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अनिल अंबानी ED दफ्तर में पेश: FEMA जांच के घेरे में बिजनेस मैग्नेट

अनिल अंबानी ED दफ्तर

मुंबई के व्यस्त कारोबारी केंद्र में आज एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब रिलायंस ग्रुप के प्रमुख अनिल अंबानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में पेश हुए। 26 फरवरी 2026 को ED अधिकारियों ने उनसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े मामलों पर लंबी पूछताछ की। यह जांच रिलायंस कम्युनिकेशंस और अन्य ग्रुप कंपनियों से जुड़े विदेशी निवेश और लेन-देन पर केंद्रित बताई जा रही है। अनिल अंबानी, जो एक समय भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों में शुमार थे, अब आर्थिक चुनौतियों और नियामकीय जांच के केंद्र में हैं।

ED जांच का पूरा बैकग्राउंड

अनिल अंबानी ED दफ्तर
अनिल अंबानी ED दफ्तर में पेश

ED की यह कार्रवाई पिछले साल शुरू हुई जांच का हिस्सा है, जिसमें रिलायंस ग्रुप की कई कंपनियों पर विदेशी फंडिंग के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। सूत्रों के अनुसार, FEMA उल्लंघन के तहत अनिल अंबानी से विदेशी उधार, निवेश ट्रांसफर और ओवरसीज ट्रांजेक्शंस पर सवाल किए गए। ED का दावा है कि ग्रुप की कुछ डील्स में विदेशी मुद्रा नियमों का पालन नहीं हुआ, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। अनिल अंबानी ने पूछताछ के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए, लेकिन जांच अभी जारी है। यह मामला रिलायंस इन्फोकॉम और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियों से जुड़ा है, जहां पहले भी NCLT और SEBI की जांच चली।

अनिल अंबानी का बिजनेस सफर: चरम से संकट तक

अनिल अंबानी का नाम एक समय रिलायंस साम्राज्य के साथ जोड़ा जाता था, जब उनकी संपत्ति हजारों करोड़ों में थी। 2000 के दशक में रिलायंस एनर्जी, रिलायंस कैपिटल और रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बाजार में धूम मचाई। लेकिन 2019 के बाद ग्रुप पर कर्ज का बोझ बढ़ा, जिससे कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया में चली गईं। अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी के तहत कई लोन चुकाए, लेकिन FEMA जांच ने नया मोड़ दे दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जांच ग्रुप की रिकवरी को प्रभावित कर सकती है। मुंबई ED दफ्तर में 4 घंटे से ज्यादा चली पूछताछ के बाद अंबानी बिना गिरफ्तारी के बाहर आए।

FEMA कानून क्या कहता है और इसका असर

FEMA 1999 का कानून विदेशी मुद्रा लेन-देन को नियंत्रित करता है, जिसमें गैर-अनुपालन पर भारी जुर्माना या सजा हो सकती है। ED के तहत चल रही यह जांच राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी है। अनिल अंबानी केस में अगर उल्लंघन साबित हुआ, तो ग्रुप की संपत्तियों पर पाबंदी लग सकती है। कारोबारी जगत में यह खबर हलचल मचा रही है, क्योंकि रिलायंस ग्रुप अभी भी टेलीकॉम और फाइनेंशियल सेक्टर में सक्रिय है। निवेशक अब अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं, जो मार्च में हो सकती है।

राजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ

अनिल अंबानी ED दफ्तर में पेश

यह घटना उस समय हुई है जब भारत सरकार विदेशी निवेश पर सख्ती बढ़ा रही है। अनिल अंबानी के भाई मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज सफलता की मिसाल है, लेकिन अनिल का केस बड़े कॉरपोरेट्स के लिए चेतावनी है। बिहार और अन्य राज्यों के निवेशक भी इसे ट्रैक कर रहे हैं, क्योंकि FEMA केस प्रभावित कंपनियों के शेयर बाजार पर असर डालते हैं। ED की कार्रवाई से अनिल अंबानी की छवि पर फिर सवाल उठे हैं, हालांकि उनके समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं

पूछताछ के बाद ED ने अगले समन का संकेत दिया है। अनिल अंबानी की टीम लीगल एक्शन पर विचार कर रही है। यह मामला स्टॉक मार्केट और बिजनेस न्यूज को हाईलाइट कर रहा है। निवेशकों को सलाह है कि रिलायंस ग्रुप शेयरों पर नजर रखें। हम लगातार अपडेट लाते रहेंगे।

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