Apni Vani

Supreme Court Historic Verdict: सोनम वंगचुक की एनएसए गिरफ्तारी और सोफिया कुरैशी केस पर आज आएगा बड़ा फैसला

नई दिल्ली : भारत की सर्वोच्च अदालत आज दो ऐसे महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रही है, जिनका सीधा संबंध देश की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही से है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष आज जलवायु कार्यकर्ता सोनम वंगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हुई गिरफ्तारी और कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में मध्य प्रदेश सरकार की निष्क्रियता पर गंभीर बहस हो रही है। इन दोनों मामलों ने पूरे देश का ध्यान खींचा है क्योंकि ये सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों और न्याय प्रणाली की निष्पक्षता को चुनौती देते हैं।

सोनम वंगचुक मामला: क्या राष्ट्र निर्माण करने वाला हो सकता है अपराधी?

लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वंगचुक पिछले कई महीनों से जोधपुर जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी 26 सितंबर 2025 को लद्दाख में 6ठी अनुसूची की मांग के दौरान हुई हिंसा के बाद की गई थी। केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने उन पर भीड़ को भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए एनएसए (NSA) लगाया है।

Sonam wangchuk

आज की सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने वंगचुक का पक्ष रखते हुए कोर्ट में दलील दी कि जिस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन देश के गौरव और शिक्षा में लगा दिया, उसे बिना पुख्ता सबूतों के ‘अपराधी’ करार देना लोकतंत्र की हार है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सरकार से उन साक्ष्यों की मांग की थी, जिनके आधार पर निवारक हिरासत (Preventive Detention) को वैध माना गया है। अनुच्छेद 22(5) के उल्लंघन का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने मांग की है कि वांगचुक को तत्काल रिहा किया जाए, क्योंकि हिरासत का आदेश अपूर्ण तथ्यों पर आधारित है।

सोफिया कुरैशी केस: राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक देरी पर तल्ख टिप्पणी

वहीं दूसरी ओर, कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख काफी सख्त नजर आ रहा है। यह मामला मध्य प्रदेश के एक प्रभावशाली मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की अधिकारी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। कोर्ट ने आज राज्य सरकार से सीधा सवाल किया कि आखिर अब तक आरोपी मंत्री पर मुकदमा चलाने की मंजूरी (Prosecution Sanction) क्यों नहीं दी गई?

कर्नल सोफिया कुरैशी, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना का प्रमुख चेहरा रही हैं, उनके सम्मान की रक्षा के लिए देशभर में #JusticeForSophia की गूंज सुनाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेना की गरिमा और महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है।

लद्दाख आंदोलन की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

सोनम वंगचुक की गिरफ्तारी के पीछे लद्दाख का वह लंबा संघर्ष है, जिसमें वहां के स्थानीय लोग केंद्र शासित प्रदेश के बजाय ‘पूर्ण राज्य’ की मांग कर रहे हैं। 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि वंगचुक का आंदोलन हमेशा अहिंसक रहा है और उन्हें फंसाया जा रहा है। उनके एनजीओ SECMOL के विदेशी फंड की जांच भी इसी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसे उनके समर्थक ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रहे हैं।

आज की यह सुनवाई केवल दो व्यक्तियों के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बात का पैमाना है कि भारत में कानून का शासन किस दिशा में जा रहा है। यदि वंगचुक को राहत मिलती है, तो यह लद्दाख आंदोलन के लिए एक नई संजीवनी होगी। वहीं सोफिया कुरैशी मामले में कोर्ट का आदेश मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

नोट: यह समाचार रिपोर्ट वर्तमान न्यायिक घटनाक्रमों और उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण पर आधारित है। (शब्द संख्या: ~650)

Also Read :- Chhapra Tractor Accident: मशरख में मासूम अभिमन्यु की मौत से पसरा मातम, आक्रोश में ग्रामीण

Delhi Janakpuri Pothole Accident: 25 साल के बैंक मैनेजर की दर्दनाक मौत! BJP पर विपक्ष का हमला

Exit mobile version