे बड़ी समस्या है। वहां मिट्टी भराई का काम अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, मानसून के दौरान जलजमाव और तकनीकी सर्वे में लगने वाले समय ने भी काम की रफ्तार धीमी कर दी। टेंडर प्रक्रिया और डीपीआर (DPR) तैयार होने में भी सालों बीत गए, जिसके कारण आम जनता में अब भारी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है।

अब तक क्या-क्या बना और आगे का प्लान क्या है?

प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति की बात करें तो निर्माण एजेंसी HSCIC इंडिया लिमिटेड के अनुसार काम तेजी से चल रहा है। निर्माण के पहले चरण में भूमि की घेराबंदी यानी बाउंड्री वॉल का काम प्राथमिकता पर रखा गया है। लगभग 5 किलोमीटर लंबी चारदीवारी और मुख्य द्वार का काम अब अंतिम चरणों में है, जिसकी लागत करीब 51 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अस्पताल के निदेशक के अनुसार, मुख्य भवन और ओपीडी (OPD) सेवाओं के लिए सर्वे और सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया गया है। लक्ष्य रखा गया है कि साल 2028 तक अस्पताल का मुख्य ढांचा बनकर तैयार हो जाए और यहाँ मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) शुरू कर दी जाए। पूरा अस्पताल 750 से 1000 बेड का होगा, जिसमें सुपर स्पेशियलिटी विभाग, ट्रॉमा सेंटर और आधुनिक लैब होंगी।

AIIMS Darbhanga Construction

मीम्स के जरिए जनता का दर्द

सोशल मीडिया पर चल रहे मीम्स सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि उत्तर बिहार के करोड़ों लोगों का दर्द हैं। मिथिलांचल के लोगों के लिए दरभंगा AIIMS स्वास्थ्य सुविधाओं की जीवनरेखा है। नेपाल, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों के मरीज भी इस अस्पताल पर निर्भर रहेंगे। जब लोग देखते हैं कि सालों बीतने के बाद भी धरातल पर केवल एक गेट खड़ा है, तो वे व्यंग्य का सहारा लेते हैं। एक यूजर ने लिखा, “बिहार में विकास का गेट तो खुल गया है, बस अंदर घुसने के लिए 5 साल और रुकिए।”

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों और मंत्री मंगल पांडेय के बयानों के अनुसार, सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 नवंबर 2024 को किए गए शिलान्यास के बाद फंड और संसाधनों की कमी को दूर कर लिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि एक बार मिट्टी भराई का काम पूरा हो जाने के बाद मुख्य बिल्डिंग का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू होगा।

AIIMS दरभंगा का गेट वायरल होना इस बात का प्रतीक है कि अब जनता विकास के वादों पर नहीं, बल्कि हकीकत पर भरोसा करना चाहती है। उम्मीद है कि 2028 की समयसीमा इस बार जुमला साबित नहीं होगी और मिथिला की धरती पर जल्द ही एक विश्वस्तरीय अस्पताल बनकर तैयार होगा, जहाँ गेट के साथ-साथ डॉक्टर और दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।

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