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Nitish Kumar’s security lapse: बेगूसराय में हेलीपैड पर बैल का ‘तांडव’, जान बचाने के लिए फायर ब्रिगेड पर चढ़े पुलिसकर्मी

बेगूसराय, बिहार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शनिवार, 14 मार्च 2026 को बेगूसराय में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी, बल्कि सुरक्षाकर्मियों के पसीने छुड़ा दिए। सीएम के आगमन के लिए तैयार किए गए अति-संवेदनशील हेलीपैड क्षेत्र में एक बेकाबू बैल घुस गया, जिससे वहां तैनात पुलिस महकमे में भगदड़ मच गई।

हेलीपैड बना ‘अखाड़ा’, पुलिसकर्मियों को जान के लाले पड़े

घटना बेगूसराय के बीआईएडीए (BIADA) कैंपस की है, जहाँ मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लैंड करने वाला था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों का दावा किया जा रहा था, लेकिन लैंडिंग से कुछ समय पहले ही एक विशाल बैल सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे हेलीपैड के बीचों-बीच पहुँच गया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब उसे भगाने की कोशिश की, तो बैल हिंसक हो गया और उसने जवानों को ही दौड़ाना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह रही कि बैल के डर से जवान अपनी ड्यूटी छोड़ इधर-उधर भागते नजर आए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान बचाने के लिए वहां खड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ी की छत पर शरण ली। करीब 15-20 मिनट तक हेलीपैड पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

Nitish Kumar's security lapse

सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ीं

मुख्यमंत्री जैसे वीवीआईपी (VVIP) की सुरक्षा के लिए ‘नो फ्लाई ज़ोन’ और ‘क्लीन पेरिमीटर’ जैसे कड़े प्रोटोकॉल होते हैं। हेलीपैड के चारों ओर बैरिकेडिंग के बावजूद एक आवारा पशु का अंदर घुस जाना जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर यह घटना सीएम के हेलीकॉप्टर लैंड करने के दौरान होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अंततः, लाठियों और शोर-शराबे की मदद से बैल को परिसर से बाहर खदेड़ा गया, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

समृद्धि यात्रा का समापन और राजनीतिक गलियारों में हलचल

नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण के तहत बेगूसराय और शेखपुरा के दौरे पर थे। इस यात्रा का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना है, लेकिन इस सुरक्षा चूक ने पूरी चर्चा का रुख मोड़ दिया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का कहना है कि जो सरकार अपने मुख्यमंत्री को सुरक्षित हेलीपैड मुहैया नहीं करा सकती, वह आम जनता की सुरक्षा क्या करेगी?

नीतीश कुमार की सुरक्षा में बार-बार होती चूक

यह पहली बार नहीं है जब बिहार के मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस तरह की ढिलाई देखी गई हो।

पिछले कुछ वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो:

क्या सबक लेगा प्रशासन?

बेगूसराय की यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वीवीआईपी सुरक्षा में पशु नियंत्रण (Animal Control) एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब देखना यह है कि इस गंभीर चूक के लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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