Bihar Police School : अब सिपाही का बेटा भी बनेगा अफसर! बिहार की सभी 40 पुलिस लाइनों में खुलेंगे नवोदय जैसे आवासीय विद्यालय

Bihar Police School : बिहार में सुशासन और पुलिस कल्याण की दिशा में नीतीश सरकार ने एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो आने वाले समय में पुलिस महकमे की तस्वीर बदल देगा। राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सम्राट चौधरी ने हाल ही में घोषणा की है कि अब बिहार की सभी 40 पुलिस लाइनों में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय (Residential Schools) खोले जाएंगे। यह निर्णय उन हजारों पुलिसकर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो दिन-रात कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने परिवार और बच्चों की खुशियों का त्याग करते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में नया ‘पुलिस मॉडल’ और इसकी खासियतें

इस योजना की सबसे खास बात इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता है। ये स्कूल केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि नवोदय और सैनिक स्कूलों के पैटर्न पर विकसित किए जाएंगे। इन विद्यालयों में आधुनिक कक्षाएं, सुसज्जित लैबोरेट्रीज, विशाल लाइब्रेरी और खेल के मैदान जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी। सरकार का उद्देश्य है कि पुलिसकर्मियों के बच्चों को वैसी ही उच्च स्तरीय शिक्षा मिले जो बड़े शहरों के महंगे निजी स्कूलों में मिलती है। शुरुआत में इन स्कूलों को आठवीं कक्षा तक संचालित किया जाएगा, जिसे बाद में बढ़ाकर सीबीएसई (CBSE) मान्यता प्राप्त इंटरमीडिएट स्तर तक ले जाने की योजना है।

Bihar Police School

तबादले की चिंता से मुक्ति और पढ़ाई में निरंतरता

दरअसल, पुलिस की नौकरी में बार-बार होने वाले तबादले (Transfers) बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। जब एक सिपाही या अधिकारी का स्थानांतरण किसी दूर-दराज के जिले में होता है, तो सबसे पहले उनके बच्चों का स्कूल और पढ़ाई का माहौल बदल जाता है। सम्राट चौधरी का यह विजन इसी समस्या का स्थाई समाधान है। अब पुलिस लाइन के भीतर ही स्कूल होने से, ट्रांसफर की स्थिति में भी बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी, क्योंकि उन्हें एक ही जिले से दूसरे जिले के ‘पुलिस स्कूल’ में आसानी से शिफ्ट किया जा सकेगा। इससे पुलिसकर्मी मानसिक रूप से निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी पर ध्यान दे पाएंगे।

आरक्षण और नामांकन का पारदर्शी ढांचा

इन स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया को भी बहुत संतुलित रखा गया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, इन स्कूलों में 50 प्रतिशत सीटें पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित होंगी, जिसमें शहीद जवानों, सेवानिवृत्त कर्मियों और वर्तमान में कार्यरत जवानों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। शेष 50 प्रतिशत सीटों पर सामान्य नागरिकों के बच्चों का नामांकन होगा, जिससे समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। यह समावेशी दृष्टिकोण न केवल पुलिस परिवारों को लाभान्वित करेगा बल्कि स्थानीय शिक्षा के स्तर को भी ऊपर उठाएगा।

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भोजन और स्वास्थ्य: एक संपूर्ण कल्याणकारी पैकेज

शिक्षा के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के बुनियादी सुख-सुविधाओं और स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 तक राज्य की सभी पुलिस लाइनों में ‘जीविका दीदी की रसोई’ की शुरुआत कर दी जाएगी, ताकि जवानों को मेस में घर जैसा शुद्ध और पौष्टिक भोजन मिल सके। इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस को पूरी तरह ‘कैशलेस’ करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। इन समन्वित प्रयासों से स्पष्ट है कि बिहार सरकार अब पुलिस बल के केवल काम पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के भविष्य और स्वास्थ्य पर भी निवेश कर रही है।

बिहार पुलिस के मनोबल में होगी ऐतिहासिक वृद्धि

झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए ऐसे विशेष स्कूलों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हजारीबाग का प्रसिद्ध विद्यालय झारखंड में चले जाने के बाद से यह मांग उठ रही थी। अब इस नई पहल से न केवल बिहार पुलिस का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि पुलिस महकमे में काम करने वाली महिला कर्मियों के लिए भी बच्चों की परवरिश और नौकरी के बीच तालमेल बिठाना आसान हो जाएगा। यह कदम बिहार में ‘पुलिसिंग विद केयर’ की नई मिसाल पेश करेगा।

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