सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला अक्सर नौकरीपेशा लोग अपने PF (भविष्य निधि) या पेंशन अकाउंट में अपनी पत्नी या बच्चों को नॉमिनी (Nominee) बनाते हैं। हम यही मानते आए हैं कि हमारे न रहने पर सारा पैसा नॉमिनी को ही मिलेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक हालिया और ऐतिहासिक फैसले ने इस धारणा को बदल दिया है।
अगर आप नौकरी करते हैं और आपका पीएफ कटता है, तो यह खबर आपके और आपके परिवार के लिए बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके पीएफ और पेंशन पर सिर्फ पत्नी का नहीं, बल्कि उसकी मां का भी बराबर का अधिकार है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कोर्ट ने क्या कहा, नियम क्या हैं और इसका आप पर क्या असर होगा।\
1. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह साफ कर दिया कि केवल ‘नॉमिनी’ होने से कोई व्यक्ति पैसे का पूरा मालिक नहीं बन जाता। कोर्ट ने कहा कि मां भी ‘Class-I Heir’ (प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी) होती है, इसलिए उसे बेटे की संपत्ति या फंड से वंचित नहीं किया जा सकता।

फैसले की मुख्य बातें:
• चाहे नॉमिनी के तौर पर सिर्फ पत्नी का नाम हो, फिर भी मां का हक खत्म नहीं होता।
• भविष्य निधि (PF) और पेंशन का पैसा उत्तराधिकार कानून (Succession Law) के तहत बंटेगा।
• बेटे की कमाई या जमा पूंजी पर बूढ़ी मां का भी उतना ही अधिकार है जितना पत्नी और बच्चों का।
2. नॉमिनी (Nominee) बनाम उत्तराधिकारी
(Legal Heir): असली मालिक कौन?
यह सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन वाला हिस्सा है। लोग सोचते हैं कि जिसे नॉमिनी बना दिया, पैसा उसी का है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बहुत ही बारीकी से समझाया है।
• नॉमिनी का काम: नॉमिनी सिर्फ एक ‘केयरटेकर’ या ‘ट्रस्टी’ होता है। उसका काम है कि वह विभाग से पैसे ले और उसे असली वारिसों (Legal Heirs) तक पहुंचाए।
• असली मालिक: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत, अगर कोई वसीयत (Will) नहीं बनी है, तो संपत्ति ‘Class-I Heirs’ में बराबर बंटेगी।
* Class-I Heirs कौन हैं?: इसमें व्यक्ति की मां, पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं।
सरल उदाहरण: मान लीजिए किसी व्यक्ति के PF खाते में 10 लाख रुपये हैं और उसने अपनी पत्नी को नॉमिनी बनाया है। उसकी मृत्यु के बाद, भले ही चेक पत्नी के नाम पर आए, लेकिन कानूनन उसे उस पैसे में से अपनी सास (मृतक की मां) को उनका हिस्सा देना होगा।
3. यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
भारतीय समाज में अक्सर देखा गया है कि बेटे की मृत्यु के बाद बहुएं या ससुराल वाले बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं। पेंशन या पीएफ का सारा पैसा पत्नी को मिल जाता है और माता-पिता खाली हाथ रह जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन बुजुर्ग माताओं के लिए एक सुरक्षा कवच है। यह सुनिश्चित करता है कि बुढ़ापे में बेटे के न रहने पर भी मां को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
4. अब आपको क्या करना चाहिए?
इस फैसले के बाद कुछ बातें जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए:
• नॉमिनेशन चेक करें: अपने पीएफ और बैंक खातों में देखें कि आपने किसे नॉमिनी बनाया है।
• वसीयत (Will) जरूर बनाएं: अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद आपकी संपत्ति को लेकर परिवार में झगड़ा न हो, तो एक स्पष्ट ‘वसीयत’ बनाना सबसे अच्छा है। वसीयत में आप लिख सकते हैं कि किसको कितना हिस्सा मिले।
• परिवार को जानकारी दें: अपने घर के सदस्यों को इन नियमों के बारे में बताएं ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: अगर मैंने सिर्फ पत्नी को नॉमिनी बनाया है, तो क्या मां क्लेम कर सकती है?
– हाँ, बिल्कुल। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, मां कानूनी वारिस (Legal Heir) है और वह कोर्ट के जरिए अपना हिस्सा मांग सकती है।
Q2: क्या यह नियम प्राइवेट और सरकारी दोनों कर्मचारियों पर लागू है?
– हाँ, यह उत्तराधिकार का सामान्य कानून है जो जमा पूंजी (PF/Gratuity आदि) पर लागू होता है।
Q3: अगर पिता जीवित हैं, तो क्या उन्हें भी हिस्सा मिलेगा?
– हिंदू कानून के तहत पिता ‘Class-II Heir’ में आते हैं। अगर मां, पत्नी और बच्चे (Class-I) मौजूद हैं, तो पहला हक उनका होता है। लेकिन वसीयत बनाकर पिता को भी हिस्सा दिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला समाज में संतुलन लाने वाला है। यह याद दिलाता है कि पत्नी जीवनसाथी है, लेकिन मां वह है जिसने जन्म दिया है। कानून की नजर में दोनों का स्थान महत्वपूर्ण है।
अगर आपको यह जानकारी काम की लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर Share करें। जागरूक बनें, सुरक्षित रहें!
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