Indian Network Problem और अंतरराष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिक केबल में आई बड़ी खराबी ने वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस घटना का असर भारत सहित एशिया और मध्य पूर्व के कई देशों पर पड़ा है। यूज़र्स लगातार इंटरनेट स्पीड में गिरावट और कनेक्टिविटी की समस्या का सामना कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में तो नेटवर्क पूरी तरह से ठप हो गया है।
इंटरनेट की रीढ़ हैं समुद्री केबल्स
दुनिया भर में इंटरनेट का जो विशाल नेटवर्क काम करता है, वह मुख्य रूप से समुद्र के भीतर बिछी इन फाइबर ऑप्टिक केबल्स पर ही निर्भर करता है। अनुमान है कि वैश्विक डेटा ट्रैफिक का लगभग 95 प्रतिशत इन्हीं समुद्री केबल्स से होकर गुजरता है। ये केबल्स महाद्वीपों, देशों और शहरों को आपस में जोड़ती हैं और अंतरराष्ट्रीय संचार की रीढ़ मानी जाती हैं। जब भी इन केबल्स में कोई तकनीकी खराबी आती है या वे क्षतिग्रस्त होती हैं, तो उसका सीधा असर इंटरनेट सेवाओं पर पड़ता है।
कैसे हुआ नुकसान?
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, यह नुकसान समुद्र की गहराई में किसी बाहरी कारण से हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री जहाजों के एंकर, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं या समुद्री जीव भी कभी-कभी इन केबल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस बार भी नुकसान के सटीक कारण की जांच जारी है। हालांकि, यह साफ है कि कटने वाली केबल बेहद अहम लिंक थी, जिससे एशिया और यूरोप के बीच इंटरनेट ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा गुजरता था।
Indian Network problem का असर
भारत में इंटरनेट यूज़र्स को इस घटना का सबसे ज्यादा असर महसूस हो रहा है। कई इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) ने माना है कि उनकी सेवाओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। विशेष रूप से बड़े शहरों में यूज़र्स ने शिकायत की है कि वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग, स्ट्रीमिंग और क्लाउड सेवाएं बेहद धीमी हो गई हैं। ऑनलाइन लेन-देन और ऑफिस से जुड़े कामकाज पर भी इसका असर पड़ा है।
मरम्मत कार्य में समय लगेगा
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के भीतर बिछी इन केबल्स की मरम्मत आसान नहीं होती। इसके लिए खास तरह के जहाज और तकनीक की जरूरत होती है। पहले क्षतिग्रस्त हिस्से का पता लगाया जाता है, फिर उसे समुद्र की सतह पर लाकर रिपेयर किया जाता है। यह पूरा काम मौसम और समुद्र की स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसी कारण इस तरह की खराबी को ठीक करने में कई दिन से लेकर हफ्तों तक का समय लग सकता है।
कंपनियों और सरकारों की प्रतिक्रिया
भारत सहित प्रभावित देशों की सरकारें और इंटरनेट कंपनियां इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। भारत सरकार ने भी प्रमुख इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिया है कि वे वैकल्पिक नेटवर्क और सैटेलाइट लिंक का इस्तेमाल कर सेवाओं को सामान्य बनाए रखने की कोशिश करें। कंपनियों ने यूज़र्स को भरोसा दिलाया है कि धीरे-धीरे इंटरनेट सेवाएं सामान्य हो जाएंगी।
यूज़र्स को परेशानी
यूज़र्स का कहना है कि वे बुनियादी काम भी नहीं कर पा रहे हैं। ऑनलाइन क्लासेज, वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल पेमेंट्स जैसे कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। कई लोगों को अपना काम रोकना पड़ा है। हालांकि, टेक्निकल विशेषज्ञों का मानना है कि वैकल्पिक रूट्स और नेटवर्क डायवर्जन से आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा।
निष्कर्ष
समुद्र में बिछी इन केबल्स का कटना यह याद दिलाता है कि आधुनिक डिजिटल दुनिया कितनी हद तक इस इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर है। जब तक यह समस्या पूरी तरह से हल नहीं होती, तब तक भारत समेत प्रभावित देशों में इंटरनेट स्पीड और कनेक्टिविटी की दिक्कत बनी रह सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें तकनीकी टीमों और मरम्मत कार्य पर टिकी हुई हैं, जिनसे जल्द समाधान की उम्मीद की जा रही है।
