Defence Minister Rajnath Singh ने बुधवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात में उन्होंने हस्तक्षेप कर संघर्ष को रोका था। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई किसी भी तीसरे देश के दबाव या मध्यस्थता के कारण स्थगित नहीं हुई थी।
भारत का अडिग रुख
हैदराबाद मुक्ति दिवस के 78वें समारोह में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और अधिक मज़बूत और आत्मनिर्भर हुआ है। उन्होंने कहा “भारत ने न कभी किसी के सामने झुकने की परंपरा अपनाई है और न आगे झुकेगा। दुनिया के सबसे ताकतवर लोग भी समझ लें कि भारत की संप्रभुता को चुनौती देना अब किसी के लिए आसान नहीं है।” रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम है और भविष्य में भी यही नीति जारी रहेगी।
ऑपरेशन सिंदूर का संकेत
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि अगर भविष्य में भारत पर कोई आतंकी हमला होता है, तो यह अभियान फिर से शुरू किया जाएगा। यह ऑपरेशन भारत की रणनीतिक और सैन्य क्षमता का प्रतीक रहा है, जिसके ज़रिए आतंकियों और उनके ठिकानों को निर्णायक ढंग से निशाना बनाया गया था। उन्होंने साफ किया कि भारत किसी भी कीमत पर अपने नागरिकों और सीमा की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकता। “अगर कोई देश या आतंकी संगठन भारत पर हमला करेगा, तो उसे उसी की भाषा में जवाब मिलेगा। भारत की सुरक्षा से जुड़ा हर निर्णय भारत स्वयं लेता है।”
ट्रंप का विवादित दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में मध्यस्थता की थी। उनका यह दावा चर्चा का विषय बना और भारत में राजनीतिक हलकों में इसे लेकर सवाल उठे। हालांकि भारत सरकार कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच का मुद्दा द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती।
राजनाथ सिंह ने इसी संदर्भ में कहा कि ट्रंप का बयान हकीकत से बिल्कुल अलग है। भारत ने कभी भी किसी बाहरी दबाव में आकर अपने अभियान को रोका नहीं है। आतंकवाद पर भारत का रवैया हमेशा से स्पष्ट और कड़ा रहा है।

आतंकवाद पर सख्ती
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की नीति स्पष्ट है – आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। भारत हर हमले का जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। चाहे सीमा पर बुनियादी ढांचे का विस्तार हो या आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, भारतीय सेना अब किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
हैदराबाद मुक्ति दिवस का संदेश
अपने भाषण के दौरान राजनाथ सिंह ने हैदराबाद मुक्ति दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1948 में भारत ने एकजुट होकर देश की संप्रभुता की रक्षा की थी और हैदराबाद का भारत में विलय कराया था। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत ने हमेशा कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और साहस दिखाया है।
भारत की बढ़ती ताकत
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि आज का भारत पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वासी है। चाहे सीमाओं की सुरक्षा हो, अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखने की क्षमता हो या वैश्विक सहयोग – भारत अब एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय को समझना चाहिए कि भारत किसी के दबाव में निर्णय नहीं लेता।
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत का यह नया आत्मविश्वास केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
अंत में क्या कहा रक्षा मंत्री ने
राजनाथ सिंह का पूरा भाषण इस संदेश पर केंद्रित रहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर अडिग रहेगा और किसी भी परिस्थिति में अपने फैसलों में बाहरी ताकतों को शामिल नहीं करेगा। ट्रंप के दावे पर उन्होंने साफ किया कि भारत ने अपनी कार्रवाई स्वतंत्र रूप से की और आगे भी करेगा।उनका यह बयान भारत की जनता और दुनिया दोनों के लिए एक स्पष्ट संदेश है – भारत अब आत्मनिर्भर, दृढ़ और निर्णायक देश है, जो न तो किसी हस्तक्षेप को स्वीकार करता है और न ही अपनी सुरक्षा पर समझौता।
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