MNREGA बंद? मोदी सरकार ला रही है रोजगार की नई ‘VBGRAM’ स्कीम, जानिए क्या बदलेगा गरीबों की जिंदगी में

क्या मनरेगा (MNREGA) का दौर खत्म होने वाला है? जी हाँ, दिल्ली के गलियारों और संसद भवन से जो खबरें आ रही हैं, वो देश के करोड़ों ग्रामीणों को चौंका सकती हैं। केंद्र सरकार रोजगार गारंटी को लेकर अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने जा रही है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने लोकसभा सांसदों के बीच एक नया बिल सर्कुलेट किया है, जिसका नाम ‘VBGRAM’ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह बिल पुराने मनरेगा कानून की जगह लेगा।

आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर यह VBGRAM क्या है, सरकार मनरेगा को क्यों बदलना चाहती है, और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजगार पर क्या पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला?

15 दिसंबर 2025 की सबसे बड़ी खबर यह है कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) को रिप्लेस (replace) करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इसके लिए VBGRAM (संभवतः ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार अभियान’ या इसी तरह का नाम) बिल का मसौदा तैयार कर लिया है और इसे लोकसभा में चर्चा के लिए सर्कुलेट भी कर दिया गया है।

MNREGA

यह कदम इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि मनरेगा सालों से ग्रामीण भारत की ‘लाइफलाइन’ रहा है।

सरकार MNREGA को क्यों खत्म करना चाहती है?

आपके मन में भी सवाल होगा कि जो योजना इतने सालों से चल रही है, उसे बदलने की क्या जरूरत आन पड़ी? इसके पीछे सरकार के कुछ तर्क हो सकते हैं:

  • संपत्ति निर्माण पर जोर (Asset Creation): पुरानी मनरेगा स्कीम पर अक्सर आरोप लगते थे कि इसमें सिर्फ गड्ढे खोदे जाते हैं और भरे जाते हैं। सरकार चाहती है कि नई स्कीम (VBGRAM) के तहत ऐसा काम हो जिससे गांव में पक्की सड़क, तालाब या बिल्डिंग जैसी ठोस संपत्ति बने।
  • भ्रष्टाचार पर लगाम: मनरेगा में ‘फर्जी जॉब कार्ड’ और फंड की हेराफेरी की खबरें आती रहती थीं। नई स्कीम पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी हो सकती है।
  • विकसित भारत का लक्ष्य: 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सरकार को ‘स्किल्ड लेबर’ (कुशल मजदूर) की जरूरत है, न कि सिर्फ दिहाड़ी मजदूरों की। VBGRAM में स्किल डेवलपमेंट को भी जोड़ा जा सकता है।

VBGRAM: नई स्कीम में क्या खास हो सकता है?

हालांकि बिल की पूरी डीटेल्स अभी सार्वजनिक होनी बाकी हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि VBGRAM में ये बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

  • ज्यादा दिहाड़ी: महंगाई को देखते हुए प्रतिदिन की मजदूरी बढ़ाई जा सकती है।
  • काम के घंटे और दिन: क्या 100 दिन की गारंटी को बढ़ाकर 150 दिन किया जाएगा? इस पर सबकी नजर है।
  • किसानों को फायदा: इस स्कीम को सीधे खेती-किसानी से जोड़ने का प्लान हो सकता है, जिससे छोटे किसानों को भी मजदूरी का लाभ मिल सके।
  • हाइब्रिड मॉडल: मजदूरी के साथ-साथ मजदूरों को तकनीकी काम सिखाने का प्रावधान भी हो सकता है।

MNREGA

विपक्ष और जानकारों की राय

जैसे ही यह खबर सामने आई कि लोकसभा में बिल सर्कुलेट हुआ है, सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार रोजगार गारंटी को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। वहीं, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह बिल सही तरीके से लागू हुआ, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

आम आदमी पर क्या असर होगा?

अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य मनरेगा जॉब कार्ड धारक है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आमतौर पर जब कोई नई स्कीम आती है, तो पुराने लाभार्थियों को उसमें शिफ्ट किया जाता है। लेकिन यह जरूर है कि काम पाने के नियम और पैसे मिलने का तरीका बदल सकता है।

‘VBGRAM’ बिल का आना यह साफ करता है कि सरकार अब पुरानी नीतियों पर चलने के बजाय नए भारत के हिसाब से रोजगार के तरीके बदलना चाहती है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह बिल संसद में पास होगा और जमीनी स्तर पर लागू होगा।

आपका क्या मानना है?

क्या मनरेगा को बंद करके नई स्कीम लाना सही फैसला है? या पुरानी स्कीम में ही सुधार करना चाहिए था? हमें कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं!

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