उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ भारतीय वायुसेना (IAF) का एक ट्रेनी माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया। यह घटना जॉर्जटाउन थाना क्षेत्र के अंतर्गत केपी कॉलेज के पास बुधवार दोपहर को हुई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ और विमान में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं।
कैसे हुआ यह हादसा?
वायुसेना का यह छोटा माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट अपनी नियमित ट्रेनिंग सॉर्टी (प्रशिक्षण उड़ान) पर था। उड़ान के दौरान अचानक विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह केपी कॉलेज के पास एक दलदली इलाके/तालाब में जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान को गिरता देख इलाके में हड़कंप मच गया, लेकिन पायलटों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।

पायलटों ने पैराशूट से बचाई जान
विमान के क्रैश होने से ठीक पहले, दोनों क्रू मेंबर्स ने आपातकालीन निकासी प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने समय रहते पैराशूट से छलांग लगा दी, जिसके कारण वे सुरक्षित रूप से दलदल में लैंड कर सके। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और वायुसेना की रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुँचीं और दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सिटी) मनीष शांडिल्य ने पुष्टि की है कि विमान में तकनीकी खराबी आने के कारण यह क्रैश हुआ।
क्रैश के संभावित तकनीकी कारण
प्रारंभिक जांच और विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर इस हादसे के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते हैं:
- इंजन फेलियर: बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान इंजन ने अचानक काम करना बंद कर दिया (Power Loss), जिससे विमान हवा में अपना संतुलन खो बैठा।
- तकनीकी खराबी: माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट हल्के वजन के होते हैं और इनमें सिंगल पिस्टन इंजन होता है। मैकेनिकल ब्रेकडाउन या फ्यूल सप्लाई में बाधा आने से ऐसे हादसे हो सकते हैं।
- मौसम या पक्षी का टकराना: हालांकि मुख्य कारण इंजन की खराबी मानी जा रही है, लेकिन जांच टीम इस बात की भी पड़ताल करेगी कि क्या किसी पक्षी के टकराने (Bird Hit) या हवा के अचानक झोंके से यह असंतुलन पैदा हुआ।

आगे की जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल
भारतीय वायुसेना और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। विमान के मलबे और उपलब्ध डेटा (ब्लैक बॉक्स या फ्लाइट डेटा) का विश्लेषण किया जाएगा ताकि सटीक कारणों का पता चल सके। यह घटना पायलट प्रशिक्षण के दौरान होने वाले जोखिमों को भी दर्शाती है, लेकिन विमान में लगे ‘बैलिस्टिक पैराशूट सिस्टम’ ने आज साबित कर दिया कि आपात स्थिति में यह तकनीक कितनी जीवनरक्षक हो सकती है।
फिलहाल, इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और वायुसेना के अधिकारी मलबे को हटाने और आगे की कार्यवाही में जुटे हैं।
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