Global Peace Index 2025 की रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई है, जिसमें दुनिया के सबसे शांतिपूर्ण और अशांत देशों की रैंकिंग सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, आइसलैंड एक बार फिर दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है। वहीं, भारत को 115वां स्थान मिला है, जो चिंतन और सुधार की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।
ग्लोबल पीस इंडेक्स को ऑस्ट्रेलिया स्थित इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) तैयार करता है। इस रिपोर्ट में 163 देशों को उनकी सामाजिक सुरक्षा, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और सैन्यीकरण जैसे मानकों के आधार पर आंका जाता है। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 2025 में भी दुनिया के कई हिस्सों में हिंसा, युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता जारी है।
सबसे शांतिपूर्ण देश
इस वर्ष की रैंकिंग में आइसलैंड ने लगातार अपनी पहली पोज़ीशन बनाए रखी है। यह देश कई सालों से शीर्ष पर है और वहां की राजनीतिक स्थिरता, कम अपराध दर और सामाजिक सहयोग प्रणाली इसकी बड़ी वजहें मानी जाती हैं। इसके बाद आयरलैंड दूसरे, न्यूजीलैंड तीसरे, ऑस्ट्रेलिया चौथे और स्विट्ज़रलैंड पांचवें स्थान पर रहे।
सबसे कम शांतिपूर्ण देश
रिपोर्ट के अनुसार, यमन, डीआरसी (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो), सूडान, यूक्रेन और रूस उन देशों में शामिल हैं, जो सबसे कम शांतिपूर्ण माने गए। यहां लगातार युद्ध, आंतरिक संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता देखी जा रही है। विशेष रूप से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का असर वैश्विक शांति पर भी गहराई से पड़ा है।
भारत की स्थिति
भारत को इस सूची में 115वां स्थान मिला है। पिछले साल की तुलना में भारत की स्थिति में मामूली सुधार तो हुआ है, लेकिन अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। भारत जैसे बड़े और विविधता वाले देश के लिए घरेलू शांति और सुरक्षा को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। देश में राजनीतिक असहमति, सीमा विवाद और आंतरिक सुरक्षा की समस्याएं इसकी रैंकिंग पर असर डालती हैं।
भारत की रैंकिंग यह भी दिखाती है कि हमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक समानता और सामाजिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में और अधिक निवेश करने की जरूरत है। खासकर युवाओं को अवसर और बेहतर रोजगार मिलने से सामाजिक तनावों को कम किया जा सकता है।
पड़ोसी देशों की स्थिति
रिपोर्ट में यह भी दिलचस्प है कि भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति कैसी रही। पाकिस्तान को 144वां, चीन को 98वां और उत्तर कोरिया को 149वां स्थान मिला है। इसका मतलब है कि दक्षिण एशिया का यह पूरा क्षेत्र अभी भी कई चुनौतियों से गुजर रहा है। हालांकि, श्रीलंका और भूटान जैसे छोटे देशों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।

दुनिया का बदलता परिदृश्य
ग्लोबल पीस इंडेक्स की इस रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि अमीर और विकसित देश अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित और शांतिपूर्ण बने हुए हैं। वहीं, विकासशील और युद्धग्रस्त देशों की स्थिति अब भी नाजुक है। अमेरिका को इस सूची में 128वां स्थान मिला है, जो बताता है कि महाशक्ति होने के बावजूद घरेलू हिंसा, गोलीबारी की घटनाएं और अंतरराष्ट्रीय तनाव उनकी रैंकिंग को प्रभावित करते हैं।
बदलता भारत
भारत की 115वीं रैंकिंग एक चुनौती भी है और अवसर भी। जहां हमें अपनी घरेलू नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन बनाना होगा, वहीं सामाजिक विकास और समावेशी नीतियों पर भी अधिक ध्यान देना होगा। अगर भारत शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है, तो आने वाले वर्षों में इसकी रैंकिंग में निश्चित रूप से सुधार देखने को मिलेगा। ग्लोबल पीस इंडेक्स 2025 हमें यह याद दिलाता है कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानवीय मूल्यों के सम्मान से भी बनती है। भारत को इस दिशा में निरंतर प्रयास करते रहना होगा ताकि आने वाले वर्षों में यह सूची हमारे लिए और भी गर्व का कारण बन सके।
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